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सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

शैतान नहीँ क्या ये ? : एलियंस

पृथु महि के इन्सानोँ के बारे मेँ जो कहेँ कम ही है . अपने पैरों पर
कुल्हाड़ी ये मारेँ ही अन्य इन्सानों ,जन्तुओँ ,वनस्पतियोँ ,आदि के
अतिरिक्त अंतरिक्ष मेँ भी विकार पैदा कर डाले .इन लोगोँ के चरित्र की
मुख्य विशेषता है -आचरण ,मन व बोली से अंतर होना.
इनका ज्ञानी भी अज्ञानी है .


पृथुमही के एक नगर मेँ रामलीला चल रहा था .दो बहुरुपिया चेहरा पर
मुखौटा लगाये घूम रहे थे .राजसी वेश मेँ ये दोनों अपने सिर पर पगड़ी बांधे
हुए थे . इनका कद लगभग तीन फुट था.


"चटपकचटापच!अब देखते हैँ कि यहाँ क्या क्या हो रहा है ?"


कुछ दूरी पर मनचले लड़कोँ का झुण्ड एक लड़की के साथ अभद्रता का
व्यवहार कर रहा था.

"मानव क्या श्रेष्ठ है ?"

"मूर्ख भी है ."

"अपराधियोँ ,माफियाओँ और जातिवादियोँ को फूल माला चढ़ा कर अपना
नेता चुनता है .सत पर जीने वालोँ को सनकी पागल कहता है .धर्म की गलियोँ
मेँ धर्म की दुर्दशा हो ."

"देखो ये सड़ा गला क्या खा रहे हैँ ?"


"इसे ये अचार कहते है .उन बोतलोँ मेँ सिरका ......?!."

"वो मधुशाला ?"

दोनोँ मधुशाला की ओर बढ़ गये .

"मधुशाला यानि की ये लोग मधु पी रहे हैँ ? मधु पिया जा सकता है . "

एक बहुरूपिया सूंघता हुआ बोला -
" नहीँ,धोखा ! हनी नहीँ "

नशे मेँ धुत्त व्यक्ति हंस पड़े .

जब दोनोँ एक शिवभक्तोँ के एक पाण्डाल मेँ पहुँचे तो -

"ऐ शिवभक्त कैसे? "


भाँग के नशे
मेँ धुत्त एक शिवभक्त बोला -"आओ ,प्रसाद चखो ."

दोनोँ एक दृसरे को देखने लगे.


" पृथुमहि पर मनुज कैसा है ? धार्मिकोँ व आध्यात्मिकोँ मेँ तक धर्म
व आध्यात्म नहीँ .सब के सब शूद्र कर्म मेँ!"


"ब्रह्मांश व प्रकृतिअंश होकर भी अपने ब्रह्मांशीय व प्राकृतिक
अंशोँ के लिए इनसे सम्बंधित अंशोँ को छोंड़कर क्रत्रिम अंशोँ के लिए अपने
ब्रह्मांश व प्राकृतिक अंशोँ को नजरांदाज कर देना कहाँ तक उचित है ?"


दोनों बहुरूपिया मेला के बाहर आ गये थे .सड़क किनारे ही एक हरे बाग
को काटा जा रहा था .

"ये हरे बाग को काट रहे ?"

" प्रकृति माँ के पूजक कहाँ ....? "

" हूँ ,ये पाँचोँ तत्वोँ को पूजते भी हैँ और अपने स्वार्थ के लिए
इनको प्रदूषित भी कर रहे हैँ ."

रविवार, 27 नवंबर 2011

एलियन्स आक्रमण की सम्भावनाओं के बीच !

सन 2025ई की 14 नवम्बर तिथि ! भविष्य रांची के रेलवे स्टेशन पर पहुँच
भी न पाया था कि एक सन्यासी भविष्य को देख कर बोला -"भविष्य,आप को भी
फुर्सत मिल गयी प्रयोगशाला से ."

"ओम आमीन!"


"ओम तत सत आमीन!"


दोनों बातचीत करते हुए प्लेटफार्म की और बढ़ गये थे .


"राजा कुरु!ये भी दो हुए हैं .मैं हस्तिन वंश के कुरु की बात नहीँ कर
रहा हूँ "-सन्यासी बोला.


"जानता हूँ आप अग्नीन्ध्र पुत्र की बात कर रहे हैँ."-भविष्य बोला .


भविष्य ! कोरिया व साइबेरिया क्षेत्र के कभी राजा रहे थे
कुरु.रोम,साइबेरिया,कुमायूँ,आदि मेँ बोली जाने वाली आदि भाषाओं की मूल
भाषा प्रियव्रत की कबीलाई भाषा थी .उत्तराखण्ड का नाम कूर्मांचल भी मिलता
है .


पृथु महि जब विनाश की ओर अग्रसर हुई है एलियन्स की गतिविधियां तेज
हुई हैँ.सन 2011ई0के 14 नवम्बर को प्रख्याक पैरानमिल लेखक माइकल कोहन का
कहना था -"पिछले कुछ समय से रुस उड़नतश्तरियाँ और संभावित एलियन यानों की
गतिविधियों का प्रमुख अड्ढा बना हुआ है जिन्हेँ सेना और सिविल एजेंसियों
ने भी देखा है."
वैदिककाल मेँ धरती पर तैंतीस करोड़ देवता थे अर्थात जो भी मानव थे
वे देवता तुल्य थे .इस पृथुमहि पर उन आत्माओं अर्थात अस्थूल एलियन्स के
नियंत्रण केन्द्र थे -काबा ,कैलाश व काशी.'कश्मीर काशी सुहोत्र पुत्र
काशिक ने,काव्य अर्थात काबा उशाना काव्य(शुक्राचार्य) व हिरण्याकशिपु
पुत्री दिव्या ने स्थापना की.ऋषभ देव ने कैलाश पर्वत को अपना स्थान
बनाया.सभी आत्माएं सतमय होती हैँ लेकिन शरीर धारण करने के बाद माया मोह
लोभ व काम के कारण उस हिसाब से अपने शरीर को निर्देशित नहीं कर पातीँ या
फिर कामकाजी बुद्धि का साथ नहीँ पा पातीँ .और ऐसे मेँ संसार मेँ उलझ कर
नरकीय,प्रेत,पितर,आदि योनियों की सम्भावनाओं मेँ जीना आरम्भ कर दिया .
जानवर कम होते गये लेकिन उनकी आत्माएं मानवशरीर धारण कर आती रहीं .आज भी
सम्भवता तैतीस करोड़ मानव ही देव योनि की सम्भावनाओं मेँ जीते होंगे .


"भविष्य!आप ठहरे वैज्ञानिक,आपको मेरी बातें निराधार लग रही होंगी ?"

भविष्य सिर्फ मुस्कुरा दिया .


रांची स्टेशन पर ही कुछ दूर किशोर किशोरियां आर एस एस की
स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य मेँ इश्तहार,स्टीकर,आदि बांट
रहे थे .कुछ मुस्लिम लड़कों ने इन किशोर किशोरियों को छेंड़ना शुरु कर
दिया.बहस बाजी के बाद नौवत मारपीट की आ गयी.प्रचार सामग्री नष्ट कर दी
गयी .सैन्य बल व अन्य व्यक्ति तमाशबीन बने देखते रहे .


