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रविवार, 20 जून 2021

21 जून 2021.........अशोकबिन्दु

 अब भी समय है....

हम जीवन के यथार्थ को समझें।

दुनिया में कोई समस्या नहीं है।

समस्या तो मानव मानव समाज में है।


सबसे बड़ी समस्या है-वह प्राणी जो इंसान।माना जाता है लेकिन उसमें इंसानियत नही है।

सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है-शिक्षा।क्योकि शिक्षित ही ज्ञान के आधार पर नहीं चलता।

हमारा सनातन हेतु है-मानवता व आध्यत्म को विकसित करना।


21जून :::आओ हम सब संकल्प लें अपनी सम्पूर्णता के अहसास में रहने का, सार्वभौमिक प्रार्थना, सार्वभौमिक ज्ञान में रहने का।


 हम सब हर वक्त ध्यान रखें -


 "हम सब आत्माओं के रूप में अनन्त यात्रा में सहचर्य हैं।जैसे कि सागर में परस्पर लहरें।यह सहचर्यता ही,तरलता/गतिशीलता/डूब ही प्रेम है, भक्ति है।जगत में जो भी स्त्री पुरूष हैं सब भाई बहिन हैं।सभी में मालिक की रोशनी मौजूद है।हम सब एक हैं।सागर में कुम्भ कुम्भ में सागर.... अंदर बाहर प्रकाश ही प्रकाश... दिल... दिल में दिव्य प्रकाश।" 


 हम सबके #ब्राइटमाइंड अभियान से भी जुड़ सकते हैं। 


 तीसरी आंख?!तीसरी आंख जगने पर हम 1000गुना अपनी पावर बड़ा सकते है। 



हमारे हाड़ मास शरीर की सीमित कुछ बर्षों तक के लिए क्षमता है।

हमारी बुद्धि सिर्फ चतुर्मुखी है।


हम अपने अंदर असीम ऊर्जा का केंद्र #मन रखते हैं।मन के हारे हार है।मन के जीते जीत। मन चंगा तो कठौती में गंगा।जब यह मन बाह्य जगत की ओर न जोड़ कर अपनी आत्मा/आत्मियता/निजता/स्व/खुद आदि से जुड़ जाता है तो हम अनन्त व अनन्त काल से जुड़ जाते है।जहां से अनन्त धारा हमारी ओर स्फुटित होने लगती है।हम अपने में अनेक रहस्यों को तब उजागर होते देखते हैं। 


 खुद या खुदा ,न जाति न पन्था!!! 



 हार्टफुलनेस एजुकेशन ट्रस्ट लाया है बच्चों में वह क्षमता कि उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है और वे पुस्तक पढ़ लेते हैं, सामने के कलर व वस्तुएं बता देते हैं। 


 #ब्राइटमाइंड 


 कान्हां शन्ति वनम, हैदराबाद में हमारा प्रमुख केंद्र! जिसके विश्व में अनेक केंद्र! 


 #ब्राइटमाइंड 


05 साल से 15 साल तक के बच्चों के लिए ध्यान के माध्यम से सीखने की एक पद्धति!! 


Greetings from Brighter Minds!


 Please contact +91 9651179702 at Kanpur, +91 9651179702 at Lucknow to enrol your child.

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"गर्म होता है शरीर: अग्नि (ऊष्मा) का मुख्य सोर्स होने के कारण सूर्य की रोशनी ठंड से सिकुड़े शरीर को गर्माहट देती है, जिससे शरीर के भीतर की ठंडक और पित्त की कमी दूर होती है। आयुर्वेद में सनबाथ को 'आतप सेवन' नाम से जाना जाता है। -मिलता है विटामिन डी: विटामिन डी शरीर में हड्डी की मजबूती के लिए अहम है।"



 सामने पानी से छन छन कर आती सूरज की लाल किरणें। सामने बारामदे में ऊपर से पानी गिर रहा था। बरामदे के बाहर लाल रंग का शीशा लगा हुआ था। अंदर कुछ लोग नङ्गे बदन सूरज की ओर मुंह किए आंख बंद कर बैठे थे। साधक मन में भाव रखे हुए थे- "सूरज की लाल किरणें हमारे पेट पर पड़ रही हैं और हमारे पेट के सारे विकार व रोग धुंआं बन बाहर जा रहे हैं।" 



 पश्चिम में भी कभी सूर्य मंदिर हुआ करते थे। जिसके अवशेष दक्षिण अमेरिका महाद्वीप पर भी मिले थे। अब से लगभग 5500वर्ष पूर्व अर्थात लगभग सन 400 ईस्वी तक रोम में भी सूर्य मंदिर प्राप्त होने के अवसर मिलते हैं।


 और..... 



 21 जून 2021ई0 को 7वां विश्व योग दिवस था। उस दिन भीमसेन एकादशी भी। 'सर जी ' ने लिखा है कि हम उस दिन व्रत में थे। 18मार्च2021 को उनकी तबियत काफी खराब हो गयी थी। पेट में कुछ भी खाया हुआ नहीं रुक रहा था।पेट एक दम खौल जाता था। चलना भी मुश्किल हो गया था इतनी कमजोरी आ गयी थी।जैसे तैसे नर्सिंग होम पहुंचे थे।विभिन्न जांचों के बाद पता चला था कि टायफाइड व पेट में इफेक्शन है।लगभग नौ दिन उन्होंने दबाई चलाई थी।खर्च काफी उठाना पड़ रहा था। वे मैडिटेशन करते ही थे।एक रात स्वप्न में किसी ने आकर एलोवेरा व त्रिफला के दर्शन करवाये। अब वे सुबह व शाम को त्रिफला व एलोवेरा ले रहे थे।सब नियंत्रण में था। 


रात्रि में मेडिटेशन के वक्त यही भाव- 


 "सूरज की लाल किरणें हमारे पेट पर पड़ रही हैं और हमारे पेट के सारे विकार व रोग धुंआं बन बाहर जा रहे हैं।" 


 एक स्थान पर कुछ लोग योगा दिवस के अबसर पर एकत्रित थे। कोरोना संक्रमण के प्रभाव को देखते हुए सभी काफी काफी दूर बैठे थे। सब राजनीति की बातें करते जा रहे थे। 


 'सर जी '-बोले योग करते समय हमें किस भाव में रहना चाहिए?पता ही नहीं।हम इसलिए यहां आते नहीं। कोई कह रहा था- "इस बार योगी सरकार बनेगी भी तो काफी कम वोटों से।" 

"अरे यादव जी, आप तो कहोगे ही।मुसलमान, यादव तो ऐसा कहेंगे ही। "


 "देखो ,जनसंख्या नीति का मसौदा तैयार हो रहा है।हो सकता है इसी मानसून सत्र में पेश हो जाए?" 


