मंगलवार, 28 जून 2022
एलियन्स के आने से संभावना!?
शुक्रवार, 24 जून 2022
सूर अज पर विस्फोट ?! #अशोकबिन्दु
सूरज पर विस्फोट?!कुछ दिनों से तेज हो गए हैं सूरज पर विस्फोट.....#अशोकबिन्दु
#अग्निवीरसूर+ज....?! सूर+अज...!?
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हम सन्तों व वैज्ञानिक की वाणियों से किशोरावस्था से ही प्रभावित होते रहे है। तभी से हम सूरज पर विस्फोट के बारे में भी सुनते आये हैं।
वे गृह युद्ध, राजनैतिक अस्थिरता, विश्व युद्ध, अनाज दिक्कत आदि का भविष्य में जिक्र करते रहे हैं सूरज पर विस्फोटों की बात भी करते रहे हैं।जिसको सबसे ज्यादा #भारत और #अफ्रीका झेलेगा।100करोड़ जनता लगभग प्रभावित होगी।
और इसके साथ ही हम बता दें कि उत्तर भारत के नीचे हजारों परमाणु बमों के बराबर ऊर्जा हरकत में है। जो यदि एक साथ #भूकंप के माध्यम से ऊपर आ जाये तो सम्भवतः पूरे एशिया व यूरोप का भविष्य ही हजारों साल तक प्रकृति परम्परा को खो दे।
और हम..?!आप जानते होंगे कि धरती अनेक शैलो, चट्टानों के टुकड़ों से बनी है ।जिनके बीच #दरारें बढ़ती सिमटती रहती हैं। जिसका असर समुद्र के अंदर भी है।समुद्र के अंदर जहां एवरेस्ट के समान पहाड़ियां है वहीं दूसरी ओर अनेक दर्रे व गुफाएं भी हैं। हां, हम कह रहे थे कि भविष्य में चट्टानों के बीच दरारें बढ़ती व सिमटती रहती हैं।जिसका असर भी #भविष्य में भारत और अफ्रीका को देखने को मिलेगा।
भारत का कभी भी किसी आक्रमण से नुकसान नहीं हुआ है।
आक्रमकारियों,घुसपैठियों, विदेशी एजेंटों को भारतीय मदद से नुकसान हुआ है या प्राकृतिक प्रकोप, गृह युद्ध से नुकसान हुआ है। हमें नहीं लगता कि भारत को विश्व युद्ध से ज्यादा नुकसान होगा अन्य देशों की अपेक्षा लेकिन भारत को भारत के लोगों से ही नुकसान होगा।
कुछ भी कहें यहाँ की सरकारों, शासकों में कमी तो रही है।एक देश या राज्य को क्या चाहिए ?इस पर देश या राज्य ने गम्भीरता से कार्य नहीं किया।देश या राज्य ने नागरिकों का स्तर देश या राज्य के लिए बड़ा महत्व पूर्ण रहा है।इस लिए हम कहते रहे हैं कि सबसे बड़ा #भ्रष्टाचार है शिक्षा ।हमारे देश व राज्य के नागरिक कैसे होने चाहिए ?इसका फैसला शिक्षा ही कर सकती है लेकिन #शिक्षा जैसी होनी चाहिए वैसी है ही नहीं।
हां, हम यहां पर #सूरज पर #विस्फोट पर चर्चा कर रहे थे।
सूरज का इस धरती के लिए काफी महत्व रहा है लेकिन इन विस्फोटों से पुनः एक बार 100 करोड़ स्त्री पुरुष व बच्चे प्रभावित होने वाले हैं। मध्यएशिया, अरब आदि के भांति सूरज के विपरीत खड़े होने से काम नहीं चलने वाला। भारतीय संस्कृति ने अमेरिका, यूरोप में तक सूर्य मंदिर दिए हैं।मंदिरों का दर्शन सिर्फ मूर्ति पूजा तक सीमित नहीं था।मूर्ति पूजा तो काफी दिनों के बाद शुरू हुई है।मंदिर,हम यहां पर 1500 वर्ष पुराने मंदिरों की बात कर रहे हैं, वे एक दर्शन का पर्याय हैं जो स्वयं में अनेक विविध रहस्य छिपाए हैं।इसके साथ ही व्रत परम्परा का भी मानव के जीवन में बड़ा महत्व है।ऐसे में एकादशी व्रत विशेष रूप से निर्जला/भीम एकादशी व्रत का बड़ा महत्व है ।इस पर तो वैज्ञानिक भी अब महत्व को कह रहे हैं।व्रत का मतलब है, हमें किसी बचाव के लिए कृत्रिमताओं, बनावटी बस्तुओँ, दुनियाबी वस्तुओं का इस्तेमाल कम से कम करना। हम भी प्रकृति का हिस्सा हैं।हमें पांच तत्वों में साधना में रहकर पारंगत करने की जरूरत है। हमे अपने अंदर के स्वतः, निरन्तर, शाश्वत से जुड़ने की आवश्यकता है। निरन्तर अभ्यास से हम अपने अंदर के ही स्वतः, निरन्तर, शाश्वत से जुड़कर जगत और ब्रह्मण्ड के स्वतः, निरन्तर, शाश्वत से जुड़ने का उपक्रम शुरू कर सकते हैं। जहां से बसु परम्परा की एक स्थिति की ओर हम बढ़ते हैं।
#अशोकबिन्दु #विश्वबन्धुत्व #अखण्डभारत #तृतीयविश्वयुद्ध #मिशन2025 #मिशनpok #लोहिया #श्यामा_प्रसाद_मुखर्जी #सुभाषसेना #अग्निवीरों
शुक्रवार, 22 अप्रैल 2022
उफ्फ, यह क्या?!
