शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

11दिसम्बर : ओशो जन्म दिवस

मैँ अवसर आने पर अपने शिष्यों को बताता रहा हूँ कि अपने नजरिये के दर्शन की तुलना महापुरुषोँ के दर्शन से करते रहा करो.मेरी एक शिष्या रही है जो मेरे कुछ शिष्यों की मेरे से अति नजदीकी के कारण कभी व्याकुल सी हो जाती थी . मैँ समझता था कि मेरा आशीर्वाद तेरे साथ भी है .एक बार उसे न रहा गया और उसने सारी भड़ास मुझपे उतार दी .मैँ बोला कि तुम किस आधार पर चलना चाहती हो अपने जीवन मेँ ,समाज के आधार पर या फिर महापुरुषों के आधार पर?वह बोली कि समाज के आधार पर . मैंने कहा जा मेरा आशीर्वाद तेरे साथ है .अब आठ साल बाद वह अब उच्च शिक्षा करने के बाद असलित समझी .मैँ फिर आज ओशो जन्म दिवस के उपलक्ष्य पर अपने शिष्यों से कहना चाहूँगा कि अपना चरित्र महापुरुषों के आधार पर गढ़ो न कि समाज के आधार पर.आज के व्याख्याकारों के जगत मेँ मैँ ओशो को सुप्रीम पावर मानता हूँ .जो उनके विरोध मेँ खड़े हैँ वे मतभेद ,गुटबाजी ,जातिवाद ,मजहबवाद ,आदि के शिकार हैँ.लेकिन हमेँ निष्पक्ष रुप से संश्लेषण की दृष्टि रखते हुए आगे बढ़ते जाना है.सत किसी जाति व मजहब की बफौती नहीँ है .

शेष .

ASHOK KUMAR VERMA 'BINDU'

<www.antaryahoo.blogspot.com>

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रविवार, 27 नवंबर 2011

एलियन्स आक्रमण की सम्भावनाओं के बीच !

सन 2025ई की 14 नवम्बर तिथि ! भविष्य रांची के रेलवे स्टेशन पर पहुँच
भी न पाया था कि एक सन्यासी भविष्य को देख कर बोला -"भविष्य,आप को भी
फुर्सत मिल गयी प्रयोगशाला से ."

"ओम आमीन!"


"ओम तत सत आमीन!"


दोनों बातचीत करते हुए प्लेटफार्म की और बढ़ गये थे .


"राजा कुरु!ये भी दो हुए हैं .मैं हस्तिन वंश के कुरु की बात नहीँ कर
रहा हूँ "-सन्यासी बोला.


"जानता हूँ आप अग्नीन्ध्र पुत्र की बात कर रहे हैँ."-भविष्य बोला .


भविष्य ! कोरिया व साइबेरिया क्षेत्र के कभी राजा रहे थे
कुरु.रोम,साइबेरिया,कुमायूँ,आदि मेँ बोली जाने वाली आदि भाषाओं की मूल
भाषा प्रियव्रत की कबीलाई भाषा थी .उत्तराखण्ड का नाम कूर्मांचल भी मिलता
है .


पृथु महि जब विनाश की ओर अग्रसर हुई है एलियन्स की गतिविधियां तेज
हुई हैँ.सन 2011ई0के 14 नवम्बर को प्रख्याक पैरानमिल लेखक माइकल कोहन का
कहना था -"पिछले कुछ समय से रुस उड़नतश्तरियाँ और संभावित एलियन यानों की
गतिविधियों का प्रमुख अड्ढा बना हुआ है जिन्हेँ सेना और सिविल एजेंसियों
ने भी देखा है."
वैदिककाल मेँ धरती पर तैंतीस करोड़ देवता थे अर्थात जो भी मानव थे
वे देवता तुल्य थे .इस पृथुमहि पर उन आत्माओं अर्थात अस्थूल एलियन्स के
नियंत्रण केन्द्र थे -काबा ,कैलाश व काशी.'कश्मीर काशी सुहोत्र पुत्र
काशिक ने,काव्य अर्थात काबा उशाना काव्य(शुक्राचार्य) व हिरण्याकशिपु
पुत्री दिव्या ने स्थापना की.ऋषभ देव ने कैलाश पर्वत को अपना स्थान
बनाया.सभी आत्माएं सतमय होती हैँ लेकिन शरीर धारण करने के बाद माया मोह
लोभ व काम के कारण उस हिसाब से अपने शरीर को निर्देशित नहीं कर पातीँ या
फिर कामकाजी बुद्धि का साथ नहीँ पा पातीँ .और ऐसे मेँ संसार मेँ उलझ कर
नरकीय,प्रेत,पितर,आदि योनियों की सम्भावनाओं मेँ जीना आरम्भ कर दिया .
जानवर कम होते गये लेकिन उनकी आत्माएं मानवशरीर धारण कर आती रहीं .आज भी
सम्भवता तैतीस करोड़ मानव ही देव योनि की सम्भावनाओं मेँ जीते होंगे .


"भविष्य!आप ठहरे वैज्ञानिक,आपको मेरी बातें निराधार लग रही होंगी ?"

भविष्य सिर्फ मुस्कुरा दिया .


रांची स्टेशन पर ही कुछ दूर किशोर किशोरियां आर एस एस की
स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य मेँ इश्तहार,स्टीकर,आदि बांट
रहे थे .कुछ मुस्लिम लड़कों ने इन किशोर किशोरियों को छेंड़ना शुरु कर
दिया.बहस बाजी के बाद नौवत मारपीट की आ गयी.प्रचार सामग्री नष्ट कर दी
गयी .सैन्य बल व अन्य व्यक्ति तमाशबीन बने देखते रहे .


एक औरत चीख रही थी -" जब तक चापलूस हिन्दुओं का शासन था तो
सेक्यूलरवाद के नाम पर तुष्टिकरण नीति चलती रही अब सेक्यूलवाद कहाँ मर
गया ?"

* * *

भविष्य अपने कमरे मेँ अकेला बैठा मानीटर युक्त दीवार पर
चलचित्र देख रहा था .

कि-


जब से ये दुनिया बनी है सत्य व अहिंसा को लेकर चलने वाले महापुरुष
आते ही रहे हैँ लेकिन मनुष्य असभ्य ही रहा.इस असभ्य मानव ने प्रकृति की
छोंड़ो धरती पर जीवन का अस्तित्व ही खतरे मेँ डाल दिया .मानव का इतिहास
हिंसा व द्वेष से भरा है .सत्य व अहिंसा के पन्नों को सिर्फ स्वर्णिम कह
कर काम चला लिया गया .

अन्तरिक्ष की अन्य धरतियों के मनुष्य तक इस धरती के मानव की मूर्खता
से असन्तुष्ट हैं और वे इस धरती पर आक्रमण करने की भी योजना बना रहे है
लेकिन उनका आक्रमण प्रकृति सुरक्षा के लिए है.


यहाँ का मानव यहाँ पर भी अपने द्वेषभावना से ही एलियन्स से युद्ध
करने को तैयार हो जायेगा लेकिन सुधरने का प्रयत्न नहीं करेगा .

इधर साइबेरिया निर्जन बर्फीले मैदान मेँ चार एलियंस घूम रहे थे उनका
तश्तरीयान कुछ दूरी पर था .ये स्थान इर्कुत्सक के समीप था जहां पहले भी
ये एलियन्स उतर चुके थे .


निर्जन स्थानों पर आते हैँ एलियन्स ?योगी भी चुनते थे निर्जन स्थान
.करते थे आत्मसाक्षात्कार .जुड़ते थे इसके बाद चेतना केन्द्रों से .और
एलियन्स ....!?

शनिवार, 26 नवंबर 2011

साइरियस से साइबेरिया तक !

दोनों तीन नेत्री थे .

दसलोफीन अकेली रह गयी थी .वह कदफनेडरीस को जाते देख रही थी.

वह जिन बूतों के समीप खड़ी थी उनके बीच एक शिला पर एक नक्शा बना हुआ था जिसमेँ भूमध्यसागरीय क्षेत्र व साइबेरियाई क्षेत्र के बीच एक मोटी सी लाइन खिंची दिखायी दे रही थी .जो दो बराबर भाग मेँ ताशकंद व काकेकश के करीब दो भागों मे बंटी थी .जहां बँटी स्थिति पर एक पर्वत व एक कछुआ बना हुआ था .दसलोफीन इस नक्शे को देखते देखते -"ऐहह ममतर.....?" मत्स्यावतार युग के शुरुआत मेँ एक आकाशीय पिण्ड साइरियस अर्थात लुन्धक से एक मत्स्यमानव भूमध्य सागर मेँ उतरा था.फिर ....!?ये साइरियस ....?!कूर्म .....?!साईबेरिया के कभी राजा थे -कुरु.जो अग्नीन्ध्र के पुत्र व प्रियव्रत के पौत्र थे .रोम ,साइबेरिया,कुमायूँ,आदि मेँ बोली जाने वाली आदिभाषाओं की मूलभाषा प्रियव्रत के कबीले की भाषा थी.सुना जाता है प्रियव्रत ने रोम की स्थापना की थी.उत्तराखण्ड का एक नाम कूर्मांचल भी मिलता है.सन2011के14नवम्बर को प्रख्यात पैरानामिल लेखक माइकल कोहान ने साइबेरिया क्षेत्र मेँ एलियन्स गतिविधियों का होना स्वीकारा.इर्कुत्सक मेँ एलियन यान उतरने की घटनाएं होती ,


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बुधवार, 16 नवंबर 2011

The White House Auto-Response Message

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From: The White House <whitehouse@autoresponder.govdelivery.com>
To: <akvashokbindu@gmail.com>
Date: गुरुवार, 18 नवंबर, 2010 12:20:02 अपराह्न GMT
Subject: The White House Auto-Response Message

Due to the high volume of messages received at this address, the White House is unable to process the email you just sent. To contact the White House, please visit:

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Thank you.


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The White House �� 1600 Pennsylvania Ave NW �� Washington, DC 20500 �� 202-456-1111

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

रुहेलखण्ड को चाहिए रुहेलखण्ड प्रदेश

बरेली मण्डल (रुहेलखण्ड) ,उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटने की उप्र सरकार की घोषणा के साथ इस विषय पर आम जनता में चर्चा खास हो गयी है. बरेली ,बदायूं ,पीलीभीत , शाहजहांपुर की जनता में इसकी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है .विविध सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि कुछ लोग रुहेलखण्ड के पक्ष में व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न शामिल होने के सम्बंध में सम्पर्क प्रारम्भ कर दिया है . मानवता हिताय सेवा समिति के संस्थापक अशोक कुमार वर्मा 'बिन्दु' ने बताया कि इस पर मण्डल के वरिष्ठ व्यक्तियों से सम्पर्क किया जा रहा है . विचारविमर्श के बाद अगली रणनीति बनायी जाएगी .

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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

सुनो ,आरदीस्वन्दी से जा कर कहना .

मानीटर पर चलचित्र आ रहे थे . ये चलचित्र भुम्सन्दा धरती के थे
.आरदीस्वन्दी अपनी पच्चीस सदस्यीय टीम के साथ भयानक जंगल में थी.

लाखों प्रकाशवर्ष दूर एक धरती सनडेक्सरन,जहां के मूलनिवासी
त्रीनेत्री थे . आरदीस्वन्दी का वह चमकीला अण्डाकार पारदर्शी पत्थर!जो कि
उच्च स्तरीय सम्वेदी कम्पयूटर पीढ़ी का था.पारदर्शी दीवारों से बने एक
पिरामिड के अन्दर एक पारदर्शी टेबिल पर जो रखा हुआ था.जिसमें बर्फीले
मैदानों के चलचित्र आ रहे थे.इन चलचित्रों मेँ एक यति कहीँ जाता हुआ
दिखायी दे रहा था .


बर्फीले मैदान मेँ चल रही बर्फीली हवाओं के बीच वह यति!

वह कभी कभी चीख पड़ता था .अनेक आवाज निकालता था .जैसे कि -


"कपचटतिकुक पच चकती कच तकचट काटापका . यपचपजगड फज ख दचडीफ खचायठी
. चाकपी चकती . चकती ! चकती ! चटकतचि चमगजीफ कचयी .चकती! "

फिर वह एक गुफा के बाहर खड़ा हो चीखने लगा -
"चकती !......चकती......चकती! चटपकी छटत पछ द छ मथ चखड इखट . चकती ! चकती ! "


गुफा के अंदर अनेक लाशेँ रखी हुई थीं .जिनका विशालकाय शरीर व कद
लगभग ग्यारह फुट था.

इधर भुम्सनदा के जंगल में आरदीस्वन्दी अपनी टीम के साथ एक नदी के
किनारे पहाड़ी पर एक गुफा के सामने थे.सभी तम्बूओं को उखाड़ने मेँ लगे
थे.बरसात तेज हो चुकी थी.सभी सामान को उठा उठा कर गुफा मेँ ले जा कर रख
रहे थे.


अचानक आरदीस्वन्दी ने इधर उधर देख और फिर -
"कदफनेडरीस व दसलोफानी ! कदफनेडरीस व दसलोफानी कहनाह हयहेइ."


एक युवती बोली -"दोनों बूतों के पास गये थे."

कदफनेडरीस एक तीननेत्री युवक व दसलोफानी एक युवती जो तीन नेत्री
तो नहीं थी लेकिन सनडेक्सरन से ही कदफनेडरीस के साथ आयी थी . दोनों सह
जीवन जी रहे थे.


दसलोफानी अकेली रह गयी थी . बूतों के पास खड़ी वह कदफनेडरीस को
जाते देख रही थी .


"सुनो,आरदीस्वन्दी से जाकर कहना...."-दसलोफीन जब बोलने को हुई थी तो.... !?

शनिवार, 6 अगस्त 2011

यति के साथ

सागर के लहरों के बीच एक मत्स्यनारी व एक मत्स्यनर जलक्रीड़ा कर कर रहे थे.


इधर ऊपर आकाश में एक अण्डाकार यान अपनी गति कम कर चुका था.

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: <akvashokbindu@gmail.com>
Date: शनिवार, 6 अगस्त, 2011 12:21:54 अपराह्न GMT+0000
Subject: यति के साथ

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------Original message------
From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: "go@blogger.com" <go@blogger.com>
Date: शनिवार, 6 अगस्त, 2011 12:03:24 अपराह्न GMT+0000
Subject: यति के साथ

आज से लगभग आठ करोड़ वर्ष पूर्व जब पृथुमहि पर वर्तमान मेँ उपस्थित हिमालय के स्थान पर सागर था.
सनडेक्सरन निवासी एक तीननेत्री अपने अण्डाकार यान से एक यति मानव के साथ पृथुमही की यात्रा पर था.
यह वह काल था जिसे जीवनशास्त्रियों,मानवशास्त्रियों,पुरातत्वविदों,आदि ने इस काल को अभिनूतन काल कहा है.

"आदम व हबबा के उत्त्पत्ति का स्थान हालांकि सउदी अरब या भूमध्यसागरीय प्रदेश था लेकिन ज्ञानी मानव का विस्तार का कारण तुम यति मानव होगे.सांतवें मनु के पूर्वज यति ही होंगे. "

यति खामोश थाय.