 "तो?तो क्या..?! योगी सरकार बना लेंगे?"


 "अरे पण्डित जी,आप भी...!" 


 "सारे पंडितों को तो दूबे की मौत दिख रही है।" 


 "और जितिन... जितिन भाजपा में शामिल हो गए सो...?"


 "जितिन ?! छह महीने बाद मालूम चल जाएगा.... सब सामने आ जायेगा।" 


 सर जी बोले- "कोई भी जीतेगा ,क्या वह माफियाओं, गुंडों, अपनी जाति के अपराधियों को नहीं बचाएगा?वोट देने से व्यवस्थाएँ बदलने बाली नहीं। जनता ही नेता चुनती है।जनता को सोचना चाहिए वोट देने से पहले कि हम किसे वोट दें?"  


सन 6050ई0! 


 हफदमस जो कि तीन नेत्री एक एलियन था।


 "यह समुद्र देखरहा हूँ मैं, इसके अंदर एक पूरा का पूरा शहर मुंबई मौजूद है।" 


 उड़न तश्तरी यान के अंदर एक स्क्रीन पर समुद्र के अंदर की मुंबई को दिखाया जा रहा था जिसमें 4 गोताखोर मौजूद थे ।  मानव आबादी के प्रमाण 250 ईसा पूर्व तक मिलते हैं। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में यह दीप समूह मौर्य साम्राज्य का भाग बने जब बहुत सम्राट अशोक महान का शासन था । कुछ आरंभिक शताब्दियों में मुंबई के नियंत्रण से संबंधित इतिहास सातवाहन साम्राज्य और इंडो सीथियन वेस्टर्न सैट्रेप के बीच विवाद था । बाद में हिंदू सिल्हारा वंश के राजाओं ने यहां 1343 ईस्वी तक राज्य किया। जब तक की गुजरात के राजा ने सप्त दीपों पर अधिकार नहीं कर लिया। एलीफेंटा गुफाओं ,बलकेश्वर मंदिर आदि में इस काल के अवशेष मिले थे। सन 15 34 ईसवी में पुर्तगालियों ने गुजरात के बहादुर शाह से यह  द्वीप समूह छीन लिए जो कि बाद में चार्ल्स   द्वितीय इंग्लैंड को दहेज रूप में दे दिए गए । यह द्वीप सन 1668 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी  को मात्र 10 पाउंड प्रतिवर्ष की दर पर पट्टे पर दे दिए ।सन 1687 ईस्वी में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने मुख्यालय सूरत से हस्तांतरित कर यहां मुंबई स्थापित किए। अंततः नगर मुंबई प्रेसीडेंसी का मुख्यालय बन गया सन 1817 के बाद नगर को विस्तृत पैमाने पर सिविल कार्यों द्वारा वर्तमान शहर के रूप में स्थापित किया गया ।इसमें सभी दीपों को एक जुड़े हुए दीप में जोड़ने की परियोजना मुख्य थी । इस परियोजना को हार्न बाय बेल्लार्ड कहा गया ।जो सन 1845 में पूर्ण हुआ तथा सन 18  53 में भारत की प्रथम यात्री रेलवे लाइन स्थापित हुई। अमेरिकी नागर युद्ध के दौरान विश्व का प्रमुख सूती व्यवसाय बाजार बना  जिससे इसकी अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। साथ ही साथ नगर का विस्तार कई गुना बढ़ गया । सन 18 69 में स्वेज नहर के खुलने के बाद से अरब सागर का सबसे बड़ा  पत्तन बन गया । हम गूगल से सर्च करते हुए मुंबई के संबंध में विभिन्न जानकारियां एकत्रित करते रहे।  हम सोच रहे थे - वो एलियंस पृथु मही की मानव जाति से काफी नाराज थे । मानव जाति इस धरती को ही नहीं बरन अंतरिक्ष को भी प्रदूषित कर चुकी थी। प्रकृति व ब्रहमांड में मानव जाति के विकास ने सहज और स्वत:  जीवन में विकार खड़े क र दिए थे। जिसका प्रभाव स्वयं मानव जाति की ही प्रकृति स्थूलता और सूक्ष्म पर पड़ा ।मानव जाति दयनीय अवस्था में पहुंच चुकी थी । वन्य समाज,आदिवासी अपना सहजीवन और व्यवस्था को बचाए हुए तो थे लेकिन जीवन संघर्ष बढ़ गया था । उत्तरी ध्रुव, साइबेरिया आदि क्षेत्र पुन: हरियाली से भरने लगे थे । अनेक ग्लेशियर पिघल चुके थे। गोमुख से ऊपर सेआने वाली अनेक जलधाराएं सूख चुकी थी । समुद्रों के तल बढ़ गए थे । अनेक समुद्र तटीय क्षेत्र डूब चुके थे। बचे खुचे मानवों में 85% जनता को अपना जीवन जीना मुश्किल हो रहा था । आपसी कलह, संघर्ष और युद्ध बढ़ गए थे । परिवार व्यवस्था ,रिश्ते नाते बिखर चुके थे ।अनेक शहरों को समुद्र निगल चुके थे । इन शहरों में एक शहर- मुंबई।   4 गोताखोर उसमें थे । तीन नेत्री एलियन 'हफदमस' उड़न तश्तरी के अंदर स्क्रीन से विभिन्न स्रोतों से विभिन्न सूचनाएं एकत्रित कर रहा था उड़नतश्तरी की गति बहुत धीमी हो चुकी थी । धरती पर खड़ी एक उड़नतश्तरी में से एक छोटा सा यान निकल कर आकाश में गति करने लगा था। हफदमस ने अपनी उड़नतश्तरी को नीचे धरती पर उतार दिया इस पृथु मही के अनेक बड़े हवाई अड्डों का पुनर्निर्माण और परिमार्जन किया जा रहा था ।  पेरू की प्राचीन सभ्यता इका के अवशेषों को आधुनिक ढंग से ठीक किया जा रहा था। दूर-दूर तक पत्थरों की जड़ाई से बनी सीधी और वृत्ताकार रेखाओं वाले स्थल को  पुनः जीवित किया जा रहा था। जिसकी एक दीवार पर एक राकेट बना हुआ था । राकेट के बीच में एक व्यक्ति आश्चर्यजनक हेलमेट लगाए हुए दिखाया गया था । जिसे मातृ देवी भी कहा जा रहा था। दक्षिण अमेरिका की इंडीज पहाड़ियों में बसी एक झील के पास एक प्राचीन नगर के अवशेषों को भी पुनर्जीवित किया जा रहा था। वहां के सूर्य मंदिर को पुनः स्थापित किया जा रहा था। 


