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शनिवार, 3 अगस्त 2019

हां, एलियन्स हैं!अन्य जीवनधारी धरतियाँ भी::अशोकबिन्दु

हां, एलियन्स हैं व और भी धरतियाँ भी हैं जहाँ जीवन है::अशोकबिन्दु
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बरेली, रुहेलखण्ड!! अनेक बार विश्व में कहीं न कहीं चर्चा होती रही है कि एलियंस हैं कि नहीं हम तो यही कहेंगे कि एलियंस हैं  ब्राह्मण्ड में ऐसी भी धरती है जहां जीवन है। हमारे अंदर कुछ ऐसा है जो अनंत यात्रा का साक्षी है लेकिन हम उसकी ओर होते नहीं। हम प्रत्याहार में नहीं। क्यों न हम हर रोज सुबह उठकर अनुलोम विलोम, कपाल भारती आदि करते हैं लेकिन हम उन स्थितियों को अवसर नहीं देते जो हमारे दिल दिमाग, मन को उस ओर ले जाए जो अनंत यात्रा का साक्षी है। असली ज्ञान अनुभव व एहसास से आता है। कभी कभी आकस्मिक ऐसी परिस्थितियां भी पैदा हो जाती हैं जो हमें उससे जोड़ती हैं जो अनंत यात्रा का साक्षी हैं।
 हम किशोरावस्था से  ही अपने अंदर झांकने की कोशिश करने में लगे रहे । ऐसे में कुछ एहसास हमें होते रहे ।जब हम इंटर के छात्र थे उस समय भी हमने अपने मित्रों विशेष रूप से  सुनील संवेदी को अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी कुछ बातों को ,तथ्यों को भविष्य के संबंध में रखा था लेकिन हमारी उस वक्त भी मजाक उड़ाई जाती थी ।आज फिर हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको पूर्ण विश्वास से कहना चाहेंगे- एलियंस हैं। अंतरिक्ष में अन्य धरती है। जहां जीवन है। वेदांग के छह अंग हैं आखरी अंग है ज्योतिष। इस पर भी हम कहते रहे हैं यह भी एक विज्ञान है।



अमेरिका में जून1947 को न्यूमैक्सिको में दो उड़नतश्तरीयां गिरी थीं।

जो प्रमाण हैं कि अंतरिक्ष में कहीं एलियन्स है न।

मंगलवार, 9 अप्रैल 2019

मानव वही जिसमें मानवता!!!

मनुष्य जातिवाद/मजहबवाद/संस्था वाद/आदि के लिए नहीं है.
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प्रकृति अभियान  को समझिए....चेतना/ईश्वर  के अभियान को समझिए.मनुष्य स्वयम क्या है?वह प्रकृतिअंश  व  ब्रह्म अंश है.हम प्रकृतिअंश व् ब्रह्मअंश हैं. प्रकृतिअंश व ब्रह्मअंश में समसम्मान/समअस्तित्व(श्री अर्धनारीश्वर अबधारना) बिना हमारा क्या है?तुम्हारी कृत्रिम सोंच/व्यवस्था/वस्तुएं /आदि कब तक चलेंगी?जो क्षणभंगुर है,उसमें रमने से क्षणभंगुर  आनन्द/वस्तुओं /भूत योनि आदि की सम्भावनाओं को प्राप्त होंगे.....देव/आत्मा/आदि स्तर को नहीं....कुरुशान(गीता) में भी श्री कृष्ण कहते हैं--- तू जिसमें लीन(भजे गा) लीन होगा,उसको ही प्राप्त होगा.इसलिए  अपने मन का भी प्रवन्धन करो.तनप्रवन्धन से ही सिर्फ भला नहीं होने वाला. और फिर हम मन के 10 भाग में से भी 01 भाग सही से इस्तेमाल नहीं  करते.

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स्तर | प्राकृतिक  | साधना
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स्थूल|काम  |   ब्रह्मचर्य
---------------------------------------
भाव  |भय    | अभय
         |घृणा  | प्रेम
         |क्रोध  | करुणा
         |हिंसा  | मैत्री
---------------------------------------
सूक्ष्म  |सन्देह  | श्रद्धा
          | बिचार| विवेक
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मनस |कल्पना|सङ्कल्प
         |स्वप्न   |अतीन्द्रिय
         |           | दर्शन
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 हमारे अंदर भी नगेटिव- पजटिव अर्थात स्त्री -पुरुष अर्थात प्रकृति- ब्रह्म होता है.अतः योग से हम आंतरिक सम्भोग(सम अस्तित्व/समसम्मान/आदि)  की दशा  भी  पा सकते है. जिसके बाद हम अपने अचेतन मन (कल्प वृक्ष/कामधेनु) को  पा कर अपनी कामनाओं  को पूर्ण कर सकते  हैं.

रविवार, 17 मार्च 2019

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=282258996021379&id=100027118429546

भविष्य वाणियों में 2011 -2025 का समय भूमिका है 2025 के बाद कि दुनिया

*साक्षी महाराज के मुंह से निकल गयी असली बात! कहा- देश में नहीं होंगे 2024 के बाद कोई चुनाव*

विवाद , , शुक्रवार , 15-03-2019

*जनचौक ब्यूरो*

नई दिल्ली। बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि 2024 के बाद देश में कोई चुनाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ''हमारे नेता मोदी सारे विश्व के नेता हैं और सारे देश में चर्चा है, मोदी हैं तो देश है।'' वह उन्नाव में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। आपको बता दें कि साक्षी महाराज यहीं से बीजेपी के सांसद भी हैं।

*बीजेपी सांसद के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वह जिस बात की पहले से आशंका जता रहे थे उसको साक्षी महाराज ने खुलकर कह दिया है।*

*साक्षी महाराज ने कहा कि 'अब जो चुनाव होगा वो देश का चुनाव होगा। मैं संन्यासी हूं और कह रहा हूं कि ये चुनाव देश का आखिरी चुनाव है और 2024 में चुनाव नहीं होगा।'' उन्होंने कहा कि केवल यही चुनाव है, ये चुनाव देश के नाम पर लड़ा जा रहा है।*


