रविवार, 5 अप्रैल 2026
अरविंद राठौर या..?!
माघ मास, सन 2094 ई0!
गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ !!
सोनम कीर्ति की बेटी - देवेश्वरी कीर्ति अब लगभग 34 वर्ष की थी। समुद्र से कुछ दूरी पर वह खड़ी चारो ओर देख रही थी।
अब से 94 वर्ष पूर्व यहां से काफी दूर था - समुद्र। अब …?!
समुद्र तल बढ़ते जा रहे हैं। अनेक गांव व शहर समुद्र ने निगल लिये हैं। धरती पर बहुत कुछ बदल चुका है।कुछ दूरी पर स्त्री - पुरुष उपस्थित थे। देवेश्वरी कीर्ति उधर बढ़ गया।
उन स्त्री - पुरुषों में अधेड़ उम्र के स्त्री - पुरुषों की संख्या की संख्या ज्यादा थी ।जिनका जन्म लगभग सन 2047 ई0 का था ।
हम पूर्वजों को क्यों याद करें ?
यदु कीर्ति ! आप जिस नजर से कह रही हो ठीक है लेकिन हमें अपना आधार ध्यान रखना चाहिए।
मां (शिवानी) कहती थी - याद रखो ,अपना इतिहास पता होना चाहिए लेकिन उसमें उलझो नहीं ।वर्तमान को ऐसा बनाओ कि वह बेहतर से बेहतर हो ।
आपकी उम्र लगभग 63 - 64 साल की होगी ?
सन 2031 ई0 का जन्म है । 31…9……40……94 में … .. (खामोशी) …..63 साल उम्र हो गयी है ।हमसे एक साल छोटी हो । शारीरिक उम्र तो बराबर ही समझ लो लेकिन समझ, अनुभव में हमारा - आपका स्तर अलग अलग हो सकता है।
अरे भाई साहब आप भी ?! मुख्य बात को बोलो ।
आप कल क्या कह रही थीं ? ऐसे हालात बनाओ कि हम जिएं जरूर वर्तमान में लेकिन हम समय की उस स्थिति में जी रहे हों जिसमें हम त्रिकाल दर्शी हों या त्रिकाल से मुक्त हों?
यह ध्यान की ही दशा है । बताया नहीं कि हम पूर्वजों को क्यों याद करें ?हमारा तो अपना विचार है कि अपना ही क्या विचार गीता के अध्ययन से भी पता चलता है कि जीवन यात्रा का मतलब है - भविष्य की ओर बढ़ना ,निरन्तरता में जीना । अतीत या भूत में जीना नहीं।इसके लिए हमें पितरों से आगे देव और देव से आगे की यात्रा पर बढ़ना होगा ।
ये है क्या है ? श्री लंका का वह कबीला अब उत्सव की तैयारी में है ।जहां श्री हनुमान सूक्ष्म रूप से उपस्थित रहेंगे ।
ये सब जीवन के पड़ाव हैं।स्थूल जगत के अलावा हम सूक्ष्म जगत से भी एक पड़ाव या स्तर पर जी रहे होते हैं।सूक्ष्म शक्तियां भी एक पड़ाव या स्तर पर होती हैं। गुप्त नवरात्रि का आप के लिए क्या महत्व है ?
चारो ओर जो दिख रहा है ,प्रकृति है ।हम सब भी प्रकृति हैं । इस दृश्यता के परे अदृश्यता भी है ,सूक्ष्म भी है ।गुप्त भी है । हमारी शारीरिक इंद्रिक इच्छाओं से परे भी एक सिस्टम है, अभियान है, स्वतः है, निरंतर है । उसके लिए खामोश रहना, मौन रहना और इसके अहसास व महसूस करने को अपने अंदर मन ही मन अवसर देना हमारी गुप्त नवरात्रि साधना है ।उसके लिए किसी प्रकार का प्रदर्शन नहीं ,दिखावा नहीं, कर्मकांड नहीं।बस,नजरिया, आस्था व मन प्रबन्धन ।आचरण में बस धैर्य ,सहनशीलता ,मानवता ,करुणा, सेवा, परिवार भाव ,जीविका के लिए कर्म ,सहकारिता आदि ।
जब स्वतः है, निरंतर है, पूर्व निर्धारित है तो फिर कर्मठता ,मेहमत, नियमितता आदि की क्या जरूरत ?