"आज यहाँ सागर है.भविष्य में यहां पर पर्वत होगा.इसका मूलस्थान ब्रहमदेश नाम से जाना जाएगा.जहाँ सूक्ष्म अनन्त शक्ति अंश विराजमान होकर मानव सभ्यता को पल्लवित व विकसित करने के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी.विभिन्न आत्माओं में बंट कर ब्रह्म यहीं बास करेगा.धरती के अन्य प्राणी स्थूल,भाव,सूक्ष्म,मनस भाग शरीर से मुक्त हो आत्मा मेँ प्रवेश कर यहीं से नियन्त्रित हों और धरती पर जन्म लेने वाली पूर्वजाग्रत आत्मा के मदद के लिए यहीं से सहायता को आत्माएं पहुंचेंगी.यति का शरीर धारण कर यहां आत्माएं स्थूल,भाव,सूक्ष्म व मनस मुक्त रहोगे "

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गुरुवार, 4 अगस्त 2011

मत्स्य मानव व जलचर!

त्रिनेत्री नागरिकों की धरती -सनडेक्सरन !
आरदीस्वन्दी की वृद्ध माँ-अफस्केदीरन दीवार पर आ रहे चलचित्र को देख रही थी.

यह चलचित्र भुम्सन्दा धरती के थे.एक वृद्ध व्यक्ति वहां आ पहुंचा और चलचित्र को देखने लगा.चलचित्र मेँ आरदीस्वन्दी को अपनी टीम के साथ भयानक जंगल में वाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ते दिखाया गया था.
चलचित्र मेँ जंगल के बीच मूसलाधार बरसात होना स्पष्ट था.

तेज मूसलाधार बरसात!

बरसात कि.......?!


एक आकाशगंगा जहां जल ही जल!बिल्कुल थल नहीं! ऐसे मेँ जलचर प्राणियों के बीच मत्स्यमानव ! मत्स्यनर व नारी दोनों ही!


नारायण अब क्वासर क्षेत्र में पहुंच चुका था.


* * * *


सागर की तेज उठती लहरें !

समुद्र में ही एक विशालकाय नाग के ऊपर एक मत्स्यनारी बैठी लहरों की मौज ले रही थी.उसने जब देखा कि एक वृद्ध व्यक्ति अर्थात नारायण तो जल में छलांग लगा कर नारायण की ओर बढ़ गयी.


"यचाखँठपिकठेटचतछटे छडकच अर्थात आज यहां कैसे ?" मत्स्यनारी ने नारायण से पूछा.

"अटेपतकचीयपत चारक अर्थात बस तुम्हारी याद आ गयी."


..तो मत्स्यनारी मुस्कुरा दी.

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बुधवार, 3 अगस्त 2011

वह पांच वर्षीय बालक !

दो आकाशगंगाएं जब टकराती हैं तो लाखों सौर परिवार उजड़ जाते हैं.ब्राहमण्ड मेँ एक आकाशगंगा अब ब्राह्माण्डखोर के नाम चर्चित हो चुकी थी.


आरदीस्वन्दी की मां अफस्केदीरन व सद्भावना इमारत के संस्थापक महागुरु अर्थात उन्मुक्त जिन का शिष्य नारायण अब वृद्ध हो चुके थे.दोनो इस समय
मेडिटेशन मेँ थे.

अब से 1220 पूर्व अर्थात सन 4800 ई0 के 19 जनवरी ! ओशो पुण्यतिथि !!
एक हाल में बैठा उन्मुक्त जिन मेडिटेशन मेँ था.उसके कान मेँ आवाज गूँजी -

"आर्य,उन्मुक्त! तुम अभी जिन नहीं हुए हो.जिन के नाम पर तुम पाखण्डी हो.तुम को अभी कठोर तपस्या करनी होगी. "


'उन्मुक्त जिन' के अज्ञातबास मेँ जाने के बाद कुख्यात औरतें ब्राह्माण्ड मेँ बेखौफ होकर आतंकवाद मचाने लगीं ,इन कुख्यात औरतों के बीच एत पांच वर्षीय बालक ठहाके लगा रहा था.


यह कलि औरतें......?!

पांच वर्षीय बालक मानीटर पर ब्राह्माण्डखोर की सक्रियता को देख देख ठहाके लगा रहा था.


इधर उन्मुक्त जिन एक वर्फीली जगह मेँ एक गुफा अन्दर मेडिटेशन मेँ था.


सन4800ई का वह पांच वर्षीय बालक......?!

अफस्केदीरन ने जब नारायण की ओर देखा तो नारायण अपने स्थान पर न था.


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द्वितीय विश्वयुद्ध और नेता जी !

गांधी जानते थे कि वास्तव मेँ हमारे स्थूल शरीर को मारने वाला गोडसे नहीं,गोडसे तो सिर्फ इस्तेमाल किया गया.


गांधी की हत्या करने के बाद अब गोडसे जेल में था.
गांधी को मार कर वह अब दुखी था.
"मैं तो यहीं जानता था कि वर्तमान हालातों के लिए गांधी दोषी हैं लेकिन .....अब मुझे पटेल व नेहरु का चरित्र संदिग्ध लगने लगा है."

द्वितीय विश्व युद्ध मेँ सुभाष बाबू को अन्तर्राष्ट्रीय अपराधी घोषित कर दिया गया था.युरोपीय उपनिवेशवाद के स्थान पर अब विश्व मेँ अमेरिकी भौतिक उपनिवेशवाद अपना स्थान बनाने लगा था.जापान के सहयोग से सुभाष बाबू ब्रिटिश शासन उखाड़ फेंकने के लिए अनेक क्षेत्रों को ब्रिटिश मुक्त कर भारत मेँ प्रवेश कर ही पाये थे कि अमेरिका ने जापान पर परमाणु हमला बोल दिया. यह शायद अमेरिका की बौखलाहट थी.सुभाष बाबू को वापस लौटना पड़ा.जिस कारण उनकी मजाक भी बनायी गयी कि 'दिल्ली चलो ' नारा लगाने वाले अब बापस भागे.

लेकिन-
सुभाष बाबू ने कहा कि 04 फरबरी का इन्तजार कीजिए.

फिर चार फरबरी के बाद नौ सेना विद्रोह और यहां के ब्रिटिश शासन के स्तम्भ माने जाने वाले विभाग विरोध मेँ आ गये.

इधर एलियंस को लेकर ...?


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शनिवार, 30 जुलाई 2011

आदि मानव कूर्म क्षत्रिय:कितना सच कितना झूठ? लेखक:अशोक कुमार वर्मा'बिन्दु'

कश्यप गोत्र धारियों का इतिहास शेष गोत्रधारियों से पुराना है.

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: <akvashokbindu@gmail.com>,<deshpremi.bharat@gmail.com>,<rsahara@saharasamay.com>,<bareilly@livehindustan.com>,<admin@khabarindiya.com>,<article.hindi@delhipress.in>,<aajbareilly@gmail.com>,<Dr.Nagesh.Pandey.Sanjay@gmail.com>,<freelance@oneindia.co.in>
Date: रविवार, 31 जुलाई, 2011 4:09:29 पूर्वाह्न GMT+0000
Subject: आदि मानव कूर्म क्षत्रिय:कितना सच कितना झूठ? लेखक:अशोक कुमार वर्मा'बिन्दु'

प्रथम ऋषि थे कश्यप.प्रथम गोत्र था कश्यप.
इण्डोकैश्पियन जिनके वंशज थे.कुमायूं का एक नाम कूर्मांचल भी मिलता है.कूर्मांचल ,कश्मीर,तिब्बत,मानसरोवर,पाकिस्तान,अफगानिस्तान,आर्यान अर्थात ईरान आर्यों का मूलस्थान कहे जा सकते हैँ.कुमायूँनी व रोमनी भाषा मेँ समानता है,जिसे यमुनादत्त वैष्णव 'अशोक ' ने साबित किया है.

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: <go@blogger.com>
Date: रविवार, 31 जुलाई, 2011 9:19:58 पूर्वाह्न GMT+0530
Subject: यमुनादत्त वैष्णव 'अशोक':एक संक्षिप्त परिचय

दक्षिणी भारत,प्राचीन सुमेर,मिश्र और भूमध्य सागर देशों की मौलिक सांस्कृतिक समानता के अध्ययन क्षेत्र मेँ यमुनादत्त वैष्णव 'अशोक' का नाम चिरस्मरणीय रहेगा.
इनका जन्म कौसानी (अल्मोड़ा) के निकट ग्राम धौलरा मेँ 02अक्टूबर1915ई को हुआ था.

युनेस्को द्वारा कुमाऊंनी शब्दकोष के अन्तर्राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए कोष निर्माण अनुबन्ध के लिए एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के मुख्यालय बैंकाक का आमंत्रण .

कोष निर्माण के लिए युनेस्को को साझेदारी का अनुबन्ध और वित्तीय सहायता.

बैंकाक की यात्रा के दौरान "थाइलैण्ड की अयोध्या" शीर्षक 12 लेखों के ग्रन्थ का प्रणयन.


मार्च1989को 75वर्ष पूरे होने पर 02अक्टूबर सन 1990 को नैनीताल के बुद्धिजीवियोँ द्वारा अभिनन्दन तथा उनके ग्रन्थ "पुरस्कृत विज्ञान कथा साहित्य" का लोकार्पण .

सन 1990ई0 तक इनके द्वारा 34 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी थीं.जिनमेँ -विज्ञान कथा साहित्य ,15 उपन्यास, 07 कथा संग्रह ,08 हिन्दी विज्ञान साहित्य, 05 संस्कृति और इतिहास .

यह कुमाऊं संस्कृति परिषद ,नैनीताल के अध्यक्ष भी रहे.उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा 'द्रविण और विश्व मानवता'ग्रन्थ पर संस्कृति पुरस्कार से सम्मानि किया गया.

इण्डोकैस्पियन(आदि द्रविड़)संस्कृति पर यरुशलेम अन्तर्राष्ट्रीय स्वयंसेवी सम्मेलन मेँ मार्च अप्रैल 1985ई0 में मध्यपूर्व,मिश्र व रोम की यात्रा.

प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन नागपुर मेँ जनवरी 1975 मेँ 'कुमाऊंनी और अन्तर्राष्ट्रीय रोमनी (जिप्सी) भाषा'की समानता पर पढ़ा गया निबन्ध.

बालक हफ्कदम के सवाल?

आखिर आजादी वक्त के अनेक दस्तावेज सुभाष व शास्त्री की मृत्यु सम्बन्धी दस्तावेज गायब क्यों कर दिये गये थे?भिण्डरावाले को पैदा किसने किया था ? लिट्टे को किसने पैदा किया था?बोड़ो आन्दोलन को किसने पैदा किया था?राजीव व संजय गांधी की हत्या के पीछे वो अदृश्य लोग कौन थे?


बालक हफ्कदम युवती फदेस्हरर से बोला-"हम दोनों भुम्सन्दा की ओर चल तो रहे हैँ लेकिन मैँ सोंचता हूँ क्या हमें वास्तव मेँ भुम्सन्दा पर चलना चाहिए?"


"क्योँ?ऐसी बात क्योँ?"


"सद्भाव तक पहुँचने के आरदीस्वन्दी के 25 सदस्यीय टीम के अभियान मेँ आखिर हमेँ क्यों नहीं शामिर किया गया?जब हमेँ शामिल नहीं किया गया तो फिर भुम्सनदा पर हम क्योँ?हम क्यों जा रहे है भुम्सनदा?"

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: <akvashokbindu@gmail.com>
Date: रविवार, 31 जुलाई, 2011 4:34:24 पूर्वाह्न GMT+0530
Subject: बालक हफ्कदम के सवाल?

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

भुम्सन्दा की ओर हफ्कदम!

भयानक जंगल! आरदीस्वन्दी की टीम मेँ 25 व्यक्ति शामिल थे जो अब भयानक जंगल मेँ थे.इधर तीन नेत्रधारी बालक हफ्कदम!पृथु मही पर बालक हफ्कदम अपने साथ सनडेक्सरन से आयी युवती फदेस्हरर के साथ एक लैण्डमार्क पर थी.दोनों भुम्सन्दा की ओर यान से रवाना होने वाले थे.
"प्रकृति मेँ मानव ही ऐसा है जिसने अपनी क्षमताओं के समक्ष अहंकार, द्वेषभाव, भौतिक निजी स्वार्थ,आदि के वशीभूत हो आपस में लड़कर हमेशा तीसरे को फायदा दिया है "-फदेस्हरर बोली .एक सन्यासी बोला-

"जाति पंथ चक्कर मेँ पड़कर मानव ही मानव का खून करता आया था.वीरभोग्या बसुन्धरा .....वीर धर्म की रक्षा के लिए नहीं भोग के लिए हो गया,प्रकृति व मानव पर मनमानी के लिए हो गया.महाभारत युग सारी पृथ्वी महाभा अर्थात महान प्रकाश मेँ रत न हो कर भोगबिलास मेँ लिप्त हो अन्यायवादियों के शिकार हो गयी थी.तो ऐसे मेँ पृथ्वी को भार से मुक्त कराने के लिए अनन्त शक्ति श्री कृष्ण मेँ जागृत हो धरती पर अवतरित हुई इसके जाने के कुछ हजार वर्ष बाद पृथ्वी फिर कालिमा से लदगयी.सोलहवी सत्ररहवीँ सदी मेँ वैज्ञानिक व मशीनरी विकास ने प्रकृति असन्तुलन खड़ा कर दिया. "सन्यासी की आंखे नम थी

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कांग्रेसी पुतले मेलों मेँ ! एक कल्पना

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सोमवार, 25 जुलाई 2011

भविष्य पर झलक : उड़नतश्तरी यान

अन्तरिक्ष विज्ञान को लेकर भविष्य को रेखांकित करती कथाएं जहां तहां नजर आती रहती हैँ.इसी पर मेरी कल्पनाओं का एक अंश , यह ब्लाग.कल्पनाओं पर आधारित कुछ और यह चित्र.

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शनिवार, 23 जुलाई 2011

चित्र : भविष्य कथांश

इस ब्लाग पर मैं अपने काल्पनिक कथांश प्रस्तुत करता ही रहता हूँ . अब कुछ यह सम्बन्धित चित्र.इस ब्लाग व इसकी कैसी भी सामग्री को कोई अन्यथा न ले.

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सोमवार, 18 जुलाई 2011

सदभाव की खोज मेँ !

सनडेक्सरन निवासी त्रीनेत्री युवती आरदीस्वन्दी की भुम्सनदा धरती पर युवक सदभाव से मुलाकात उड़नतश्तरीयान वाली धरती धधस्कनक के तीन निवासी हलदकरोड़ा(युवती),दस रलकम व फदरस्लन ने करायी थी .

सनडेक्सरन से त्रीनेत्री आरदीस्वन्दी सदभाव की ध्वनि 'ओम आमीन' तरंगों के आधार पर भुम्सनदा धरती पर पहुंच तो गयी थी लेकिन....?!


