बुधवार, 9 मार्च 2011

सदभावना का अन्तिम वारिस

भुम्सनदा के बर्फीले भू भाग पर से कुछ बर्फीले टीलों से बर्फ खिसकना प्रारम्भ हुई और जिसमे से ब्रह्मा शक्ल व्यक्ति नजर आना प्रारम्भ हुए .पृथु मही के समयानुसार सैकड़ो वर्ष मेडिटेशन के बाद अब इन्होने अपनी आँखे खोली .



उड़नतश्तरी यान जब जमीन पर उतरा तो ब्रह्मा शक्ल व्यक्तियोँ ने यान की ओर देखा.


"यल्ह आर्य !"--उड़नतश्तरी यान से निकल कर धधस्कनक निबासी तीनो व्यक्ति एक साथ बोले.



" यल्ह !यल्ह!! "



"देव रावण के साम्राज्य के खिलाफ अपने स्थूल कर्म मे आने का वक्त आ गया है."-हलदकरोडा बोली.



" ब्रह्मा पद हेतु चुनाव के बाद हम सब स्थूल जगत के लिए कार्यक्रम तैयार करेगे .शाश्वत नियमों पर अवरोध नही लगाये जा सकते.हम सब निर्गुण रुप से सामर्थ्यवान व एक होकर भी प्रकृति को धारण कर प्रकृति से प्रभावित हो जाते है अर्थात चेतन यात्रा मे अन्य स्थूल सम्भावनाएं बनती बिगड़ती रहती हैं."


" हम लोगोँ के लिए आदेश !"



इसी धरती पर ही जंगल के बीच सूर्य मन्दिर जाओ. वहाँ सनडेक्सरन से आरदीस्वन्दी आयी हुई है.वह इस धरती पर सदभाव की ध्वनि संकेतो के आधार पर आ तो गयी है लेकिन सदभाव से उसकी मुलाकात तुम लोग ही कराओगे .



" जैसी आज्ञा आप सब की."



* * *


काफी समय बीत चुका था.



वह तीन नेत्रधारी वृद्ध अब भी बर्फीले मैदान मे एक गुफा के समीप ध्यान मुद्रा मेँ बैठा था.
जिसके शरीर के अधिकतर हिस्से बर्फ से ढक चुके थे.अनेक नर नारी इस तीन नेत्रधारी वृद्ध के इन्तजार मे खड़े स्वयं ध्यान मुद्रा मे लगभग हो चुके थे.



गुफा मे से एक युवती एक बालक के साथ बाहर आयी,जो कि तीन नेत्रधारी ही थी.



* * * वह युवती बालक के साथ एक अण्डाकार यान मेँ थी.यान पृथु मही के नजदीक था.



युवती बालक से बोली-"हफकदम!निन्यानवे प्रतिशत व्यक्ति प्रकृति व अपने शरीर पर प्रभावो प्रति तटस्थ नहीं रह पाता.हालांकि चेतना की सनातन यात्रा तटस्थ भाव ही होती है.वह समय के बन्धन से मुक्त हो वर्तमान मे जीती है."



बालक हफ्कदम बोला-" अपने लोग तो वर्तमान मे ही जीते है,उस वर्तमान मे जिसका न भूत है न भविष्य.वर्तमान, भूत, भविष्य तो स्थूल वस्तुओ व स्थूल जगत का होता है."


"मै पृथु मही के मनुष्यो के सम्बन्ध मे कह रही हूँ."


" जो भी होता है वह पूर्व नियोजित है,शाश्वत नियमो से बंधा होता है.मनुष्य के द्वारा भी जैसा होना होता है,वैसा उसके मन बुद्धि मे आ जाता है.इस धरती पर पैतालीस हजार साल पहले ही प्रलय की कहानी प्रारम्भ हो गयी थी.देखो तो कैसी हो गयी है यह धरती?लेकिन अब भी तो सुधरने का नाम नही लेता यहाँ का मनुष्य. निर्गुण शक्तियाँ कल्कि अवतार लेंगी तो कहीं कुछ समय ठीक रहेगा लेकिन फिर....यहाँ आ माया मोह लोभ मेँ उलझ कर रह जाता है प्राणी."