जरूरत क्यों नहीं ? शरीर को शरीर चाहिए ही ,संसार की वस्तु के लिए ,समाज प्रबन्धन के कर्म चाहिए ही ।लेकिन अंतरात्मा के साथ ,भाव के साथ ,आत्मियता के साथ ।
अब्दुल जिसकी उम्र लगभग 34 वर्ष वह रश्मि का मित्र । रश्मि की उम्र भी लगभग 35 की रही होगी ।दोनों आकर बैठते हुए - नमस्ते ।
नमस्ते ।
रश्मि और अब्दुल ! आपकी दोस्ती इतिहास में हमेशा याद की जाएगी ।
सब मालिक कृपा ।
वह अरविंद राठौर इन दिनों अब अस्सी वर्ष का था।
हमारी एक पुस्तक - 'बुजुर्ग ' का वह एक काल्पनिक चरित्र।
उधर ...?!
" ............ "
यह सब तो हम पहले भी स्वप्न में देखते आये थे लेकिन इस सब के बाद अब .....?!
हम एक स्वप्न में गांव ददीयूरी में थे।
पीपल देव स्थान हमारे नजर में था।
वह पीपल स्थान कभी हमारे एक पूर्वज के द्वारा ही स्थापित किया गया था।
जहां से कोई एक पितर हम पर आक्रमण कर रहे थे।उनसे बचते हुए हम उड़ -उड़ यूक्लिप्टस के पेड़ों पर पहुंच रहे थे।
उनके एक आक्रमण में हमने एक पेड़ की आड़ ले ली और जमुना नाम के एक गांव के ही एक निवासी से मदद के विचार को हमारा ही एक रूप सलाह देता है।
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अरविंद राठौर बड़ी मुश्किल से अपनी बैसाखियों वे सहारे खड़े हो आगे तख्त की ओर बढ़ा और उसने तख्त पर रखी पुस्तक - ' अशोकबिन्दु :: दैट इज ...?! ' को उठा लिया।
वहां आसपास कोई न था।
लगता था कि शेर दहाड़ता हुआ उसकी ओर ही आ रहा हो?
वह तेजी से बायीं ओर जा कर एक खंडहर में बने कमरे में प्रवेश कर गया और उसका जालीदार लोहे का गेट बंद कर लिया। उस कमरे में एक अधेड़ उम्र की औरत ध्यान मुद्रा में बैठी थी। एक अलमारी में पुस्तक रख कर वह भी एक ओर ध्यान मुद्रा में बैठ गया।
ध्यान में बैठने के बाबजूद उसके दिमाग में उसके ही अतीत के दृश्य चल रहे थे ... " सम्भवतः सन 2015 ई0 का समय था और ग्राम पंचायत के चुनाव चल रहे थे। पूर्व प्रधान की जीप से वह सपरिवार गांव पहुंचा था। उस जीप को पूर्व प्रधान के का इकलौता बेटा शिवम चला रहा था। उससे पता चला था कि वह और उसके पिता जी आदि सब मांस -मदिरा आदि इस उम्मीद से छोंड़ चुके हैं कि बस,एक बार प्रधान बन जायें पिता जी? "
" हूँ , भक्ति कैसी ? भक्ति की विनिमय या व्यापार? "
किसी को उम्मीद नहीं थी शिवम के पिता जी हार जाएंगे?मात्र आठ वोटों से वे हार गये थे। जिस दिन वोट पड़ रहे थे,उस दिन आखिर में सभी उत्साह में आकर ढीले पड़ गये थे और घर में आकर बैठ गये थे।सब यही सोंच रहे थे कि अब तो जीत ही गये? लेकिन अरविंद राठौर के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था?
अरविंद राठौर जब कक्षा सात में पढ़ता था तभी उसे शिवम के पिता जी (अर्थात अरविंद राठौर के पिता जी के चचेरे भाई नेतराम ) के प्रति मन ही मन या स्वप्न में उनकी ओर से विविध नकारात्मक संकेत मिलते थे।
ऐसे में क्या हो? कैसे में?!
सन 2034 ई0 , उनके शादी के 25 साल पूर्ण …इस बीच वह , उसका जीवन का वर्तमान भौतिक स्वरूप क्या ?
अरविंद राठौर इन दिनों 80 वर्ष का हो चुका था।सन 2053 ई0 …..
हूँ?! ये मन भी .?! कभी सन 2034 ई0 में शादी की 25 वीं वर्षगांठ के वक्त तो कभी भविष्य के गर्त में कल्पनाओं के पंख लगा ?!
मन भागता फिरता है?निद्रा में रहता हूँ तो ठीक । …. और मेडिटशन ?! मेडिटशन के नाम पर भी क्या ?आंख बंद करते करते कहीं खो जाना?
अरविंद राठौर की तरह ‘ सर जी ‘भी क्या ?
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