वे ध्वनि तरंगें अब शून्य मेँ थीँ.भुम्सनदा पर लैण्डमार्क के समीप सूर्यमंदिर के पास जहाँ एक दीवार पर यान व विशेष वेशभूषा पहनी एक युवती का चित्र बना था.पड़ोस मेँ एक पत्थर पर आरदीस्वन्दी बैठी थी.पशु पक्षियों द्वारा लाए गये फूल पत्तियां उसके आसपास पड़े हुए थे.ब्रह्माशकल कुछ सूक्ष्म शरीर उससे मुलाकात कर जा ही पाये थे कि वहाँ अपने उड़नतश्तरी यान से युवती हलदकरोड़ा अपने दोनेँ युवक साथी दस रलकम व फदरस्लन के साथ वहां आ पहुँची थी.

* * *

भयानक जंगल !सदभाव की ओर कदम!!

यह कदम एक अभियान से कम नहीं थे.


जून सन 5020 ई0 मेँ सदभाव के अज्ञातबास में जाने के एक हजार वर्ष बाद अब ब्राह्माण्ड से उसका सामना होने वाला था.जंगल मेँ आरदीस्वन्दी के साथ 25 लोग थे.

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मेरें Nokia फ़ोन से भेजा गया

बुधवार, 13 जुलाई 2011

द अफ्रीकन

भूमध्य सागरीय आदिमानव! क्रीट सभ्यता एवं अफ्रीका का इतिहास.....



दूसरी ओर एक मार्डन फैमिली,जिसमेँ एक युवती .....उम्र उसकी तीस वर्ष.


उसकी महत्वाकांक्षा कि मैं चाहती हूँ सारी दुनियां मेरी मुटठी में हो और वो (जीवनसाथी)जो हो ,उसके लिए मैं ही सारी दुनियां होऊँ.मेरे सिवा सारी दुनिया को वह भूल जाए.


इस युवती को जंगलों में जाकर विभिन्न औषधियों व वनस्पतियों के बारे में जानकारी एकत्रित करने का शौक था.वह एक मेडिकल इंस्टीटयूट मेँ कार्यरत थी.लेकिन इस वक्त वह अफ्रीका के जंगलों मे थी...




दूसरी ओर एक मनोचिकित्सालय.....एक पागल एक रुम में था,उसने कुछ चित्र बना डाले थे-
एक चित्र में भूमध्यसागरीय क्षेत्र, दूसरे मेँ संसार तीसरे मेँ पृथ्वी ,चौथे में एक आकाशीय पिण्ड ,पाँचवें मेँ एक अन्तरिक्ष यान .....


उस पागल ने अपनी आंखे बन्द कर रखी थीं.


क्या वह वास्तव मेँ पागल था-


अन्तरिक्ष मेँ एक यान!


एक स्क्रीन पर मनोचिकित्सालय के चलचित्र!उस पागल की तश्वीरें भी.....



"यह पागलखाने मेँ!"


"पृथु की धरती के हाल क्या है?कैसे बयां करें ? "


" चलो ठीक है,इसके माइण्ड हमारे कम्पयूटर के कांटेक्ट मेँ आ गया है.क्या था विचारा,दुष्ट इन्सानों ने इसे क्या बना डाला?इसका ही बेटा नहीं क्या इसके शक्ल का अफ्रीका के जंगलों मेँ?"


"नहीं!"

"इसके जुड़वा भाई की करतूत है वह..."



इधर अफ्रीका के जंगलों मेँ.....

मंगलवार, 12 जुलाई 2011

20जनवरी के विस्फोट !

तेज ठहाकों से कक्ष गूंज उठा था.
यह ठहाके थे-पच्स्कदन के,अर्थात एक सनडेक्सरन निवासी के.


"वो पृथ्वी के लिए जयचन्द्र ही सही लेकिन है हमारे काम के.ऐ न्यूयार्की,शाबाशी दे डालो मेरी ओर से सबको."


"ओके सर!"


फिर पच्स्कदन विडियो फोन पर एक युवती फन्जेफडस से सम्पर्क करता है.


"फन्जेफडस!आज मै बहुत खुश हूँ.देख लो मुझे तेरी जरुरत नहीं पड़ रही है.देख मै तेरे बिना भी बहुत खुश हूँ."


"यह तेरी खुशी नहीं, तेरी मौत का जश्न है."


"हूँ!तू तो मुझे चाहती है प्रेम करती है."



"तू तो कलंक है कलंक!सनडेक्सरन धरती के लिए.आगे चल कर तुझे यहाँ के नागरिक ही नहीँ सारी धरतियों के मनुज तुझपे थूकेँगे ."


"हूँ!होने दो!"


फिर पच्स्कदन कक्ष से बाहर हो जाता है.


इधर मोनिका-

मोनिका का सारा कामकाज ,उसका और उसके साथियों का कार्यालय,गुप्त आवास,नियन्त्रण कक्ष,आदि पहाड़ों के नीचे अण्डरग्राउण्ड थे.
जो अब कुशक्तियों के विध्वंसक कार्यवाहियों के शिकार हो चुके थे.


मोनिका अन्तरिक्ष के किसी अज्ञात धरती से यान द्वारा कहसरक्यूनसे (त्रीनेत्री सनडेक्सरन निवासी) व ननकरेमक निवासी ताम्ररंगी नाटा व्यक्ति के साथ हाहाहूस धरती की ओर जा रही थी.
* * *


हाहाहूस धरती पर!


हाहाहूस धरती पर एक गुफा के सामने 'कक् लएश्श देवय ' की आदम कद प्रतिमा लगी हुई थी.जिसके सामने एक चबूतरे पर बैठा शक्ति वम्मा अपने पुत्र के साथ मेडिटेशन मेँ था .




मोनिका का यान एक गुफा के अन्दर प्रवेश कर गया.यान के रुक ने के बाद मोनिका दोनों के साथ यान से बाहर आ गयी.आगे बढ़ जब तीनों एक विशाल कक्ष में प्रवेश किए तो वहाँ उपस्थित युवक युवतियाँ व व्यक्ति अपनी अपनी कुर्सी से उठ बैठे और -
अभिवादन के बाद मोनिका बोली-"शक्ति वम्मा कहाँ है ? "



एक युवती बोली-" उनका अभी मेडिटेशन का समय है,वे...."

फिर मोनिका दोनों के साथ दूसरे कक्ष में प्रवेश कर कुर्सी पर बैठ गयी.एक ओर मानीटर पर दृश्य,


कि-

कक् लएश्श की आदम कद की प्रतिमा के समीप अब शक्ति वम्मा अपने पुत्र व अन्य के साथ मेडिटेशन में था.



* * *



न्यूयार्क मेँ एक हवेली !


इस हवेली के एक कक्ष मेँ-

कुछ कुशक्ति व्यक्ति मीटिंग कर रहे थे जिसमें न्युयार्की भी उपस्थित था.


विडियो फोन से पच्स्कदन सभी को सम्बोधित कर रहा था.


"....ए न्यूयार्की!जरा सम्भल कर . मोनिका के ठिकानों के साथ साथ चर्चित के कुछ ठिकानों पर विस्फोटों से वे और सशक्त हो कर उभर रहे हैं.रुचिको पृथ्वी पर आने वाली है.हम नाटक खेल रहे है,देखो कितना कमयाब होते है कि वह पृथ्वी पर न आने की अपनी शपथ न तोड़े."


एक अनाम पागल को एक अमेरीकी पागल खाने से निकाल कर समुद्री जहाज से समुद्र के बीच फेँक दिया जाता है.

लेकिन कुछ देर बाद वह जहाज एक विस्फोट से नष्ट हो जाता है.



इधर अनाम....!


समुद्र की लहरों से जूझते अनाम की तश्वीरें स्क्रीन पर थीं.


जिस पर निगाह थी-अशोक शक्ल व्यक्ति की.
अशोक शक्ल व्यक्ति की ?

हाँ!अशोक शक्ल व्यक्ति की ही निगाहें स्क्रीन पर थीँ.


स्क्रीन पर-


एक व्यक्ति एक यान समुद्र में उतार कर उस पागल अनाम को बचा लेता है.



अशोक शक्ल व्यक्ति स्क्रीन से निगाहें हटा कर पीछे खड़ी एक नवयुवती को देख,जो स्कर्ट ब्लाउज पहने थी-
" तुम यहाँ से चलने की मेरी व्यवस्था करो."


"क्या?सर!आज और रुक लेते.वैसे भी इस बार डेढ़ महीने बाद यहाँ आये हो."


वह उठ कर वह नवयुवती के रोकने के बाबजूद बाहर निकल आया.



अशोक शक्ल जब बाहर आया तो अनाम को देख-
"धन्यवाद!"

"सर!धन्यवाद कैसा?मेरे होते भी वहाँ बम विस्फोट!"

न्यूमैक्सिको : सन1947ई0

सन 1947ई 0 का समय!सत्ता हस्तान्तरण वक्त! अप्रत्यक्ष रुप से सत्ता ब्रिटिश के ही हाथ में रहे ,इसके लिए नेहरु को तैयार कर लिया गया था.लार्ड माउण्टवेटन की पत्नी के झांसे उलझ कर देश का हित भूल देश विभाजन व कामनवेल्थ का सदस्य बनने को तैयार हो गये थे.



हिन्दुस्तान के इतिहास मेँ एक नये अध्याय का प्रारम्भ!



न्यू मैक्सिकोँ में दो स्थानों पर उड़नतश्तरियां गिरी थीं.जिसका गबाह था-
न्यू मैक्सिको का ही मि एस.जो मानवतावादी अण्डरवर्ल्ड चीफ मोनिका के नाना थे .
वह इस वक्त अमेरीकी जेल में कैद थे.जब उसकी निगाह सलाखों से बाहर गली में पड़ी तो -


सामने गली से एक त्रीनेत्री ग्यारह फूटी व्यक्ति उसके कठघरे की ओर ही आ रहा था.


तब मि एस सोंचने लगा -
"सनडेक्सरन धरती का निवासी !"


"हा! मैं सनडेक्सरन धरती का निबासी ."मि एस ने पीछे मुड़ कर देखा,लेकिन पीछे कोई न था .आवाज पीछे से ही आयी थी.

सनडेक्सरन नागरिक करीब आ चुका था.उसने अपना हाथ सलाखों से अन्दर डाल कर मि एस के शर्ट को सामने से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और -

"मैने सोंचा कि मि एस का मुखड़ा भी देख लिया जाए."

फिर जब वह मि एस को छोड़ देता है तो मि एस जमीन में गिर जाता है.फिर सनडेक्सरन नागरिक वहां से चलते बना.वह मि एस की निगाहों से ओझल ही हो पाया था कि-तभी उसे एक चीख सुनायी दी.यह चीख पड़ोस के एक कठघरे से आयी थी.जिसमें उड़नतश्तरियों की धरती -'धधस्कनक' का वह नागरिक कैद था जो कि मि एस के फार्म पर मि एस के साथ ही गिरफ्तार किया गया था .


मि एस को तो जेल से छोंड़ दिया गया था लेकिन उसके साथी अर्थात धधस्कनक नागरिक को नहीं छोंड़ा गया था.


दो दिन बाद-
आकाश में एक यान तीब्र विस्फोट के बाद नष्ट हो गया,जिसमें मि एस उपस्थित थी.


पूरी दीवार ही एक स्क्रीन में तब्दील थी.जिसमें अन्तरिक्ष के चलचित्र आ रहे थे.अनेक अन्तरिक्ष यान तीव्र विस्फोटों के शिकार हो रहे थे .



अधेड़ावस्था से निकल वृद्धावस्था मे प्रवेश करने वाली अब मोनिका बैठी स्क्रीन पर चित्रों को देख रही थी.


सन बीस सौ इक्कीस की उन्नीस जनवरी!


आज ओशो की पुण्यतिथि के अवसर पर अनेक स्थानों पर से कार्यक्रम की सूचनाएं थीँ.भारत के खजुराहों में भी कार्यक्रम का आयोजन था.खजुराहो बैसे तो सन1999ई में ही विश्वपरिदृश्य पर आ गया था.खजुराहो के एक हजार वर्ष पूर्ण होने के अबसर पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था.इस सम्बन्ध में ओशो की काफी विस्तृत योजना थी,लेकिन अफसोस वह सन उन्नीस सौ नब्बे में ही इस दुनिया से जा चुके थे.
सन1999 - 2000ई
खजुराहो कार्यक्रम ओशो प्रेमियों के लिए अधिक सन्तुष्टि प्रदान न कर सका था लेकिन 2031में19जनवरी से 26जनवरी तक का सांस्कृतिक आध्यात्मिक कार्यक्रम काफी आनन्ददायक था क्योंकि इस कार्यक्रम काफी आनन्ददायक था क्योंकि इस कार्यक्रम की सारी योजना ओशो प्रेमियों की थी.


लेकिन -


दुनियां में विभिन्न स्थानों ,कृत्रिम उपग्रहों,अन्तरिक्ष यानों व रडार केन्द्रों को विस्फोटों के माध्यम से निशाना बनाया गया था.




अन्तरिक्ष में एक अज्ञात धरती ,जहां से एक अन्तरिक्ष यान उड़ कर अन्तरिक्ष यात्रा पर था.इस अन्तरिक्ष यान में तीन लोग उपस्थित थे-मोनिका,ननकेरमक नागरिक जो कि ताम्ररंगी नाटा था,व तीसरा-सनडेक्सरन नागरिक 'कहसरक्यूनसे' .

'कहसरक्यूनसे' से मोनिका बोली-"यान को हाहाहूस की ओर मोड़ दो."



"हमारे पूर्वजों ने अमेरीका व अन्तरिक्ष की कुछ कुशक्तियों के साथ मिल कर मोनिका के मानवतावादी वर्ल्ड को ध्वस्त कर दिया था.आज हम फिर देवरावण के साथ मिल कर मानवतावादी शक्तियों को नष्ट करेंगे . "



-सनडेक्सरन का एक बागी नागरिक 'चटकाएतपयटचट' बोला.

शनिवार, 9 जुलाई 2011

बालक हफ्कदम और देवरावणी सेना

सन 6020ई0 का विजयादशमी पर्व! मातृदेवी की भव्य प्रतिमा के समक्ष शस्त्रपूजन कार्यक्रम चल रहा था.सनडेक्सरन नि वासी बालक हफ्कदम के एक युवती के साथ मंच पर उपस्थित था. दोनों तीननेत्री थे. एक वृद्व सन्यासी जो कि हरा व लाल रंग के वस्त्र पहने था.हवन कुण्ड की अग्नि प्रजव्लित करते हुए बोला -"जीवों में चेतना के दो अंश होते हैं-परमात्मांश व प्रकृतिअंश.इन दोनों में सन्तुलन का सिद्धान्त ही (एक ओर स्थापित श्री अर्द्धनारीश्वर प्रतिमा को देखकर) श्रीअर्द्धनारीश्वर स्वरुप में छिपादर्शन है.आज विजयादशमी पर आप सगुणप्रेमियोँ के द्वारा मातृदेवी के समक्ष शस्त्रों की पूजा का मतलब क्या है?प्रकृति को बचाने को शस्त्र उठने ही चाहिए लेकिन शस्त्र सिर्फ स्थूल ही नहीं होते.हर कोई प्रकृति का संरक्षक सगुण व क्षत्रिय है." आकाश में अनेक यान तेजी के साथ तेज आवाज करते हुए मड़राने लगे.
और... " हा... हा.. हा.. हा.....! " - अपने नियन्त्रण कक्ष से एक वृद्ध राजसी व्यक्ति ठहाके लगा रहा था. यह वृद्ध व्यक्ति...?!अचानक वह चौंका.स्क्रीन पर दिख रहा था कि सारे नष्ट किये जा रहे थे और अब बालक हफ्कदम हँसते हुए बोला-"देवरावण!तू ..."