शनिवार, 19 मार्च 2022
अवतार सन 2100ई0!!
अवतार सन 2100ई0!! #अशोकबिन्दु
देश व दुनिया में ऐसे नायक चाहिए जो मजहबियों, अलगाववादियों, जातिवादियों, आतंकवादियों, भीड़ हिंसा ,मजहबी उन्माद आदि पर हॉबी हों।
इतना तो है कि अब से लगभग 75 वर्ष पहले सभी भारतीय बिरादरियां राजनैतिक बैनर तले एक साथ आ गयी थीं। कुछ अपवादों को छोड़ कर।
देश व दुनिया भर में इस आधार पर ध्रुवीकरण तेज हो गया था। मजहबी उन्मादी, अलगाववादी, आतंकवादी आदि के मजहब से भी तीस प्रतिशत लोग भी उन लोगों के साथ आ चुके जो राष्टवाद, विश्व बंधुत्व, भारतीयता को बढ़ावा दे रहे थे। हालांकि दुनिया तीन भागों में बंट चुकी थी।तीसरी दुनिया के नाम से जाने जाने वाले देश राष्ट्रवाद, विश्वबन्धुत्व, भारतीयता से प्रभावित हो रहे थे।क्योंकि यहां पर किसी जाति, मजहब ,किसी की संस्कृति का विरोध न कर जातिवाद, मजहबवाद ,भीड़ हिंसा, मजहबी उन्माद,अलगाववाद,आतंकवाद आदि का सिर्फ विरोध था। 'विश्व सरकार ग्रन्थ साहिब' -को बढ़ावा था जिसमें सभी जाति, मजहब, देश के सन्तों ,सूफी संतों आदि के इंसानी व रूहानी सन्देशों का संकलन था।
#गोधरा कांड की प्रक्रिया में खड़ा हुआ #गुजरात कांड में कुछ ऐसे चरित्र उभर कर आये थे जो 'सेक्युलर फोर्स' के अंतर्गत कार्य कर रहे थे। जो हर प्रकार की जातिवादी,मजहबी, उन्मादी, कट्टरपन, आतंकवाद आदि के खिलाफ थे।जिसके लिए वे उनका फाइनल डिसीजन होता था- हिंसा के खिलाफ हिंसा लेकिन पहला कदम अहिंसा।इस चरित्र के लोग अंडरग्राउंड थे। क्योकि इनके खिलाफ हर जाति व हर मजहब के कट्टरपंथी व उन्मादी लोग थे।
गोधरा कांड प्रतिक्रिया में उभरी हिंसा अर्थात प्रतिहिंसा के बीच ये सेक्युलर फोर्स बच्चों, औरतों, उदारवादियों, निष्पक्ष व्यक्तियों आदि के साथ खड़ी थी।
मंगलवार, 21 सितंबर 2021
पृथु महि पर मानव सत्ताएं?
फील्ड जहां तहां विद्यार्थियों के झुंड बैठे हुए थे।
'भविष्य::कथांश'- नाम की एक पुस्तक एक विद्यार्थी के हाथ में थी। "यह पुस्तक हमारे 'सर जी'- ने लिखी है।"- वह विद्यार्थी बोला जिसके हाथ में यह पुस्तक थी।
एक लड़की ने उसके हाथ से पुस्तक ले ली।
'लेखक परिचय'- पृष्ठ पर नजर डालते हुए वह छात्रा बोली-"अरे, यह सर जी का तो जन्म स्थान-ददिउरी सुनासीर?यह तो हमारे गांव के ही समीप है।"
"तुम्हारा गांव कौन सा है?"
" मोहिउद्दीनपुर।"
फिर वह छात्रा खामोश हो कर उस पृष्ठ को पढ़ने लगी।
इधर कालेज के गेट की ओर ऑफिस की तरफ एक अधेड़ व्यक्ति को एक युवक के साथ खड़ा हुआ देखकर एक विद्यार्थी बोला -" अरे, सर जी तो यही है। अच्छा,उन्होंने एम ए फाइनल इतिहास का फार्म यही से भरा था।साथ में आशांक सर हैं।"
फिर वह विद्यार्थी उठ कर चल दिया।
"सर जी से मिल लें।"
"ओह, यह...?!" -वह छात्रा के मुख से निकल गया।
"क्यों ,क्या बात?!"
"बस, यूं ही...?!"
कल सर जी ने फेसबुक पर जो पोस्ट की ,वह मानवता का मार्मिक दर्द है। 14अगस्त से दुनिया में कोई यह।मैसेज देने को तैयार नहीं है कि कैसे हथियारों के होड़ व भावी युद्ध की विभीषिका से बचा जाए?
और उधर एलियन्स..?!
एलियन्स भी परेशान हो उठे हैं, इस पृथु महि पर मानव सत्ता की दशा व दिशा को लेकर।जो कि पूरे सौर परिवार को ही नहीं पूरे ब्रह्मांड को प्रभावित कर रहा है।
और-
सन 1993ई0!!
अशोक अब युवा हो चला था।
उसने डायरी उठायी, जिसे वह पलटने लगा।
डायरी में एक पृष्ठ पर उसकी निगाहें रुक गईं।
जिसमें उसने लिख रखा था--
एक विशाल कक्ष!