बीजेपी सांसद के बयान के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ''बीजेपी ने अपना मक़सद साफ़ कर दिया। मैं तो पहले से ही कह रहा हूं की मोदी और अमित शाह की जोड़ी दोबारा आ गयी तो वे संविधान बदल देंगे और चुनाव करवाना ही बंद कर देंगे। हिटलर ने भी ऐसा ही किया था।''

भाजपा ने अपना मक़सद साफ़ कर दिया।

"मैं तो पहले से ही कह रहा हूँ की मोदी और अमित शाह की जोड़ी दोबारा आ गयी तो वे संविधान बदल देंगे और चुनाव करवाना ही बंद कर देंगे। हिट्लर ने भी ऐसा ही किया था।" https://t.co/agGW08ACip

— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) March 15, 2019


शायद यही सही बात है जो अनजाने में साक्षी महाराज के मुंह से निकल गयी। बुद्धिजीवियों का एक हिस्सा पूरे मामले को इसी रूप में देख रहा है। उसका मानना है कि यह देश, लोकतंत्र और उसके संविधान को बचाने का चुनाव है। लिहाजा दांव पर पूरा गणतंत्र है। उसका कहना है कि अगर इस बार मोदी फिर से जीत गए तो आने वाले दिन देश के लिए किसी कयामत से कम नहीं होंगे।

*एक दूसरे हिस्से का मानना है कि अभी तक कमान बीजेपी और उसके नेताओं के हाथ थी। और आरएसएस खुलकर आने के बावजूद पर्दे के पीछे से ही काम कर रहा था। लेकिन 2019 में अगर बीजेपी की सरकार बन गयी तो पूरी कमान आरएसएस अपने हाथ में ले लेगा। उस आईने में रखकर साक्षी महाराज की बात को आसानी से समझा जा सकता है। क्योंकि खुद आरएसएस अपने संगठन के भीतर लोकतंत्र का पक्षधर नहीं रहा है।*

*उसके यहां पदाधिकारियों का चुनाव नहीं बल्कि मनोनयन होता है। और ऊपर से हिंदू राष्ट्र में विश्वास करने वाला संगठन देश के संचालन के लिहाज से पुरानी वर्ण व्यवस्था को आदर्श प्रणाली के तौर पर देखता है। लिहाजा उसके लिए अपने राज्य में उसको हासिल करना ही सबसे बड़ा लक्ष्य होगा। जिसकी पहली और आखिरी शर्त है लोकतंत्र का खात्मा। संविधान को तिलांजलि। और गणतंत्र को इतिहास बना देना। क्योंकि इन तीनों की कब्रों पर ही कोई हिंदू राष्ट्र खड़ा हो सकता है। जो देश में आरएसएस-बीजेपी का आखिरी लक्ष्य है।*

"ये देश का आखरी चुनाव है। इसके बाद 2024 में चुनाव ही नहीं होंगे।.... ये कोई और नहीं स्वयं बीजेपी सांसद साक्षी महाराज कह रहे हैं। क्या समझें इससे?pic.twitter.com/XwR35Yq7iJ"

— Anurag Dhanda (@anuragdhanda) March 15, 2019

https://janchowk.com/pahlapanna/sakshi-maharaj-bjp-election-unnao-modi-loksabha/4324#.XIvSChNtpYM.facebook

मंगलवार, 20 मार्च 2018

सिंहासन का मतलब है, सिंहों का आसन!!!लेकिन....

हम अपने नजदीक समाज व पास पड़ोस की संस्था में देखते हैं किसकी चल रही है? जिनकी चलती है उनके रहते समस्याएं हल क्यों नहीं हो रही हैं ?विभिन्न सरकार संस्थाओं, संयुक्त राष्ट्र संघ आदि के रहते समस्याएं हल क्यों नहीं हो रही हैं ?यदि समस्याएं हल नहीं हो रही हैं तो इसका मतलब क्या है ?दुनिया को जकड़े बैठे लोग क्या समस्याओं को हल करने की क्षमता नहीं रखते? यदि बे क्षमता नहीं रखते तो फिर गद्दी खाली क्यों नहीं करते? इसका मतलब हर पल क्रांति की आवश्यकता है हर पल जिहाद की आवश्यकता है .राष्ट्रवाद, जातिवाद ,मजहबवाद...... चाहे कोई भी वाद हो उससे विश्व में शांति व मानव का कल्याण संभव नहीं है .मानवता व अध्यात्म से ही सभी समस्याएं हल हो सकती हैं .आप कहते हैं -डंडा चलाने की जरूरत है योगी हो या मोदी देश का भला होने वाला नहीं . डंडा कौन चलाएगा निष्पक्ष या पक्षपाती? अब भी क्या डंडा नहीं चल रहा ?ईमानदारी ,न्याय, मानवता ,कानून ,सुपर प्रबंधन, सुप्रबंधन पर क्या झंडा नहीं चल रहा है? गांव या वार्ड के गुंडे,माफिया आज किसके साथ खड़े हैं ?कानूनी झाड़ने वाले ,कानून के बात करने वाले ,सच्चे ,ईमानदार, इंसानियत को स्वीकारने वाले, कानूनी व्यवस्था को मानने वाले आदि नेताओं विधायकों मंत्रियों थाना अध्यक्षयों आदि के साथ खड़े है??
#शेष

गुरुवार, 22 सितंबर 2016


२1सितम्बर::विश्व शान्ति दिवस
""""""""""""""""""""""""""""""""""""""[9/29, 11:38 PM] ashok kumar verma: मोदी विश्व यात्रा बनाम तृतीय विश्व युद्ध ??
.
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इस बार के महाविश्व / महाभारत का क्षेत्र एशिया होगा ? हालाँकि इस युद्ध को तृतीय विश्व युद्ध कहा जायेगा . क्या ये वास्तव में  होगा ? इस युद्ध के कारण मैजूद हैं . भारत चाहे तो ये युद्ध आज हो जाये ?  लेकिन भारत आज  दिव्य है?वह आज वही भारत है;भा+रत अर्थात प्रकाश में रत .दुनिया एक बार फिर भारत की ओर देखने जा रही है.भारत मेंअब भी ज्ञान-- कमलों की कमी नहीं है.दुनिया के गैर भारतीयों में ऐसा कौन सा नेता है जो सारी दुनिया के लिए जाति/मजहब/देश की शरहदों से परे हो सारी मनुष्यता व प्रकृति के लिए दर्द रखता है? भारत में इस नेता होने जा रहा है?मोदी की विश्व यात्राओं को यों ही हल्के में मत लीजिए.मोदी विश्व स्तर पर उन परिस्थितियों के लिए वातावरण बना रहे हैं .मोदी जाते जाते वो कर जायेंगे जिसे उनके  दुश्मन भी याद करेंगे?