महाभारत युद्ध के बाद विश्व में विभिन्न नगरों में इक्ष्वाकु वंश की मूर्ति निर्माण कला प्रसारित हुई थी।कोणार्क के सूर्य मंदिर के तरह पश्चिम के अनेक देशों में सूर्य मंदिर भी स्थापित किए गए थे या स्थापित की जाने लगे थे। लेकिन... लेकिन...  हफदमस उड़नतश्तरी से बाहर निकलते हुए जब आगे बढ़ा तो काले रंग के अनेक लड़के लड़कियों ने उन्हें घेर लिया और साथ-साथ चलने लगे। सन 1498 ईस्वी में जब वास्कोडिगामा भारत आया तब उन दिनों भी मुंबई वर्तमान नगर की तरह स्थापित नहीं हो पाया था।वह उस समय भी 7 दीपों के रूप में था । जहां का वातावरण पूर्ण रूप से प्राकृतिक था। इन द्वीपों पर कश्यप वंशी मछुआरे रहा करते थे जो अपने को यवन  आर्य  (ययाति पुत्र तुर्वसुवंशी)कहते थे।कुछ अपने को रावण (र - अवन) वंशी भी मानते थे। 


सन 1498 ईस्वी में वास्कोडिगामा की यात्रा के वक्त, उस समय का 'सर जी'- का एक चरित्र था-दितान्त ,जो कि समाज में तुर्क माना जाता था लेकिन वह अपने को यवन आर्य कहता। वह कहता था कि हमारे पूर्वज कभी कृष्ण सागर के आसपास विशेषकर आनातोलिया में बस गए थे । जो मलेक्षों में ब्राह्मण के रूप में सम्मानित थे।




 Thank you!


शनिवार, 1 मई 2021

तीन नेत्री एलियन-'हफदमस'-सन सन6050ई0!

 सन 6050ई0!

हफदमस जो कि तीन नेत्री एक एलियन था।

"यह समुद्र देखरहा हूँ मैं, इसके अंदर एक पूरा का पूरा शहर मुंबई मौजूद है।"


उड़न तश्तरी यान के अंदर एक स्क्रीन पर समुद्र के अंदर की मुंबई को दिखाया जा रहा था जिसमें 4 गोताखोर मौजूद थे । 

मानव आबादी के प्रमाण 250 ईसा पूर्व तक मिलते हैं। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में यह दीप समूह मौर्य साम्राज्य का भाग बने जब बहुत सम्राट अशोक महान का शासन था । कुछ आरंभिक शताब्दियों में मुंबई के नियंत्रण से संबंधित इतिहास सातवाहन साम्राज्य और इंडो सीथियन वेस्टर्न सैट्रेप के बीच विवाद था । बाद में हिंदू सिल्हारा वंश के राजाओं ने यहां 1343 ईस्वी तक राज्य किया। जब तक की गुजरात के राजा ने सप्त दीपों पर अधिकार नहीं कर लिया। एलीफेंटा गुफाओं ,बलकेश्वर मंदिर आदि में इस काल के अवशेष मिले थे। सन 15 34 ईसवी में पुर्तगालियों ने गुजरात के बहादुर शाह से यह  द्वीप समूह छीन लिए जो कि बाद में चार्ल्स   द्वितीय इंग्लैंड को दहेज रूप में दे दिए गए । यह द्वीप सन 1668 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी  को मात्र 10 पाउंड प्रतिवर्ष की दर पर पट्टे पर दे दिए ।सन 1687 ईस्वी में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने मुख्यालय सूरत से हस्तांतरित कर यहां मुंबई स्थापित किए। अंततः नगर मुंबई प्रेसीडेंसी का मुख्यालय बन गया सन 1817 के बाद नगर को विस्तृत पैमाने पर सिविल कार्यों द्वारा वर्तमान शहर के रूप में स्थापित किया गया ।इसमें सभी दीपों को एक जुड़े हुए दीप में जोड़ने की परियोजना मुख्य थी । इस परियोजना को हार्न बाय बेल्लार्ड कहा गया ।जो सन 1845 में पूर्ण हुआ तथा सन 18  53 में भारत की प्रथम यात्री रेलवे लाइन स्थापित हुई। अमेरिकी नागर युद्ध के दौरान विश्व का प्रमुख सूती व्यवसाय बाजार बना  जिससे इसकी अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। साथ ही साथ नगर का विस्तार कई गुना बढ़ गया । सन 18 69 में स्वेज नहर के खुलने के बाद से अरब सागर का सबसे बड़ा  पत्तन बन गया ।


हम गूगल से सर्च करते हुए मुंबई के संबंध में विभिन्न जानकारियां एकत्रित करते रहे।

 हम सोच रहे थे - वो एलियंस पृथु मही की मानव जाति से काफी नाराज थे ।

मानव जाति इस धरती को ही नहीं बरन अंतरिक्ष को भी प्रदूषित कर चुकी थी। प्रकृति व ब्रहमांड में मानव जाति के विकास ने सहज और स्वत:  जीवन में विकार खड़े क र दिए थे। जिसका प्रभाव स्वयं मानव जाति की ही प्रकृति स्थूलता और सूक्ष्म पर पड़ा ।मानव जाति दयनीय अवस्था में पहुंच चुकी थी ।


वन्य समाज,आदिवासी अपना सहजीवन और व्यवस्था को बचाए हुए तो थे लेकिन जीवन संघर्ष बढ़ गया था ।

उत्तरी ध्रुव, साइबेरिया आदि क्षेत्र पुन: हरियाली से भरने लगे थे ।

अनेक ग्लेशियर पिघल चुके थे। गोमुख से ऊपर सेआने वाली अनेक जलधाराएं सूख चुकी थी । समुद्रों के तल बढ़ गए थे । अनेक समुद्र तटीय क्षेत्र डूब चुके थे। बचे खुचे मानवों में 85% जनता को अपना जीवन जीना मुश्किल हो रहा था । आपसी कलह, संघर्ष और युद्ध बढ़ गए थे । परिवार व्यवस्था ,रिश्ते नाते बिखर चुके थे ।अनेक शहरों को समुद्र निगल चुके थे । इन शहरों में एक शहर- मुंबई। 

 4 गोताखोर उसमें थे ।




तीन नेत्री एलियन 'हफदमस' उड़न तश्तरी के अंदर स्क्रीन से विभिन्न स्रोतों से विभिन्न सूचनाएं एकत्रित कर रहा था उड़नतश्तरी की गति बहुत धीमी हो चुकी थी । धरती पर खड़ी एक उड़नतश्तरी में से एक छोटा सा यान निकल कर आकाश में गति करने लगा था।