एक औरत चीख रही थी -" जब तक चापलूस हिन्दुओं का शासन था तो
सेक्यूलरवाद के नाम पर तुष्टिकरण नीति चलती रही अब सेक्यूलवाद कहाँ मर
गया ?"

* * *

भविष्य अपने कमरे मेँ अकेला बैठा मानीटर युक्त दीवार पर
चलचित्र देख रहा था .

कि-


जब से ये दुनिया बनी है सत्य व अहिंसा को लेकर चलने वाले महापुरुष
आते ही रहे हैँ लेकिन मनुष्य असभ्य ही रहा.इस असभ्य मानव ने प्रकृति की
छोंड़ो धरती पर जीवन का अस्तित्व ही खतरे मेँ डाल दिया .मानव का इतिहास
हिंसा व द्वेष से भरा है .सत्य व अहिंसा के पन्नों को सिर्फ स्वर्णिम कह
कर काम चला लिया गया .

अन्तरिक्ष की अन्य धरतियों के मनुष्य तक इस धरती के मानव की मूर्खता
से असन्तुष्ट हैं और वे इस धरती पर आक्रमण करने की भी योजना बना रहे है
लेकिन उनका आक्रमण प्रकृति सुरक्षा के लिए है.


यहाँ का मानव यहाँ पर भी अपने द्वेषभावना से ही एलियन्स से युद्ध
करने को तैयार हो जायेगा लेकिन सुधरने का प्रयत्न नहीं करेगा .

इधर साइबेरिया निर्जन बर्फीले मैदान मेँ चार एलियंस घूम रहे थे उनका
तश्तरीयान कुछ दूरी पर था .ये स्थान इर्कुत्सक के समीप था जहां पहले भी
ये एलियन्स उतर चुके थे .


निर्जन स्थानों पर आते हैँ एलियन्स ?योगी भी चुनते थे निर्जन स्थान
.करते थे आत्मसाक्षात्कार .जुड़ते थे इसके बाद चेतना केन्द्रों से .और
एलियन्स ....!?

शनिवार, 26 नवंबर 2011

साइरियस से साइबेरिया तक !

दोनों तीन नेत्री थे .
दसलोफीन अकेली रह गयी थी .वह कदफनेडरीस को जाते देख रही थी.

वह जिन बूतों के समीप खड़ी थी उनके बीच एक शिला पर एक नक्शा बना हुआ था जिसमेँ भूमध्यसागरीय क्षेत्र व साइबेरियाई क्षेत्र के बीच एक मोटी सी लाइन खिंची दिखायी दे रही थी .जो दो बराबर भाग मेँ ताशकंद व काकेकश के करीब दो भागों मे बंटी थी .जहां बँटी स्थिति पर एक पर्वत व एक कछुआ बना हुआ था .दसलोफीन इस नक्शे को देखते देखते -"ऐहह ममतर.....?" मत्स्यावतार युग के शुरुआत मेँ एक आकाशीय पिण्ड साइरियस अर्थात लुन्धक से एक मत्स्यमानव भूमध्य सागर मेँ उतरा था.फिर ....!?ये साइरियस ....?!कूर्म .....?!साईबेरिया के कभी राजा थे -कुरु.जो अग्नीन्ध्र के पुत्र व प्रियव्रत के पौत्र थे .रोम ,साइबेरिया,कुमायूँ,आदि मेँ बोली जाने वाली आदिभाषाओं की मूलभाषा प्रियव्रत के कबीले की भाषा थी.सुना जाता है प्रियव्रत ने रोम की स्थापना की थी.उत्तराखण्ड का एक नाम कूर्मांचल भी मिलता है.सन2011के14नवम्बर को प्रख्यात पैरानामिल लेखक माइकल कोहान ने साइबेरिया क्षेत्र मेँ एलियन्स गतिविधियों का होना स्वीकारा.इर्कुत्सक मेँ एलियन यान उतरने की घटनाएं होती .
दक्षिण भारत महत्वपूर्ण तो होगा लेकिन सूक्ष्म शक्तियां कूर्म क्षेत्र अर्थात हिमालय,साइबेरिया आदि से भी महत्वपूर्ण होगी। कोरो शक्ति व कोरो-ना शक्ति के बीच महा संघर्ष होगा।आत्मा के अलावा कोरो क्या?लेकिन उस को नजरअंदाज कब तक करेगा मनुज? कुदरत उसी के माध्यम से सफाई करेगी!!एक डेढ़ प्रतिशत मौन के सागर में डूब विष पीने का काम करेंगे।उनसे ही सब थमेगा।सनातन है आत्मा, आत्मा से जुड़ व्यवहार स्वीकार करना होगा।
2011से 2025 ई0 के बीच का समय कोरो अर्थात सहज के लिए बेहतर तो होगा लेकिन जब 98 प्रतिशत कोरो-ना अर्थात असहजता तो दिखेगा वह ही।खेल असल और होगा...
 कोई फाइनल खेल नहीं.... सनातन तो निरन्तर है...वहां विकास नहीं वरन विकासशीलता....

कुछ वर्ष तक लेनिन को साइबेरिया में एक स्थान पर नजरबन्ध  रखा गया।
दिल्ली में नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के बाद  सुभाष बाबू भी साइबेरिया में नजरबंद रहे।
इस साइबेरिया में--
उत्तरी ध्रुव अब इधर ही आ रहा है।
शाहजहाँपुर में बाबूजी का तो कहना है-ध्रुव अपने स्थान से खिसकेगा। विनाश उत्तर से ही चलेगा।
उधर-
कैलाश पर्वत!

ये तिकोना आकार प्राकृतिक पहाड़ नहीं वरन एक पिरामिड है जिस पर बर्फ जमी रहती है-रूसी वैज्ञानिकों की एक टीम(1999)
.
.

कैलाश पर्वत पर आज तक कोई क्यों नहीं चढ़ पाया है?
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हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत का बहुत महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। लेकिन इसमें सोचने वाली बात ये है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अभी तक 7000 से ज्यादा लोग फतह कर चुके हैं, जिसकी ऊंचाई 8848 मीटर है, लेकिन कैलाश पर्वत पर आज तक कोई नहीं चढ़ पाया, जबकि इसकी ऊंचाई एवरेस्ट से लगभग 2000 मीटर कम यानी 6638 मीटर है। यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है।
.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक पर्वतारोही ने अपनी किताब में लिखा था कि उसने कैलाश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन इस पर्वत पर रहना असंभव था, क्योंकि वहां शरीर के बाल और नाखून तेजी से बढ़ने लगते हैं। इसके अलावा कैलाश पर्वत बहुत ही ज्यादा रेडियोएक्टिव भी है।
...
कैलाश पर्वत पर कभी किसी के नहीं चढ़ पाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर शिव जी निवास करते हैं और इसीलिए कोई जीवित इंसान वहां ऊपर नहीं पहुंच सकता। मरने के बाद या वह जिसने कभी कोई पाप न किया हो, केवल वही कैलाश फतह कर सकता है।