इस विशाल कक्ष के मध्य एक विशाल टेबिल पर - सहकन्न की लाश उपस्थित थी और एक परखनली सहित परखनली स्टैंड एक शीशे के गिलास एवं कुछ अन्य सामिग्री रखी थी।
कुछ समय पश्चात रोबेट उस टेबिल के पास आकर कुछ समय के लिए रुकता है फिर वहां से चला जाता है।
लगभग एक घंटा बाद एक गुफा से बाहर आकर रोबोट बाहर खड़े डायनासोर के मुख में प्रवेश कर जाता है।
-- अशोक यह अपने मकान की छत पर पड़ी चारपाई पर बैठा सोच रहा था और जैसा कि पहले स्पष्ट हो चुका है इससे पूर्व सोंच को किशोर अशोक अपने छत पर पड़े छप्पर के नीचे पड़ी चारपाई पर लेटे लेटे अपने ख्यालों में ले आया था।
बरसात समाप्त हो चुकी थी।
अशोक ने एकाएक अपनी निगाहें आसमान पर डालीं-आसमान साफ था। वह बाहर चारपाई डाल कर लेट गया।और सो गया।
-और फिर स्वप्न में!
भयावह अंधेरी रात में तेजी के साथ ठोकरें खाते खाते गिरते जाते जैसे तैसे भागते आगे बढ़ता जा रहा था।भागते भागते पीछे मुड़ भी वह (यानी कि किशोरावस्था का अशोक) देखता जा रहा था- पीछे एक विशालकाय जंतु उसके पीछे दौड़ता आ रहा था।
..........अब वह जाए तो कहां जाए आगे सर्पों का के समूह और पीछे वह विशालकाय जंतु (डायनासोर).......वह जिस पेड़ पर चढ़ा था उसकी एक टहनी पर एक विशालकाय अजगर!
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पृथु महि पर मानव सत्ताएं?!
सर जी कहते रहे हैं कि इस दुनिया में सबसे खतरनाक प्राणी है - मानव, क्योंकि उसमें इंसानियत है ही नहीं।दो प्रतिशत से भी कम मानव होमोसेपियन्स प्रजाति का है।सभी अभी आदम प्रवृति में ही जीते हैं।
आज कल क्या हो रहा है?अफगनिस्तान में अमेरिका के पलायन और तालिबान के शासन के बाद पूरी दुनिया हथियारों की होड़ व भावी विश्व युद्ध में ही जी रहा है।
मुंबई में अमिताभ बच्चन एक बच्ची के साथ खेल रहे थे।
सामने स्क्रीन पर उनकी निगाह गयी।
एक न्यूज चैनल मोदी के जन्मदिन पर एक कार्यक्रम को दिखा रहा था।
वह सोफे पर बैठ कर ट्यूटर पर कमेंट्स देखने लगे।
एक कमेंट्स को देख कर वह मुस्कुरा दिए।
"मैं हूँ आपके आसमां का ही सितारा,
विश्वास है चमकूँगा आपके ही रोशनी से।"
उन्हें एक नई फिल्म के लिए ऑफर आया था, जिसके लिए एक फाइल मेज पर रखी थी।
वह उस फाइल को उठा कर देखने लगे।
उस फाइल को पढ़ते - पढ़ते वे गम्भीर हो हो गए । जिसमें एक बुजुर्ग के जीवन को दर्शाया गया था।
अचानक उनका ध्यान ट्यूटर पर उनकी एक एक पुरानी पोस्ट की ओर गया।जिस पर किसी की कमेंट को ....?!
फाइल मेज पर रख कर वह ट्यूटर पर उस पोस्ट को देखने लगें। वह पोस्ट तो मिल गई लेकिन ..?!वह कमेंट गयाब?!
"वह कमेंट उसने हटा क्यों दिया?!"
वह किसी सोंच में पड़ गए।
"हम भी बुढ़ापे पर?!नींद में उस तरह का स्वप्न... वह कमेंट... और अब यह फ़ाइल....?!अब विधाता हमसे क्या करवाना चाहता है?हमें इस फ़िल्म पर ओके कर देना चाहिए क्या?!"
मैं (लेखक) बेचैनी के साथ कमरे में इधर उधर टहल रहा था।
"हम भी न जाने कितना इधर उधर का सोंचते रहते हैं?"
रात्रि के 11.35pm बज रहे थे।
"मालिक, तेरी मर्जी।बैसे तो जीवन जीना मुश्किल हो जाता है। ये इच्छाएं ही दुःख का कारण हैं, गुलामी, मजबूरी का कारण है। असमर्थतता परेशान कर देती है।ये होना चाहिए, वो होना चाहिए ....हूँ!लेकिन सामर्थ्य क्या है? इसलिए निरन्तर अभ्यास चाहिए।आदतें ही जीवन को बेहतर बनाती हैं और आदतें ही जीवन को मुश्किल में लाती हैं।निरन्तर अभ्यास में रहना जरूरी है।मालिक, तू ही जाने।"
और---
रुतबा?!
तुम, तुम्हारे ठेकेदार, तुम्हारे बच्चे किसकी नजर में रुतबा दिखाना चाहते हैं? अफसोस, जो तुम्हारे बच्चे विद्यार्थी का चोंगा ओढ़े विद्यालय में, क्लास में,शिक्षकों के सामने बैठते हैं तो किस रुतबा में बैठते हैं?किस रुतबा में हरकतें करते हैं?