हफदमस ने अपनी उड़नतश्तरी को नीचे धरती पर उतार दिया इस पृथु मही के अनेक बड़े हवाई अड्डों का पुनर्निर्माण और परिमार्जन किया जा रहा था । 

पेरू की प्राचीन सभ्यता इका के अवशेषों को आधुनिक ढंग से ठीक किया जा रहा था। दूर-दूर तक पत्थरों की जड़ाई से बनी सीधी और वृत्ताकार रेखाओं वाले स्थल को  पुनः जीवित किया जा रहा था। जिसकी एक दीवार पर एक राकेट बना हुआ था । राकेट के बीच में एक व्यक्ति आश्चर्यजनक हेलमेट लगाए हुए दिखाया गया था । जिसे मातृ देवी भी कहा जा रहा था। दक्षिण अमेरिका की इंडीज पहाड़ियों में बसी एक झील के पास एक प्राचीन नगर के अवशेषों को भी पुनर्जीवित किया जा रहा था। वहां के सूर्य मंदिर को पुनः स्थापित किया जा रहा था।

महाभारत युद्ध के बाद विश्व में विभिन्न नगरों में इक्ष्वाकु वंश की मूर्ति निर्माण कला प्रसारित हुई थी।कोणार्क के सूर्य मंदिर के तरह पश्चिम के अनेक देशों में सूर्य मंदिर भी स्थापित किए गए थे या स्थापित की जाने लगे थे।


लेकिन... लेकिन...


 हफदमस उड़नतश्तरी से बाहर निकलते हुए जब आगे बढ़ा तो काले रंग के अनेक लड़के लड़कियों ने उन्हें घेर लिया और साथ-साथ चलने लगे।


सन 1498 ईस्वी में जब वास्कोडिगामा भारत आया तब उन दिनों भी मुंबई वर्तमान नगर की तरह स्थापित नहीं हो पाया था।वह उस समय भी 7 दीपों के रूप में था । जहां का वातावरण पूर्ण रूप से प्राकृतिक था। इन द्वीपों पर कश्यप वंशी मछुआरे रहा करते थे जो अपने को यवन  आर्य  (ययाति पुत्र तुर्वसुवंशी)कहते थे।कुछ अपने को रावण (र - अवन) वंशी भी मानते थे। सन 1498 ईस्वी में वास्कोडिगामा की यात्रा के वक्त, उस समय का 'सर जी'- का एक चरित्र था-दितान्त ,जो कि समाज में तुर्क माना जाता था लेकिन वह अपने को यवन आर्य कहता। वह कहता था कि हमारे पूर्वज कभी कृष्ण सागर के आसपास विशेषकर आनातोलिया में बस गए थे । जो मलेक्षों में ब्राह्मण के रूप में सम्मानित थे।





शनिवार, 28 नवंबर 2020

श्रुति बनाम स्मृति ! श्रुति हमारी अंदर की आसमानी स्थिति, जो हमें ऋषि बनाती है::अशोकबिन्दु

 सन्देश!

पुस्तक -'#सत्यकाउदय'!

पुस्तक - '#अक्षरसत्य'!!

पुस्तक-'#वयंरक्षाम:'

इन पुस्तकों का अध्ययन व #अंतरप्रेरणा के बाद.....


प्रकृति अभियान(यज्ञ),उसकी दशा व वो जिसमें उतरना वह ऋषि!वह जो ऋषि में उतरे वही श्रुति वही #सुरति!!वही पुस्तक रूप में अब #वेद!!


योग का आठवां अंग-#समाधि।

जहां #सिकन्दर अपनी अंतिम स्वासें गिन रहा था, वह क्षेत्र भी कभी आर्य का आभा क्षेत्र था। क्षेत्र ,परिस्थिति व पन्थ विशेष के आधार पर अभिव्यक्ति के माध्यम व तरीके बदलते रहे हैं। वहां कभी #मेसोपोटामिया सभ्यता पनपी।

पुरातत्व विद डॉक्टर फ्रेंक फोर्ड और लैंगडन आदि कहते हैं कि प्रोटोएलमाइट सभ्यता का ही विकसित रूप सुमेर सभ्यता है।#प्रोटोएलमाइट जाति क्या है?प्रोटोएलमाइट जाति है-चाक्षुष कुल या जाति।जिसके छह महारथियों ने बिलोचिस्तान और ईरान होते हुए एलाम और मेसोपोटामिया को जीत कर  अपने राज्य में स्थापित किए थे। भूमध्य सागरीय क्षेत्र व मिश्र के कुछ कबीले/जंगली लोग अब भी कहते हैं कि हमारा पूर्वज दूसरी धरती से आया था।जो मत्स्य मानव था।प्रलय के वक्त उसी प्रजाति /वरुण से मनु की नौका को बचाया गया था। पश्चिम व #बेबीलोनियन पौराणिक कथाओं में भी ,शत पथ व मत्स्य पुराण में भी इन घटनाओं का वर्णन है।


योग का आठवां अंग-#समाधि।


#नक्शबंदी सम्प्रदाय के आदि सन्त भाव व मन से सनातन धर्म को मानते थे।एक समय वह भी था जब धर्म का #मजहबीकरण नहीं हुआ था।क्षेत्र, भाषा, भौगोलिक परिस्थितियों आदि विशेष के कारण कर्मकांड, रीतिरिवाज आदि व मानव नस्ल में भेद रहा है।दुनिया में लगभग  चार मानव नस्ल सदा रही हैं। नक्शबंदी सम्प्रदाय  में आठ नियम रहे हैं-श्वास में चैतन्य, चरणों पर दृष्टि, यात्रा, एकांतबास, ईश्वरी स्मृति, ईश्वर के प्रति एकांत गमन, ईश्वरी ध्यान तथा आत्म विस्मृति। आत्म विस्मृति या समाधि का मतलब सांसारिकता के प्रति असावधान हो जाना और खोए खोए अपनी दिनचर्या व कर्तव्य निभाते जाना।यहां पर अपने कोई अधिकार नहीं रह जाते। हम उस दशा को पा जाते हैं कि उसकी मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता। वह सारथी बन जाता है।हमारे हाड़मांस शरीर व हमारी सांसारिक, सामाजिक, भौतिक स्थिति कोई भी हो सकती है।अमीर होकर भी आम सामान्य सी। 

  #शेष


#अशोकबिन्दु






सोमवार, 16 नवंबर 2020

भईया दूज:: यम शक्ति को नमन!!अशोकबिन्दु

 हमारी व्याख्याएं व जगत को देखने का तरीका दूसरा है।


अपनी सम्पूर्णता में जीने से ही शांति हैं, सुकून है,सन्तुष्टि है।

योग कोई हाथ पैर चलना, लम्बी गहरी सांसे छोड़ना निकलना आदि नहीं है सिर्फ।

योग/सम्पूर्णता की प्राप्ति के आठ अंग हैं।

पहला अंग है-यम।

खोना व पाना का संग है।हर पल एक की प्राप्ति होती है तो एक से दूरी...लेकिन अंततः दोनों से मुक्ति।

इस लिए कहा गया है-आचार्य है मृत्यु, योगी होना है मृत्यु। यम भी है मृत्यु। एक का छूटना।



सत्य, अहिंसा, अस्तेय,अपरिग्रह व ब्रह्मचर्य पांच यम हैं। यही आदि सनातन धर्म स्तम्भ हैं। ऋषभ देव का पंच महाव्रत है। इस पंच महाव्रत को धारण करने वाला जिन है ,धरती का आदि वीर है।।

प्रकृति व ब्रह्म के बीच परस्पर सम्मान कब है?