इससे पहले काफी कुछ होना है----
@संयुक्त राष्ट्र सङ्घ में भारत को स्थाई  सदस्यता

@संयुक्त राष्ट्र सङ्घ में हिन्दी भाषा को मान्यता

@भारत को जगत गुरु का दर्जा

@सन् 2022 का इंतजार व अनेक फाइलों का सार्वजनिक होना.अनेक कानूनों का संशोधन.
@विभिन्न क्षेत्रों में सक्षम होना.

@विश्व मन्च पर अपना पक्ष मजबूती से रखना व उसके लिए विश्व मत तैयार करना.

@आतंकवाद पर स्पष्ट विश्व मत तैयार करना.

@गरीब देशों व गरीबों के हित कल्याणकारी नीतियों का समर्थन.

@पर्यावरण के लिए स्पष्ट नीति का समर्थन जो गरीब देशों के अहित में न हो.

@आदि


www.akvashokbindu.blogspot.com

शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

शैतान नहीँ क्या ये ? : एलियंस

पृथु महि के इन्सानोँ के बारे मेँ जो कहेँ कम ही है . अपने पैरों पर
कुल्हाड़ी ये मारेँ ही अन्य इन्सानों ,जन्तुओँ ,वनस्पतियोँ ,आदि के
अतिरिक्त अंतरिक्ष मेँ भी विकार पैदा कर डाले .इन लोगोँ के चरित्र की
मुख्य विशेषता है -आचरण ,मन व बोली से अंतर होना.
इनका ज्ञानी भी अज्ञानी है .


पृथुमही के एक नगर मेँ रामलीला चल रहा था .दो बहुरुपिया चेहरा पर
मुखौटा लगाये घूम रहे थे .राजसी वेश मेँ ये दोनों अपने सिर पर पगड़ी बांधे
हुए थे . इनका कद लगभग तीन फुट था.


"चटपकचटापच!अब देखते हैँ कि यहाँ क्या क्या हो रहा है ?"


कुछ दूरी पर मनचले लड़कोँ का झुण्ड एक लड़की के साथ अभद्रता का
व्यवहार कर रहा था.

"मानव क्या श्रेष्ठ है ?"

"मूर्ख भी है ."

"अपराधियोँ ,माफियाओँ और जातिवादियोँ को फूल माला चढ़ा कर अपना
नेता चुनता है .सत पर जीने वालोँ को सनकी पागल कहता है .धर्म की गलियोँ
मेँ धर्म की दुर्दशा हो ."

"देखो ये सड़ा गला क्या खा रहे हैँ ?"


"इसे ये अचार कहते है .उन बोतलोँ मेँ सिरका ......?!."

"वो मधुशाला ?"

दोनोँ मधुशाला की ओर बढ़ गये .

"मधुशाला यानि की ये लोग मधु पी रहे हैँ ? मधु पिया जा सकता है . "

एक बहुरूपिया सूंघता हुआ बोला -
" नहीँ,धोखा ! हनी नहीँ "

नशे मेँ धुत्त व्यक्ति हंस पड़े .

जब दोनोँ एक शिवभक्तोँ के एक पाण्डाल मेँ पहुँचे तो -

"ऐ शिवभक्त कैसे? "


भाँग के नशे
मेँ धुत्त एक शिवभक्त बोला -"आओ ,प्रसाद चखो ."

दोनोँ एक दृसरे को देखने लगे.


" पृथुमहि पर मनुज कैसा है ? धार्मिकोँ व आध्यात्मिकोँ मेँ तक धर्म
व आध्यात्म नहीँ .सब के सब शूद्र कर्म मेँ!"


"ब्रह्मांश व प्रकृतिअंश होकर भी अपने ब्रह्मांशीय व प्राकृतिक
अंशोँ के लिए इनसे सम्बंधित अंशोँ को छोंड़कर क्रत्रिम अंशोँ के लिए अपने
ब्रह्मांश व प्राकृतिक अंशोँ को नजरांदाज कर देना कहाँ तक उचित है ?"


दोनों बहुरूपिया मेला के बाहर आ गये थे .सड़क किनारे ही एक हरे बाग
को काटा जा रहा था .

"ये हरे बाग को काट रहे ?"

" प्रकृति माँ के पूजक कहाँ ....? "

" हूँ ,ये पाँचोँ तत्वोँ को पूजते भी हैँ और अपने स्वार्थ के लिए
इनको प्रदूषित भी कर रहे हैँ ."

रविवार, 27 नवंबर 2011

एलियन्स आक्रमण की सम्भावनाओं के बीच !

सन 2025ई की 14 नवम्बर तिथि ! भविष्य रांची के रेलवे स्टेशन पर पहुँच
भी न पाया था कि एक सन्यासी भविष्य को देख कर बोला -"भविष्य,आप को भी
फुर्सत मिल गयी प्रयोगशाला से ."

"ओम आमीन!"


"ओम तत सत आमीन!"


दोनों बातचीत करते हुए प्लेटफार्म की और बढ़ गये थे .


"राजा कुरु!ये भी दो हुए हैं .मैं हस्तिन वंश के कुरु की बात नहीँ कर
रहा हूँ "-सन्यासी बोला.


"जानता हूँ आप अग्नीन्ध्र पुत्र की बात कर रहे हैँ."-भविष्य बोला .


भविष्य ! कोरिया व साइबेरिया क्षेत्र के कभी राजा रहे थे
कुरु.रोम,साइबेरिया,कुमायूँ,आदि मेँ बोली जाने वाली आदि भाषाओं की मूल
भाषा प्रियव्रत की कबीलाई भाषा थी .उत्तराखण्ड का नाम कूर्मांचल भी मिलता
है .