ऐसा भी माना जाता है कि कैलाश पर्वत पर थोड़ा सा ऊपर चढ़ते ही व्यक्ति दिशाहीन हो जाता है। चूंकि बिना दिशा के चढ़ाई करना मतलब मौत को दावत देना है, इसीलिए कोई भी इंसान आज तक कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया।
.
सन 1999 में रूस के वैज्ञानिकों की टीम एक महीने तक माउंट कैलाश के नीचे रही और इसके आकार के बारे में शोध करती रही। वैज्ञानिकों ने कहा कि इस पहाड़ की तिकोने आकार की चोटी प्राकृतिक नहीं, बल्कि एक पिरामिड है जो बर्फ से ढका रहता है। माउंट कैलाश को "शिव पिरामिड" के नाम से भी जाना जाता है।
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जो भी इस पहाड़ को चढ़ने निकला, या तो मारा गया, या बिना चढ़े वापिस लौट आया।
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सन 2007 में रूसी पर्वतारोही सर्गे सिस्टिकोव ने अपनी टीम के साथ माउंट कैलाश पर चढ़ने की कोशिश की। सर्गे ने अपना खुद का अनुभव बताते हुए कहा : 'कुछ दूर चढ़ने पर मेरी और पूरी टीम के सिर में भयंकर दर्द होने लगा। फिर हमारे पैरों ने जवाब दे दिया। मेरे जबड़े की मांसपेशियाँ खिंचने लगी, और जीभ जम गयी। मुँह से आवाज़ निकलना बंद हो गयी। चढ़ते हुए मुझे महसूस हुआ कि मैं इस पर्वत पर चढ़ने लायक नहीं हूँ। मैं फ़ौरन मुड़ कर उतरने लगा, तब जाकर मुझे आराम मिला।
...
"कर्नल विल्सन ने भी कैलाश चढ़ने की कोशिश की थी। बताते हैं : "जैसे ही मुझे शिखर तक पहुँचने का थोड़ा-बहुत रास्ता दिखता, कि बर्फ़बारी शुरू हो जाती। और हर बार मुझे बेस कैम्प लौटना पड़ता। "चीनी सरकार ने फिर कुछ पर्वतारोहियों को कैलाश पर चढ़ने को कहा। मगर इस बार पूरी दुनिया ने चीन की इन हरकतों का इतना विरोध किया कि हार कर चीनी सरकार को इस पहाड़ पर चढ़ने से रोक लगानी पड़ी।कहते हैं जो भी इस पहाड़ पर चढ़ने की कोशिश करता है, वो आगे नहीं चढ़ पाता, उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है।यहाँ की हवा में कुछ अलग बात है। आपके बाल और नाखून 2 दिन में ही इतने बढ़ जाते हैं, जितने 2 हफ्ते में बढ़ने चाहिए। शरीर मुरझाने लगता है। चेहरे पर बुढ़ापा दिखने लगता है।कैलाश पर चढ़ना कोई खेल नहीं

29,000 फ़ीट ऊँचा होने के बाद भी एवरेस्ट पर चढ़ना तकनीकी रूप से आसान है। मगर कैलाश पर्वत पर चढ़ने का कोई रास्ता नहीं है। चारों ओर खड़ी चट्टानों और हिमखंडों से बने कैलाश पर्वत तक पहुँचने का कोई रास्ता ही नहीं है। ऐसी मुश्किल चट्टानें चढ़ने में बड़े-से-बड़ा पर्वतारोही भी घुटने तक दे।हर साल लाखों लोग कैलाश पर्वत के चारों ओर परिक्रमा लगाने आते हैं। रास्ते में मानसरोवर झील के दर्शन भी करते हैं।लेकिन एक बात आज तक रहस्य बनी हुई है। अगर ये पहाड़ इतना जाना जाता है तो आज तक इस पर कोई चढ़ाई क्यों नहीं कर पाया।


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बुधवार, 16 नवंबर 2011

The White House Auto-Response Message

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To: <akvashokbindu@gmail.com>
Date: गुरुवार, 18 नवंबर, 2010 12:20:02 अपराह्न GMT
Subject: The White House Auto-Response Message

Due to the high volume of messages received at this address, the White House is unable to process the email you just sent. To contact the White House, please visit:

http://www.whitehouse.gov/contact [http://www.whitehouse.gov/contact]

Thank you.


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मंगलवार, 15 नवंबर 2011

रुहेलखण्ड को चाहिए रुहेलखण्ड प्रदेश

बरेली मण्डल (रुहेलखण्ड) ,उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटने की उप्र सरकार की घोषणा के साथ इस विषय पर आम जनता में चर्चा खास हो गयी है. बरेली ,बदायूं ,पीलीभीत , शाहजहांपुर की जनता में इसकी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है .विविध सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि कुछ लोग रुहेलखण्ड के पक्ष में व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न शामिल होने के सम्बंध में सम्पर्क प्रारम्भ कर दिया है . मानवता हिताय सेवा समिति के संस्थापक अशोक कुमार वर्मा 'बिन्दु' ने बताया कि इस पर मण्डल के वरिष्ठ व्यक्तियों से सम्पर्क किया जा रहा है . विचारविमर्श के बाद अगली रणनीति बनायी जाएगी .

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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

सुनो ,आरदीस्वन्दी से जा कर कहना .

मानीटर पर चलचित्र आ रहे थे . ये चलचित्र भुम्सन्दा धरती के थे
.आरदीस्वन्दी अपनी पच्चीस सदस्यीय टीम के साथ भयानक जंगल में थी.
लाखों प्रकाशवर्ष दूर एक धरती सनडेक्सरन,जहां के मूलनिवासी
त्रीनेत्री थे . आरदीस्वन्दी का वह चमकीला अण्डाकार पारदर्शी पत्थर!जो कि
उच्च स्तरीय सम्वेदी कम्पयूटर पीढ़ी का था.पारदर्शी दीवारों से बने एक
पिरामिड के अन्दर एक पारदर्शी टेबिल पर जो रखा हुआ था.जिसमें बर्फीले
मैदानों के चलचित्र आ रहे थे.इन चलचित्रों मेँ एक यति कहीँ जाता हुआ
दिखायी दे रहा था .

बर्फीले मैदान मेँ चल रही बर्फीली हवाओं के बीच वह यति!

वह कभी कभी चीख पड़ता था .अनेक आवाज निकालता था .जैसे कि -

"कपचटतिकुक पच चकती कच तकचट काटापका . यपचपजगड फज ख दचडीफ खचायठी
. चाकपी चकती . चकती ! चकती ! चटकतचि चमगजीफ कचयी .चकती! "

फिर वह एक गुफा के बाहर खड़ा हो चीखने लगा -
"चकती !......चकती......चकती! चटपकी छटत पछ द छ मथ चखड इखट . चकती ! चकती ! "

गुफा के अंदर अनेक लाशेँ रखी हुई थीं .जिनका विशालकाय शरीर व कद
लगभग ग्यारह फुट था.