ASHOK KUMAR VERMA 'BINDU' WITH MANVATA HITAY SEVA SAMITI,U.P., INDIA .

....हंस कर लेंगे हिन्दु��्तान !

नादिरा खानम !

भविष्य त्रिपाठी के साथ अनुसंधान कार्य में लगी रहती थी-नादिरा खानम.



सन 2031ई0की हजरत अली जयन्ती!
मीरानपुर कटरा, शाहजहांपुर में कब्बाली का आयोजन था.



अपने जीवन में पचास बच्चे पैदा करने वाली फहरीन अंसारी को मुसलमानों की आबादी बढ़ाने में योगदान हेतु इनाम दिया गया .



इस कार्यक्रम की अतिथि थीं-नादिरा खानम.



"फहरीन अंसारी मुसलमानों की आबादी बढ़ाने मेँ योगदान दिया ,यह मेरे लिए ताजुब्ब की बात है.कहाँ है मुसलमान ?आप लोग कहते हैं कि दुनिया में मुसलमान की आबादी आसमान चूमने लगी है.दुनिया की सत्ता चन्द सालों बाद हमारे हाथ में होगी .यह आप लोगों का मानना है. मुझे तो मुट्ठी भर से भी कम मुसलमान दिखे हैं.मुसलमान कौन है?
जिसका ईमान दृढ है,वही मुसलमान है. मोहम्मद साहब से बढ़कर मुसलमान कौन है?उनसे बढ़कर क्या कोई दयालु है?वे उस दुष्ट महिला का सम्मान करना भी जानते हैं,जो प्रति दिन उनके ऊपर कूड़ा फेंकती है .आप ईमान से पक्के हैं क्या ?ईमान पर पक्के रहने वालों की आबादी बढ़ रही है क्या? "- नादिरा खानम बोल रही थीँ.




पब्लिक के बीच से दो युवक खुसुर फुसुर करने लगे थे-
"साली,यह थोड़ी बोल रही है.यह तो इसका यार भविष्य त्रिपाठी बुलवा रहा है.इन युवकों के पास पुष्प कन्नौजिया भी बैठा था.वह गुस्से का घूंट पी कर रह गया .


"पाकिस्तान लिया था लड़ के अब हिन्दुस्तान लेंगे हंस के ."-एक मुस्लिम युवक बोला.


पुष्प कन्नौजिया वहां से उठ बैठा.


नादिरा खानम अब भी बोल रही थी -



" यह धरती इन्सान व कुदरत के बिना क्या महत्वहीन नहीं हो जाएगी? जाति मजहब से ऊपर उठ कर करुणा व प्रेम की मिसाल प्रस्तुत कीजिए .सार्भौमिक सत्य के पथ पर यात्रा तय किए बिना इन्सान क्या इन्सान? अपने पन्थ के सामने अन्य पन्थ को हीन भावना से देख कर व जीव जन्तु वनस्पतियों का नाश करना कहां का ईमान है.पूरी दुनिया में अपना साम्राज्य स्थापित करना चाहते हो तो सर्वसम्मत्ति से विश्वसरकार तथा आम आदमी के लिए अन्तर्राष्ट्रीय शरहदों को खोल देने की वकालत करो.चाहें गैरमुसलमान क्यों न हो ,ईमानदार व दयालू व्यक्तियों का संरक्षण होना चाहिए . क्यों न कोई मुसलमान हो,यदि वह भ्रष्ट व हिंसक है तो उसकी बगावत करो."



* * *


मुगलिस्तान जिन्दावाद के नारे तेज हो चुके थे.


मुगलिस्तान में पाकिस्तान,अफगानिस्तान व बांग्लादेश सहित पूरा उत्तर भारत शामिल किया गया था .हर भारतीय मुसलमान का मकसद बन चुका था-मुगलिस्तान.



कुछ सेक्युलरवादी ताकतें उभरीं तो थीं लेकिन उनके साथ मुस्लिम आबादी नहीं थी.यह सम्राट अकबर की दीन ए इलाही पन्थ के आधार पर चल रहीं थी.यह दूसरी जाति में शादी करने की वकालत कर रही थीं.



ओशो जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर कार्यक्रमों में ओशोप्रेमी व कुछ अन्य संगठन सार्क राष्ट्रों का एक संघ राज्य व आम आदमी के लिए अन्तर्राष्ट्रीय शरहदें खोलने की वकालत के साथ विश्व सरकार हेतु जनमत तैयार कर रहे थे.


लेकिन मुस्लिम आबादी गैरलोकतान्त्रिक व गैरसेक्यूलर मुस्लिम सरकार चाह रहे थे .बढ़ती मुस्लिम आबादी का दबाव मुस्लिम राज्य के लिए रास्ता सुगम बना रहा था.



फिर-


सन बीस सौ इक्कतीस की उन्नीस जनवरी!



आज से चालीस वर्ष पूर्व यानि कि उन्नीस जनवरी सन उन्नीस सौ नब्बे को ओशो परमसत्ता में विलीन हो गये थे.इसी अवसर पर पृथ्वी के अनेक नगरों में कार्यक्रमों का आयोजन था.सारी पृथ्वी पर सात जगह प्रमुख कार्यक्रम ,जैसे भारत में खजुराहो,अमेरीका में ओशो आश्रम,मास्को,नागासाकी,रोम,आदि स्थान .

बुधवार, 6 जुलाई 2011

राजीव की हत्या के पीछ��!

ब्रिटेन की एक बहुमंजिला इमारत के सबसे ऊपरी मंजिल पर एक गोष्ठी चल रही थी.

दो ब्रिटिश आपस में बात कर रहे थे.शेष सब खामोश थे.क्लेयर शार्ट का पिता थाम्पसन भी इस गोष्ठी में शामिल था.


"सर! पंजाब समस्या के प्रश्न पर सन्त लोंगोवाल व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अब सन्त लोंगोवाल पर..."




"शा.....शान्त......!तुम कुछ अधिक ही बोलने लगे हो.अभी यहाँ गोष्ठी का उद्देश्य...."



"सारी सर! "


"सारी ? तुम तो सारी कह कर काम चला लेते हो लेकिन.... . "



"सर!अमेरीका में कैद राबर्ट के अब कैद करने रखने से क्या लाभ, वो तो....... ."



"उसे अभी छोड़ा भी न जा सकता और मारा भी न जा सकता.चीफ का अब जो आदेश हो."


"वो काफी दृढ़ है,इण्डिया के खिलाफ कुछ भी नहीं बोल सकता लेकिन एक बात समझ में नहीं आती कि ओशो के खिलाफ......."



"तुम नहीं जानते उसके प्रेममय ,सत्य एवं ईमानदार भाषणों से विश्व की जनता उस ओर आकर्षित हो रही है.जनता अनभिज्ञता में रहे तभी हम लोगों व सत्तावादियोँ का लाभ है."


"लेकिन सर...."



उपस्थित थाम्पसन के मन में न जाने क्या आता है कि वह उठ कर चल देता है .


बाहर-

"थाम्पसन,सा'ब आप!?बहुत जल्दी!"



"स्वास्थ्य बिगड़ने लगा था"-कहते हुए थाम्पसन आगे बढ़ गया.



* * *


थाम्पसन रात्रि के समय अकेले बैठा चाँद की ओर निहार रहा था.



"मैं पैर से लेकर सिर तक कम्पित हो जाता हूँ - एकान्त में.इन विश्व की कुचक्रकारी शक्तियों की शाखाओं के सामने मैं झुक तो गया हूं बिना किसी कारण के,लेकिन मेरा एकान्त मुझे मेरे इस कुकृत्य को लेकर कुचेटने लगता है. मेरे व्यवहार को लेकर मेरा पुत्र क्लेयर मुझसे नाराज है ही.व्यक्तिगत व परिवार की पूर्तियों के लिए मेरी भौतिक लालसा के कारण कुशक्तियों के साथ के कारण वह ही नहीं....! हूँ;क्लेयर कहता ही रहता कि कहाँ गये वो तुम्हारे सिद्धान्त? उन पर कल्पनाएं जोड़ कर अनेक पुस्तकें लिख डाली लेकिन व्यवहार में....?मुझपे दबाव डाला जा रहा है अब कि मैं इण्डिया जाऊं,उद्देश्य बताया जाना बाकी है. "




"डैडी!"




वह देखता है कि सामने उसका बेटा क्लेयर शार्ट खड़ा है .



"चलो खाना तैयार है."



"आता हूँ ,तुम चलो."


फिर-


क्लेयर शार्ट चला जाता है.




"इण्डिया जाने से पहले न्यूयार्क के हिलटन होटल में आगामी मिटिंग की व्यवस्था मुझे ही करनी होगी."-थाम्पसन सोंच रहा था.




आज से चार पाँच वर्ष पूर्व !



स्थान दिल्ली दक्षिण के आर.के पुरम स्थित एअर हेड क्वार्टस.



वहां एक लोअर डिवीजन क्लर्क.



लोग उसके प्रति असमञ्जस्य में थे कि वह एक साधारण सा क्लर्क और उसकी जीवन शैली उसके पद के स्तर से काफी ऊंची.



आखिर-


उसको फाइव स्टार होटलों में विभिन्न पार्टियों से मिलते उसे देखा गया था .




एक विदेशी छात्रा-जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में,उससे उस क्लर्क का सम्पर्क !



वह था-एक भारतविरोधी जासूस.



उस विदेशी छात्रा के माध्यम से उसके विभिन्न लोगों से सम्पर्क हुए थे.



भारतीय गुप्तचर विभाग उसके खिलाफ सबूत एकत्रित करने में लग गया था.



सन चौरासी की छह अप्रैल को उसके लिए वर्खास्तगी के आदेश दे दिए गये थे.



संयोग से उन दिनों मैं यानि कि थाम्पसन दिल्ली में ही था.आठ अप्रैल की शाम मैं वहाँ से कलकत्ता रवाना हो गया था.उस समय मुझे इन्दिया गांधी की हत्या के सम्बन्ध में जानकारी भी थी. कलकत्ता में मैं लगभग एक मास रहा था फिर ब्रिटेन रवाना हो गया था.



हमारी टीम की उच्च समिति को जानकारी थी कि अमेरीकी गुप्तचर एजेंसी 'फडरेल ब्यूरो इनवेस्टिगेशन' का कोई एक एजेण्ट की हमारी टीम के एक सदस्य पर नजर पड़ गयी है.तेईस दिसम्बर को उसकी हत्या कर दी गयी थी लेकिन मुझे बुरा लगा था.यदि ऐसी स्थिति मेरे साथ तो......तो फिर मेरी भी हत्या?मैने मिटिंग में इस हत्या पर अनेक प्रश्न भी किये तो सब की निगाहें ऐसी थीं कि वे सब मुझे खा जायेंगे.



एक जनवरी को मुझे आदेश मिला कि मैं न्यूयार्क जा कर गुर प्रताप सिंह बिर्क , लाल सिंह,आदि युवकों से सम्पर्क करुँ.हमारी टीम को इन युवकों के सम्बन्ध में जानकारी हुई थी कि वे राजीव गांधी ,मुख्यमन्त्री भजन लाल सहित अनेक नेताओं की हत्या के साथ इण्डिया में अन्य विध्वंसकारी कार्य करना चाहते हैँ.हमारी टीम का विचार था कि उन्हें कैच कर सन्तुष्ट किया जाए और उनसे अपना काम भी लिया जाये.मैं पिच्चासी सन के सत्ताईस जनवरी को न्युयार्क मेँ प्रवेश कर चुका था लेकिन मुझे नववें दिन अन्य खास काम से ब्रिटेन बुला लिया गया.न्यूयार्क में हमारा दूसरा एजेण्ट आ चुका था.



थाम्पसन सोंच रहा था-



मैं सक्रिय तो हूँ इन लोगों के साथ लेकिन शुरु से अभी तक मेरा एकान्त मुझे कचोटता है.

"राजीव हत्या के पीछे...?"

मंगलवार, 5 जुलाई 2011

वो शक्तियां ....

मंजुला तीन युवतियों व तीन युवकों के साथ एक सड़क किनारे स्थित धर्मस्थल पर पीपल वृक्ष के नीचे बैठी वहां के अधेड़ सन्त से बातचीत कर रही थी.यह सब ओशो प्रेमी थे.



ओशो पर चर्चा के दौरान-



एक समय वह भी था जब ओशो सिर्फ अकेला था.नितान्त अकेला.



अमेरीकी प्रशासन ने उसे जंजीरों से जकड़ रखा था,भारी भारी जंजीरों से.



वह अकेला तब भी सरकारों को उससे भय?



क्यों...?



मात्र इसलिए क्योंकि वह जो बोलता था वह सत्य बोलता था.



उन दिनों ही अमेरीका में न्यूयार्क के एक जेल में एक हिन्दू राबर्ट के नाम से कैद था.


वह एक अधेड़ अमेरिकन से कह रहा था-



" तुम नहीं जानते कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है,तुम......."



"हा...हा....हा..!ऐ सब अपने पास रख.जानता हूँ इण्डिया का हर कोई उपदेशक से कम नहीं.हाँ;तुझे एक खुशखबरी,...?मेरे लिए खुशखबरी ही!ओशो पर फेंका गया हम लोगों का मिशन कामयाब रहा.बदनाम तो उसे कर ही चुके थे,अब उन्नीस जनवरी को स्वर्ग भी सिधार गया."


राबर्ट उस पर अपनी आंखे गड़ाते हुए-
"जान गया हूं तुम्हारे चमचों के द्वारा."



"चम्मचे तो तुम्हारे यहां नेताओं के होते हैं."




और अब...!




एक समय वह था जब परम्पराओं के ठेकेदार ओशो के विरोध में थे क्योंकि उन्हें अपनी दुकानें ठप्प होने का भय था.ऐसे ही लोग कृष्ण,सुकरात,ईसा,मोहम्मद,कबीर,आदि की उपस्थिति में इनके विरोध में ही रहे.परम्परायें नवीनता को शीघ्र नहीं स्वीकारतीं,हालांकि वह नवीनता नवीनता नहीं होती पुराने सिद्धान्तों की पुनर्व्याख्या होती है.जब नवीनता समाज में कुछ प्रतिष्ठित होने लगती है तभी उनकी दृष्टि नवीनता पर पड़ती है लेकिन तब तक वह नवीनता परम्परा हो चुकी है.फिर वही....
कोई नया आता है,फिर उसके साथ वही.



आज!

और आज जब ओशो जन्मशताब्दी वर्ष!