"पृथु मही पर जीवन कैसे आया?यहाँ से लगभग आठ प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित लुन्धक तारे से."


"साइरियस से ?! "


"हाँ वही, साइरियस को ही लुन्धक कहते हैं. पृथ्वी पर सर्व प्रथम मानव का जन्म अफ्रीका महाद्वीप मे मत्स्यमानव के रूप मेँ हुआ था.डोगिन कबीले की शुरुआत अन्तरिक्ष से आये 'नोम्नो' नाम के एक विचित्र प्राणी ने की थी."


".....तो फिर तिब्बत मे .?!"



"तिब्बत आर्यो की उत्पत्ति का स्थान कहा जाना उचित होगा,मानव जाति की उत्पत्ति का स्थान नही ."



यान पृथु मही अर्थात पृथ्वी के करीब आकर पृथ्वी के चारो ओर चक्कर लगाने लगा था.



" साइवेरिया मे भी तो कोई एलियन्स अन्तरिक्ष से आ कर रहा था ? "



" सुनो,जिस धरती पर मानव जीवन की संभावनाएं नजर आती है तो वहाँ एलियन्स के द्वारा ही मानव सत्ता का उदय होता है.जिसके लिए निर्गुण शक्तियाँ ब्रह्मा विष्णु महेश व उनके परिवार तथा परिषद के रुप में स्थूल जीवन का संचालन करती हैं. "



भू मध्य सागरीय क्षेत्र मे स्थित जंगल के समीप यान उतरते ही डोगोन मनुष्य यान के करीब आ गये.



* * *



पृथ्वी पर ही पूर्वोत्तर भारत मे स्थित एक अन्तरिक्ष व विज्ञान संस्थान के समीप बनी एक इमारत 'सदभावना' ,


सन5020ई0 की जून!


सद्भावना इमारत के सामने कुछ दूरी पर अपने यान के करीब खड़ी आरदीस्वन्दी ,जो कि उस वक्त किशोरावस्था मेँ थी,क्रोध भाव मेँ एक मैरुन वस्त्रधारी एक वृद्व सन्यासी से बोली-"यदि सदभाव को कुछ हो गया तो हमसे बुरा कोई न होगा.सारी पृथ्वी को हिला कर रख दूँगी."




" आप गलत सोच रही है.वह सदभावना का अन्तिम वारिस है,गंगा जमुनी संस्कृति का अन्तिम वारिस है.उसे सुरक्षा की ......"



" तुम्हारी धरती पर होगी गंगा जमुनी संस्कृति,प्रकृति मेँ निर्गुण मेँ ....सनातन यात्रा मे क्या गंगा क्या जमुना? जाती हूँ सात दिन का वक्त देकर!"




फिर वह यान पर बैठ कर चली गयी.आज लगभग 1000वर्ष बाद अब.....




मंगलवार, 8 मार्च 2011

भम्सनदा के ब्रह्मा !

अन्तरिक्ष!


विभिन्न पिण्डोँ,उल्काओँ,सूक्ष्म ग्रहों आदि के बीच से अपना बचाव करते हुए तेजी के साथ जाता 'उड़नतश्तरी ' यान . इस यान में उपस्थित दो पुरुष व एक स्त्री तीन फुट कद ,वाह्य कर्णविहीन थे.उनके शरीर पर कहीं भी बाल नहीं थे,न भवेँ व पलकें,बिल्कुल वैसे ही जैसे'कोई मिल गया' फिल्म मेँ एलियन्स.