इधर भुम्सनदा के जंगल में आरदीस्वन्दी अपनी टीम के साथ एक नदी के
किनारे पहाड़ी पर एक गुफा के सामने थे.सभी तम्बूओं को उखाड़ने मेँ लगे
थे.बरसात तेज हो चुकी थी.सभी सामान को उठा उठा कर गुफा मेँ ले जा कर रख
रहे थे.

अचानक आरदीस्वन्दी ने इधर उधर देख और फिर -
"कदफनेडरीस व दसलोफानी ! कदफनेडरीस व दसलोफानी कहनाह हयहेइ."

एक युवती बोली -"दोनों बूतों के पास गये थे."

कदफनेडरीस एक तीननेत्री युवक व दसलोफानी एक युवती जो तीन नेत्री
तो नहीं थी लेकिन सनडेक्सरन से ही कदफनेडरीस के साथ आयी थी . दोनों सह
जीवन जी रहे थे.


दसलोफिन अकेली रह गयी थी . बूतों के पास खड़ी वह कदफनेडरीस को
जाते देख रही थी .

"सुनो,आरदीस्वन्दी से जाकर कहना...."-दसलोफीन जब बोलने को हुई थी तो.... !?















शनिवार, 6 अगस्त 2011

यति के साथ

सागर के लहरों के बीच एक मत्स्यनारी व एक मत्स्यनर जलक्रीड़ा कर कर रहे थे.


इधर ऊपर आकाश में एक अण्डाकार यान अपनी गति कम कर चुका था.

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: <akvashokbindu@gmail.com>
Date: शनिवार, 6 अगस्त, 2011 12:21:54 अपराह्न GMT+0000
Subject: यति के साथ

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: "go@blogger.com" <go@blogger.com>
Date: शनिवार, 6 अगस्त, 2011 12:03:24 अपराह्न GMT+0000
Subject: यति के साथ

आज से लगभग आठ करोड़ वर्ष पूर्व जब पृथुमहि पर वर्तमान मेँ उपस्थित हिमालय के स्थान पर सागर था.
सनडेक्सरन निवासी एक तीननेत्री अपने अण्डाकार यान से एक यति मानव के साथ पृथुमही की यात्रा पर था.
यह वह काल था जिसे जीवनशास्त्रियों,मानवशास्त्रियों,पुरातत्वविदों,आदि ने इस काल को अभिनूतन काल कहा है.

"आदम व हबबा के उत्त्पत्ति का स्थान हालांकि सउदी अरब या भूमध्यसागरीय प्रदेश था लेकिन ज्ञानी मानव का विस्तार का कारण तुम यति मानव होगे.सांतवें मनु के पूर्वज यति ही होंगे. "

यति खामोश थाय.

"आज यहाँ सागर है.भविष्य में यहां पर पर्वत होगा.इसका मूलस्थान ब्रहमदेश नाम से जाना जाएगा.जहाँ सूक्ष्म अनन्त शक्ति अंश विराजमान होकर मानव सभ्यता को पल्लवित व विकसित करने के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी.विभिन्न आत्माओं में बंट कर ब्रह्म यहीं बास करेगा.धरती के अन्य प्राणी स्थूल,भाव,सूक्ष्म,मनस भाग शरीर से मुक्त हो आत्मा मेँ प्रवेश कर यहीं से नियन्त्रित हों और धरती पर जन्म लेने वाली पूर्वजाग्रत आत्मा के मदद के लिए यहीं से सहायता को आत्माएं पहुंचेंगी.यति का शरीर धारण कर यहां आत्माएं स्थूल,भाव,सूक्ष्म व मनस मुक्त रहोगे "

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गुरुवार, 4 अगस्त 2011

मत्स्य मानव व जलचर!

त्रिनेत्री नागरिकों की धरती -सनडेक्सरन !
आरदीस्वन्दी की वृद्ध माँ-अफस्केदीरन दीवार पर आ रहे चलचित्र को देख रही थी.
यह चलचित्र भुम्सन्दा धरती के थे.एक वृद्ध व्यक्ति वहां आ पहुंचा और चलचित्र को देखने लगा.चलचित्र मेँ आरदीस्वन्दी को अपनी टीम के साथ भयानक जंगल में वाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ते दिखाया गया था.
चलचित्र मेँ जंगल के बीच मूसलाधार बरसात होना स्पष्ट था.

तेज मूसलाधार बरसात!
बरसात कि.......?!

एक आकाशगंगा जहां जल ही जल!बिल्कुल थल नहीं! ऐसे मेँ जलचर प्राणियों के बीच मत्स्यमानव ! मत्स्यनर व नारी दोनों ही!

नारायण अब क्वासर क्षेत्र में पहुंच चुका था.

* * * *

सागर की तेज उठती लहरें !
समुद्र में ही एक विशालकाय नाग के ऊपर एक मत्स्यनारी बैठी लहरों की मौज ले रही थी.उसने जब देखा कि एक वृद्ध व्यक्ति अर्थात नारायण तो जल में छलांग लगा कर नारायण की ओर बढ़ गयी.

"यचाखँठपिकठेटचतछटे छडकच अर्थात आज यहां कैसे ?" मत्स्यनारी ने नारायण से पूछा.

"अटेपतकचीयपत चारक अर्थात बस तुम्हारी याद आ गयी."

..तो मत्स्यनारी मुस्कुरा दी.


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बुधवार, 3 अगस्त 2011

वह पांच वर्षीय बालक !

दो आकाशगंगाएं जब टकराती हैं तो लाखों सौर परिवार उजड़ जाते हैं.ब्राहमण्ड मेँ एक आकाशगंगा अब ब्राह्माण्डखोर के नाम चर्चित हो चुकी थी.


आरदीस्वन्दी की मां अफस्केदीरन व सद्भावना इमारत के संस्थापक महागुरु अर्थात उन्मुक्त जिन का शिष्य नारायण अब वृद्ध हो चुके थे.दोनो इस समय
मेडिटेशन मेँ थे.

अब से 1220 पूर्व अर्थात सन 4800 ई0 के 19 जनवरी ! ओशो पुण्यतिथि !!
एक हाल में बैठा उन्मुक्त जिन मेडिटेशन मेँ था.उसके कान मेँ आवाज गूँजी -

"आर्य,उन्मुक्त! तुम अभी जिन नहीं हुए हो.जिन के नाम पर तुम पाखण्डी हो.तुम को अभी कठोर तपस्या करनी होगी. "


'उन्मुक्त जिन' के अज्ञातबास मेँ जाने के बाद कुख्यात औरतें ब्राह्माण्ड मेँ बेखौफ होकर आतंकवाद मचाने लगीं ,इन कुख्यात औरतों के बीच एत पांच वर्षीय बालक ठहाके लगा रहा था.


यह कलि औरतें......?!

पांच वर्षीय बालक मानीटर पर ब्राह्माण्डखोर की सक्रियता को देख देख ठहाके लगा रहा था.


इधर उन्मुक्त जिन एक वर्फीली जगह मेँ एक गुफा अन्दर मेडिटेशन मेँ था.


सन4800ई का वह पांच वर्षीय बालक......?!

अफस्केदीरन ने जब नारायण की ओर देखा तो नारायण अपने स्थान पर न था.


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द्वितीय विश्वयुद्ध और नेता जी !