तब करोड़ों है उनके पक्ष में लेकिन अब लोग उनको लेकर बैठ गये और समय के मुताबिक नवीन परिस्थितियां.......सनातन धर्म की यात्रा में ठहरे हुए होते हैँ.



वह नवयुवती अर्थात मंजुला कमरे में अकेले बैठी डायरी पर लिखे जा रही थी.


उसकी कलम अभी रुकी न थी-



सन तिरानवे के अश्विन मास में हिन्दुस्थान आने के बाद क्लेयर शार्ट लगभग एक वर्ष यहां रहा था.वह इस वक्त ब्रिटेन में था.
जब वह
हिन्दुस्तान में तो
क्लेयर शार्ट अशोक से कह रहा था-



"अशोक ,मैने तुम्हें जब पहली बार हरिद्वार में देखा था तो लगा था कि तुमसे मेरा अनेक जन्म से सम्बन्ध है."



अशोक ने ऊपर आसमान की ओर देखा मानो वह सूक्ष्म शक्तियों को मौन संकेत कर रहा हो.



"अशोक! कल्पनाएं कभी झूठ नहीं होतीं और सन छियासी या सत्तासी से आपकी कल्पनाओं के जो बिन्दु हैं आश्चार्य है उन्हीं बिन्दुओं की बात मैने आपसे क्यों कर दी और कहता रहा कि अशोक,आपका नवीन क्रान्ति से सम्बन्ध है.मैं कहता था कि ऐसा होगा,वैसा होगा तुम कहते कि ऐसी तो मेरी कल्पना है..हम और आप एक दूसरे के अन्तरमन को न जानते फिर भी......."



"मैं......!" - फिर अशोक अन्दर की ओर तेजी से श्वास लेते हुए अपना सिर नीचे झुका कर अपने सीने पर निगाह डालता है.



"कुछ बोलने को थे तुम अशोक."



"बोलो,तुम बोलो,मै नहीं बोलूंगा अभी,(मुस्कुराते हुए) अभी बोलने की अक्ल नहीं,जब बोलूंगा तो सारी धरती एक बार हिल जाये."



"होगा अशोक,ऐसा ही होगा."



"अशोक,तुम जैसे लोग देश समाज विश्व के बारे में सोंचने वाले कम ही होते हैं."


"अच्छा,छोंड़ो यह व्यक्तिगत बाते!मैं ही जानता हूँ मैं क्या हूँ?एक अस्थिर,अनिर्णयशील,भययुक्त,आदि के अलावा और क्या....?"


"इक्कीसवीं सदी के प्रारम्भ में युगदर्शी से भेंट के बाद तुम्हारे बाहरी व्यक्तित्व में भी परिवर्तन हो जायेगा और जो विक्रान्तियां हैँ वे नष्ट होना आरम्भ हो जायेंगी."



"धन्यवाद!ऐसा ही हो ,मैं प्रभु से चाहूँ."



"ऐसा ही होगा.प्रभु से अपने लिए कुछ भी न मांगने वाला कोई....."



"यह तो मैं ही जानता हूँ."



......क्लेयर शार्ट अकेला ही जर्मन के एक शहर स्थित एक पार्क में लेटा सोंच रहा था-अशोक में बहुत कुछ छिपा है सिर्फ व्यवहार नहीं है पास,लेकिन एक दिन...




एक बहुमंजिला इमारत!


जिसके सबसे ऊपरी मंजिल पर अन्तर्राष्ट्रीय कुशक्तियों की एक गोष्ठी ,जिसमें पाक खुफिया ऐजेन्सी के प्रतिनिधि सहित अनेक उग्रवादी आतंकवादी एवं विध्वंसकारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे.


इस गोष्ठी के कुछ अंश-


"कल दिल्ली के किले पर राजीव का प्रथम भाषण होगा.मौत उस बेचारे को राजनीति में खींच लायी है."



" वो तो जाल बिछा ही रखा है राजीव के लिए सर.लेकिन फैजावाद में वो गुमनामी बाबा....!उसके सम्बन्ध में...... . "



"सब जानता हूँ , सुभाष के सम्बन्ध में यह सब प्रचार प्रसार ज्यादा सफल नहीं होंगे . "



"सर!पंजाब समस्या के प्रश्न पर सन्त लोंगोवाल व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के बीच समझौते पर ......

रविवार, 3 जुलाई 2011

ओशो जन्मशताब्दी वर्ष :एक झलक!

ओशो जन्मशताब्दी !

यानि कि-
2031

हिन्द भूमि पर ओशो जन्मशताब्दी समारोहों का सिलसिला प्रारम्भ हो चुका था.विदेशों से भी इसकी खबरें थीं.



प्रात:काल का समय ! अभी सूर्य उदित भी न हुआ था.चर्चित अकेले ही पैदल गांव से बाहर खेतों की ओर चल दिया था.शीत ऋतु,हल्का हल्का कोहरा छाया हुआ था.खेतों में चारो ओर सरसों लहलहा रही थी.चर्चित अपने में खोया खोया आगे चलता जा रहा था.



अचानक!


चर्चित ने अचानक इधर उधर देखा -
उसके होंठों पर मुस्कान जगी.चर्चित चारो ओर से राइफलधारियों द्वारा घिरा हुआ था.वह मुस्कुराते हुए आगे बढ़ा.



"ठहरो!" - और एक ने चर्चित की ठोंढ़ी पर राइफल की नाल तान दी लेकिन चर्चित के होंठोँ पे मुस्कान ही थी.



चर्चित का स्थिर शरीर , लेकिन अपनी चलायमान आंखों से सामने उपस्थित राइफलधारियों के चेहरों पर नजर डाली.


फिर-


जिसने चर्चित पे राइफल तान रखी थी,उसके चेहरे पर पसीना देख कर,


"ऐसा काम क्यों करते हो जिससे भय पाये दिल?तुम तो अनेक राइफलधारियों के साथ हो,ऐसे में डर....?क्या दिल मेँ असलियत चुभ रही है और ऊपर से ढोंग किये जाते हो? "



"ऐ,स्पीच देना बन्द कर." -दूसरा बोला.


उसे देख कर चर्चित-

"रण में जाया जाता है,बुजदिली से नहीं जाया जात.तुम की ये आवाज भी बनी बनायी है,दिल की आवाज नहीं है . "



"हमें तू डिगा नहीं सकता."


एक बोला-

"हम लोग तुम्हारे साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं करना चाहते .हम लोगों का कहना है कि यदि तुम भला चाहते हो तो अपना प्रचार प्रसार बन्द करो,नहीं तो फिर.... ."


"नहीं तो फिर......"


"हमारा कहना मानो."



"हम....?वह भी तुम्हारा!बड़े हिम्मती बनते हो तभी तो हम लोगों की बातों का जबाब बातोँ से न दे अपनी राइफलों पर गुमान करते हो.स्वयं तुम.........?!और इस शरीर को मार भी दोगे तो भी मेरे शरीर को ही सिर्फ नष्ट करोगे मुझे नहीं.इससे अच्छी और क्या बात होगी कि मेरे शरीर का मरना भी तुम लोगों के शायद काम आये."



सब एक दूसरे का चेहरा देख रहे थे.चर्चित के होंठों पे हल्की सी मुस्कान अब भी बनी हुई थी.



चर्चित पर तानी गयी राइफल हटा ली गयी.




शाम को व दूसरे दिन सुबह -



समाचार पत्रों,टीवी चैनलों व आकाशवाणी ने ओशो जन्मशताब्दी पर प्रकाश डालने के साथ चर्चित के सामने राइफलधारियों के समर्पण की घटना को भी हाईलाइट किया गया था.जानकारी दे दूं कि अब भी कुछ लोग ओशो व ओशो जन्मशताब्दी कार्यक्रम के खिलाफ थे.




एक नवयुवती कुर्सी पर बैठी मेज पर डायरी रख कर उस पर कुछ लिखे जा रही थी.सामने विस्तर पर ओशो जन्मशताब्दी समारोह सम्बन्धी अनेक सामग्री पोस्टर बैनर आदि बिखरे पड़े थे .



कुछ समय पश्चात उस नवयुवती ने लिखना बन्द कर दिया और अपने गुलाबी होँठों पर सुन्दर डाटपेन टच कर रखी थी.


वह मन ही मन-"ओशो ने कहा था कि न मुझे स्वीकारो और न ही हमें भूलो."



जम्हाई लेते हुए उसने ओशो की तश्वीर पर निगाह डाली.



फिर वह युवती डाटपेन मेज पर रख कर कमरे से बाहर निकल कर बरामदे में पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी.


कुछ मिनट बाद वह कुर्सी से उठ बैठी .



अब वह एक सड़क पर कुछ युवक युवतियों के थी.कुल सात थे,तीन नवयुवक व उस सहित चार नवयुवती.सभी अपनी अपनी साईकिल पर थे.सब अपने अपने माथे पर एक एक भगवा पट्टी बांधे थे ,जिस पर लिख था-ओशो.



आगे सड़क पर एक विशाल पीपल व उसके समीप एक बिल्डिंग नजर आ रही थी.



एक नवयुवक उस नवयुवती को देख कर -


"ओ मेरी मोनिका! क्यों न ......"


" देख मैं कितनी बार कह चुकी हूँ कि......कहाँ मोनिका और कहां मैं ? मैं तो उसके पैर की जूती तक नहीं.अब अपनी बात बोल."



" मैं मानता हूँ तेरी बात लेकिन यहां इस सोसायटी में तो तू ही मोनिका भांति,तू ही....(फिर मुस्कुराते हुए) क्यों न आगे पीपल नीचे कुछ पल रुक लिया जाये."



" जैसी मर्जी " - वह नवयुवती बोली.



फिर सभी आकर पीपल के नीचे रुक गये.



पड़ोस में एक हैण्ठपम्प था.उसके समीप एक विशाल बरामडा.आगे कुछ दूरी पर दो मंजिल कई कमरों सहित एक बिल्डिंग,जिसके सामने श्री कृष्ण की आदम कद एक प्रतिमा लखी थी.पीपल वृक्ष के दूसरी ओर एक छोटा सा बरामडा,जिसके ऊपर एक कमरा व बरामदा बना हुआ था.छत के इस बरामदा पर खपरैल पड़ा था.



सातो युवक युवतियां चबूतरे पर बैठ आपस में बात करने लगे थे.


कि-


एक गेंहुआ व स्वेत वस्त्रधारी अधेड़ उन ओर आया तो सभी उठ कर उससे नमस्ते करने लगे.


वह अधेड़ बोला-

"हां भाईयों एक खुशखबरी दे दूँ.व्यवस्था समिति यहां ओशो की प्रतिमा लगवाने के लिए मेरा सुझाव पर मान गयी है."

यह नवयुवती ओर कोई नहीं मंजुला ही थी.मंजुला बोली-
"धन्यवाद."
"अरे हम तो..... भाई आप जैसों के सामने विशेष रुप से चर्चित के सामने मैं नतमस्तक हूँ.मुझे अखबार से सूचना मिली कि चर्चित ने अकेले ही सशस्त्र बल से अपनी वाकपटुता माध्यम से कैसे मुकावला किया.वास्तव में अब बुद्ध कृष्णा के तटस्थ मार्ग पर तुम.

शनिवार, 2 जुलाई 2011

सन चार हजार साठ ई0 की त��यारी ....

चर्चित इस समय नवयुवती मंजुला के साथ था.


"अशोक सन छियानवे के बाईस जून को इस धरती से जा चुका था लेकिन उसकी कल्पनाओं को विस्तार देना अभी काफी बाकी है.अशोक भी कहा करता था कि मुझमें इतना भण्डार है कि एक हजार बार जन्म होने के बाद भी उसे कागजों पर नहीं उतार सकता.कहानी के अन्दर कहानी ,हर पात्र पर एक श्रंखला...."



"अभी पुरानी बातें छोंड़ों ....चर्चित,भविष्य की बातें छोंड़ो.वर्तमान की बात करो .अगले ओशो जन्मशताब्दी वर्ष के व्यवस्था सम्बन्धी......!? "


दूसरी ओर अधेड़ उम्र का एक व्यक्ति-किशोर.वह एक वैज्ञानिक अनुसंधानशाला में एक सेमीनार मेँ शामिल था.जिसमें निर्णय लिया जा रहा था कि डायनासोर के जीवित अण्डों पर कार्य करके डायनासोर की नस्ल की उत्पत्ति की जाए.



"नहीँ,मैं नहीं बर्दाश्त कर सकता.आप लोगें का निर्णय मेरी दृष्टि से प्राकृतिकता नहीं " - फिर गोष्ठी के मध्य से किशोर उठ बैठा तो लोगों में प्रतिक्रिया हुई-"रुकिए सर!रुक जाईए सर!कहाँ चले?" - आदि वाक्य लोगों के मुख से निकले लेकिन किशोर न रुका,वह वहां से चलता बना.



किशोर जब बाहर आया तो अपने पच्चीस वर्षीय बेटे को देख कर -"सुबिधा कहां है?"तो उसका बेटा उससे बोला-"पापा,वो तो नहेसुडेल्स के साथ गयी है."किशोर बोला-"चलना नहीं है उसे,उसे बुलाओ."

" वो तो अभी मना कर रही है ."


"तो मैं चलता हूं.तुम उसे ले आ जाना."-कहते हुए किशोर अपने यान की ओर बढ़ गया.
यान के दक्षिण ओर उसकी सात वर्षीय पुत्री सुविधा अपने हमउम्र तीन नेत्रधारी एक लड़की-नहेसुडेल्स के साथ
यान की ओर ही आ रही थी.इधर पीछे गोष्ठी भवन से ग्यारह फुटातीन नेत्रधारी व्यक्ति किशोर की आ रहा था.



सुविधा पास आते हुए किशोर से बोली-"आप तो अभी ही जा रहे हैं?"



" हां ,बेटी! मैं चलता हूँ.तुम भाई के साथ आ जाना. "


तब तक तीननेत्रधारी
व्यक्ति किशोर के समीप आ कर बोला-"सर,सुप्रीमो रुकने को कहते हैं."



"नहीं,मैं नहीं रुक सकता."


फिर किशोर अपने यान के अन्दर पहुंच गया.यान उड़ने के कुछ समय पश्चात अन्यत्र उतर गया.दो युवतियां जिसका इन्तजार कर रही थीँ.
किशोर जब यान से उतर कर आगे चल दिया तो दोनों युवतियां उसके दायें बायें चल दीँ.कमरे में जा कर किशोर कुर्सी पर बैठते हुए-


"न जाने उन्हें क्या हो गया?मैं तो नहीं चाहता कि अपनी इस धरती पर पुन:डायनासोर अपना अधिपत्य जमायें."


"लेकिन सर,डायनासोर यहां अधिपत्य कैसे जमायेँ? "



किशोर कुछ सोंचने लगा.







अब से लगभग बीस वर्ष पूर्व लगभग सन बीस सौ बारह या पन्द्रह की दो अक्टूबर तिथि-गांधी जयन्ती.


गांधी शास्त्री जयन्ती !



एक विशाल जनसभा !