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भैया दूज!

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यम / मृत्यु को जीतना।सम्मान देना।


आध्यत्म में सन्देश :: जगत में जो भी स्त्री पुरुष हैं, भाई बहिन हैं। सभी में मालिक की रोशनी मौजूद है।सब मिशन/प्रकृति अभियान(यज्ञ) में लगे हैं। सभी एक जगत पिता से हैं। सभी अपनी अपनी व्यस्तता के बीच अर्थात जगत की चकाचौंध में  इस को भूल गए हैं। जब हम इसे याद करेगें और इस भाव में आकर एक दूसरे के निष्काम सम्मान को बढ़ाएंगे तो आध्यात्मिक राज्य स्थापित होगा। सभी की उम्र बढ़ेगी।


अनन्त यात्रा में लीनता ही प्रेम। जहां कम्पन, स्पंदन, तरंगें, प्रकाश...गतिमान... आत्मियता... आत्मा... सम्वेदना जो सर्वत्र व्याप्त...! ऐसे में स्त्री पुरुष के बोध का भी भान नहीं। जब स्त्री पुरुष के बोध का भान हो भी तो वह भाई बहिन के रूप में क्योकि प्रेम अर्थात अनन्त सागर में लीनता में कुछ भी इंद्रियक नहीं, स्थूल नहीं। 


#अशोकबिन्दु


यमस्वसर्नमस्तेऽसु यमुने लोकपूजिते।

वरदा भव मे नित्यं सूर्यपुत्रि नमोऽस्तु ते ।।

                   ❤️ लोकश्रुति है कि यमराज व्यस्तताओं के कारण कभी बहन यमुना के घर नहीं जा पाते थे। इस कारण यमुना को बहुत दुःख होता था। एक बार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को यमराज अचानक बहन यमुना के घर पहुंचे, तो यमुना बहुत प्रसन्न हुईं और उन्होंने अपने अतिव्यस्त भाई यमराज की खूब आवभगत की ! यमराज ने प्रसन्न हो कर वर दिया कि आज के दिन बहन के घर भोजन करने वालों को यम का भय नहीं होगा और उनकी आयु में वृद्धि होगी। इस परंपरा के माध्यम से हर भाई-बहन के बीच परस्पर स्नेह  सतत बढ़ता रहे, इसी सद्कामना के साथ आप सबको भाई दूज के पावन पर्व की अनंत शुभकामनाएँ ! साथ ही साथ आप सब को भगवान चित्रगुप्त के पूजनोत्सव की भी असीम मंगलकामनाएँ 😍🙏💐💐





गुरुवार, 5 नवंबर 2020

साइबेरिया की प्रयोगशाला से!

  साइबेरिया के जंगलों के बीच एक प्रयोगशाला।

तीन नेत्रधारी दो युवक रूस की एक युवती के साथ बैठे थे।

सामने डिजिटल बॉल पर चल चित्र आ रहे थें।

चलचित्र में---


ईशा पूर्व लगभग 567 वर्ष।

तब एक पांच छह साल का बालक?जिसे कोई 'प्र-ओत', तो कोई 'प्रा-ओटा' पुकारते थे।

वह समुद्री तट?!


समुद्र में समुद्र की ऊंची ऊंची कुश्ती लहरों के बीच एक नौका में आंख बंद पड़ी वेदों की छोरियां सुना जाता है की वे दोनों की छोरियां भारत से आई थी समुद्री लुटेरों ने एक जहाज को लूटा था वह जहाज कलिंग राज्य भारत के किसी बंदरगाह से चला था और समुद्र में लूट लिया गया जब यह जहाज भारत से चला था तो दोनों किशोरियों बालिका थी उन्हें किसी व्यापारी ने बेच दिया था कुछ व्यक्तियों के साथ बे बालिकाएं भी समुद्र में कूद गई थी उस जहाज से लूट के दौरान आग भी लग गई थी बेहोशी हालत में दोनों एक द्वीप के तट पर लग गई थी जब होश आया तो कुछ समय उनके परेशानी और बेचैनी में बीता घास फूस पत्ते खाकर काम चलाया ।

उन्हें ध्यान आया की उनकी मां मुसीबत के समय आंख बंद करके बैठती थी और मन ही मन बुदबुदा टी  थी हमारी कोई समस्या नहीं है हम तो दिव्य प्रकाश से भरे हैं जिसके प्रभाव हमारे सारे विकार नष्ट हो रहे हैं दोनों उस टापू पर अधिकतर समय ध्यान में बिताते थी लगभग 5 साल बीत गए 1 दिन समुद्री तूफान आया जिसमें वह दोनों बहे गई जब तूफान शांत हुआ तो उन पर कुछ मछुआरों की निगाह पड़ी एक सन्यासी ने अपनी झोपड़ी में उसे आश्रित दिया बड़ी को  प्रे फेस नाम से व छोटी को प्रेमबल नाम से पुकारा जाने लगा। दोनों के बीच पांच छह वर्षिय प्रोटागोरस कुछ समय के लिए खेलने लगा और ध्यान करना भी सीखा।

"पूर्व के सन्तों को नमन!"



उस भूमिगत एलियन्स प्रयोगशाला, साइबेरिया में उस चलचित्र से अपना ध्यान हटा कर  समकेदल वम्मा के बारे में सोचने लगी।


समकेदल वम्मा...?!

सन 5012ई0 का ही शायद समय था...

....सम्कदेल वम्मा मुश्किल मेँ था.अब कैसे यान को वह आगे निकाले?दुश्मनोँ के यान से छोड़ी जा रही घातक तरंगे यान को नुकसान पहुँचा सकती थी.ऐसे मेँ उसने अनेक धरतियोँ पर उपस्थित अपने सहयोगियोँ से एक साथ सम्पर्क साधा.


"मेरे यान को घेर लिया गया है."