गांधी जानते थे कि वास्तव मे हमारे स्थूल शरीर को मारने वाला गोडसे नहीं,गोडसे तो सिर्फ इस्तेमाल किया गया.

गांधी की हत्या करने के बाद अब गोडसे जेल में था.
गांधी को मार कर वह अब दुखी था.
"मैं तो यहीं जानता था कि वर्तमान हालातों के लिए गांधी दोषी हैं लेकिन .....अब मुझे पटेल व नेहरु का चरित्र संदिग्ध लगने लगा है."

द्वितीय विश्व युद्ध मे सुभाष बाबू को अन्तर्राष्ट्रीय अपराधी घोषित कर दिया गया था.युरोपीय उपनिवेशवाद के स्थान पर अब विश्व मेँ अमेरिकी भौतिक उपनिवेशवाद अपना स्थान बनाने लगा था.जापान के सहयोग से सुभाष बाबू ब्रिटिश शासन उखाड़ फेंकने के लिए अनेक क्षेत्रों को ब्रिटिश मुक्त कर भारत मेँ प्रवेश कर ही पाये थे कि अमेरिका ने जापान पर परमाणु हमला बोल दिया. यह शायद अमेरिका की बौखलाहट थी.सुभाष बाबू को वापस लौटना पड़ा.जिस कारण उनकी मजाक भी बनायी गयी कि 'दिल्ली चलो ' नारा लगाने वाले अब बापस भागे.
लेकिन-
सुभाष बाबू ने कहा कि 04 फरबरी का इन्तजार कीजिए.
फिर चार फरबरी के बाद नौ सेना विद्रोह और यहां के ब्रिटिश शासन के स्तम्भ माने जाने वाले विभाग विरोध मेँ आ गये.
इधर एलियंस को लेकर ...? 



इधर अमेरिका के न्यू मैक्सिको में उड़न तश्तरी गिरी जिसको अमेरिकी सरकार ने छुपाया



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शनिवार, 30 जुलाई 2011

आदि मानव कूर्म क्षत्रिय:कितना सच कितना झूठ? लेखक:अशोक कुमार वर्मा'बिन्दु'

कश्यप गोत्र धारियों का इतिहास शेष गोत्रधारियों से पुराना है.

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Date: रविवार, 31 जुलाई, 2011 4:09:29 पूर्वाह्न GMT+0000
Subject: आदि मानव कूर्म क्षत्रिय:कितना सच कितना झूठ? लेखक:अशोक कुमार वर्मा'बिन्दु'

प्रथम ऋषि थे कश्यप.प्रथम गोत्र था कश्यप.
इण्डोकैश्पियन जिनके वंशज थे.कुमायूं का एक नाम कूर्मांचल भी मिलता है.कूर्मांचल ,कश्मीर,तिब्बत,मानसरोवर,पाकिस्तान,अफगानिस्तान,आर्यान अर्थात ईरान आर्यों का मूलस्थान कहे जा सकते हैँ.कुमायूँनी व रोमनी भाषा मेँ समानता है,जिसे यमुनादत्त वैष्णव 'अशोक ' ने साबित किया है.

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Date: रविवार, 31 जुलाई, 2011 9:19:58 पूर्वाह्न GMT+0530
Subject: यमुनादत्त वैष्णव 'अशोक':एक संक्षिप्त परिचय

दक्षिणी भारत,प्राचीन सुमेर,मिश्र और भूमध्य सागर देशों की मौलिक सांस्कृतिक समानता के अध्ययन क्षेत्र मेँ यमुनादत्त वैष्णव 'अशोक' का नाम चिरस्मरणीय रहेगा.
इनका जन्म कौसानी (अल्मोड़ा) के निकट ग्राम धौलरा मेँ 02अक्टूबर1915ई को हुआ था.

युनेस्को द्वारा कुमाऊंनी शब्दकोष के अन्तर्राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए कोष निर्माण अनुबन्ध के लिए एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के मुख्यालय बैंकाक का आमंत्रण .

कोष निर्माण के लिए युनेस्को को साझेदारी का अनुबन्ध और वित्तीय सहायता.

बैंकाक की यात्रा के दौरान "थाइलैण्ड की अयोध्या" शीर्षक 12 लेखों के ग्रन्थ का प्रणयन.


मार्च1989को 75वर्ष पूरे होने पर 02अक्टूबर सन 1990 को नैनीताल के बुद्धिजीवियोँ द्वारा अभिनन्दन तथा उनके ग्रन्थ "पुरस्कृत विज्ञान कथा साहित्य" का लोकार्पण .

सन 1990ई0 तक इनके द्वारा 34 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी थीं.जिनमेँ -विज्ञान कथा साहित्य ,15 उपन्यास, 07 कथा संग्रह ,08 हिन्दी विज्ञान साहित्य, 05 संस्कृति और इतिहास .

यह कुमाऊं संस्कृति परिषद ,नैनीताल के अध्यक्ष भी रहे.उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा 'द्रविण और विश्व मानवता'ग्रन्थ पर संस्कृति पुरस्कार से सम्मानि किया गया.

इण्डोकैस्पियन(आदि द्रविड़)संस्कृति पर यरुशलेम अन्तर्राष्ट्रीय स्वयंसेवी सम्मेलन मेँ मार्च अप्रैल 1985ई0 में मध्यपूर्व,मिश्र व रोम की यात्रा.

प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन नागपुर मेँ जनवरी 1975 मेँ 'कुमाऊंनी और अन्तर्राष्ट्रीय रोमनी (जिप्सी) भाषा'की समानता पर पढ़ा गया निबन्ध.

बालक हफ्कदम के सवाल?

आखिर आजादी वक्त के अनेक दस्तावेज सुभाष व शास्त्री की मृत्यु सम्बन्धी दस्तावेज गायब क्यों कर दिये गये थे?भिण्डरावाले को पैदा किसने किया था ? लिट्टे को किसने पैदा किया था?बोड़ो आन्दोलन को किसने पैदा किया था?राजीव व संजय गांधी की हत्या के पीछे वो अदृश्य लोग कौन थे?


बालक हफ्कदम युवती फदेस्हरर से बोला-"हम दोनों भुम्सन्दा की ओर चल तो रहे हैँ लेकिन मैँ सोंचता हूँ क्या हमें वास्तव मेँ भुम्सन्दा पर चलना चाहिए?"


"क्योँ?ऐसी बात क्योँ?"


"सद्भाव तक पहुँचने के आरदीस्वन्दी के 25 सदस्यीय टीम के अभियान मेँ आखिर हमेँ क्यों नहीं शामिर किया गया?जब हमेँ शामिल नहीं किया गया तो फिर भुम्सनदा पर हम क्योँ?हम क्यों जा रहे है भुम्सनदा?"

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Date: रविवार, 31 जुलाई, 2011 4:34:24 पूर्वाह्न GMT+0530
Subject: बालक हफ्कदम के सवाल?

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

भुम्सन्दा की ओर हफ्कदम!