पृथु महि जब विनाश की ओर अग्रसर हुई है एलियन्स की गतिविधियां तेज
हुई हैँ.सन 2011ई0के 14 नवम्बर को प्रख्याक पैरानमिल लेखक माइकल कोहन का
कहना था -"पिछले कुछ समय से रुस उड़नतश्तरियाँ और संभावित एलियन यानों की
गतिविधियों का प्रमुख अड्ढा बना हुआ है जिन्हेँ सेना और सिविल एजेंसियों
ने भी देखा है."
वैदिककाल मेँ धरती पर तैंतीस करोड़ देवता थे अर्थात जो भी मानव थे
वे देवता तुल्य थे .इस पृथुमहि पर उन आत्माओं अर्थात अस्थूल एलियन्स के
नियंत्रण केन्द्र थे -काबा ,कैलाश व काशी.'कश्मीर काशी सुहोत्र पुत्र
काशिक ने,काव्य अर्थात काबा उशाना काव्य(शुक्राचार्य) व हिरण्याकशिपु
पुत्री दिव्या ने स्थापना की.ऋषभ देव ने कैलाश पर्वत को अपना स्थान
बनाया.सभी आत्माएं सतमय होती हैँ लेकिन शरीर धारण करने के बाद माया मोह
लोभ व काम के कारण उस हिसाब से अपने शरीर को निर्देशित नहीं कर पातीँ या
फिर कामकाजी बुद्धि का साथ नहीँ पा पातीँ .और ऐसे मेँ संसार मेँ उलझ कर
नरकीय,प्रेत,पितर,आदि योनियों की सम्भावनाओं मेँ जीना आरम्भ कर दिया .
जानवर कम होते गये लेकिन उनकी आत्माएं मानवशरीर धारण कर आती रहीं .आज भी
सम्भवता तैतीस करोड़ मानव ही देव योनि की सम्भावनाओं मेँ जीते होंगे .


"भविष्य!आप ठहरे वैज्ञानिक,आपको मेरी बातें निराधार लग रही होंगी ?"

भविष्य सिर्फ मुस्कुरा दिया .


रांची स्टेशन पर ही कुछ दूर किशोर किशोरियां आर एस एस की
स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य मेँ इश्तहार,स्टीकर,आदि बांट
रहे थे .कुछ मुस्लिम लड़कों ने इन किशोर किशोरियों को छेंड़ना शुरु कर
दिया.बहस बाजी के बाद नौवत मारपीट की आ गयी.प्रचार सामग्री नष्ट कर दी
गयी .सैन्य बल व अन्य व्यक्ति तमाशबीन बने देखते रहे .


एक औरत चीख रही थी -" जब तक चापलूस हिन्दुओं का शासन था तो
सेक्यूलरवाद के नाम पर तुष्टिकरण नीति चलती रही अब सेक्यूलवाद कहाँ मर
गया ?"

* * *

भविष्य अपने कमरे मेँ अकेला बैठा मानीटर युक्त दीवार पर
चलचित्र देख रहा था .

कि-


जब से ये दुनिया बनी है सत्य व अहिंसा को लेकर चलने वाले महापुरुष
आते ही रहे हैँ लेकिन मनुष्य असभ्य ही रहा.इस असभ्य मानव ने प्रकृति की
छोंड़ो धरती पर जीवन का अस्तित्व ही खतरे मेँ डाल दिया .मानव का इतिहास
हिंसा व द्वेष से भरा है .सत्य व अहिंसा के पन्नों को सिर्फ स्वर्णिम कह
कर काम चला लिया गया .

अन्तरिक्ष की अन्य धरतियों के मनुष्य तक इस धरती के मानव की मूर्खता
से असन्तुष्ट हैं और वे इस धरती पर आक्रमण करने की भी योजना बना रहे है
लेकिन उनका आक्रमण प्रकृति सुरक्षा के लिए है.


यहाँ का मानव यहाँ पर भी अपने द्वेषभावना से ही एलियन्स से युद्ध
करने को तैयार हो जायेगा लेकिन सुधरने का प्रयत्न नहीं करेगा .

इधर साइबेरिया निर्जन बर्फीले मैदान मेँ चार एलियंस घूम रहे थे उनका
तश्तरीयान कुछ दूरी पर था .ये स्थान इर्कुत्सक के समीप था जहां पहले भी
ये एलियन्स उतर चुके थे .


निर्जन स्थानों पर आते हैँ एलियन्स ?योगी भी चुनते थे निर्जन स्थान
.करते थे आत्मसाक्षात्कार .जुड़ते थे इसके बाद चेतना केन्द्रों से .और
एलियन्स ....!?

शनिवार, 26 नवंबर 2011

साइरियस से साइबेरिया तक !

दोनों तीन नेत्री थे .
दसलोफीन अकेली रह गयी थी .वह कदफनेडरीस को जाते देख रही थी.

वह जिन बूतों के समीप खड़ी थी उनके बीच एक शिला पर एक नक्शा बना हुआ था जिसमेँ भूमध्यसागरीय क्षेत्र व साइबेरियाई क्षेत्र के बीच एक मोटी सी लाइन खिंची दिखायी दे रही थी .जो दो बराबर भाग मेँ ताशकंद व काकेकश के करीब दो भागों मे बंटी थी .जहां बँटी स्थिति पर एक पर्वत व एक कछुआ बना हुआ था .दसलोफीन इस नक्शे को देखते देखते -"ऐहह ममतर.....?" मत्स्यावतार युग के शुरुआत मेँ एक आकाशीय पिण्ड साइरियस अर्थात लुन्धक से एक मत्स्यमानव भूमध्य सागर मेँ उतरा था.फिर ....!?ये साइरियस ....?!कूर्म .....?!साईबेरिया के कभी राजा थे -कुरु.जो अग्नीन्ध्र के पुत्र व प्रियव्रत के पौत्र थे .रोम ,साइबेरिया,कुमायूँ,आदि मेँ बोली जाने वाली आदिभाषाओं की मूलभाषा प्रियव्रत के कबीले की भाषा थी.सुना जाता है प्रियव्रत ने रोम की स्थापना की थी.उत्तराखण्ड का एक नाम कूर्मांचल भी मिलता है.सन2011के14नवम्बर को प्रख्यात पैरानामिल लेखक माइकल कोहान ने साइबेरिया क्षेत्र मेँ एलियन्स गतिविधियों का होना स्वीकारा.इर्कुत्सक मेँ एलियन यान उतरने की घटनाएं होती .
दक्षिण भारत महत्वपूर्ण तो होगा लेकिन सूक्ष्म शक्तियां कूर्म क्षेत्र अर्थात हिमालय,साइबेरिया आदि से भी महत्वपूर्ण होगी। कोरो शक्ति व कोरो-ना शक्ति के बीच महा संघर्ष होगा।आत्मा के अलावा कोरो क्या?लेकिन उस को नजरअंदाज कब तक करेगा मनुज? कुदरत उसी के माध्यम से सफाई करेगी!!एक डेढ़ प्रतिशत मौन के सागर में डूब विष पीने का काम करेंगे।उनसे ही सब थमेगा।सनातन है आत्मा, आत्मा से जुड़ व्यवहार स्वीकार करना होगा।
2011से 2025 ई0 के बीच का समय कोरो अर्थात सहज के लिए बेहतर तो होगा लेकिन जब 98 प्रतिशत कोरो-ना अर्थात असहजता तो दिखेगा वह ही।खेल असल और होगा...
 कोई फाइनल खेल नहीं.... सनातन तो निरन्तर है...वहां विकास नहीं वरन विकासशीलता....