सम्कदेल वम्मा के सहयोगियोँ के द्वारा अपने अपने नियन्त्रण कक्ष से अपने अपने कृत्रिम उपग्रहोँ मेँ फिट हथियारोँ से दुश्मन के यानोँ पर घातक तरंगे छोड़ी जाने लगीँ.अनेक यान नष्ट भी हुए.


लेकिन....?!


सम्कदेल वम्मा के यान मेँ आग लग गयी .


"मित्रोँ!सर! यान मेँ आग लग गयी है. दुश्मनोँ के यानोँ से छोड़ी जाने वाली घातक तरंगोँ से मेरा यान अब भी घिरा हुआ है. कोई अपने कृत्रिम उपग्रह से पायलटहीन यान भेजेँ . लेकिन.....?!मैँ......मैँ... ....मैँ.....आ.....आ...(कराहते हुए) आत्मसमर्पण करने जा रहा हूँ."

फिर सम्कदेल वम्मा ने सिर झुका लिया.


सम्कदेल वम्मा ने अपने बेल्ट पर लगा एक स्बीच आफ कर दिया.जिससे उसके ड्रेश पर की जहाँ तहाँ टिमटिमाती रोशनियाँ बन्द हो गयीँ. इसके साथ ही यानोँ से घातक तरंगोँ का अटैक समाप्त हो गया और जैसे ही उसने अपने यान का दरवाजा खोला एक विशेष प्रकार की चुम्बकीय तरंगोँ ने उसे खीँच कर दुश्मन के एक यान मेँ पहुंचा दिया.वह यान के बन्द होते दरबाजे की ओर देखने लगा.

"दरबाजे की ओर क्योँ देख रहे हो?" 


"तुम?!"


"हाँ मै,तुम हमसे दोस्ती कर लो.मौज करोगे."


"मेरा मौज मेरे मिशन मेँ है." 


" हा S S S S हा S S S S हा S S S हा S S S S हा S S S " -  ठाहके लगाते हुए.

फिर-

"धर्म मेँ क्या रखा है? जेहाद मेँ क्या रखा है ? ' जय कुरुशान जय कुरुआन' का जयघोष छोड़ो.'जय काम' बोलो 'जय अर्थ' बोलो.जितना 'काम'और 'अर्थ'मेँ मजा है उतना 'धर्म'और 'मोक्ष'मेँ कहाँ ? 'काम'और'अर्थ'की लालसा पालो,'धर्म'और 'मोक्ष' की नहीँ."


"तुम मार दो मेरे तन को.तभी तुम्हारी भलाई है."



" सम्कदेल वम्मा! अपने पिता की तरह क्या तुम मरना पसन्द करोगे? "


" पिता कैसा पिता?शरीर तो नश्वर ही है . तू हमेँ मारेगा ? भूल गया तू क्या कुरुशान को अर्थात गीता सन्देश को ? भूल गया तू क्या कुरुआन को -हुसैन की शहादत को ? "


"सम्कदेल! तू भी अपने पिता की तरह बोलता है? "


"हूँ! तुम जैसे भोगवादी! धन लोलुप! कामुक!थू! "

"सम्कदेल!"


"हमारी कोशिसेँ बेकार नहीँ जायेगी . क्योँ न बार बार मर कर बार बार जन्म लेना पड़े? राम कृष्ण के जन्म हेतु अतीत मेँ कारण छिपे होते है. तेरा अहंकार जाग कर जब तक सौ प्रतिशत नहीँ हो जाता तब तक तू मोक्ष नहीँ पा सकता, इसके लिए तुझे बार बार जन्म लेना पड़ सकता है. तू चाहे मेरे इस शरीर को मार दे लेकिन तेरा अहंकार चकनाचूर करने को मैँ फिर जन्म लूँगा -देव रावण . "


" अपनी फिलासफी तू अपने पास रख. कुछ दिनोँ बाद ब्राहमाण्ड की सारी शक्तियाँ हमारे हाथ मेँ होगी. तुम मुट्ठी भर लोग क्या करोगे? अब हम वो दुर्योधन बनेँगे जो कृष्ण को भी अपने साथ रखेगा ,कृष्ण की नारायणी सेना भी. अब मैँ वह रावण बनूंगा जो विभीषण से प्रेम करेगा,राम के पास नहीँ जाने देगा.अगर जायेगा भी तो जिन्दा नहीँ जाएगा."


"यह तो वक्त बतायेगा,जनाब . वक्त आने पर अच्छे अच्छे की बुद्धि काम नहीँ करती.आप क्या चीज हैँ ?"


"हूँ!"


फिर-


" सम्कदेल! जानता हूँ धर्म मोक्ष देता है लेकिन तुम क्या यह नहीँ जानते कि अधर्म भी मोक्ष देता है?मैँ आखिरी वार कह रहा हूँ कि मेरे साथ आ जाओ. नहीँ तो मरने को तैयार हो जाओ."


" मार दो, मेरे शरीर को मार दो."


"डरना नहीँ मरने से?"


"क्योँ डरुँ? चल मार."


सम्कदेल वम्मा के सहयोगी अपने अपने ठिकाने से अन्तरिक्ष मेँ आ चुके थे.


लेकिन...?!


सम्कदेल वम्मा ......?!


""" *** """


एक चालकहीन कम्प्यूटरीकृत यान सनडेक्सरन धरती पर आ कर सम्कदेल वम्मा के मृतक शरीर को छोड़ गया था. आरदीस्वन्दी भागती हुई मृतक शरीर के पास आयी और शान्त भाव मेँ खड़ी हो गयी.


उसके मन मस्तिष्क मेँ सम्कदेल वम्मा के कथन गूँज उठे.


".....शरीर तो नश्वर है . हमे तू मारेगा? भूल गया कुरुशान को अर्थात गीता सन्देश को ? ..... हमारी कोशिसेँ बेकार नहीँ जाएगी. क्योँ न बार बार मर कर बार बार जन्म लेना पड़े?"


आरदीस्वन्दी अभी कुछ समय पहले सम्कदेल वम्मा व देव रावण की वार्ता को सचित्र देख रही थी.आरदीस्वन्दी ने सिर उठा कर देखा कि यान अन्तरिक्ष से वापस आ रहे थे.


कुछ दूर एक विशालकाय स्क्रीन पर अन्तरिक्ष युद्ध के चित्र प्रसारित हो रहे थे. देव रावण के अनेक यानोँ को नष्ट किया जा चुका था.


अब भी-


"..... तेरा अहंकार जाग कर जब तक सौ प्रतिशत नहीँ हो जाता तब तक तू भी मोक्ष नहीँ पा सकता है, इसके लिए तुझे भी बार बार जन्म लेना पड़ सकता है. तू चाहे मेरे इस शरीर ......!?