भयानक जंगल! आरदीस्वन्दी की टीम मेँ 25 व्यक्ति शामिल थे जो अब भयानक जंगल मेँ थे.इधर तीन नेत्रधारी बालक हफ्कदम!पृथु मही पर बालक हफ्कदम अपने साथ सनडेक्सरन से आयी युवती फदेस्हरर के साथ एक लैण्डमार्क पर था।.दोनों भुम्सन्दा की ओर यान से रवाना होने वाले थे.
"प्रकृति मेँ मानव ही ऐसा है जिसने अपनी क्षमताओं के समक्ष अहंकार, द्वेषभाव, भौतिक निजी स्वार्थ,आदि के वशीभूत हो आपस में लड़कर हमेशा तीसरे को फायदा दिया है "-फदेस्हरर बोली .एक सन्यासी बोला-
"जाति पंथ चक्कर मेँ पड़कर मानव ही मानव का खून करता आया था.वीरभोग्या बसुन्धरा .....वीर धर्म की रक्षा के लिए नहीं भोग के लिए हो गया,प्रकृति व मानव पर मनमानी के लिए हो गया.महाभारत युग सारी पृथ्वी महाभा अर्थात महान प्रकाश मेँ रत न हो कर भोगबिलास मेँ लिप्त हो अन्यायवादियों के शिकार हो गयी थी.तो ऐसे मेँ पृथ्वी को भार से मुक्त कराने के लिए अनन्त शक्ति श्री कृष्ण मेँ जागृत हो धरती पर अवतरित हुई इसके जाने के कुछ हजार वर्ष बाद पृथ्वी फिर कालिमा से लदगयी.सोलहवी सत्ररहवीँ सदी मेँ वैज्ञानिक व मशीनरी विकास ने प्रकृति असन्तुलन खड़ा कर दिया. "सन्यासी की आंखे नम थी
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कांग्रेसी पुतले मेलों मेँ ! एक कल्पना

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सोमवार, 25 जुलाई 2011

भविष्य पर झलक : उड़नतश्तरी यान

अन्तरिक्ष विज्ञान को लेकर भविष्य को रेखांकित करती कथाएं जहां तहां नजर आती रहती हैँ.इसी पर मेरी कल्पनाओं का एक अंश , यह ब्लाग.कल्पनाओं पर आधारित कुछ और यह चित्र.
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एक किताब है नाम the eyes of darkness  1981 को पब्लिश हुई थी इसमे लिखा है कि कॅरोना वायरस को चीन ने अपने शहर वुहानके एक लैब में सबसे छुपा कर बनाया था ,बाद में चीन इसको use करेगा अपनी गरीब लोगों की आबादी कम करने के लिए जिससे कि उसे सुपर पावर बनने में आसानी हो ,और इस बुक में कॅरोना वायरस का नाम वुहान 400 के नाम पर है इस किताब में पहले ही बता दिया है कि आगे चलकर चीन इस वायरस का उपयोग करेगा बायो लॉजिकल हथियार के रूप में
लेखक का नाम dean Koontz
किताब के पेज 353 से 356

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इसमें कितनी सच्चाई है,हम अंजान है। मानवतावादी संगठनों को इस पर गौर करने की जरूरत है।संयुक्त राष्ट्र संघ को विश्व सरकार के लिए विचार बनाना चाहिए ही ,भविष्य में जैविक आक्रमण पर विचार होना चाहिए। भारत तो अपने स्तर पर काम करेगा ही।कुदरत के सम्मान में कौन सामने आएंगे?ये वक्त बताएगा। 2025 तक ऐसे हालात आ जाएंगे कि वर्तमान सिस्टम के बीच भारतीयता पनपेगी। चीन क्या विश्व युद्ध का कारण बनेगा???हम स्वप्न में चीन के सैनिकों के बीच अपने को डर में क्यों देखते हैं??

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शनिवार, 23 जुलाई 2011

चित्र : भविष्य कथांश

इस ब्लाग पर मैं अपने काल्पनिक कथांश प्रस्तुत करता ही रहता हूँ . अब कुछ यह सम्बन्धित चित्र.इस ब्लाग व इसकी कैसी भी सामग्री को कोई अन्यथा न ले.

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सोमवार, 18 जुलाई 2011

सदभाव की खोज मेँ !

सनडेक्सरन निवासी त्रीनेत्री युवती आरदीस्वन्दी की भुम्सनदा धरती पर युवक सदभाव से मुलाकात उड़नतश्तरीयान वाली धरती धधस्कनक के तीन निवासी हलदकरोड़ा(युवती),दस रलकम व फदरस्लन ने करायी थी .

सनडेक्सरन से त्रीनेत्री आरदीस्वन्दी सदभाव की ध्वनि 'ओम आमीन' तरंगों के आधार पर भुम्सनदा धरती पर पहुंच तो गयी थी लेकिन....?!


वे ध्वनि तरंगें अब शून्य मेँ थीँ.भुम्सनदा पर लैण्डमार्क के समीप सूर्यमंदिर के पास जहाँ एक दीवार पर यान व विशेष वेशभूषा पहनी एक युवती का चित्र बना था.पड़ोस मेँ एक पत्थर पर आरदीस्वन्दी बैठी थी.पशु पक्षियों द्वारा लाए गये फूल पत्तियां उसके आसपास पड़े हुए थे.ब्रह्माशकल कुछ सूक्ष्म शरीर उससे मुलाकात कर जा ही पाये थे कि वहाँ अपने उड़नतश्तरी यान से युवती हलदकरोड़ा अपने दोनेँ युवक साथी दस रलकम व फदरस्लन के साथ वहां आ पहुँची थी.

* * *

भयानक जंगल !सदभाव की ओर कदम!!

यह कदम एक अभियान से कम नहीं थे.


जून सन 5020 ई0 मेँ सदभाव के अज्ञातबास में जाने के एक हजार वर्ष बाद अब ब्राह्माण्ड से उसका सामना होने वाला था.जंगल मेँ आरदीस्वन्दी के साथ 25 लोग थे.

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बुधवार, 13 जुलाई 2011

द अफ्रीकन

भूमध्य सागरीय आदिमानव! क्रीट सभ्यता एवं अफ्रीका का इतिहास.....



दूसरी ओर एक मार्डन फैमिली,जिसमेँ एक युवती .....उम्र उसकी तीस वर्ष.


उसकी महत्वाकांक्षा कि मैं चाहती हूँ सारी दुनियां मेरी मुटठी में हो और वो (जीवनसाथी)जो हो ,उसके लिए मैं ही सारी दुनियां होऊँ.मेरे सिवा सारी दुनिया को वह भूल जाए.


इस युवती को जंगलों में जाकर विभिन्न औषधियों व वनस्पतियों के बारे में जानकारी एकत्रित करने का शौक था.वह एक मेडिकल इंस्टीटयूट मेँ कार्यरत थी.लेकिन इस वक्त वह अफ्रीका के जंगलों मे थी...




दूसरी ओर एक मनोचिकित्सालय.....एक पागल एक रुम में था,उसने कुछ चित्र बना डाले थे-
एक चित्र में भूमध्यसागरीय क्षेत्र, दूसरे मेँ संसार तीसरे मेँ पृथ्वी ,चौथे में एक आकाशीय पिण्ड ,पाँचवें मेँ एक अन्तरिक्ष यान .....


उस पागल ने अपनी आंखे बन्द कर रखी थीं.