पृथु मही पर स्थित न्यू मैक्सिको मे सन 14जून1946ई0 को दो उड़नतश्तरी दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थीँ.दूसरे दिन इस घटना को समाचार पत्रो ने प्रकाशित किया था लेकिन अमेरीकी सरकार ने समाचार पत्रो की इस सम्बन्धित खबरो का खण्डन कर कहा था कि कही भी न तो उड़नतश्तरिया पायी गयी और न ही उड़नतश्तरियो से सम्बन्धित कोई एलियन्स.



आखिर इस घटना को अमेरीकी सरकार ने क्यो छिपाया?लगभग दो सौ वर्षो तक यह रहस्य बना रहा था लेकिन......??लेकिन सन 2147ई0मेँ.....?!



" दस् रलकम ! पृथु मही के मनुष्यो की करतूतो के बारे मे क्या सोचना?उन्हे अपने किए की सजा मिल तो गयी."



"मै सोचता हूँ कि क्या वास्तव मे उस वक्त अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आतंकवादी नही था ? हलदकरोडा! "



हलदकरोडा बोली--
" मै जानती हूँ कि अमेरिका पृथु मही का अपराधी था ही वह अन्तरिक्ष अपराधी भी था ? "



सामने स्क्रीन पर 'भुम्सनदा' ग्रह को देख कर दस्करलकम बोला....

" फदरस्लन! भुम्सनदा करीब आ गया है ."



" भुम्सनदा क्या वास्तव मे ब्रह्मा की धरती है? "



"हलदकरोडा ! भुम्सनदा पर ही चल रहे है, जान जाओगी ."


" हूँ,पृथु मही के हिन्दू पौराणिक कथाओ मे वर्णित ब्रह्मा विष्णु महेश का अस्तित्व क्या स्थूल रुप से भी वास्तविक नही है? "



"हाँ,उस वक्त पृथु मही के एक वैज्ञानिक ने यह कहा भी था कि कही ऐसा तो नही कि ब्रह्मा विष्णु महेश एलियन्स ही हो ? "



"....और एक ने यह भी कहा था कि आत्माएँ एलियन्स ही होती है."


"खैर....! "




* * *


भुम्सनदा धरती पर गैरबर्फीली भूमि पर लैण्ड मार्क के करीब सूर्यमन्दिर के खण्डहर के पास ,जहाँ दीवार पर एक यान व विशेष वेशभूषा पहनी एक युवती का चित्र बना था.जिसे पशु पक्षियो ने फूल पत्तियो से लाद दिया था.



खामोशी !


पत्थर पर आरदीस्वन्दी खामोश हुए बैठी.चारो ओर काफी मात्रा मे फूल पत्तियाँ पड़ी हुई थी.पशु पक्षी भी खामोश थे.कुछ पशु पक्षियो के आँखो मे आँसू थे.



आत्म साक्षात्कार खामोशी ही कराती है,एक दूसरे आत्म का भी.खामोशी हमे एकाग्रता ,लयता व निरन्तरता देती है -आत्म मे बनाये रखने को.उपनिषद का भी क्या अर्थ है ,उपासना का भी क्या अर्थ है,खामोशी का भी क्या अर्थ है?-" बैठना" बैठकर अर्थात अपने मन को स्थिर कर अपने आत्म से जोड़ना.वेद को प्राप्त कर वेदान्त तक पहुँचना.क्यो मूर्तियाँ,क्यो तश्वीरे,क्यो धर्म स्थल?यह सब तो इस धरती की ही बाते है? वेद(ज्ञान)तक जाने की बात तो दूर ,इस धरती की स्थूल सामग्री मे ही उलझ गये हो.सत की ओर यदि चल दिए तो फिर अब क्या जरुरत मूर्तियो तश्वीरो धर्मस्थलो मे उलझने की?फिर क्या जरुरत अमरूद से'अ',आम से 'आ,'.......जब चल दिए तो अ ,आ ,इ ,ई,.....इनसे शब्द .......?!इसका मतलब यह नही कि अमरूद ,आम,.....भोग भाव रखे या फिर बुजुर्ग होने के बाद भी ' अ','आ', ..... के करीब जाने के लिए अमरुद,आम, ..... के करीब जाये ,फिर तो यह एक विकार है.जीवन भर तब तुमने किया भी क्या? ऐसे मे तो फिर जब सारी इन्द्रियाँ कमजोर पड़ जाऐगी बुद्धि कमजोर पड़ जाएगी तो फिर अ, आ , .....याद नही करोगे ,भोग लालसा के लिए याद करोगे.पानी सूखने के वाद भी वेल सूखने के वाद भी आकार जरुरी न बदले.आंतें जबाब दे जायेगी ,दाँत जबाब दे जायेगे ,जीभ जबाब दे जायेगी लेकिन......?!