कुदरत से बढ़ कर तुम व तुम्हारे बच्चे नहीं हो सकते।ईश्वर से बढ़कर तुम व तुम्हारे बच्चे नहीं हो सकते। कुदरत व ईश्वर के सामने तुम्हारी सारी धारणाएं, मनसूबे, रुतबा काम आने वाला नहीं।कोई गबाही काम आने वाली नहीं?!
हम कोशिस करते रहे हैं, सिर्फ कुदरत व ईश्वर को साक्षी मान कर कार्य करने की।
हमारे शिक्षण का 26 वां वर्ष 01 जुलाई 2021 से शुरू हो चुका है।इस बीच हमने अनेक कहानिया सजोई है।बस, सजोने वाला चाहिए।हर पल, हर जगह वे बिखरी पड़ीं है।बस, सजोने वाला चाहिए। जो हमने अनेक वेबसाइड में सुरक्षित कर रखी हैं।
हमने जीवन महसूस किया है।समाज, परिवार संस्थाओं में कुछ लोग अपने स्तर से कुदरत व खुदा के दरबार में बेहतर होते हैं।लेकिन समाज,परिवार, संस्थाओं में जातिवादियों, मज़हबीयों, हांहजूरों,चाटुकारों, चन्द् रुपयों की खातिर, झूठा रुतबा आदि के लिए जीने वालों के बीच निर्दोष होकर भी दोषी साबित हो जाते हैं।
चरित्र समाज, समाज, संस्थाओं की नजर में जीना अलग होता है।कुदरत व खुदा, महापुरुषों आदि की नजर में जीना अलग होता है।
हमें दुःख होता है जो माता पिता, गुरुजनों, शिक्षको के सामने रुतबा दिखाते हैं। हमने देखा है, जो आगे चल समाज में महानता का पथ चूमे हैं वे माता पिता,गुरुजनों,शिक्षकों के प्रति उदार, नम्र हुए हैं।अफसोस है कि आज नई पीढ़ी में अब समीकरण बदल रहे है।
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रविवार, 12 सितंबर 2021
डायनासोर की वह धरती?!
सन 1993ई0!!
अशोक अब युवा हो चला था।
उसने डायरी उठायी, जिसे वह पलटने लगा।
डायरी में एक पृष्ठ पर उसकी निगाहें रुक गईं।
जिसमें उसने लिख रखा था--
एक विशाल कक्ष!
इस विशाल कक्ष के मध्य एक विशाल टेबिल पर - सहकन्न की लाश उपस्थित थी और एक परखनली सहित परखनली स्टैंड एक शीशे के गिलास एवं कुछ अन्य सामिग्री रखी थी।
कुछ समय पश्चात रोबेट उस टेबिल के पास आकर कुछ समय के लिए रुकता है फिर वहां से चला जाता है।
लगभग एक घंटा बाद एक गुफा से बाहर आकर रोबोट बाहर खड़े डायनासोर के मुख में प्रवेश कर जाता है।
-- अशोक यह अपने मकान की छत पर पड़ी चारपाई पर बैठा सोच रहा था और जैसा कि पहले स्पष्ट हो चुका है इससे पूर्व सोंच को किशोर अशोक अपने छत पर पड़े छप्पर के नीचे पड़ी चारपाई पर लेटे लेटे अपने ख्यालों में ले आया था।
बरसात समाप्त हो चुकी थी।
अशोक ने एकाएक अपनी निगाहें आसमान पर डालीं-आसमान साफ था। वह बाहर चारपाई डाल कर लेट गया।और सो गया।
-और फिर स्वप्न में!
भयावह अंधेरी रात में तेजी के साथ ठोकरें खाते खाते गिरते जाते जैसे तैसे भागते आगे बढ़ता जा रहा था।भागते भागते पीछे मुड़ भी वह (यानी कि किशोरावस्था का अशोक) देखता जा रहा था- पीछे एक विशालकाय जंतु उसके पीछे दौड़ता आ रहा था।
..........अब वह जाए तो कहां जाए आगे सर्पों का के समूह और पीछे वह विशालकाय जंतु (डायनासोर).......वह जिस पेड़ पर चढ़ा था उसकी एक टहनी पर एक विशालकाय अजगर!
गुरुवार, 2 सितंबर 2021
क्या सच में एलियन्स?!
05.40pm-05.58pm!
टेलर दोद राम, कुम्हरवाली गली, कटरा, शाहजहाँपुर,उप्र!
हम टेलर की दुकान पर बैठे थे।दुकान पर दोद राम के अलावा अन्य कोई न था।
बात करते करते दोनों भावुक हो गए थे।सूक्ष्म आभासों पर बात हो रही थी।
भारत की भूमि में विष्णु बाल रूप में क्या अवतार ले चुके हैं?
सद चर्चा..!?पूर्व के सूक्ष्म आभासों के साथ।
26 जून 2016 ई0 को....?!
हम सोंच रहे थे-भविष्य में एलियन्स पृथु महि पर आक्रमण करेंगे।
उधर अंतरिक्ष मे एक धरती 'हा- हा- हूस'- जहाँ विशालकाय जंतु!! मिस्टर एस की पुत्री -'रुचिको'को वहीं छोंड़ दिया गया था।
एक विशालकाय डायनासोर!