पुन:



....सम्कदेल वम्मा मुश्किल मेँ था.अब कैसे यान को वह आगे निकाले?दुश्मनोँ के यान से छोड़ी जा रही घातक तरंगे यान को नुकसान पहुँचा सकती थी.ऐसे मेँ उसने अनेक धरतियोँ पर उपस्थित अपने सहयोगियोँ से एक साथ सम्पर्क साधा.


"मेरे यान को घेर लिया गया है."


सम्कदेल वम्मा के सहयोगियोँ के द्वारा अपने अपने नियन्त्रण कक्ष से अपने अपने कृत्रिम उपग्रहोँ मेँ फिट हथियारोँ से दुश्मन के यानोँ पर घातक तरंगे छोड़ी जाने लगीँ.अनेक यान नष्ट भी हुए.


लेकिन....?!


सम्कदेल वम्मा के यान मेँ आग लग गयी .


"मित्रोँ!सर! यान मेँ आग लग गयी है. दुश्मनोँ के यानोँ से छोड़ी जाने वाली घातक तरंगोँ से मेरा यान अब भी घिरा हुआ है. कोई अपने कृत्रिम उपग्रह से पायलटहीन यान भेजेँ . लेकिन.....?!मैँ......मैँ... ....मैँ.....आ.....आ...(कराहते हुए) आत्मसमर्पण करने जा रहा हूँ."

फिर सम्कदेल वम्मा ने सिर झुका लिया.


सम्कदेल वम्मा ने अपने बेल्ट पर लगा एक स्बीच आफ कर दिया.जिससे उसके ड्रेश पर की जहाँ तहाँ टिमटिमाती रोशनियाँ बन्द हो गयीँ. इसके साथ ही यानोँ से घातक तरंगोँ का अटैक समाप्त हो गया और जैसे ही उसने अपने यान का दरवाजा खोला एक विशेष प्रकार की चुम्बकीय तरंगोँ ने उसे खीँच कर दुश्मन के एक यान मेँ पहुंचा दिया.वह यान के बन्द होते दरबाजे की ओर देखने लगा.

"दरबाजे की ओर क्योँ देख रहे हो?" 


"तुम?!"


"हाँ मै,तुम हमसे दोस्ती कर लो.मौज करोगे."


"मेरा मौज मेरे मिशन मेँ है." 


" हा S S S S हा S S S S हा S S S हा S S S S हा S S S " -  ठाहके लगाते हुए.

फिर-

"धर्म मेँ क्या रखा है? जेहाद मेँ क्या रखा है ? ' जय कुरुशान जय कुरुआन' का जयघोष छोड़ो.'जय काम' बोलो 'जय अर्थ' बोलो.जितना 'काम'और 'अर्थ'मेँ मजा है उतना 'धर्म'और 'मोक्ष'मेँ कहाँ ? 'काम'और'अर्थ'की लालसा पालो,'धर्म'और 'मोक्ष' की नहीँ."


"तुम मार दो मेरे तन को.तभी तुम्हारी भलाई है."



" सम्कदेल वम्मा! अपने पिता की तरह क्या तुम मरना पसन्द करोगे? "


" पिता कैसा पिता?शरीर तो नश्वर ही है . तू हमेँ मारेगा ? भूल गया तू क्या कुरुशान को अर्थात गीता सन्देश को ? भूल गया तू क्या कुरुआन को -हुसैन की शहादत को ? "


"सम्कदेल! तू भी अपने पिता की तरह बोलता है? "


"हूँ! तुम जैसे भोगवादी! धन लोलुप! कामुक!थू! "

"सम्कदेल!"


"हमारी कोशिसेँ बेकार नहीँ जायेगी . क्योँ न बार बार मर कर बार बार जन्म लेना पड़े? राम कृष्ण के जन्म हेतु अतीत मेँ कारण छिपे होते है. तेरा अहंकार जाग कर जब तक सौ प्रतिशत नहीँ हो जाता तब तक तू मोक्ष नहीँ पा सकता, इसके लिए तुझे बार बार जन्म लेना पड़ सकता है. तू चाहे मेरे इस शरीर को मार दे लेकिन तेरा अहंकार चकनाचूर करने को मैँ फिर जन्म लूँगा -देव रावण . "


" अपनी फिलासफी तू अपने पास रख. कुछ दिनोँ बाद ब्राहमाण्ड की सारी शक्तियाँ हमारे हाथ मेँ होगी. तुम मुट्ठी भर लोग क्या करोगे? अब हम वो दुर्योधन बनेँगे जो कृष्ण को भी अपने साथ रखेगा ,कृष्ण की नारायणी सेना भी. अब मैँ वह रावण बनूंगा जो विभीषण से प्रेम करेगा,राम के पास नहीँ जाने देगा.अगर जायेगा भी तो जिन्दा नहीँ जाएगा."


"यह तो वक्त बतायेगा,जनाब . वक्त आने पर अच्छे अच्छे की बुद्धि काम नहीँ करती.आप क्या चीज हैँ ?"


"हूँ!"


फिर-


" सम्कदेल! जानता हूँ धर्म मोक्ष देता है लेकिन तुम क्या यह नहीँ जानते कि अधर्म भी मोक्ष देता है?मैँ आखिरी वार कह रहा हूँ कि मेरे साथ आ जाओ. नहीँ तो मरने को तैयार हो जाओ."


" मार दो, मेरे शरीर को मार दो."


"डरना नहीँ मरने से?"


"क्योँ डरुँ? चल मार."


सम्कदेल वम्मा के सहयोगी अपने अपने ठिकाने से अन्तरिक्ष मेँ आ चुके थे.


लेकिन...?!


सम्कदेल वम्मा ......?!


""" *** """


एक चालकहीन कम्प्यूटरीकृत यान सनडेक्सरन धरती पर आ कर सम्कदेल वम्मा के मृतक शरीर को छोड़ गया था. आरदीस्वन्दी भागती हुई मृतक शरीर के पास आयी और शान्त भाव मेँ खड़ी हो गयी.


उसके मन मस्तिष्क मेँ सम्कदेल वम्मा के कथन गूँज उठे.


".....शरीर तो नश्वर है . हमे तू मारेगा? भूल गया कुरुशान को अर्थात गीता सन्देश को ? ..... हमारी कोशिसेँ बेकार नहीँ जाएगी. क्योँ न बार बार मर कर बार बार जन्म लेना पड़े?"


आरदीस्वन्दी अभी कुछ समय पहले सम्कदेल वम्मा व देव रावण की वार्ता को सचित्र देख रही थी.आरदीस्वन्दी ने सिर उठा कर देखा कि यान अन्तरिक्ष से वापस आ रहे थे.