खामोशी !


खामोशी हमे तटस्थता की ओर भी ले जाती है-भावनाओ लालसाओ के प्रति भी.



आत्म साक्षात्कार के लिए सांसारिक वस्तुओ ,तश्वीरो मूर्तियो धर्मस्थलोँ आदि की आवश्यकता जरुरी नहीँ है.



ओ3म आमीन !


ओ3म आमीन दोनो क्यो?



सिन्धु के इस पार ओ3म तो सिन्धु के उस पार आमीन !



......लेकिन शक्ति एक ही,सिर्फ भाषा व नजरिया का फर्क.



आरदीस्वनदी के अन्त:कर्ण मे पड़ने वाली ध्वनि-" ओ3म आमीन ".....



आरदीस्वन्दी के अन्त:कर्ण मे "ओ3म आमीन" ध्वनि प्रसारित करने वाला कौन था ?...और फिर उसका "ओ3म आमीन"ध्वनि से क्या सम्बन्ध था?भुम्सनदा के लिए चलने से पूर्व उसमे घबराहट लेकिन जब उसके अन्त : कर्ण मे "ओ3म आमीन" ध्वनि पड़ी तो उसकी घबराहट दूर हो गयी और उस ध्वनि के आधार पर यहाँ भुम्सनदा आ पहुँची?



गैर बर्फीले भूमि पर पीपल नीम वृक्षोँ की अधिकता थी व पशुओ मे गौ वंशीय पशुओ की.




इधर आकाश मे उड़नतश्तरी यान भुम्सनदा के काफी करीब आ चुका था.वह इस वक्त भुम्सनदा के बर्फीले भाग के ऊपर आकाश मेँ था.

बर्फीले भाग पर अनेक बर्फीले टीलों से बर्फ खिसकना प्रारम्भ हुआ जिससे ब्रह्म

सोमवार, 7 मार्च 2011

भुम्सनदा पर आरदीस्वन���दी !

एक वृद्ध सन्यासी ,जो कि तीन नेत्रधारी!



वह एक पर्वतीय वर्फीले क्षेत्र में ध्यान मुद्रा में बैठा था.कुछ चिन्तित नर नारी जिनमेँ से अधिकतर तीन नेत्रधारी ही थे,शान्त मुद्रा मेँ खड़े थे और उस वृद्ध सन्यासी के आँखेँ खोलने का इन्तजार कर रहे थे.



समय गुजरा ,पृथु मही पर लगभग एक वर्ष से ज्यादा वक्त गुजरने को आया.



" 'आरदीस्वन्दी' साधना को बीच में छोंड़ कर भुम्सनदा पर जा पहुंची है.उधर शिव पद के लिए भावी उम्मीदवार (ध्यान मुद्रा में बैठे उस वृद्ध सन्यासी)के पास सभी सत जन इकट्ठे हो उस अंशशक्तिवान की आँखे खुलने का इन्तजार कर रहे हैँ.ब्राह्माण्ड मेँ इधर शैतानी शक्तियाँ अपनी मनमानी करने को ओर भी ज्यादा स्वतन्त्र हो गयी हैं. "



"कक्कय! यह वाल्मीकी की तरह दूरदर्शी हैँ,सब जानते हैं.पृथु मही पर कल्कि अवतार को अभी वहाँ के समयानुसार काफी वक्त है लेकिन कुछ धरतियोँ के लिए यह वक्त बहुत कम समय है,अत:शैतानी रणनीतियों को कामयाबी मिलते देख हम सब का भ्रम में पड़ना स्वाभाविक है.नकली कल्कि अवतार की शैतानी कोशिसें समय आने पर धराशायी हो जायेंगी."