वह चलता तो लगता कि सारी धरती कांप रही हो।
'ह ह न स र क'-एक पहाड़ी की आड़ ले खड़ा हो जाता है।
कुछ समय पश्चात डायनासोर तो आगे बढ़ जाता है लेकिन ' ह ह न स र क'- दो फन वाले एक सांप का शिकार हो जाता है। सांप उसके बांये पैर से लिपट गया था।काफी प्रयत्न के बाद उस दो मुहे वाले साँप से उसने पीछा छुड़ाया और आगे बढ़ गया।
और--
मिस्टर एस की पुत्री-रुचिको सस्कनपल को अपनी ओर आते देख कर सहमी सहमी एक वृक्ष तले झाड़ी में दुबक जाती है।लेकिन-
सस्कनपल उस झाड़ी के समीप ही आ चुका था।
उस झाड़ी में दो मुहे सांप की फुसकार पर रुचिको डर कर खड़ी हो जाती है।
तो सस्कनपल उसे देख मुस्कुरा देता है।और.....
किसी धरती पर एक कमरे में महात्मा गांधी शक्ल एक बुजुर्ग व्यक्ति टहल रहा था।
वह-
"इन महान वैज्ञानिकों ने पृथु महि के महात्मा गांधी का क्लोन अर्थात हमें बना कर सफलता तो पा ली है, लेकिन....!? हमारा नाम दिया गया है- ब्रह्मांड बी.गांधी।"
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कुछ वर्षों पूर्व हम काफी अमेरिकी राष्ट्रपति भवन- व्हाइट हाउस को पत्र भेजा करते थे।
ऐसा हम बिल क्लिंटन के समय से कर रहे थे। आगे चलकर हम लगभग 2009ई0से व्हाइट हाउस की बेवसाइट पर लिखने लगे थे। बराक ओबामा फिर हमें अपने पर्सनल e mail भेजने लगे थे। ऐसा शायद उनके द्वारा न होकर शायद उनके आफिस से ही होता हो? एक दो बार उनके पत्नी के भी e mail हमें प्राप्त हुए। हम विश्व व इंसानों की समस्याओं को लिख कर उस ओर अपने समाधान लिखता था।
हमें पूरा विश्वास है कि बराक ओबामा के पहले शपथ समारोह में एलियन्स सूक्ष्म रूप से उपस्थित थे।
और....
वह पांच वर्षीय बालक !
आरदीस्वन्दी की मां अफस्केदीरन व सद्भावना इमारत के संस्थापक महागुरु अर्थात उन्मुक्त जिन का शिष्य नारायण अब वृद्ध हो चुके थे.दोनो इस समय
मेडिटेशन मेँ थे.
अब से 1220 पूर्व अर्थात सन 4800 ई0 के 19 जनवरी ! ओशो पुण्यतिथि !!
एक हाल में बैठा उन्मुक्त जिन मेडिटेशन मेँ था.उसके कान मेँ आवाज गूँजी -
"आर्य,उन्मुक्त! तुम अभी जिन नहीं हुए हो.जिन के नाम पर तुम पाखण्डी हो.तुम को अभी कठोर तपस्या करनी होगी. "
'उन्मुक्त जिन' के अज्ञातबास मेँ जाने के बाद कुख्यात औरतें ब्राह्माण्ड मेँ बेखौफ होकर आतंकवाद मचाने लगीं ,इन कुख्यात औरतों के बीच एत पांच वर्षीय बालक ठहाके लगा रहा था.
यह कलि औरतें......?!
पांच वर्षीय बालक मानीटर पर ब्राह्माण्डखोर की सक्रियता को देख देख ठहाके लगा रहा था.
इधर उन्मुक्त जिन एक वर्फीली जगह मेँ एक गुफा अन्दर मेडिटेशन मेँ था.
सन4800ई का वह पांच वर्षीय बालक......?!
अफस्केदीरन ने जब नारायण की ओर देखा तो नारायण अपने स्थान पर न था.
कक्षा 09c!!चुनावी राजनीति, नागरिकशास्त्र में चर्चा करते करते हम भावुक हो गए थे।
चौथा पीरियड,07 सितम्बर 2021 ई0!! सब कुछ ठीक है।कार्लमार्क्स ने कहा है कि दुनिया को बर्बाद करने वाले सत्तावादी, पूंजीवादी,पुरोहित्वादी हैं। आचार्य चतुरसेन कहते हैं कि जब इन्द्र पद का सृजन हुआ तो क्या हुआ था?तब भी भृष्टाचार था।सन 1947 के आजादी के वक्त भी भृष्टाचार था।
ब्रिटेन के एक मंत्री कह चुके हैं कि एलियन्स धरती पर आक्रमण कर सकते हैं। ब्रह्मांड में खतरनाक प्राणी कौन है?सिर्फ मानव ।उसने इस धरती पर ही नहीं ब्रह्मांड में भी प्रदूषण खड़े कर दिए हैं। हम किशोरावस्था से ही इस पर सहमत रहे हैं कि एलियन्स हैं।
रविवार, 22 अगस्त 2021
एलियन्स का आक्रमण?!
एलियन्स आक्रमण ?!
हम सोंच रहे थे-भविष्य में एलियन्स पृथु महि पर आक्रमण करेंगे।
उधर अंतरिक्ष मे एक धरती 'हा- हा- हूस'- जहाँ विशालकाय जंतु!! मिस्टर एस की पुत्री -'रुचिको'को वहीं छोंड़ दिया गया था।
एक विशालकाय डायनासोर!