कुछ वर्ष तक लेनिन को साइबेरिया में एक स्थान पर नजरबन्ध  रखा गया।
दिल्ली में नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के बाद  सुभाष बाबू भी साइबेरिया में नजरबंद रहे।
इस साइबेरिया में--
उत्तरी ध्रुव अब इधर ही आ रहा है।
शाहजहाँपुर में बाबूजी का तो कहना है-ध्रुव अपने स्थान से खिसकेगा। विनाश उत्तर से ही चलेगा।
उधर-
कैलाश पर्वत!

ये तिकोना आकार प्राकृतिक पहाड़ नहीं वरन एक पिरामिड है जिस पर बर्फ जमी रहती है-रूसी वैज्ञानिकों की एक टीम(1999)
.
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कैलाश पर्वत पर आज तक कोई क्यों नहीं चढ़ पाया है?
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हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत का बहुत महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। लेकिन इसमें सोचने वाली बात ये है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अभी तक 7000 से ज्यादा लोग फतह कर चुके हैं, जिसकी ऊंचाई 8848 मीटर है, लेकिन कैलाश पर्वत पर आज तक कोई नहीं चढ़ पाया, जबकि इसकी ऊंचाई एवरेस्ट से लगभग 2000 मीटर कम यानी 6638 मीटर है। यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक पर्वतारोही ने अपनी किताब में लिखा था कि उसने कैलाश पर्वत पर चढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन इस पर्वत पर रहना असंभव था, क्योंकि वहां शरीर के बाल और नाखून तेजी से बढ़ने लगते हैं। इसके अलावा कैलाश पर्वत बहुत ही ज्यादा रेडियोएक्टिव भी है।
...
कैलाश पर्वत पर कभी किसी के नहीं चढ़ पाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर शिव जी निवास करते हैं और इसीलिए कोई जीवित इंसान वहां ऊपर नहीं पहुंच सकता। मरने के बाद या वह जिसने कभी कोई पाप न किया हो, केवल वही कैलाश फतह कर सकता है।


ऐसा भी माना जाता है कि कैलाश पर्वत पर थोड़ा सा ऊपर चढ़ते ही व्यक्ति दिशाहीन हो जाता है। चूंकि बिना दिशा के चढ़ाई करना मतलब मौत को दावत देना है, इसीलिए कोई भी इंसान आज तक कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया।
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सन 1999 में रूस के वैज्ञानिकों की टीम एक महीने तक माउंट कैलाश के नीचे रही और इसके आकार के बारे में शोध करती रही। वैज्ञानिकों ने कहा कि इस पहाड़ की तिकोने आकार की चोटी प्राकृतिक नहीं, बल्कि एक पिरामिड है जो बर्फ से ढका रहता है। माउंट कैलाश को "शिव पिरामिड" के नाम से भी जाना जाता है।
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जो भी इस पहाड़ को चढ़ने निकला, या तो मारा गया, या बिना चढ़े वापिस लौट आया।
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सन 2007 में रूसी पर्वतारोही सर्गे सिस्टिकोव ने अपनी टीम के साथ माउंट कैलाश पर चढ़ने की कोशिश की। सर्गे ने अपना खुद का अनुभव बताते हुए कहा : 'कुछ दूर चढ़ने पर मेरी और पूरी टीम के सिर में भयंकर दर्द होने लगा। फिर हमारे पैरों ने जवाब दे दिया। मेरे जबड़े की मांसपेशियाँ खिंचने लगी, और जीभ जम गयी। मुँह से आवाज़ निकलना बंद हो गयी। चढ़ते हुए मुझे महसूस हुआ कि मैं इस पर्वत पर चढ़ने लायक नहीं हूँ। मैं फ़ौरन मुड़ कर उतरने लगा, तब जाकर मुझे आराम मिला।
...
"कर्नल विल्सन ने भी कैलाश चढ़ने की कोशिश की थी। बताते हैं : "जैसे ही मुझे शिखर तक पहुँचने का थोड़ा-बहुत रास्ता दिखता, कि बर्फ़बारी शुरू हो जाती। और हर बार मुझे बेस कैम्प लौटना पड़ता। "चीनी सरकार ने फिर कुछ पर्वतारोहियों को कैलाश पर चढ़ने को कहा। मगर इस बार पूरी दुनिया ने चीन की इन हरकतों का इतना विरोध किया कि हार कर चीनी सरकार को इस पहाड़ पर चढ़ने से रोक लगानी पड़ी।कहते हैं जो भी इस पहाड़ पर चढ़ने की कोशिश करता है, वो आगे नहीं चढ़ पाता, उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है।यहाँ की हवा में कुछ अलग बात है। आपके बाल और नाखून 2 दिन में ही इतने बढ़ जाते हैं, जितने 2 हफ्ते में बढ़ने चाहिए। शरीर मुरझाने लगता है। चेहरे पर बुढ़ापा दिखने लगता है।कैलाश पर चढ़ना कोई खेल नहीं

