शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

11दिसम्बर : ओशो जन्म दिवस

मैँ अवसर आने पर अपने शिष्यों को बताता रहा हूँ कि अपने नजरिये के दर्शन की तुलना महापुरुषोँ के दर्शन से करते रहा करो.मेरी एक शिष्या रही है जो मेरे कुछ शिष्यों की मेरे से अति नजदीकी के कारण कभी व्याकुल सी हो जाती थी . मैँ समझता था कि मेरा आशीर्वाद तेरे साथ भी है .एक बार उसे न रहा गया और उसने सारी भड़ास मुझपे उतार दी .मैँ बोला कि तुम किस आधार पर चलना चाहती हो अपने जीवन मेँ ,समाज के आधार पर या फिर महापुरुषों के आधार पर?वह बोली कि समाज के आधार पर . मैंने कहा जा मेरा आशीर्वाद तेरे साथ है .अब आठ साल बाद वह अब उच्च शिक्षा करने के बाद असलित समझी .मैँ फिर आज ओशो जन्म दिवस के उपलक्ष्य पर अपने शिष्यों से कहना चाहूँगा कि अपना चरित्र महापुरुषों के आधार पर गढ़ो न कि समाज के आधार पर.आज के व्याख्याकारों के जगत मेँ मैँ ओशो को सुप्रीम पावर मानता हूँ .जो उनके विरोध मेँ खड़े हैँ वे मतभेद ,गुटबाजी ,जातिवाद ,मजहबवाद ,आदि के शिकार हैँ.लेकिन हमेँ निष्पक्ष रुप से संश्लेषण की दृष्टि रखते हुए आगे बढ़ते जाना है.सत किसी जाति व मजहब की बफौती नहीँ है .

शेष .

ASHOK KUMAR VERMA 'BINDU'

<www.antaryahoo.blogspot.com>

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