वह चलता तो लगता कि सारी धरती कांप रही हो।
'ह ह न स र क'-एक पहाड़ी की आड़ ले खड़ा हो जाता है।
कुछ समय पश्चात डायनासोर तो आगे बढ़ जाता है लेकिन ' ह ह न स र क'- दो फन वाले एक सांप का शिकार हो जाता है। सांप उसके बांये पैर से लिपट गया था।काफी प्रयत्न के बाद उस दो मुहे वाले साँप से उसने पीछा छुड़ाया और आगे बढ़ गया।
और--
मिस्टर एस की पुत्री-रुचिको सस्कनपल को अपनी ओर आते देख कर सहमी सहमी एक वृक्ष तले झाड़ी में दुबक जाती है।लेकिन-
सस्कनपल उस झाड़ी के समीप ही आ चुका था।
उस झाड़ी में दो मुहे सांप की फुसकार पर रुचिको डर कर खड़ी हो जाती है।
तो सस्कनपल उसे देख मुस्कुरा देता है।और.....
किसी धरती पर एक कमरे में महात्मा गांधी शक्ल एक बुजुर्ग व्यक्ति टहल रहा था।
वह-
"इन महान वैज्ञानिकों ने पृथु महि के महात्मा गांधी का क्लोन अर्थात हमें बना कर सफलता तो पा ली है, लेकिन....!? हमारा नाम दिया गया है- ब्रह्मांड बी.गांधी।"
आगे जा कर वह एक दीवार की ओर देखता है।वह दीवार एक स्क्रीन में बदल कर चलचित्र दिखाने लगती है।
"पृथु महि व उसके सौर परिवार, उसके मंदाकिनी की स्थिति बड़ी भयावह हो गयी है।मंगल ग्रह की तरह क्या अब पृथु महि का मानव भी अब खत्म हो जाएगा। वह मानव भी बड़ा बनता था?हूँ, स्वयं ही सभी प्राणियों में सर्वश्रष्ठ?लेकिन उसने पृथुमहि ही नहीं सारे अंतरिक्ष के हालात मुश्किल कर दिए?वह भूल गया कि प्रकृति अभियान से बढ़ कर कुछ भी नहीं।जैविक क्रमिक विकास में मानव ही सर्वश्रेष्ठ कृति नहीं है अभी।ये जैविक क्रमिक विकास तो अनन्त है।अभी अनेक स्तर दर स्तर क्रमिक प्राणी आयंगे जो हर पूर्व मानव से श्रेष्ठ होंगे। हूँ, अनेक धरतियों के प्राणी जो पृथु महि के मानव से बेहतर तकनीकी में है नाराज हैं।इस कारण वे पृथुमहि के मानवों पर आक्रमण भी करने वाले हैं।"
'सर जी'- कहते रहे हैं कि धरती पर सबसे बड़ी समस्या है-वह प्राणी जो मानव कहा जाता है लेकिन उसमें मानवता नहीं है।और सबसे बड़ा भृष्टाचार है शिक्षा।क्योकि कोई भी शिक्षित का आचरण,विचार व भाव ज्ञान के आधार पर नही है।
हूँ.....
उन दिनों हम शिशु क या शिशु ख में विद्यार्थी थे। एक महात्मा अपने आवास स्थल पर प्राइमरी स्तर का विद्यालय चला रहे थे।हमारा वहीं पढ़ने के लिए आना जाना था।कायस्थ जाति के बच्चों के हमारी दोस्ती होगयी थी। बात सन 1978-79ई0 की रही होगी। उन दिनों मई- जून की छुट्टियों में खजुरिया नवीराम(भीकमपुर),बिलसंडा आना जाना होता था।अपने पैतृक गांव का आता पता अहसास न था।
उन दिनों शान्ति कुंज, आर्य समाज में पिताजी की सक्रियता काफी ज्यादा थी।
खजुरिया नवीराम की स्थापना कुनबी मराठा ठाकुरों ने की थी।जो अब कुर्मी गिने जाते हैं।जिनके हजारों गांव पूरे के पूरे उत्तर भारत के तराई में बस गए थे।ये भी सुना जाता है कि सन1761ई0 के मराठा व अब्दाली युद्ध में अनेक भारतीय शक्तियों की मदद न मिलने या तटस्थता या गद्दारी के कारण कुनबी मराठा पराजित हुए थे।वे इतने स्वभिमानी होने व देश की विभक्त राजनीति से परेशान होकर यहां के जंगलों में बस गए थे।जिन्हें अंग्रजों ने खेत जोतने ,कृषि करने की स्वतंत्रता दे दी थी। बताते है इनके पूर्वज अयोध्या में क्षत्रिय थे।जिन्हें विभिन्न परिस्थितियों के कारण दक्षिण व अन्य क्षेत्रों में जाकर बसना लड़ा था।कोलार, कर्णकट आदि क्षेत्र में अपना राज्य स्थापित किया था।जिनके पूर्वज चोल वंश, गंग वंश में भी प्रतिष्ठित हुए थे।ददिगी जिनका प्रमुख नेता था।विजय नगर साम्राज्य में भी इनका योगदान था।विजयनगर के राजपुरोहित, सेनापति व सर्वप्रथम वेद भाष्यकार #सायण ने तक कहा था कि कूर्मि सर्वशक्तिमान होता है।ये लोग वर्मा या वर्मन उपाधि भी लगाने लगे थे। खजुरिया नवीराम में पिता जी की ननिहाल थी। सुना जाता है कि नवीराम कुनबियों के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे।एक समय पूरे तराई क्षेत्र में इनकी तूती बोलती थी।
जून की छुट्टियां चल रही थीं।
हम खजुरिया नवीराम में उपस्थित थे।
उन दिनों बादलों में विभिन्न आकृतियां खोजना शौक था।
शुक्रवार, 6 अगस्त 2021
मिस्टर एस की मृत्यु?!
मिस्टर एस अब कठघरे में था।
वह किसी सोंच में था?!