" विश्वारि ! कक्कय को बोलने दो. सांसारिक बातोँ को मन मेँ रखना ठीक नहीं."



"कक्कय ! तुम एक स्त्री हो,संसार से ऊपर उठ हर नारी की शक्ति मातृ शक्ति है.यहाँ तो रिश्तों का जाल है लेकिन वहाँ कोई रिश्ता नहीं.आने वाले समय मेँ तुम्हें माँ का कर्त्तव्य निभाना है.मन्दरा तुम्हारी सलाहकार के रूप मेँ रहेगी."



"विश्वारि !सत ने सबको अपने अपने किरदार के आधार पर पहले से ही बाँध रखा है.तुम अपने कर्त्तव्योँ को समझो.कहीँ फिर तुम्हारे साथ भी विश्वामित्र की तरह न हो जाए?जिसके गर्भ मेँ जाना होगा तुम्हें उसके गर्भ मेँ न जा कर अन्य के गर्भ मेँ जा कर शरीर धारण कर बैठो?शैतानी शक्तियाँ बैसे भी अपने षड़यन्त्रोँ मेँ लगी हुई हैँ."



" देवरावण का अन्त ऐसे ही नहीं हो जाने वाला है.विभिन्न संसाधनों व बायो तकनीकि के बल पर वह लगभग डेढ़ हजार वर्ष तक जीता चला आ रहा है.न जाने कितनी शक्तियां उसके क्रूर साम्राज्य को समाप्त करने मेँ लगी रहीँ लेकिन समाप्त न कर पायीं. "



" इस चक्कर में तो सम्कदेल वम्मा को अपना शरीर त्यागना पड़ गया."



"सम्कदेल वम्मा....?! लगभग सन 5012-19 ई0 के करीब देव रावण के द्वारा सम्कदेल वम्मा के शरीर को मार दिया गया था . "



उधर लाखों प्रकाश दूर वह आकाशीय पिण्ड जिसका अस्सी प्रतिशत भाग लगभग बर्फीला था.उसी के गैरबर्फीले क्षेत्र मेँ स्थित लैण्डमार्क पर 'आरदीस्वन्दी' का यान उतर चुका था.जिसके स्वागत मेँ खड़े थे अनेक पशु पक्षी.भुम्सनदा के इस भूभाग को 'आरदीस्वन्दी' ने नाम दिया था-पेरु.





शुक्रवार, 4 मार्च 2011

दूसरा पेरु :अन्तरिक्ष मेँ इंका सभ्यता

एक अण्डाकार यान अन्तरिक्ष मेँ काफी तेजी के साथ आगे बढ़ता जा रहा था.इस यान मेँ 'सनडेक्सरन' धरती निवासी तीन नेत्रधारी कन्कनेरसु,सस्कनपल व हह्नसरक थे .जो कि एक धरती'हा हा हूस ' पर जा रहे थे.इस सफर को कांच की टेबिल पर रखे एक अण्डाकार पारदर्शी पत्थर पर दर्शाया जा रहा था .जिसके सामने थी एक तीन नेत्रधारी युवती ' आरदीस्वन्दी'.




* * *





आरदीस्वन्दी के अन्त: कर्ण मेँ अब भी किसी अज्ञात व्यक्ति की आवाज'ओ3म आमीन' गूँज रही थी.वातावरण में मौजूद इन ध्वनि तरंगों के आधार पर आरदीस्वन्दी का यान आगे बढ़ता जा रहा था. अनेक आकाशीय पिण्डोँ के समीप से गुजरता
हुआ यह यान एक ऐसे आकाशीय पिण्ड का चक्कर लगाने लगा जिसका अस्सी प्रतिशत भू भाग वर्फ से आच्छादित था.