क्या वह वास्तव मेँ पागल था-


अन्तरिक्ष मेँ एक यान!


एक स्क्रीन पर मनोचिकित्सालय के चलचित्र!उस पागल की तश्वीरें भी.....



"यह पागलखाने मेँ!"


"पृथु की धरती के हाल क्या है?कैसे बयां करें ? "


" चलो ठीक है,इसके माइण्ड हमारे कम्पयूटर के कांटेक्ट मेँ आ गया है.क्या था विचारा,दुष्ट इन्सानों ने इसे क्या बना डाला?इसका ही बेटा नहीं क्या इसके शक्ल का अफ्रीका के जंगलों मेँ?"


"नहीं!"

"इसके जुड़वा भाई की करतूत है वह..."



इधर अफ्रीका के जंगलों मेँ.....

मंगलवार, 12 जुलाई 2011

20जनवरी के विस्फोट !

तेज ठहाकों से कक्ष गूंज उठा था.
यह ठहाके थे-पच्स्कदन के,अर्थात एक सनडेक्सरन निवासी के.


"वो पृथ्वी के लिए जयचन्द्र ही सही लेकिन है हमारे काम के.ऐ न्यूयार्की,शाबाशी दे डालो मेरी ओर से सबको."


"ओके सर!"


फिर पच्स्कदन विडियो फोन पर एक युवती फन्जेफडस से सम्पर्क करता है.


"फन्जेफडस!आज मै बहुत खुश हूँ.देख लो मुझे तेरी जरुरत नहीं पड़ रही है.देख मै तेरे बिना भी बहुत खुश हूँ."


"यह तेरी खुशी नहीं, तेरी मौत का जश्न है."


"हूँ!तू तो मुझे चाहती है प्रेम करती है."



"तू तो कलंक है कलंक!सनडेक्सरन धरती के लिए.आगे चल कर तुझे यहाँ के नागरिक ही नहीँ सारी धरतियों के मनुज तुझपे थूकेँगे ."


"हूँ!होने दो!"


फिर पच्स्कदन कक्ष से बाहर हो जाता है.


इधर मोनिका-

मोनिका का सारा कामकाज ,उसका और उसके साथियों का कार्यालय,गुप्त आवास,नियन्त्रण कक्ष,आदि पहाड़ों के नीचे अण्डरग्राउण्ड थे.
जो अब कुशक्तियों के विध्वंसक कार्यवाहियों के शिकार हो चुके थे.


मोनिका अन्तरिक्ष के किसी अज्ञात धरती से यान द्वारा कहसरक्यूनसे (त्रीनेत्री सनडेक्सरन निवासी) व ननकरेमक निवासी ताम्ररंगी नाटा व्यक्ति के साथ हाहाहूस धरती की ओर जा रही थी.
* * *


हाहाहूस धरती पर!


हाहाहूस धरती पर एक गुफा के सामने 'कक् लएश्श देवय ' की आदम कद प्रतिमा लगी हुई थी.जिसके सामने एक चबूतरे पर बैठा शक्ति वम्मा अपने पुत्र के साथ मेडिटेशन मेँ था .




मोनिका का यान एक गुफा के अन्दर प्रवेश कर गया.यान के रुक ने के बाद मोनिका दोनों के साथ यान से बाहर आ गयी.आगे बढ़ जब तीनों एक विशाल कक्ष में प्रवेश किए तो वहाँ उपस्थित युवक युवतियाँ व व्यक्ति अपनी अपनी कुर्सी से उठ बैठे और -
अभिवादन के बाद मोनिका बोली-"शक्ति वम्मा कहाँ है ? "



एक युवती बोली-" उनका अभी मेडिटेशन का समय है,वे...."

फिर मोनिका दोनों के साथ दूसरे कक्ष में प्रवेश कर कुर्सी पर बैठ गयी.एक ओर मानीटर पर दृश्य,


कि-

कक् लएश्श की आदम कद की प्रतिमा के समीप अब शक्ति वम्मा अपने पुत्र व अन्य के साथ मेडिटेशन में था.



* * *



न्यूयार्क मेँ एक हवेली !


इस हवेली के एक कक्ष मेँ-

कुछ कुशक्ति व्यक्ति मीटिंग कर रहे थे जिसमें न्युयार्की भी उपस्थित था.


विडियो फोन से पच्स्कदन सभी को सम्बोधित कर रहा था.


"....ए न्यूयार्की!जरा सम्भल कर . मोनिका के ठिकानों के साथ साथ चर्चित के कुछ ठिकानों पर विस्फोटों से वे और सशक्त हो कर उभर रहे हैं.रुचिको पृथ्वी पर आने वाली है.हम नाटक खेल रहे है,देखो कितना कमयाब होते है कि वह पृथ्वी पर न आने की अपनी शपथ न तोड़े."


एक अनाम पागल को एक अमेरीकी पागल खाने से निकाल कर समुद्री जहाज से समुद्र के बीच फेँक दिया जाता है.

लेकिन कुछ देर बाद वह जहाज एक विस्फोट से नष्ट हो जाता है.



इधर अनाम....!


समुद्र की लहरों से जूझते अनाम की तश्वीरें स्क्रीन पर थीं.


जिस पर निगाह थी-अशोक शक्ल व्यक्ति की.
अशोक शक्ल व्यक्ति की ?

हाँ!अशोक शक्ल व्यक्ति की ही निगाहें स्क्रीन पर थीँ.


स्क्रीन पर-


एक व्यक्ति एक यान समुद्र में उतार कर उस पागल अनाम को बचा लेता है.



अशोक शक्ल व्यक्ति स्क्रीन से निगाहें हटा कर पीछे खड़ी एक नवयुवती को देख,जो स्कर्ट ब्लाउज पहने थी-
" तुम यहाँ से चलने की मेरी व्यवस्था करो."


"क्या?सर!आज और रुक लेते.वैसे भी इस बार डेढ़ महीने बाद यहाँ आये हो."


वह उठ कर वह नवयुवती के रोकने के बाबजूद बाहर निकल आया.



अशोक शक्ल जब बाहर आया तो अनाम को देख-
"धन्यवाद!"

"सर!धन्यवाद कैसा?मेरे होते भी वहाँ बम विस्फोट!"
"क्या सोंचने लगे?"
"हूँ, ये सत्तावाद व पूंजी वाद का खेल कब थमेगा?सन2019-20 से नया करबट लेगा!"
"क्या?समझा नहीं?"
"हिटलर याद है?पहले मुर्गे के पर को नोच डालो, फिर....??"
"फिर क्या?फिर दाना डाल दो।"
"जनता भी मूर्ख है?जनतंत्र तो जनता का शासन है लेकिन....?"
"अब भय का खेल वायरस,जैविक आक्रमण व उसके आड़ में व्यापार....अनेक सत्ताएं भी न समझ पाएगीं सन2020 में!"

न्यूमैक्सिको : सन1947ई0



               सन 1947ई 0 का समय!
               सत्ता हस्तान्तरण वक्त!