अब से लाखों वर्ष पूर्व-
उन दिनों तृण बिंदु के आश्रम में एक आचार्य था,जिसका नाम था-'कुटु-अम्ब'।
वह छब्बीस साल में लग गया था। उस समय एक यक्षिणी थी-दृणी।जो कि यक्षणी -
ताड़का की सहचारिणी थी। अयोध्या में उस वक्त राजा दशरथ के यहां श्रीरामचन्द्र का जन्म हो चुका था जो लगभग सात वर्ष के रहे होंगे।
जब कोई आत्मा गर्भ धारण करती है तो एक योजना व अपने पूर्व संस्कारों, पूर्व कर्मों आदि के प्रभाव में आकर। लंका साम्राज्य के अंत के लिए छोटी छोटी घटनाओं के माध्यम से बड़े मिशन की तैयारियो को अंजाम दिया जा रहा था।
रावण का नाम सोमाली/सोम अली का वन्य समाज में पूरी धरती पर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रभाव रहता था।
जहां आज सोमालिया है, वहाँ उसका कभी गढ़ रहा था-उत्तर अफ्रीका की ओर व द्वारिका आदि तक, बिंदु सरोबर तक भी।
ताड़का एक गुफा में बैठी सोंच रही थी-" आचार्य कुटुंब से एक बार हमारा सामना हुआ था। हमारी विभीषणता से वह विचलित नहीं हुआ था । वह बोला था हम आपके सामने नतमस्तक होते हैं क्योंकि आपके अंदर भी आत्मा दिव्य शक्तियां हैं। हमारा आपका स्तर अलग-अलग है,बस ।प्रकृति और ब्रह्म अंश से आप भी हैं और मैं भी और सभी जीव जंतु भी। हम पुनः आपके सामने आपके अंदर की दिव्य शक्तियों को नमन करते हैं, जो जगत का भी कल्याण कर सकती हैं ,यदि आप चाहें तो । हम में आप में कोई अंतर नहीं है। अंतर सब स्तर का है ,अपना-अपना है स्तर।"
हूँ!
मिस्टर बैचैनी में कठघरे के अंदर ही टहलने लगा था।
"हूँ, अब जेल में सड़ कर क्या मनसूबे पूरे होंगे?"
हूँ, मानव समाज व तन्त्र हर देश व धरती भर का बिगड़ चुका है।ऐसे में इन एलियन्स का इस्तेमाल भी इस धरती का मानव गलत ही करेगा।धरती व प्रकृति को ऋषि परम्परा के लोग चाहिए जोकि 'बसुधैब कुटुम्बकम की भावना व 'सागर में कुम्भ कुम्भ में सागर'- की भावना रखते हैं।हमें चिंता इन एलियन्स को लेकर। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की रिपोर्ट्स तो अंडर वर्ल्ड के प्रकृति व ब्रह्मांड विरोधी मंसूबों की ओर संकेत करती है।"
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गुरुवार, 5 अगस्त 2021
ये मेरा मेहमान है?!
" ये मेरा मेहमान है! मेरे मेहमान के साथ ...?!आखिर आपसब इसे क्यों ले जा रहे हो?"-सेना उस धधस्कनक निबासी के एलियन्स को जब ले जाने लगती है तो मिस्टर एस सेना के अधिकारी से बोला।
और...
दरअसल....
मिस्टर एस के आश्वासन पर धधस्कनक धरती का वह कान विहीन, बाल विहीन प्राणी अर्थात एलियन मिस्टर एस के आवास पर ही रुक गया।रात्रि बीतने के बाद सुबह....
मिस्टर एस से मिलने एक व्यक्ति आया।मिस्टर उससे मिलते हुए बोला-
"हां, तो क्यों?इतनी जल्द सुबह सुबह क्यों आना हो गया?"
"सर,कल मेरे आंखों के सामने एक उड़न तश्तरी दुर्घटनाग्रस्त होकर आसमान से नीचे आकर गिरी कल एक उड़न तश्तरी गिरी थी पास जा कर दे पास जाकर देखा तो 4 छोटे प्राणियों के शरीर पड़े थे।दो की सांस चल रही थी और एक उनका उपचार कर रहा था।लेकिन सेना आकर उन सबको ले गयी।उड़न तश्तरी के मलबे को लेकर ,और मुझसे कहा जाता है कि मैं सब कुछ भूल जाऊं।"
मिस्टर एस काफी समय तक मौन ही रहा।फिर-
"वह धरती धधस्कनक धरती की ही होगी।"
क्या..?!धधस्नकनक !"
"ऐसी घटना तो मेरे साथ भी घटी है।"
"क्या...?!"
"लेकिन समझ में नहीं आता शासन प्रशासन इन अंतरिक्ष घटनाओं को छिपाता क्यों है?"
"सर, इनकी साजिशें काफी लंबी हैं।"
"हूँ, मैं भी समझ रहा हूँ।समाज में अपना दबदबा रखने का नशा ऐसी शक्तियों को सृष्टि आरम्भ से ही रहा हैऔर इसी श्रंखला के अंतर्गत यह सब घट रहा है।"
"अच्छा सर, मैं चलता हूँ।फिर मिलूंगा।"-और वह व्यक्ति मिस्टर एस के आवास से चला गया।
वह व्यक्ति अपनी एक जीप से था।
दो किलोमीटर ही वह पहुंच पाया होगा कि...