यान के स्पीकर पर अब 'ओम आमीन तत सत ' की ध्वनि तेज हो गयी थी.



अचानक आरदीस्वन्दी को याद आया ,जब वह किशोरावस्था मेँ थी.पृथु मही के समयानुसार लगभग
एक हजार वर्ष पूर्व सन5020ई0की 28 नबम्बर,अग्नि अण्कल से सम्वाद के दौरान 'दस सितम्बर' उपन्यास का जिक्र हुआ था.सेरेना की आत्मकथा मेँ किसी'सर जी' व्यक्ति का जिक्र अनेक बार हुआ था.जिन्होने यह उपन्यास लिखा था लेकिन जिसे किसी ने गुम कर लिया था.'सर जी'के कुछ उपन्यासोँ मेँ भी
ऐसे चरित्र रहे थे जो 'ओम आमीन 'पर विश्वास करते थे.उन्होने कही पर विदुरराज गोडसे का जिक्र किया था.जिसने 27फरबरी2002 के गोधरा काण्ड के बाद गुजरात काण्ड मेँ अपने सेक्यूलरवाद का परिचय देते हुए दोनोँ पक्षों के कट्टरपन्थियोँ पर खत्म किया था.जिसके साथ भी 'ओम आमीन' का जयघोष था, 'जय कुर आन जय कुरशान' का जयघोष था.





हालाँकि गोडसे सेक्यूलर फोर्स का मेम्बर था ,गुजरात काण्ड मेँ अपने किरदार से हट कर ' मिशन:जय माँ काली ' मेँ उसका किरदार था.



' सनडेक्सरन ' धरती की गुफा में रखी एक पाण्डुलिपि के कुछ अंशोँ को किसी अज्ञात भाषाविज्ञ के सहयोग से समझने का दाबा कर उसने एक पुस्तक लिखी थी-'पैगम्बरों के पुरखे '.


"आरदीस्वन्दी,गोडसे पर सोँचने लगीं?"
'पैगम्बरों के पुरखे' पुस्तक का आधार क्या वही है -सनडेक्सरन की गुफा मेँ रखी पुस्तक ...?


"दर असल गोडसे भी ओम आमीन पर..."


"वे सेक्यूलर ही थे.हाँ, तो आप यहाँ तक आ ही गयी."


" लेकिन आप कहाँ हैं?ध्वनि तरंगोँ के आधार पर आ तो गयी लेकिन......."




" जल्दी क्या है ? "



* * *



अन्जान आकाशीय पिण्ड के चक्कर लगाते लगाते जब यान की स्पीड धीमी हो गयी तो यान उस आकाशीय पिण्ड की ओर चल दिया .


नीचे इसी आकाशीय पिण्ड पर.....




खण्डहर हो चुकी एक दीवार , बची हुई दीवार पर एक यान व एक विशेष वेशभूषा मेँ एक युवती की तश्वीर बनी हुई थी.



इस तश्वीर के सामने अनेक हाथी व कुत्ते इकट्ठे होने लगे थे.



आरदीस्वन्दी का यान जब उस धरती के काफी नजदीक पहुंचा तो...




"अरे,यह क्या ?कहीं यह पृथु मही पर एक स्थान पेरु की तरह तो नहीं?जहां के इंका सभ्यता के लैंडमार्क की तरह यहाँ भी ये रेखाएं दिखाई दे रही हैं? जरूर यह भी यहाँ का लैंडमार्क होगा?"



कुछ सेकण्ड बाद यान लैंडमार्क पर उतर चुका था.हाथी ,कुत्ते, कुछ अन्य पशु पक्षी यान के करीब आ चुके थे.


अब क्या हो?


कुछ मिनट के लिए आरदीस्वन्दी यान के अन्दर ही बैठे पशु पक्षियों को देखती रही . जब उसने एक हाथी को यान की ओर बढ़ते देखा जिसके सूंड़ मेँ फूलों से लदी एक टहनी थी व उसके ऊपर बैठा एक बन्दर भी फूलों से लदी एक टहनी पकड़े था.