29,000 फ़ीट ऊँचा होने के बाद भी एवरेस्ट पर चढ़ना तकनीकी रूप से आसान है। मगर कैलाश पर्वत पर चढ़ने का कोई रास्ता नहीं है। चारों ओर खड़ी चट्टानों और हिमखंडों से बने कैलाश पर्वत तक पहुँचने का कोई रास्ता ही नहीं है। ऐसी मुश्किल चट्टानें चढ़ने में बड़े-से-बड़ा पर्वतारोही भी घुटने तक दे।हर साल लाखों लोग कैलाश पर्वत के चारों ओर परिक्रमा लगाने आते हैं। रास्ते में मानसरोवर झील के दर्शन भी करते हैं।लेकिन एक बात आज तक रहस्य बनी हुई है। अगर ये पहाड़ इतना जाना जाता है तो आज तक इस पर कोई चढ़ाई क्यों नहीं कर पाया।


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मेरें Nokia फ़ोन से भेजा गया

बुधवार, 16 नवंबर 2011

The White House Auto-Response Message

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मेरें Nokia फ़ोन से भेजा गया

------Original message------
From: The White House <whitehouse@autoresponder.govdelivery.com>
To: <akvashokbindu@gmail.com>
Date: गुरुवार, 18 नवंबर, 2010 12:20:02 अपराह्न GMT
Subject: The White House Auto-Response Message

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मंगलवार, 15 नवंबर 2011

रुहेलखण्ड को चाहिए रुहेलखण्ड प्रदेश

बरेली मण्डल (रुहेलखण्ड) ,उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटने की उप्र सरकार की घोषणा के साथ इस विषय पर आम जनता में चर्चा खास हो गयी है. बरेली ,बदायूं ,पीलीभीत , शाहजहांपुर की जनता में इसकी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है .विविध सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि कुछ लोग रुहेलखण्ड के पक्ष में व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में न शामिल होने के सम्बंध में सम्पर्क प्रारम्भ कर दिया है . मानवता हिताय सेवा समिति के संस्थापक अशोक कुमार वर्मा 'बिन्दु' ने बताया कि इस पर मण्डल के वरिष्ठ व्यक्तियों से सम्पर्क किया जा रहा है . विचारविमर्श के बाद अगली रणनीति बनायी जाएगी .

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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

सुनो ,आरदीस्वन्दी से जा कर कहना .

मानीटर पर चलचित्र आ रहे थे . ये चलचित्र भुम्सन्दा धरती के थे
.आरदीस्वन्दी अपनी पच्चीस सदस्यीय टीम के साथ भयानक जंगल में थी.
लाखों प्रकाशवर्ष दूर एक धरती सनडेक्सरन,जहां के मूलनिवासी
त्रीनेत्री थे . आरदीस्वन्दी का वह चमकीला अण्डाकार पारदर्शी पत्थर!जो कि
उच्च स्तरीय सम्वेदी कम्पयूटर पीढ़ी का था.पारदर्शी दीवारों से बने एक
पिरामिड के अन्दर एक पारदर्शी टेबिल पर जो रखा हुआ था.जिसमें बर्फीले
मैदानों के चलचित्र आ रहे थे.इन चलचित्रों मेँ एक यति कहीँ जाता हुआ
दिखायी दे रहा था .

बर्फीले मैदान मेँ चल रही बर्फीली हवाओं के बीच वह यति!

वह कभी कभी चीख पड़ता था .अनेक आवाज निकालता था .जैसे कि -

"कपचटतिकुक पच चकती कच तकचट काटापका . यपचपजगड फज ख दचडीफ खचायठी
. चाकपी चकती . चकती ! चकती ! चटकतचि चमगजीफ कचयी .चकती! "

फिर वह एक गुफा के बाहर खड़ा हो चीखने लगा -
"चकती !......चकती......चकती! चटपकी छटत पछ द छ मथ चखड इखट . चकती ! चकती ! "

गुफा के अंदर अनेक लाशेँ रखी हुई थीं .जिनका विशालकाय शरीर व कद
लगभग ग्यारह फुट था.

इधर भुम्सनदा के जंगल में आरदीस्वन्दी अपनी टीम के साथ एक नदी के
किनारे पहाड़ी पर एक गुफा के सामने थे.सभी तम्बूओं को उखाड़ने मेँ लगे
थे.बरसात तेज हो चुकी थी.सभी सामान को उठा उठा कर गुफा मेँ ले जा कर रख
रहे थे.

अचानक आरदीस्वन्दी ने इधर उधर देख और फिर -
"कदफनेडरीस व दसलोफानी ! कदफनेडरीस व दसलोफानी कहनाह हयहेइ."

एक युवती बोली -"दोनों बूतों के पास गये थे."

कदफनेडरीस एक तीननेत्री युवक व दसलोफानी एक युवती जो तीन नेत्री
तो नहीं थी लेकिन सनडेक्सरन से ही कदफनेडरीस के साथ आयी थी . दोनों सह
जीवन जी रहे थे.


दसलोफिन अकेली रह गयी थी . बूतों के पास खड़ी वह कदफनेडरीस को
जाते देख रही थी .

"सुनो,आरदीस्वन्दी से जाकर कहना...."-दसलोफीन जब बोलने को हुई थी तो.... !?















शनिवार, 6 अगस्त 2011

यति के साथ

सागर के लहरों के बीच एक मत्स्यनारी व एक मत्स्यनर जलक्रीड़ा कर कर रहे थे.


इधर ऊपर आकाश में एक अण्डाकार यान अपनी गति कम कर चुका था.

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: <akvashokbindu@gmail.com>
Date: शनिवार, 6 अगस्त, 2011 12:21:54 अपराह्न GMT+0000
Subject: यति के साथ

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------Original message------
From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: "go@blogger.com" <go@blogger.com>
Date: शनिवार, 6 अगस्त, 2011 12:03:24 अपराह्न GMT+0000
Subject: यति के साथ

आज से लगभग आठ करोड़ वर्ष पूर्व जब पृथुमहि पर वर्तमान मेँ उपस्थित हिमालय के स्थान पर सागर था.
सनडेक्सरन निवासी एक तीननेत्री अपने अण्डाकार यान से एक यति मानव के साथ पृथुमही की यात्रा पर था.
यह वह काल था जिसे जीवनशास्त्रियों,मानवशास्त्रियों,पुरातत्वविदों,आदि ने इस काल को अभिनूतन काल कहा है.