मंच के पीछे तीन विशाल आकृतियां बनी थीं,जो दो स्पष्ट थी-गांधी व शास्त्री का चेहरा लेकिन तीसरा चेहरा अस्पष्ट था.उस पर अखण्ड भारत का नक्शा बना था.जिस पर लिखा था-दो अक्टूबर.


अनेक वक्ता बोल चुके थे.मंच का संचालन एक विकलांग सुन्दर युवती कर रही थी.



जब मंच पर एक वृद्ध व्यक्ति प्रवेश करता है तो सारा माहौल गूंज उठता है-जय विश्व ! जय ब्राह्माण्ड! !



जय विश्व जय ब्राह्माण्ड से सारा बातावरण गूंजते देख कर वह वृद्ध प्रफुल्लित होते हुए बोला-


"मैँ खुश हूँ कि एक लेखक मात्र की कल्पनाओं में गुञ्जारित होने वाला यह जयघोष इतना शीघ्र जनमानस मेँ छा गया लेकिन हमें मन से भी लक्ष्यों की ओर जाने का परिवेश बनाना होगा.आज दो अक्टूबर है ,सब जानते हैं.हमारे गांधी जी की भी कल्पना थी कि एक विश्वसरकार स्थापित हो.अपनी संस्कृति तो वसुधैव कुटुम्बकम की बात करती आयी है.अच्छाईयां होती हैं जहाँ ,तो वहां बुराईयां भी है.गांधी जी शास्त्री जी......."




अब सन बीस सौ चौबीस आने को आयी.चर्चित मंजुला के साथ था.चर्चित मंजुला से कह रहा था-



"उस मंगल यात्रा के बाद लेखक अशोक एवं उसके साहित्य का जिक्र समाचार पत्रों में एक बार फिर चर्चे में था."



"तो फिर अशोक के साहित्य में वर्णित उस अशोक शक्ल का भी चर्चा होगा. क्योंकि लेखक अशोक ने एक जगह पर अपने शक्ल के......... ."



"और फिर वह वृद्ध....."



"हूँ ....हूँ...."चर्चित मुस्कुराते हुए गर्दन हिलाता है.



और -

" प्रशासन के बीच एक बार वह वृद्ध बोला था कि मैं वो अशोक शक्ल नहीं हूं,चाहें मेरा परीक्षण भी करवा लें .कहां अशोक की उम्र कहां अशोक की उम्र और कहां वह वृद्ध...?! "





किशोर की एक न चली थी.



अधेड़ किशोर चिन्तित था कि वैसे भी पृथ्वी खतरे में है.भविष्य त्रिपाठी के अनुसार आगे दो सौ वर्षों के अन्दर हिन्दप्राय द्वीप दो भू भागों में विभक्त होने वाला है . ऊपर से यह सिरफिरे वैज्ञानिकों के हाथ डायनासोर के जीवित अण्डें क्या लगे कि वे इस धरती पर डायनासोर नस्ल को पुनर्जीवित करने का ख्वाब देखने लगे हैँ.



लेकिन...



अब सन चार हजार साठ !



वनमानव के दोनों पैर कांटों से घायल थे.

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

सन2031ई0:यहां ऐसे वो.

हिमालय प्रकृति की अनुपम देन !



चारो ओर बर्फ ही बर्फ!कुछ समय पश्चात....लेकिन यह क्या....?!ताज्जुब......?!एक चोटी पर का वर्फ तेजी के साथ पिघलने लगा था.सिर्फ एक चोटी पर ही ऐसा क्यों?




एक अण्डाकार अन्तरिक्ष यान हिमालय के एक स्थान पर उतरा.इस यान से एक तीननेत्रधारी बालिका के साथ तीननेत्रधारी दो युवतियां बाहर आयीं थीं.इन तीनों के स्वागत में एक चार वर्षीय बालक अपने माता पिता के साथ खड़ा था.



उस तीन नेत्रधारी बालिका का नाम था-माजेडीसीकल दी.जो चार वर्षीय बालक से बात करने लगी थी.यह चार वर्षीय बालक काफी उम्र का लगता था.




इधर-


हिमालय की एक चोटी ,जिसका वर्फ तेजी के साथ पिघलने लगा था.
जब सारा वर्फ पिघला तो....?!यह क्या.....?!यह चोटी तो शीशे की बनी......



कि-


पिरामिड आकार की इस इमारत के सभी शीशे एक पुष्प के पंखुड़ियों की तरह खुल गये.जिसमें से एक यान निकल कर तेजी से आकाश में उड़ने लगा.



और फिर वह पंखुड़ियों की तरह के शीशे ......?!शीशे पूर्व स्थिति में आ गये.अब फिर वही चोटी सा.धीरे धीरे कर उस पर वर्फ जमने लगी.




* * *



भयंकर जंगल!


जंगल मेँ एक ओर डायनासोर व दूसरी ओर विशालकाय अजगर .जंगल के किनारे एक पहाड़ी पर स्थित दुर्ग,जिसके अन्दर एक बालक श्री कृष्ण की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़े आंख बन्द कर बैठा था.



यह जंगल अन्य धरती का नहीं अपनी इस धरती का ही,लगभग सन चार हजार साठ ई0का रहा होगा.दक्षिणी भाग में-




एक विशालकाय डायनासोर उत्तर पश्चिम की ओर तेजी के साथ आगे बढ़ता जा रहा था.वह डायनासोर झाड़ियों के मध्य एक खण्डित दीवार को पार कर जब आगे बढ़ता है तो झाड़ियों से घिरी एक चबूतरे पर लगी ओशो की प्रतिमा से टकरा जाता है.उस छोटे से चबूतरे सहित वह प्रतिमा गिर जाती है.



एक आदिमानव नग्न अवस्था में एक पेंड़ से दूसरे पेंड़ पर छलांग लगाते हुए आगे जा रहा था.डायनासोर को देख कर एक पल तो वह वनमानव भयभीत हुआ फिर वह तेजी से छलांग लगा ज्यों ही दूसरे पेंड़ पर पहुंचा त्यों ही जिस वृक्षशाखा को उसने पकड़ा ,वह शाखा सहित नीचे आ गया.पीछे डायनासोर काफी नजदीक था .वह तेजी से आगे भागा लेकिन आगे एक विशालकाय अजगर को देख वह ठिठका.उसके पैरों से खून निकल रहा था.ऐसा कांटे चुभने के कारण हुआ था.तेजी से दौड़ते दौड़ते वह जमीन पर गिरी ओशो की प्रतिमा के पास आ गया.उसने एक विशाल पत्थर उठा कर उसकी ओर मुख बढ़ाते डायनासोर के चेहरे पर मारा.जिससे डायनासोर की बायीं आंख फूट गयी.फिर भी डायनासोर को आगे बढ़ते देख उसने ओशो की प्रतिमा उठा ली कि आसमान से आयी तेज किरणों से डायनासोर स्थिर हो जमीन पर गिर पड़ा.ओशो की प्रतिमा ऊपर उठाये उठाये ही उसने ऊपर देखा-आसमान पर वही यान उड़ रहा था जो कि वर्फीली चोटी के नीचे से निकला था.


स्क्रीन पर दिखायी दे रहा था कि एक बालक प्रार्थना में था.


अपने समीप बैठे एक एक युवक से युवती बोली-"चर्चित! यह बालक कौन है?"


"मंजुला,आगे सब जान जाओगी."



चर्चित पुन: मंजुला से बोला-

"किशोर की कल्पनाओं के माध्यम से युवा लेखक अशोक ने आगे दो हजार तीस वर्ष बाद के अपने काल्पनिक जगत में जाने का प्रयत्न किया."


"हूँ"-मंजुला सिर्फ गर्दन हिला देती है.




चर्चित फिर मुस्कुराते हुए बोला-
"गणेश जी को देख आयीं?"


" हां "


फिर

"बीसवीं सदी में जुरासिक पार्क,द लास्ट वर्ल्ड,जैसी फिल्में लोंगों के लिए मनोरंजन मात्र बन कर रह गयी थीं लेकिन वे फिल्में एक संकेत भी थीं भविष्य की,लेखक अशोक के अनुसार."



"बाईस जून को यदि लेखक अशोक की मृत्यु न होती तो शायद हमारी उससे मुलाकात होती."



"सम्भवत:...."



"सन उन्नीस सौ चौरानवे के बाद रोबोट कृत डायनासोर लोगों के लिए विशेषकर बच्चों के लिए एक अच्छा मनोरंजन बन गये थे लेकिन अशोक की कल्पना के अनुसार चवालीसवीं सदी के बाद इस धरती पर भी डायनासोर........"



"हूँ! जैसा तुम जिक्र कर चुके हो,चर्चित."



इस धरती पर डायनासोर....?चवालीसवीं सदी के बाद .....?!



कैसे..?




यहां ऐसे वो....



डायनासोर के वे जीवित अण्डे इस धरती पर कहां से आये ? किशोर अपनी उम्र की अधेड़ावस्था में जी रहा था .उसने इन अण्डों को नष्ट करने की वकालत की थी लेकिन उसकी न सुनी गयी.

सोमवार, 23 मई 2011

सन 2011ई0 की मई........... र��हुल गांधी अचानक स े स���ी देयोल हो गए

राहुल गांधी अचानक से सनी देयोल हो
गए
*गुंजेश*
*दखल की दुनिया *

अगर यह समझना हो कि कैसे 'पापुलर तरीकों' का प्रयोग कर शोहरत बटोरी जा सकती है
तो हमें बुधवार को राहुल गांधी के द्वारा किये गए धारणा प्रदर्शन और उसके बाद
होने वाली गिरफ्तारी का अध्ययन करना चाहिए। इस घटना को जिस तरह से समझाया
दिखाया गया है उससे राहुल गांधी एकदम हीरो दिख रहे हैं। किसानों के मसीहा नज़र
आ रहे हैं। राहुल गांधी अचानक से सनी देयोल हो गए।
पढ़ते रहिये...
यह था एक बेवसाईट पर उन दिनों .




सन 5020 ई0 का किसान दिवस.

शुक्रवार, 20 मई 2011

राहुल को जल्द बड़ी ज ���म्मेदारी संभालनी हो�� ीः अय्यर

राहुल को जल्द बड़ी जिम्मेदारी संभालनी होगीः
अय्यर



*रिपोर्टः अशोक कुमार*
*संपादनः एस गौड़*

कांग्रेस नेता मणि शंकर अय्यर का कहना है कि परंपरा को निभाते हुए राहुल गांधी
को जल्द बड़ी जिम्मेदारी निभानी होगी. राजीव गांधी की 20वीं बरसी पर अय्यर ने
कहा कि कभी कभी 'हम' उनके रास्ते से भटक जाते हैं, पर फिर लौट आते हैं.
मणि शंकर अय्यर राजीव गांधी से प्रेरणा लेकर विदेश सेवा की नौकरी छोड़ कर 1989
में राजनीतिक में आए. वह राजीव गांधी के काफी करीबी रहे.

पढ़ते रहिये...

मंगलवार, 17 मई 2011

विप्लव विकल्प विक ास सरकारी दमन में अगला

शर्म आती है हिन्दुस्तानी कहते हुए अपने को.

कहाँ है मीडिया ! क्या इस बार कोंग्रेस मीडिया को नहीं खरीद पाई या उससे अच्छी
बोली बलात्कारीओं ने दे दी .

2011/5/17 Ashu

> *ग्रेटर नोयडा ,भट्टा पारसौल में मायावती सरकार के पुलिसिया गुंडों ने लगभग
> ८० किसानों को मारकर वहीँ जला दिया...गांव की सारी फसल जला दी गयी.महिलाएं
> शौच के लिए घर से बाहर नहीं निकल रही लगभग ११० महिलों के साथ पुलिसिया गुंडों
> ने बलात्कार किया...हाँ उत्तर प्रदेश सरकार के रिकॉर्ड में कोई लापता नहीं
> है और सिर्फ २ किसान मरे..*
>
> **
>
> *लगभग ५०० ग्रामीण लापता हैं...मीडिया चुप बैठा है...और खबर दिखाई भी तो जिन
> पे जुल्म हुआ उनका कवरेज कम और राहुल बाबा का ज्यादा... *
>
> *आज भारत में जिस तरफ देखें जमींन की लूट चल रही है...कुछ परदे के पीछे ,कुछ
> लालच से,कुछ मायावती सरकार की तानाशाही के रास्ते पर चलकर हत्याएं करवाकर..
> विकास की चकाचौध और अर्थव्यवस्था का गणित समझकर हमारी माननीय केंद्र सरकार भी
> एक के बाद एक परियोजनाओं को हरी झंडी दिखा रही है और अब किसी से छिपा नहीं
> है की इन सबकी दलाली भी ये नेता और कार्पोरेट खा रहें हैं...किसान से जमीन ली
> जाती है १ लाख रूपये या उससे कम के मुआवजे पर और बेचीं जाती है २ करोण
> रूपये एकड़ बिल्डरों को..अब तो मुझे लगता है हमे अरब खरब नील या मिलियन
> ट्रिलियन से आगे जा कर कोई नयी इकाई बनानी पड़ेगी सरकारों की इस दलाली की
> गाड़ना के लिए ..*
>
> *अगर नोएडा की बात करे तो नोएडा रूपी राक्षस बढ़ता ही जा रहा है..कभी फेज -
> २,कभी नोएडा एक्सटेंसन तो कभी ग्रेटर नोएडा तो कभी ग्रेटर नोएडा एक्सटेंसन...
> किसनो की खेती की जमीन का अधिग्रहण औने पौने दामों पर करके सरकारें सद्दाम
> हुसैन और हुस्नी मुबारक की तरह अपना घर भर रही हैं..काहिरा और इराज के लोग
> सौभाग्यशाली थे की एक ही मुबारक या एक ही सद्दाम था ..भारत की विडंबना ये है
> की यहाँ तो सददामों और हुश्नियों की पूरी फ़ौज ही है..मायावती ,राहुल गाँधी ,
> शरद पवार,अमर सिंह,कर्णाटक के रेड्डी ऐसे कुछ गिद्धों के नाम हैं जो इस देश
> को नोच नोच कर खा रहें हैं और हम अपने वातानुकूलित घरों में बैठे जश्न मना
> रहे हैं..भले ही ८० करोड़ लोगो को रोटी नहीं मिले २ जून की, नोएडा से आगरा तक
> दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस वे बनेगा वो भी किसानों की लाश पर उनकी घरों की
> महिलाओं की इज्जत की कीमत पर..कारण सिर्फ इतना है की सरकार को तो बिल्डर और
> दलाल चलातें हैं..अब ये जमीन जो अधिग्रहित की जा रही है हजारगुना जयादा दाम
> पर बिल्डरों को बेचीं जाती है..उसमें भी दलाली खाते है हमारे जनसेवक और नेता
> जी लोग..उसके बाद इन दलाली के पैसों को रियल इस्टेट में इन्ही बिल्डरों के
> यहाँ लगा देते हैं इस देश के कर्णधार बिल्डर से फ्लैट खरीदने वाला भी आम आदमी
> , जो पुरे जीवन किश्त भरता है और वो दलाली की कमाई अब तक १० गुना बढ़ चुकी
> होती है...वो भी बिलकुल सफ़ेद धन...
> पिछले कुछ सालों में इस आर्थिक चकाचौंध की दौर में बिल्डरों और दलालों की
> एक पूरी व्यवस्था भी बन गयी है जो प्रकारांतर से सरकारी और पुलिसिया सहयोग से
> निरीह ग्रामीणों का सुनियोजित दमन कर रहा है और चुकी ये खबर समाज के सबसे
> कमजोर तबके से है इसलिए बहुत आसनी से इसे दबा दिया जाता है..इस कार्य में सभी
> पार्टिया सामान रूप से भागीदारी कर रही हैं...अगर यही खरोंच किसी युवराज की
> गाड़ी पर आई होती तो हम आप और मीडिया शुरू कर देता चिल्ल पों मचाना ..मगर जो
> मरा,जो जलाया गया वो किसान है..क्या हुआ जो हम उसकी मेहनत का पैदा किया हुआ
> अन्न ठूस ठूस कर कहते हैं हम सब तो अब नमकहराम होते जा रहे हैं..मरने दो उसे
> ..होने दो उसकी बेटियों का बलात्कार किसान होता ही है इसलिए...*
>
> *अब न तो उन किसानों के लिए कोई जंतर मंतर पर धरना होगा न ही ब्लॉग लिखा
> जाएगा न ही कोई कैंडिल मार्च होगा..क्यूकी आज की व्यवस्था और परिवेश में
> हमारी सोच है की "IT HARDLY MATTERS TO US " *
>
> *अब मेरी उम्र का किसी किसान का लड़का हाथ में बन्दूक उठा ले तो उसे माओवादी
> कहा जाएगा..क्या करेगा वो..बाप की लाश भी नहीं छोड़ी इस सरकार ने ..माँ और
> बहन का सामूहिक बलात्कार पुलिसिया गिद्धों ने उसके सामने किया फिर भी हम
> कहेंगे की अहिंसा परमो धर्मः....किसान किसी को मारे तो वो मुख्य समाचार बन
> जाता है और ८० किसानों को जला दिया गया उसकी चर्चा भी नहीं..ये SEZ बना कर
> दलाली खाने का जो खेल सरकार ने शुरू किया है वो कई नंदीग्राम और सिंगूर पैदा
> करने वाला है...क्यूकी व्यवस्था से असहाय व्यक्ति के पास शस्त्र उठाने के
> अलावा कोई चारा नहीं रहता है...
> आज जो भी व्यक्ति ये ब्लाग या ईमेल पढ़ रहा होगा उसे शायद कोई लेना देना नहीं
> होगा इस किसानो से मगर बंधू उन किसानो के बाद आप का ही नम