सामने सेना की गाड़ी आकर खड़ी हुई और-
"रुको,ए इंसान।"
और वह जब अपनी जीप से बाहर निकला तब सैनिकों द्वारा उसे पकड़ लिया गया।
"आ.. आप मुझे क्यों पकड़ रहे हैं?मेरा क्या दोष?"
नौकर मिस्टर एस को काफी का प्याला पकड़ा ही पाता है कि सामने अधिकारी को देख.
"आइए बैठिए।"
"तेरा दोष?हूँ...!"
दूसरा-
"चल बैठ गाड़ी में।"
एक सैनिक उस व्यक्ति की जीप ड्राइव कर आगे बढ़ सेना गाड़ी के पीछे पीछे चलने लगा।
दूसरी और....
मिस्टर एस..?!
मिस्टर एस का फार्म स्थित आवास!
उसे भी सेना द्वारा घेर लिया गया।
मिस्टर एस की निगाह ऊपर गयी-ऊपर एक हैलीकाप्टर मंडरा रहा था।
नौकर मिस्टर एस के पास आकर सूचना बताता है-
"सा'ब!आवास को तो सेना ने घेर लिया है?"
मिस्टर एस मौन ही रहा।फिर-
"जाओ, एक काफी बना कर लाओ।"
"जी,.....सा'ब!"
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आज से लाखों वर्ष पहले की बात है।
हिन्द महाद्वीप का अरब सागर, बिंदु सरोबर व मध्य एशिया मैं कैस्पियन सागर अर्थात कश्यप सागर एक ही थे।
तृण बिंदु का आश्रम उस वक्त दक्षिणी गोलार्ध अर्थात दक्षिण अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण भारत, जावा, सुमात्रा आदि में मतंग आश्रम के बाद महत्वपूर्ण शिक्षा का केंद्र था। तृण बिंदु की चेतना व अंतर समझ सूर्य तक पहुंच चुकी थी।इक्ष्वाकु जनक विवस्वान उनके आदि ऋषि थे।जो से बढ़कर इस प्रतिभा से बढ़कर अभी कोई धरती पर न था।जिनके सूर्य वंश धरती पर स्थापित हुआ था। उस वक्त सोमाली अर्थात सोमालिया की धरती द्वारिका से मिली हुई थी।
उस वक्त अनेक क्षेत्र एलियन्स से सम्पर्क में थे। दक्षिणी गोलार्ध जिससे प्रभावित था ही, पृथु महि का उत्तरी गोलार्ध ,साइबेरिया, कोरिया, जापान आदि क्षेत्र के अलावा भूमध्य सागर क्षेत्र भी एलियन्स से प्रभावित था।
अनेक स्थानों पट आदिबासी ,सभ्यताएं आदि अपना आराध्य एलियन्स को मानती थीं।
भूमध्यसागरीय क्षेत्र में अनेक जन अपने को अंतरिक्ष की अन्य धरती #लुन्धक से आये #मत्स्य मानव को अपना पूर्वज मानते हैं।
गुजरात, राजस्तान के कुछ भाग से लेकर भूमध्यसागरीय क्षेत्र तक कभी मत्स्य क्षेत्र कहलाता था।
एस एस कालेज, शाहजहांपुर के प्रांगण।में कुछ विद्यार्थी इस पर चर्चा कर रहे थे।
हमने एम ए द्वितीय वर्ष(इतिहास) का फार्म यहां से भर रखा था। एक प्रश्नपत्र की हमारी परीक्षा थी, हम भी वहां पहुंचे हुए थे। जब विद्यार्थियों ने हमें देखा तो हमें घेर लिया।
"नमस्ते, सर।"
"नमस्ते।"
"नमस्ते सर।"
"सभी को नमस्ते।"
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नौकर मिस्टर एस को काफी का प्याला पकड़ा ही पाया कि सामने देख कर-
"आइए बैठिए।"
एक सेना अधिकारी आकर बोला-
"बैठने की फुर्सत नहीं।तुम अब हमारी निगरानी में हो।"
"धन्यवाद!"
"चलिए।"
"चलें?काफी ले लें।"
"नहीं। आप चलते हैं कि सैनिकों को आदेश देना पड़ेगा?"
"सारी, आप काफी नहीं लेंगे, इसका मतलब यह नहीं कि मैं भी काफी न लूं?"
बायीं आँख के बायें कोने से मिस्टर एस ने देखा कि सेना धधस्कनक धरती के उस प्राणी को पकड़ कर ले जा रही है तो?!तो कुर्सी से उठ बैठा और क्रोध में-
"यह मेरा मेहमान है। मेरे यहां से मेरे मेहमान को बिना किसी जुर्म के पकड़ ले जाना न्यायोचित नहीं है।"
"हम भी इसको मेहमान की भांति ही रखे रखेंगे।"
"हूँ!'- आधी काफी ही पी कर कप मेज पर रखते हुए-"यदिमेरे इस मेहमान पर कुछ हो गया या इसे किसी भी भांति की पीड़ा दी गयी तो हमसे बुरा कोई न होगा।"
"बहुत चीखने लगा है मिस्टर एस तू.."
फिर कुछ सैनिक।मिस्टर एस को पकड़ लेते हैं।
"अमानवीय शक्तियों संग मिल कर षड्यंत्र रचने का अब तेरा समय गुजर गया है-मिस्टर एस।"
तो मिस्टर एस मुस्कुराने लगा।और-
"भ्रम में हो।धन, सत्ता-पद के लोभ ने तुम लोगों को निकम्मा कर दिया है।"
अब मिस्टर एस कठघरे में था।