<यह है क्या DUSRA PERU?>

बुधवार, 2 मार्च 2011

विदुरराज गोडसे संदेश

कुछ हिन्दू कहते फिरते हैँ कि जब तक देश मेँ हिन्दू बहुमत मेँ हैँ तब तक देश मेँ सेक्यूलरवाद की बात चल रही है और वह भी तुष्टीकरण के कारण छद्म .गैरमुसलमान व मुसलमान नेता पन्थनिरपक्षता प्रति कितने ईमानदार हैँ ?अभी कुछ महीनों से कुछ मुस्लिम नेता अपनी स्वयं निर्मित पार्टी के विज्ञापन के साथ अखबारों में नजर आ रहे हैं जो कि हिन्दू मुसलमान के साथ साथ चलने,हिन्दू मुस्लिम भाईचारा ,आदि सन्देशों के साथ नजर आ रहे है.यदि इन मुस्लिम नेताओं की लड़कियां गैरमुस्लिम लड़कोँ से शादी करना चाहें तो क्या ये रुकावट तो नहीं बनेगे ?रुकावट बनेगे ,अवश्य बनेगे क्योंकि यह सब मजहबी ही हैं न कि धार्मिक या सेक्युलर ? इसी तरह सेक्यूलर हिन्दू नेता.


ओशो ने ठीक कहा था कि यह कहने की क्या आवश्यकता है कि हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई आपस मेँ सब भाई भाई .यह क्यों नहीँ कहते कि हम एक हैँ .



देश के अन्दर इन्दिरा गांधी परिवार व इन्द्रकुमार गुजराल के परिवार को ही मैं सेक्यूलरवादी कहता हूँ.उन व्यक्तियों को मैं धार्मिक नहीं मान सकता जो सिर्फ अपने मजहबी रीति रिवाजोँ व्यक्तियों में रहने को ही धार्मिकता मानते हैँ और गैरमजहबियों व गैरजातियों के प्रति द्वेषभावना व छुआ छूत रखते हैं.



मुगलकाल में अनेक बादशाह हुए लेकिन अकबर को ही महान क्यों कहा जाता है ? जो सेक्यूलर के रास्ते पर चलना चाहते है उन्हें अकबर के दीन ए इलाही पथ पर चलना चाहिए लेकिन एक कदम आगे,एक कदम आगे कैसा ? अकबर ने हिन्दू लड़कियों को स्वीकार तो किया लेकिन मुस्लिम लड़कियोँ को हिन्दुओं मेँ नहीं दिया .जिस दिन परिवारों के अन्दर पति पत्नी में से एक हिन्दू व एक मुसलमान तथा वेद व कुरान एक साथ होगा उस दिन यह देश महान होगा ही अपने अखण्ड रुप में भी होगा.



जो मुस्लिम नेता हिन्दू मुस्लिम को एक साथ चलने की बात कर रहे हैं उन्हेँ इस बात पर गौर करना चाहिए.दारुल उलूम देवबंद ने फतवा जारी किया है कि यदि किसी मुस्लिम लड़के लड़की ने किसी गैर मुस्लिम से शादी की तो उसकी खैर नहीं.
यह मुस्लिम नेता चाहें वे पीस पार्टी के प्रमुख ही क्योँ न हों,कहते फिर रहे हैँ कि हिन्दू मुसलमान साथ चलेगा ;क्यों नहीँ दारुल उलूम देवबंद के फतवे के विरोध मेँ बयान दें?जिससे कि हम जैसे इनके सेक्यूलरवाद पर विश्वास कर सकें.



लेकिन यह सब कैसे होगा?हर कोई अभी मानसिक रूप से गुलाम है.कोई भी धर्म को समझने की कोशिस नहीं कर रहा है.मजहबी व जातीय सोँच से बाहर निकलने की कोशिस ही नहीं.