बुधवार, 11 मई 2011

देहदान से क्या हर्ज ?

दान का मानव जीवन मेँ बड़ा महत्व रहा है.दान अनेक तरह के हैं,उनमें से
एक दान है-देहदान. देहदान के प्रति मुझमें जिज्ञासा रही है कि देहदान कौन
कर सकता है?क्या अस्वस्थ व्यक्ति भी अपना शरीर दान कर सकता है?शरीरदान के
लिए जिले में कहां सम्पर्क किया जाए?आदि आदि.बरेली मण्डल के एक जनपद
बदायूं सात व्यक्ति अपना शरीरदान कर चुके हैं.जिसके परिचय ,जीवनी आदि से
सम्बन्धित पुस्तक बदायूं के दानदाता एक सजग सिंहावलोकन जून मास में
प्रकाशित की जाएगी.ऐसा एक समाचार पत्र से हमें संज्ञान हुआ.

: कतरा कतरा मरता हूँ हर रोज!

कतरा कतरा मरता हूँ हर रोज ,


बूंद बूंद जहर दिया इन अपनों से न मौज.


कहते हैं सुख दुख सोंचने का ढंग है


इस बात से संवारते थे खुद को हर रोज.

कौन है अपना ऐसा ,समझे अपने हाल को जो


अपनों की भीड़ बीच ,हर रोज मेरी मौत.

कहें सब अपनी अपनी,रंग न पाये बात कोई

इन अपनों के मरहम,घावों को बढ़ायें हर रोज.


भीड़ से हट एकान्त ने ही दिया मरहम


खून के आंसू पीकर रह जाएं ,भीड़ के मौज.


एकान्त के प्रभुस्मरण से ही पायें सुकून

भीड़ की संत्वना में
कहां मरहम,भीड़ में न पाया मौज.

शनिवार, 7 मई 2011

सद्भाव वाणी !

सद्भाव अब भी युवा था ,इसका एक मात्र कारण आयुर्वेद योग,तप,आदि था.वह आरदीस्वन्दी व धधस्कनक निवासी हलदकरोड़ा युवती,दस् रलकम व फदरस्लन की उपस्थिति में सामने उपस्थित पशु पक्षियों व विभिन्न मानवों को सम्बोधित कर रहा था.




विधाता की सत्ता शक्ति का सृष्टि में अंशविभाजन है-ब्रह्मा,विष्णु व महेश.इन तीनों से ऊपर है वह विधाता ,जिसे ब्लेक होल में आने व जाने की शक्ति प्राप्त कर लेने के बाद ही जाना जा सकता है.जहां तक अभी श्री कृष्ण ही अर्जुन को लेकर पहुंचे हैं.तब जब वे एक के मरे हुए पुत्रों को लेने पहुंचे थे.श्री कूष्ण के बाद ऐसी क्षमता कल्कि भगवान में ही होगी.ब्रह्मा जी एक बार नारद जी की जिज्ञासा को शान्त करते हुए बोले थे कि उन भगवान वासुदेव की मैं वन्दना करता हूँ और ध्यान भी,जिनकी दुर्जय माया से मोहित होकर लोग मुझे जगतगुरु कहते हैं.वेद नारायण के परायण हैं.देवता भी नारायण के ही अंगों में कल्पित हुए हैं और समस्त यज्ञ भी नारायण की प्रसन्ता के लिये ही हैं तथा उनसे जिन लोकों की प्राप्ति होती है,वे भी नारायण में ही कल्पित हैँ.वे द्रष्टा होने पर भी ईश्वर है,स्वामी हैं;निर्विकार होने पर भी सर्वस्वरुप हैं.उन्होने ही मुझे बनाया है और उनकी दृष्टि से ही प्रेरित होकर मैं उनके इच्छानुसार सृष्टि रचना करता हूँ.



सद्भाव एक विशालकाय अजगर को देख कर बोला कि आप लोग महान आत्मा रखते हैँ,एक साथ आपसब की यहाँ उपस्थिति इस बात का परिचय है.विज्ञान की खाद्य श्रंखला भी यहाँ पर फेल हो जाती है,क्यों कि खाद्यश्रंखला की अवधारणा में प्रकृति व्यवस्था है.चेतना की व्यवस्था काफी आगे की है.एक दूसरे के प्रति जन्माधारित हिँसात्मक सम्बन्ध रखने वाले जन्तु भी अपनी आत्मा में आने पर अहिंसक हो सकते हैं.चाहें को भी सम्प्रदाय हो सब जगह उसी विधाता के स्मरण के असफल कार्य हैं लेकिन कोई भी हम से आगे का एहसास या वखान नहीं रखते.ब्लेक का अन्धकार का बखान नहीं कर पाते,जो कहते हैं ईश्वर नहीं है और ब्रह्म से भी आगे के शून्य की बात करते हैं तो लोग उन्हें अनिश्वरवादी कह उठते,हालांकि उन्हें अनिश्वरवादी कहने वाले क्यों न अभी तक हम तक पहुंचे हों.देवी देवताओं ,पितरों,भूतों,आदि में ही रमण कर रहे हों.शून्य या शून्य से आगे की बात करने वाले बुद्धों को लोग अनिश्वरवादी कह ही उठते हैं.वहां पर हम जैसे व अन्य देवी देवता व भगवान नहीं होते.ब्लेक व शून्य को झेलने के बाद ही कोई उस सत्नारायण से साक्षात्कार पा सकता है.आम आदमी चन्द पल के लिए ब्लैक व शून्य का सामना करने पर परेशान हो उठता है,मतकटा का शिकार हो जाता है क्यों कि वह दृष्टा न बन दुनिया की नजर में बेहतर प्रदर्शन व अपने अहंकार व अस्तित्व को बचा कर रखना चाहता है .वह घबरा तो जाता है लेकिन इस बात से अन्जान होता है कि ब्लैक व शून्य प्रति तटस्थ होने पर ही हम अपने चेतना के स्रोत यानि कि उस बासुदेव को पा सकते हैं.



युवती हलदकरोड़ा बोली -" यह कलाप गांव कहाँ अस्तित्व में आयेगा?जिसकी जमीन में स्थित तहखाने में मरु मेडिटेशन में है? "


सद्भाव बोला-
"समय आने पर सब सामने आ जाएगा.मरु कलियुग के अन्त में नजर आयेगा और सूर्यवंश को फिर चलायेगा.अनेक योगसाधक है जो दुनियां से अन्जान हो मेडिटेशन में हैं. "



"हाँ,ऐसा तो है.पृथु मही पर एक टीले की खुदाई मेँ एक तहखाने मेँ एक व्यक्ति मेडिटेशन में मिला.उसने कलियुग खत्म हो जाने के बाद ही दुनिया में सक्रिय होने की बात की.फिर तहखाने से बाहर नहीं निकला और तहखाना बन्द कर दिया गया."




* * * * *


पृथु मही पर हिमालय के तराई क्षेत्र में स्थित माधव(माधौटांडा) वन में एक मन्दिर के के चारो ओर चक्कर लगा कर चला जाता था.



युवती फदेस्हरर बालक हफ्कदम के साथ इसी जंगल में थी.मन्दिर के चबूतरे पर आकर दोनों बैठ गये.मन्दिर के अन्दर दो साधु दरबाजे बन्द कर बैठे थे.



"अरे,अन्दर आ जाओ .शेर आने वाला है फांड़ डालेगा."



बालक हफ्कदम बोला-" किस स्तर के साधु हो. ".


युवती फदेस्हरर बोली
"हफ्कदम,क्या बोलते हो?".



मन्दिर के अन्दर खुसुरफुसुर हुई कि कोई लेडीज है ,अन्दर ले ले. ....क्या,हर वक्त नियति खराब न रखा रख,कहीं शेर आ गया तो...?.....आ गया.



शेर आकर मन्दिर का एक चक्कर लगाने के बाद फदेस्हरर व हफ्कदम के सामने रुक कर दहाड़ा.
दोनों शान्त भाव में बैठे रहे.



बालक हफ्कदम शेर से बोला-"तुम पिछले जन्म यहां साधु थे.अब चले आते हो चक्कर लगाने.बिचारे यह साधु डरते है .तू भी निर्जीव के पीछे पड़ गया?तेरा जल्दी ही मोक्ष होगा.तेरा अभी कुछ काम रह गया है.देवरावण को मारने वाला पैदा होने वाला है.भूम्सनदा पर आरदीस्वन्दी व सद्भाव की मुलाकात हो चुकी है".



मंगलवार, 3 मई 2011

तृतीय विश्व युद्ध की ��ूमिका:अमेरिका भारत म��ँ.

चीन का साम्राज्यवाद ,मुस्लिम आतंकवाद , अमेरिका की चीन से चिढ़ व चीन के द्वारा मुस्लिम देशों का नेतृत्व ने दुनिया को तृतीय विश्वयुद्ध में झोंक दिया था.


सन 2011ई0
एक मई को अमेरिका के द्वारा आतंकवादी सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया था.




इस दौरान पूर्व विदेश सचिव ललित मान सिंह का मानना था कि देखना होगा कि ओबामा के समर्थन में ओसामा के समर्थन में कितने व्यक्ति व राज्य है?दुनिया को खतरे बढ़े है विशेष कर भारत को.'हिन्दुस्तान' समाचार पत्र अपने सम्पादकीय में लिखा था कि जब भी शान्ति व सद् भावना की बात चली है आतंकवादी घटना हुई है.



पाकिस्तान में लादेन की उपस्थिति व पाकिस्तान में ही लादेन की मृत्यु ने पाक सरकार पर संदिग्ध निगाहें डाल दी थीं.ऐसे में उसकी भारत के खिलाफ मुहिम में तेजी की सम्भावनाएं बढ़ गयीं थीं.इधर भारत के अन्दर भ्रष्टाचार व कुप्रबन्धन एवं काले धन की बापसी पर जन आन्दोलन तेज हो गये थे.जिससे ध्यान हटाने के लिए भ्रष्ट नेताओं द्वारा युद्ध की पहल की शंकाएं बढ़ गयीं थीं.उप्र सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चीन की साम्राज्यवादी नीति पर कुछ नेपाल संसदों से बातचीत प्रारम्भ कर दी थी.कुछ लोग देश के अन्दर मुस्लिम वोट को देश की अखण्डता व सम्प्रभुता के लिए खतरा मान रहे थे. गुरु अफजल ,कसाब ,आदि जैसे आतंकवादी को फांसी में मुस्लिम वोट का लोभ आड़े आ रहा था.लोगों को भारतीय मुस्लिमों पर से उम्मीदें उठने लगीं थीं.ऊपर से भ्रष्ट नेता.....?



2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले मामले में रिपोर्ट की सच्चाई के विरोध में पीएसी समिति में सपा ,बसपा व कांग्रेस एक साथ नजर आये.......इसका मतलब क्या था ? हालातों से तंग आकर एक मानवतावादी अण्डर वर्ल्ड ग्रुप 'सेक्यूलर फोर्स' को मजबूरी में सैनिक कार्रवाही का समर्थन करना पड़ा था.दृसरी तरफ चीन व माओवादियोँ की करतूतेँ......?!कहना पड़ा-"अमेरिका भारत आओ" . बदलाव के लिए प्रजातन्त्र पर उम्मीदें करना मुश्किल हो गया था क्योंकि भ्रष्टाचार व कुप्रबन्धन के खिलाफ एवं कालेधन की वापसी के लिए जो सामने आये भी थे,उन्हें मुस्लिम वोट व हिन्दुओ में अपनी जाति के नेताओं से निकलने की गुंजाईश नहीं थी.भ्रष्ट नेताओं को उनकी जाति के लोग समर्थन से बाहर निकल नहीं पा रहे थे. 'म' ग्रुप मनमोहन सिंह,मुलायम सिह,माया वती, मुस्लिम मत,पाक मेँ मुशर्रफ व इनसे अलग अपने निजी स्तर पर माओ वादी देश के लिए .......?!हालांकि कुछ माओवादी कुछ भ्रष्टनेताओं को मार रहे थे लेकिन मारे गये नेताओं की लाशों पर.....!?भारतीय संविधान की भी धज्जियां उड़ायी जाने लगी थीं.ऐसे में देश में सैनिक कार्रवाही व अमेरिका के आने की उम्मीदें बढ़ गयीं थीं. अग्रेजों के आने से पूर्व देश की राजनैतिक दशा क्या थी?देश के आजादी के वक्त देश की राजनैतिक दशा क्या थी?अब भी देशी रियासतें आधुनिक रुप में जन्म लेने की क्षमता रखती हैँ.