"आदम व हबबा के उत्त्पत्ति का स्थान हालांकि सउदी अरब या भूमध्यसागरीय प्रदेश था लेकिन ज्ञानी मानव का विस्तार का कारण तुम यति मानव होगे.सांतवें मनु के पूर्वज यति ही होंगे. "

यति खामोश थाय.

"आज यहाँ सागर है.भविष्य में यहां पर पर्वत होगा.इसका मूलस्थान ब्रहमदेश नाम से जाना जाएगा.जहाँ सूक्ष्म अनन्त शक्ति अंश विराजमान होकर मानव सभ्यता को पल्लवित व विकसित करने के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी.विभिन्न आत्माओं में बंट कर ब्रह्म यहीं बास करेगा.धरती के अन्य प्राणी स्थूल,भाव,सूक्ष्म,मनस भाग शरीर से मुक्त हो आत्मा मेँ प्रवेश कर यहीं से नियन्त्रित हों और धरती पर जन्म लेने वाली पूर्वजाग्रत आत्मा के मदद के लिए यहीं से सहायता को आत्माएं पहुंचेंगी.यति का शरीर धारण कर यहां आत्माएं स्थूल,भाव,सूक्ष्म व मनस मुक्त रहोगे "

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गुरुवार, 4 अगस्त 2011

मत्स्य मानव व जलचर!

त्रिनेत्री नागरिकों की धरती -सनडेक्सरन !
आरदीस्वन्दी की वृद्ध माँ-अफस्केदीरन दीवार पर आ रहे चलचित्र को देख रही थी.
यह चलचित्र भुम्सन्दा धरती के थे.एक वृद्ध व्यक्ति वहां आ पहुंचा और चलचित्र को देखने लगा.चलचित्र मेँ आरदीस्वन्दी को अपनी टीम के साथ भयानक जंगल में वाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ते दिखाया गया था.
चलचित्र मेँ जंगल के बीच मूसलाधार बरसात होना स्पष्ट था.

तेज मूसलाधार बरसात!
बरसात कि.......?!

एक आकाशगंगा जहां जल ही जल!बिल्कुल थल नहीं! ऐसे मेँ जलचर प्राणियों के बीच मत्स्यमानव ! मत्स्यनर व नारी दोनों ही!

नारायण अब क्वासर क्षेत्र में पहुंच चुका था.

* * * *

सागर की तेज उठती लहरें !
समुद्र में ही एक विशालकाय नाग के ऊपर एक मत्स्यनारी बैठी लहरों की मौज ले रही थी.उसने जब देखा कि एक वृद्ध व्यक्ति अर्थात नारायण तो जल में छलांग लगा कर नारायण की ओर बढ़ गयी.

"यचाखँठपिकठेटचतछटे छडकच अर्थात आज यहां कैसे ?" मत्स्यनारी ने नारायण से पूछा.

"अटेपतकचीयपत चारक अर्थात बस तुम्हारी याद आ गयी."

..तो मत्स्यनारी मुस्कुरा दी.


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बुधवार, 3 अगस्त 2011

वह पांच वर्षीय बालक !

दो आकाशगंगाएं जब टकराती हैं तो लाखों सौर परिवार उजड़ जाते हैं.ब्राहमण्ड मेँ एक आकाशगंगा अब ब्राह्माण्डखोर के नाम चर्चित हो चुकी थी.


आरदीस्वन्दी की मां अफस्केदीरन व सद्भावना इमारत के संस्थापक महागुरु अर्थात उन्मुक्त जिन का शिष्य नारायण अब वृद्ध हो चुके थे.दोनो इस समय
मेडिटेशन मेँ थे.

अब से 1220 पूर्व अर्थात सन 4800 ई0 के 19 जनवरी ! ओशो पुण्यतिथि !!
एक हाल में बैठा उन्मुक्त जिन मेडिटेशन मेँ था.उसके कान मेँ आवाज गूँजी -

"आर्य,उन्मुक्त! तुम अभी जिन नहीं हुए हो.जिन के नाम पर तुम पाखण्डी हो.तुम को अभी कठोर तपस्या करनी होगी. "


'उन्मुक्त जिन' के अज्ञातबास मेँ जाने के बाद कुख्यात औरतें ब्राह्माण्ड मेँ बेखौफ होकर आतंकवाद मचाने लगीं ,इन कुख्यात औरतों के बीच एत पांच वर्षीय बालक ठहाके लगा रहा था.


यह कलि औरतें......?!

पांच वर्षीय बालक मानीटर पर ब्राह्माण्डखोर की सक्रियता को देख देख ठहाके लगा रहा था.


इधर उन्मुक्त जिन एक वर्फीली जगह मेँ एक गुफा अन्दर मेडिटेशन मेँ था.


सन4800ई का वह पांच वर्षीय बालक......?!

अफस्केदीरन ने जब नारायण की ओर देखा तो नारायण अपने स्थान पर न था.


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द्वितीय विश्वयुद्ध और नेता जी !

गांधी जानते थे कि वास्तव मे हमारे स्थूल शरीर को मारने वाला गोडसे नहीं,गोडसे तो सिर्फ इस्तेमाल किया गया.

गांधी की हत्या करने के बाद अब गोडसे जेल में था.
गांधी को मार कर वह अब दुखी था.
"मैं तो यहीं जानता था कि वर्तमान हालातों के लिए गांधी दोषी हैं लेकिन .....अब मुझे पटेल व नेहरु का चरित्र संदिग्ध लगने लगा है."

द्वितीय विश्व युद्ध मे सुभाष बाबू को अन्तर्राष्ट्रीय अपराधी घोषित कर दिया गया था.युरोपीय उपनिवेशवाद के स्थान पर अब विश्व मेँ अमेरिकी भौतिक उपनिवेशवाद अपना स्थान बनाने लगा था.जापान के सहयोग से सुभाष बाबू ब्रिटिश शासन उखाड़ फेंकने के लिए अनेक क्षेत्रों को ब्रिटिश मुक्त कर भारत मेँ प्रवेश कर ही पाये थे कि अमेरिका ने जापान पर परमाणु हमला बोल दिया. यह शायद अमेरिका की बौखलाहट थी.सुभाष बाबू को वापस लौटना पड़ा.जिस कारण उनकी मजाक भी बनायी गयी कि 'दिल्ली चलो ' नारा लगाने वाले अब बापस भागे.
लेकिन-
सुभाष बाबू ने कहा कि 04 फरबरी का इन्तजार कीजिए.
फिर चार फरबरी के बाद नौ सेना विद्रोह और यहां के ब्रिटिश शासन के स्तम्भ माने जाने वाले विभाग विरोध मेँ आ गये.
इधर एलियंस को लेकर ...? 