अप्रत्यक्ष रुप से सत्ता ब्रिटिश के ही हाथ में रहे ,इसके लिए नेहरु को तैयार कर लिया गया था.लार्ड माउण्टवेटन की पत्नी के झांसे उलझ कर देश का हित भूल देश विभाजन व कामनवेल्थ का सदस्य बनने को तैयार हो गये थे.



हिन्दुस्तान के इतिहास मे एक नये अध्याय का प्रारम्भ!



न्यू मैक्सिकोँ में दो स्थानों पर उड़नतश्तरियां गिरी थीं.जिसका गबाह था-
न्यू मैक्सिको का ही मि एस.जो मानवतावादी अण्डरवर्ल्ड चीफ मोनिका के नाना थे .
वह इस वक्त अमेरीकी जेल में कैद थे.जब उसकी निगाह सलाखों से बाहर गली में पड़ी तो -


सामने गली से एक त्रीनेत्री ग्यारह फूटी व्यक्ति उसके कठघरे की ओर ही आ रहा था.


तब मि एस सोंचने लगा -
"सनडेक्सरन धरती का निवासी !"


"हा! मैं सनडेक्सरन धरती का निबासी ."मि एस ने पीछे मुड़ कर देखा,लेकिन पीछे कोई न था .आवाज पीछे से ही आयी थी.

सनडेक्सरन नागरिक करीब आ चुका था.उसने अपना हाथ सलाखों से अन्दर डाल कर मि एस के शर्ट को सामने से पकड़ कर ऊपर उठा लिया और -

"मैने सोंचा कि मि एस का मुखड़ा भी देख लिया जाए."

फिर जब वह मि एस को छोड़ देता है तो मि एस जमीन में गिर जाता है.फिर सनडेक्सरन नागरिक वहां से चलते बना.वह मि एस की निगाहों से ओझल ही हो पाया था कि-तभी उसे एक चीख सुनायी दी.यह चीख पड़ोस के एक कठघरे से आयी थी.जिसमें उड़नतश्तरियों की धरती -'धधस्कनक' का वह नागरिक कैद था जो कि मि एस के फार्म पर मि एस के साथ ही गिरफ्तार किया गया था .


मि एस को तो जेल से छोंड़ दिया गया था लेकिन उसके साथी अर्थात धधस्कनक नागरिक को नहीं छोंड़ा गया था.


दो दिन बाद-
आकाश में एक यान तीब्र विस्फोट के बाद नष्ट हो गया,जिसमें मि एस उपस्थित था.


पूरी दीवार ही एक स्क्रीन में तब्दील थी.जिसमें अन्तरिक्ष के चलचित्र आ रहे थे.अनेक अन्तरिक्ष यान तीव्र विस्फोटों के शिकार हो रहे थे .



अधेड़ावस्था से निकल वृद्धावस्था मे प्रवेश करने वाली अब मोनिका बैठी स्क्रीन पर चित्रों को देख रही थी.


सन बीस सौ इक्कीस की उन्नीस जनवरी!


आज ओशो की पुण्यतिथि के अवसर पर अनेक स्थानों पर से कार्यक्रम की सूचनाएं थीँ.भारत के खजुराहों में भी कार्यक्रम का आयोजन था.खजुराहो बैसे तो सन1999ई में ही विश्वपरिदृश्य पर आ गया था.खजुराहो के एक हजार वर्ष पूर्ण होने के अबसर पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था.इस सम्बन्ध में ओशो की काफी विस्तृत योजना थी,लेकिन अफसोस वह सन उन्नीस सौ नब्बे में ही इस दुनिया से जा चुके थे.
सन1999 - 2000ई
खजुराहो कार्यक्रम ओशो प्रेमियों के लिए अधिक सन्तुष्टि प्रदान न कर सका था लेकिन 2031में19जनवरी से 26जनवरी तक का सांस्कृतिक आध्यात्मिक कार्यक्रम काफी आनन्ददायक था क्योंकि इस कार्यक्रम काफी आनन्ददायक था क्योंकि इस कार्यक्रम की सारी योजना ओशो प्रेमियों की थी.


लेकिन -


दुनियां में विभिन्न स्थानों ,कृत्रिम उपग्रहों,अन्तरिक्ष यानों व रडार केन्द्रों को विस्फोटों के माध्यम से निशाना बनाया गया था.




अन्तरिक्ष में एक अज्ञात धरती ,जहां से एक अन्तरिक्ष यान उड़ कर अन्तरिक्ष यात्रा पर था.इस अन्तरिक्ष यान में तीन लोग उपस्थित थे-मोनिका,ननकेरमक नागरिक जो कि ताम्ररंगी नाटा था,व तीसरा-सनडेक्सरन नागरिक 'कहसरक्यूनसे' .

'कहसरक्यूनसे' से मोनिका बोली-"यान को हाहाहूस की ओर मोड़ दो."



"हमारे पूर्वजों ने अमेरीका व अन्तरिक्ष की कुछ कुशक्तियों के साथ मिल कर मोनिका के मानवतावादी वर्ल्ड को ध्वस्त कर दिया था.आज हम फिर देवरावण के साथ मिल कर मानवतावादी शक्तियों को नष्ट करेंगे . "



-सनडेक्सरन का एक बागी नागरिक 'चटकाएतपयटचट' बोला.
"सन 2020ई0 एक संस्था अपना 75 वां वर्षगाँठ माना  रही होगी। वह संस्था के लोग पूरी दुनिया में अनेक स्थानों से अपने अपने स्तर से मुहिम चला रहे होंगे।"

"तो....."

"पूरी बात तो सुनों- मनुष्य इतना गिर चुका होगा कि सूक्ष्म जगत की नगेटिव पॉजीटिव घटनाएं उन्हें नहीं दिखाई दे रही होंगी।हर शहर में उसका अहसास करने वाले तो होंगे लेकिन उनको लोग जब तक जाने गे तब तक काफी देर हो चुकी होगी।

"ऐसा क्या...!?"

" कुदरत इंसान जाति के कुकृत्यों से प्रभावित हो कर सन्तुलन बनाने में जो करेगी वह का प्रभाव इंसान नहीं झेल पाएगा। दक्षिण भारत तब दुनिया के लिए महत्वपूर्ण होगा।कोरो-ना अभियान बीच साइबेरिया के पड़ोस से कुकर्म का परिणाम विश्व के इंसानों को निगले गा तब लोगों की आंखे खुलेंगी। कोरो को तब स्वीकर करेंगे।"

"ये कोरो क्या? कोरो - ना क्या?"

"इस पर अभी यही है कि कोरो का मतलब भारत के गांव में सफाई से है। विस्तार से तो तभी पता चलेगा।"

"बीसलपुर से कालसे महाराज के पास सन 1996-97 में....'

 "वहां भावी विश्व को लेकर सूक्ष्म शक्तियों से प्रभावित हो तीन चार बार वार्ताएं हुई हैं।"

" उसी दौरान एक रात्रि गोपी टाकीज की दुकानों के सामने चबूतरे पर सुन सान समय दो युवकों के बीच आई जी या जी आई नाम से एक मिशन को देखा गया।"

"जिसे सन 1990-91 में बीसलपुर के ही डिग्री कालेज के मैदान में कुछ विद्यार्थियों के बीच महाभारत का नाम दिया गया था।