रविवार, 1 मई 2011

'सद्भावना'क्योँ?

कभी पूर्वोत्तर भारत में जंगलों के बीच हुआ करती थी एक इमारत-'सद्भावना'.


जून सन 5020 ई0 को 'सद्भावना' के एक मात्र वारिस को अज्ञातबास में पहुंचा दिया गया था.इस घटना के एक हजार वर्ष बाद-



तीननेत्रधारी आरदीस्वन्दी अब जवान थी.वह भुम्सन्दा धरती पर थी.जब वह ध्वनी थेरेपी से 'ओम आमीन' ध्वनि के आधार पर भुम्सनदा धरती पर आ गयी थी .



'धधस्कनक'धरती (अर्थात उड़नतश्तरी यान वालों की धरती) तीन निवासी -हलदकरोड़ा(युवती),दस् रलकम व फदरस्लन भी भुम्सनदा पर उपस्थित थे.जिन्होने 'सद्भाव' से आरदीस्वन्दी की मुलाकात करवायी थी.



'सद्भाव' कौन ?


'सद्भाव' ही था -'सद्भावना' का अन्तिम बारिस.जिसके हितैषी यहां भुम्सन्दा पर उसे ले आये थे.



* * * *




चार हजार वर्ष पूर्व पृथु मही पर घटित हुई एक घटना,गोधरा काण्ड के नाम से जानी गयी.जिसकी प्रतिक्रिया में गुजरात काण्ड!



गुजरात में दंगे चल रहे थे.



एक अण्डर वर्ल्ड ग्रुप की चीफ-मोनिका . जो अब वृद्धावस्था की दहलीज पर कदम रख चुकी थी.वह अण्डर वर्ल्ड से जरुर थी लेकिन उसकी हरकतें जातिवादी द्वेष, साम्प्रदायिकता, निर्दोष हत्याओं ,
आदि के खिलाफ थीं.इस अण्डरवर्ल्ड प्रवृत्ति से दुनिया अन्जान थी.हाँ,इसका एक एहसास 'हिन्दू आतंकवाद' के नाम से काल्पनिक तथ्यों के आधार पर अवश्य उठाया गया था.



मोनिका खुश थी कि उसके द्वारा लगाया गया वट वृक्ष अब काफी बड़ा हो चुका था.जिसकी अनेक शाखाएं निकल कर जमीन से जुड़ चुकी थीं.



मोनिका को स्मरण हो आये अपनी वृद्ध माँ रुचिको के अन्तिम शब्द-


"हमारे पिता जिन्हें दुनिया मि एस के नाम से जानती थी.भ्रष्टाचार व कुप्रबन्धन के खिलाफ शहीद हो गये थे.इस धरती के कुछ भ्रष्ट मानवों ने भ्रष्टाचार व कुप्रबन्धन को अन्तरिक्ष तक पहुंचा दिया था.मैं जिन्दगी भर लड़ती रही भ्रष्टाचार व कुप्रबन्धन के खिलाफ .अब आगे की लड़ाई तुमको लड़नी है मोनिका. "



मि एस कौन था?


14जून1946ई0 को न्यू मैक्सिको में गिरी उड़नतश्तरी की घटना का एक गवाह था-अन्तरिक्ष वैज्ञानिक मि एस.जो उड़नतश्तरी यान से आये एलियन की मदद करना चाहता था और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ लड़ना चाहता था लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने उसे मरवा दिया.



हाँ,गुजरात काण्ड व अन्य ऐसे ही काण्डों के दौरान प्रत्येक पक्ष के उन कट्टरपन्थियों को मारने का काम किया था मोनिका ग्रुप ,सेक्यूलर फोर्स व अन्य ग्रुप के देशबासियों ने;जो निर्दोषों का खून बहा रहे थे.



इन्हीं ग्रुपों के परिणामस्वरुप सामने आयी एक इमारत -'सद्भावना'.


गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

पुट्टीपर्थी का संत!

एक अधेड़ तब्बती महिला त्रिनेत्रधारी युवती फदेस्हरर से बोली -

" सत्य साईं बाबा का असली नाम था-सत्य नारायण राजू.जो सन1926ई के 23 नवम्बर को इस धरती पर आये और सन 2011ई0 24 अप्रेल की सुवह इस दुनिया से चले गये.कुछ लोगों का मानना था कि अमेरिका मे ओशो को जिस तरह धीमा जहर दिया गया था ,उसी तरह सत्य साईं को भी धीमा जहर दिया गया था.14 साल की अवस्था मे ही इनके जीवन मे चमत्कार होने लगे थे.20 अक्टूबर 1940ई0 को उन्होने अपने अवतार की घोषणा करते हुए कहा था कि वह शिरडी के साईं बाबा के दूसरे अवतार हैं.06 जुलाई 1963ई0 को गुरु पर्णिमा के दिन सत्य साईं ने घोषणा करते हुए कहा कि साईं बाबा के कुल तीन अवतार होंगे.उन्होने एक बार कहा था कि वह मांड्या क्षेत्र मे पुनर्जन्म लेंगे.इस धरती पर उनकी उम्र 85 वर्ष की हो चुकी थी लेकिन चन्द्रमा के पंचांग आधार पर उनकी उम्र 96 वर्ष हो चुकी थी . "



बालक हफ्कदम सोंचने लगा-"मांड् या मे.......दिवाकर सत्य साईं के गुजरने से एक माह पूर्व ही मांड् या पहुंच चुका था?"



"कुछ दुष्ट व्यक्ति संतो तक को तो नहीं बख्शते.खुद का स्तर इनका इतना गिरा होता है कि जो सुधरना चाहे या सुधर कर समाज में सुधार की मुहिम चलाना चाहे,गड़े मुर्दे उखाड़ने से बाज नहीं आते.उन दिनो अन्ना हजारे ,बाबा रामदेव ,आदि की टीम के साथ भी ऐसा था.दुष्ट लोग लगातार इन पर आरोप ही लगाते रहे लेकिन सुधार की कोई भूमिका नहीं."



"सत्य साईं बाबा की मृत्यु के साथ उनके करीबी सत्यजीत व निजी चिकित्सक डा अय्यर की जान को खतरा हो गया था.महापुरुष की मृत्यु के बाद अन्य धर्मस्थलों की तरह यहां भी सत्य साईं के कुछ अनुयायीयों का चरित्र संदिग्ध हो गया था.इस घटना के 22साल पहले ओशो ने सम्भवत:कहा था कि अनुयायी झूठे ही होते है,वे जिस के अनुयायी होते हैं उससे काफी गिरे स्तर के होते है.महापुरुष जिस मशाल को लेकर चलते है,उनके खत्म होने के साथ वह मशाल खत्म हो जाती है.अनुयायियों की पकड़ मे रह जाता है सिर्फ मशाल का मूठ(डण्डा) ".



* * *



' मांड् या ' शहर एक टीले में तब्दील हो चुका था,कुछ धार्मिक स्थलों को छोँड़ कर.



"ओम आमीन तत सत ,ओम आमीन तत सत ,ओम आमीन तत सत ओम आमीन तत सत ,ओम आमीन तत सत ,ओम आमीन ..... " खुदाई करने वाले मजदूर चौंके, जब कुछ ईंटे निकालने के बाद नीचे एक तहखाना दिखाई दिया जिसमे से किसी के 'ओम आमीन तत सत ' जपने की ध्वनि सुनाई आ रही थी.




"अरे,तुम लोग क्यो रुक गये?अपना अपना काम करो".

" सर! यहां तो आना ."


जब ठेकेदार आया तो तहखाने से आती आवाज को सुन-
आप लोग इधर काम करना बन्द करो .


फिर ठेकेदार ने आगे बढ़कर अपने को खामोश कर लिया.उसके मस्तिष्क ने दूर स्थित किसी के मस्तिष्क से सम्बन्ध स्थापित किया.


"हैलो!सुनती हो क्या?मैने सुबह उठ कर जिस स्वपन का जिक्र किया था,वह असलियत है.यहां एक तहखाना है,जिसमें से किसी के 'ओम आमीन तत सत' जप करने की आवाज आ रही है ."


" अच्छा! तो उस जगह पर काम रुकवा दो अभी."


"हाँ,रुकवा दिया है."

ठेकेदार पश्चिम की ओर लगभग एक किलोमीटर दूरी पर बनी श्रीअर्द्धनारीश्वर की विशालकाय प्रतिमा की ओर देखने लगा.



आसमान से एक अण्डाकार यान नीचे की ओर आ रहा था.इस यान मे बैठी युवती फदेस्हर व बालक हफ्कदम आपसी बातचीत में थे.

सोमवार, 25 अप्रैल 2011

गोधन के लिए संघर्ष!

गरीब तबके के लोग एक परिवार से संघर्ष करके एक गाय को अपने कबीले मे ले आये थे.


बालक फदेस्हरर बोला -" एक गाय के लिए मानव मानव के बीच संघर्ष ? "

"इतनी ही अक्ल होती तो बात ही फिर दूसरी होती.हर सृष्टि के बाद ऋग्वैदिक काल मे आर्य विद्वान एक 'आर्ट आफ लिविंग' देते हैं लेकिन मानव आगे चल कर साम्प्रदायिकता , सत्तावाद व पूंजीवाद की कठपुतली बन कर रह जाता है . 21 मई 2011ई0 के दो माह पूर्व लगभग! दिन गुरुवार 24 मार्च रंगपंचमी पर्व,दोहा नदी के तट पर स्थित एक शहर अंगदीय(शाहजहाँपुर) के समीप स्थित एक कस्बा ईश गढ़ (खुदागंज) मे यह पर्व बड़ी धूम से मनाया जा रहा था.जहां स्थित एक देवि स्थल पर अपने धरती के कुछ व्यक्ति अपने सूक्ष्म शरीर मे उपस्थित थे. इसी धरती के निबासी चर्चा कर रहे थे. "



* * * *

खुदागंज का ही एक देवि स्थल के प्रांगण मे एक पीपल वृक्ष के नीचे-



"आदिकारण श्रीनारायण अर्थात ईश्वरीय तत्व से ही है सब कुछ."


"सब कुछ कैसे ? वर्तमान के प्रलय काल के लिए तो मनुष्य दोषी है ! मनुष्य से क्या प्रकृति प्रभावित नही होती ? "


" प्रकृति ही प्रकृति को प्रभावित करती है .मनुष्य जो करता है वह अपनी ऐच्छिक व शारीरिक आवश्यकताओं वश चेष्टाएं करता है.कर्म तो आत्मा से होते है. "



"रेडियोएक्टिव प्रदूषण से बचने के उपाय तो होंगे ? जापान मे देखो क्या चल रहा है,रेडियशन से क्या उपाय हो सकते हैं गरीब व्यक्ति के सामने ? "



"आध्यात्मिक ज्ञान के साथ साथ योग,कलर थेरेपी सुगन्ध थेरेपी प्रकाश थेरेपी आदि,गाय का गोबर मूत्र दूध घी आदि...और आत्मबल."



"गाय के गोबर से लिपी जमीन दीवारों पर रेडियेशन का प्रभाव नहीं पड़ता."


"हमारे पूर्वजों ने कहा था कि गाय के सींगों पर पृथ्वी टिकी है,तो इसका मतलब क्या है? यहां गाय के सींगों से मतलब गाय के सम्मान से है."



"भविष्य में बचे खुचे मनुष्यों के द्वारा गाय का सम्मान एक मजबूरी हो जाता है.गोमूत्र तो मनुष्य के प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का अच्छा उपाय है ही,रेडियेशन आदि के कारण कैंसर होने की संभावना समाप्त करता है."



"इस पर अब तो अनेक वैज्ञानिक शोध भी सामने आये हैं."



"यदि बाल्यावस्था से ही मनुष्य गौमूत्र व उसके दूध से बने उत्पाद के साथ साथ आयुर्वेद आदि को दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए तो मनुष्य अपनी उम्र व स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से उबरा रह सकता है. "




"गौरबशाली भारत का इतिहास घर घर मे गाय पालन व सम्मान का इतिहास था."



" रुसी वैज्ञानिक सिरोविच ने कहा है कि आण्विक विकरण से रक्षा पर अपने प्रयोग के दौरान पाया कि गाय के घी की अग्नि में आहुति देने पर उसकी जो सुवास निकलती है वह जहाँ जहाँ तक फैलती है उससे सारा वातावरण आण्विक विकरण से मुक्त हो जाता है. "



" शायद हजरत मोहम्मद साहब ने भी कहा है कि गाय का दूध गिजा है,घी दबा है और गोस्त बीमारी है . "



" हमने सुना है कि दिवाकर अपना घर बच्चे छोंड़ मांड् या चला गया है. "



" सही ही सुना है."



"जब बाबा ही बनना था तो शादी क्यों की ?"



"क्या गृहस्थ सन्यासी नहीं हो सकता ? और फिर पहले अपने परिवार को मना कर वह सन्यासी बना.साल मे दो तीन बार घर आता भी रहता है."



"हाँ,बात गोधन की हो रही थी.सर जी के साहित्य से पता चलता है कि जीवों वनस्पतियों की प्रजातियां खत्म हो रही हैं ऐसे में दो तीन हजार वर्ष बाद गोधन को पाने की लालसा मे संघर्ष तेज हो सकते है ."



अब इकसठवीं सदी-



युवती फदेस्हरर व बालक हफ्कदम एक तिब्बती अधेड़ स्त्री के साथ पैदल ही समुद्र तट के विपरीत दिशा में आगे बढ़ते जा रहे थे . मत्स्य मानव की विशालकाय प्रतिमा पीछे ही छूट गयी थी.



दायीं ओर कुछ लोग गाय को लेकर झगड़ रहे थे.जब उन्होने इन तीनो को देखा तो कुछ पल के लिए स्थिर हो गये.
जब तीनों उधर ही बढ़ गये तो वे सब शान्त भाव से इधर ही बढ़ चले.


* * * *




युवती फदेस्हरर व बालक हफ्क्दम तिब्बती अधेड़ स्त्री के साथ मिट्टी से बने एक चौकोर चबूतरे पर बैठे हुए थे . कबीला के लोग सामने जमीन पर बैठे थे .गाय को घेरे कुछ दबंग युवक खड़े थे.
इस गरीब कबीला के कुछ लोग गाय को चुरा कर ले तो आये थे लेकिन फिर यहां गाय के दूध ,मूत्र व गोबर के इस्तेमाल को लेकर आपस मेँ झगड़ पड़े थे.



फदेस्हरर गाय को घेरे दबंग युवकों से बोली-



"आप सब को अब भी सीख नहीं लेनी अपने पुरखों की करतूतों से.मानव शक्ल हो सब ,सनातन महापुरुषों के सम्मान में कुछ तो करो.आपके परिजन सामर्थ्यवान है,बस इतना ही काफी है ? इन गरीबों को आप सब बन्धुआ तो रख सकते हो लेकिन इनके बच्चों के लिए गोरस की व्यवस्था क्यों नहीं? वीर भोग्या बसुन्धरा!यदि यह बिचारे गरीब अपने बच्चों के जीवन के लिए वीरता दिखाते है तो इसके लिए सिर्फ यही दोषी न."