इधर अमेरिका के न्यू मैक्सिको में उड़न तश्तरी गिरी जिसको अमेरिकी सरकार ने छुपाया



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शनिवार, 30 जुलाई 2011

आदि मानव कूर्म क्षत्रिय:कितना सच कितना झूठ? लेखक:अशोक कुमार वर्मा'बिन्दु'

कश्यप गोत्र धारियों का इतिहास शेष गोत्रधारियों से पुराना है.

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: <akvashokbindu@gmail.com>,<deshpremi.bharat@gmail.com>,<rsahara@saharasamay.com>,<bareilly@livehindustan.com>,<admin@khabarindiya.com>,<article.hindi@delhipress.in>,<aajbareilly@gmail.com>,<Dr.Nagesh.Pandey.Sanjay@gmail.com>,<freelance@oneindia.co.in>
Date: रविवार, 31 जुलाई, 2011 4:09:29 पूर्वाह्न GMT+0000
Subject: आदि मानव कूर्म क्षत्रिय:कितना सच कितना झूठ? लेखक:अशोक कुमार वर्मा'बिन्दु'

प्रथम ऋषि थे कश्यप.प्रथम गोत्र था कश्यप.
इण्डोकैश्पियन जिनके वंशज थे.कुमायूं का एक नाम कूर्मांचल भी मिलता है.कूर्मांचल ,कश्मीर,तिब्बत,मानसरोवर,पाकिस्तान,अफगानिस्तान,आर्यान अर्थात ईरान आर्यों का मूलस्थान कहे जा सकते हैँ.कुमायूँनी व रोमनी भाषा मेँ समानता है,जिसे यमुनादत्त वैष्णव 'अशोक ' ने साबित किया है.

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: <go@blogger.com>
Date: रविवार, 31 जुलाई, 2011 9:19:58 पूर्वाह्न GMT+0530
Subject: यमुनादत्त वैष्णव 'अशोक':एक संक्षिप्त परिचय

दक्षिणी भारत,प्राचीन सुमेर,मिश्र और भूमध्य सागर देशों की मौलिक सांस्कृतिक समानता के अध्ययन क्षेत्र मेँ यमुनादत्त वैष्णव 'अशोक' का नाम चिरस्मरणीय रहेगा.
इनका जन्म कौसानी (अल्मोड़ा) के निकट ग्राम धौलरा मेँ 02अक्टूबर1915ई को हुआ था.

युनेस्को द्वारा कुमाऊंनी शब्दकोष के अन्तर्राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए कोष निर्माण अनुबन्ध के लिए एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के मुख्यालय बैंकाक का आमंत्रण .

कोष निर्माण के लिए युनेस्को को साझेदारी का अनुबन्ध और वित्तीय सहायता.

बैंकाक की यात्रा के दौरान "थाइलैण्ड की अयोध्या" शीर्षक 12 लेखों के ग्रन्थ का प्रणयन.


मार्च1989को 75वर्ष पूरे होने पर 02अक्टूबर सन 1990 को नैनीताल के बुद्धिजीवियोँ द्वारा अभिनन्दन तथा उनके ग्रन्थ "पुरस्कृत विज्ञान कथा साहित्य" का लोकार्पण .

सन 1990ई0 तक इनके द्वारा 34 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी थीं.जिनमेँ -विज्ञान कथा साहित्य ,15 उपन्यास, 07 कथा संग्रह ,08 हिन्दी विज्ञान साहित्य, 05 संस्कृति और इतिहास .

यह कुमाऊं संस्कृति परिषद ,नैनीताल के अध्यक्ष भी रहे.उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा 'द्रविण और विश्व मानवता'ग्रन्थ पर संस्कृति पुरस्कार से सम्मानि किया गया.

इण्डोकैस्पियन(आदि द्रविड़)संस्कृति पर यरुशलेम अन्तर्राष्ट्रीय स्वयंसेवी सम्मेलन मेँ मार्च अप्रैल 1985ई0 में मध्यपूर्व,मिश्र व रोम की यात्रा.

प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन नागपुर मेँ जनवरी 1975 मेँ 'कुमाऊंनी और अन्तर्राष्ट्रीय रोमनी (जिप्सी) भाषा'की समानता पर पढ़ा गया निबन्ध.

बालक हफ्कदम के सवाल?

आखिर आजादी वक्त के अनेक दस्तावेज सुभाष व शास्त्री की मृत्यु सम्बन्धी दस्तावेज गायब क्यों कर दिये गये थे?भिण्डरावाले को पैदा किसने किया था ? लिट्टे को किसने पैदा किया था?बोड़ो आन्दोलन को किसने पैदा किया था?राजीव व संजय गांधी की हत्या के पीछे वो अदृश्य लोग कौन थे?


बालक हफ्कदम युवती फदेस्हरर से बोला-"हम दोनों भुम्सन्दा की ओर चल तो रहे हैँ लेकिन मैँ सोंचता हूँ क्या हमें वास्तव मेँ भुम्सन्दा पर चलना चाहिए?"


"क्योँ?ऐसी बात क्योँ?"


"सद्भाव तक पहुँचने के आरदीस्वन्दी के 25 सदस्यीय टीम के अभियान मेँ आखिर हमेँ क्यों नहीं शामिर किया गया?जब हमेँ शामिल नहीं किया गया तो फिर भुम्सनदा पर हम क्योँ?हम क्यों जा रहे है भुम्सनदा?"

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From: Ashok kumar Verma Bindu <akvashokbindu@yahoo.in>
To: <akvashokbindu@gmail.com>
Date: रविवार, 31 जुलाई, 2011 4:34:24 पूर्वाह्न GMT+0530
Subject: बालक हफ्कदम के सवाल?