कुछ दूर एक विशालकाय स्क्रीन पर अन्तरिक्ष युद्ध के चित्र प्रसारित हो रहे थे. देव रावण के अनेक यानोँ को नष्ट किया जा चुका था.


अब भी-


"..... तेरा अहंकार जाग कर जब तक सौ प्रतिशत नहीँ हो जाता तब तक तू भी मोक्ष नहीँ पा सकता है, इसके लिए तुझे भी बार बार जन्म लेना पड़ सकता है. 

और....



सन 6020ई0 का विजयादशमी पर्व! मातृदेवी की भव्य प्रतिमा के समक्ष शस्त्रपूजन कार्यक्रम चल रहा था.सनडेक्सरन नि वासी बालक हफ्कदम के एक युवती के साथ मंच पर उपस्थित था. दोनों तीननेत्री थे. एक वृद्व सन्यासी जो कि हरा व लाल रंग के वस्त्र पहने था.हवन कुण्ड की अग्नि प्रजव्लित करते हुए बोला -"जीवों में चेतना के दो अंश होते हैं-परमात्मांश व प्रकृतिअंश.इन दोनों में सन्तुलन का सिद्धान्त ही (एक ओर स्थापित श्री अर्द्धनारीश्वर प्रतिमा को देखकर) श्रीअर्द्धनारीश्वर स्वरुप में छिपादर्शन है.आज विजयादशमी पर आप सगुणप्रेमियोँ के द्वारा मातृदेवी के समक्ष शस्त्रों की पूजा का मतलब क्या है?प्रकृति को बचाने को शस्त्र उठने ही चाहिए लेकिन शस्त्र सिर्फ स्थूल ही नहीं होते.हर कोई प्रकृति का संरक्षक सगुण व क्षत्रिय है." आकाश में अनेक यान तेजी के साथ तेज आवाज करते हुए मड़राने लगे. 
और... " हा... हा.. हा.. हा.....! " - अपने नियन्त्रण कक्ष से एक  वृद्ध राजसी व्यक्ति ठहाके लगा रहा था. यह वृद्ध व्यक्ति...?!अचानक वह चौंका.स्क्रीन पर दिख रहा था कि सारे नष्ट किये जा रहे थे और अब बालक हफ्कदम हँसते हुए बोला-"देवरावण!तू ..."



सरकारें बदलने से कुछ नहीं होने का, व्यवस्थाएं बदलने की जरूरत::अशोकबिन्दु


 "गांव की सरकार से क्या अभिप्राय है?"


05 नवम्बर 2022 ई0! राष्ट्र सन्त श्री तुकडोजी महाराज पुण्य तिथि!!


 सहकारिता,मानवता,परस्पर सहयोग से जीता मानव समाज जब प्राकृतिक कृषि पशुपालन लघु उद्योग कुटीर उद्योग आदि के वातावरण में जीवन जिए तो ऐसे में समाज और सामाजिकता घटित होती है। कबीलाई संस्कृति,आश्रम पद्धति वास्तव में हमें प्रकृति के बीच ससम्मान जीवन दे सकती है। शहरीकरण,स्मार्ट सिटी के स्थान पर स्मार्ट विलेज की परंपरा खड़ी होनी चाहिए। विद्यार्थी जीवन के बाद अनेक युवक युवतियां प्रकृति के बीच निकल आए और सरकार के सहयोग से पशुपालन, बागवानी ,कृषि ,औषधियों,योगा, जीविका आदि के लिए बहुउद्देश्य  उपक्रम खड़ा करें । शहरों, पूजी पतियों की व्यवस्था की ओर नहीं। मानवता, सहकारिता और बहुद्देशीय संस्थाओं की ओर अब हम सब बढ़े ।अधिक विभाग ,अनेक विभाग खड़े करने की जरूरत नहीं है ।

हर व्यक्ति का सैनिक करण और कृषि का व्यवसायीकरण आवश्यक है । हर व्यक्ति का योगीकरण आवश्यक है।


 नैतिक पार्टी के संस्थापक सी वी पांडे की गांव सरकार का हम समर्थन करते हैं । आज राष्ट्र संत श्री टुकड़ोंजी महाराज की पुण्यतिथि है । इस समय प्रदेश में विधानसभा चुनाव का माहौल है। हम किसी पार्टी का प्रचार प्रसार करने नहीं आए हैं । हम यह कहने आए हैं जनतंत्र में हम को प्रबंधन के लिए जनता को ही दोषी मानते हैं । क्योंकि जनता ही सरकार चुनती हैं। जनता ही चेयरमैन,विधायक ,सांसद आदि चुनती है। हमें इससे मतलब होना चाहिए कि क्या होना चाहिए क्या नहीं होना चाहिए ? जीवन को समझो । इस धरती पर बड़े-बड़े सूरमा आए धराशायी हो गए ।कृत्रिम व्यवस्थाओं ने प्रकृति को ही नहीं मानव जीवन में भी विकार खड़े कर दिए हैं। गांव की सरकार का मतलब शहरीकरण नहीं है। कृत्रिम व्यवस्थाओं,पूंजीवादी व्यवस्था से जुड़ना नहीं है बरन उस कबीलाई और सहकारी व्यवस्था से जुड़ना है जो प्रकृत से बिना छेड़छाड़ किए या कम छेड़छाड़ के खड़ी हो । 


16 वी सदी से जो सामाजिक और आर्थिक विकास बनता है उसने भौतिक भोग वाद को ही जन्म दिया है और कार्यात्मक संरचना को तोड़ा है। प्राकृतिक जीवन को नष्ट किया है। 


'सर जी'-कुछ समय तक हमारे नजदीक रहे। वे कहते थे हम सिर्फ प्रकृति अंश हैं और ब्रह्म अंश। हम सबके अलावा सब ब्राह्मण्ड में प्रकृति अभियान के हिसाब से चलता है।


किसानों के लिए राष्ट्रीय किसान आय आयोग बनाया जाए ।


किसानों को स्वयं अपने उपज की कीमत निर्धारित करने का अधिकार हो।

#भविष्यकथांश


हमारी पुस्तक-' विश्व सरकार ग्रन्थ साहिब::भूमिका'


अशोक कुमार वर्मा "बिंदु"/अशोक बिन्दु भैया


www.akvashokbindu.blogspot.com

बुधवार, 19 अगस्त 2020

सद्भावना में मशीनी औरतें..... अशोकबिन्दु


जंगल के बीच एक विशालकाय इमारत ! इमारत के बाहर अनेक जीव जन्तुओँ एवं महापुरूषोँ-कृष्ण विदुर ,महावीर जैन ,बुद्ध, चाणक्य, ईसा मसीह ,सुकरात, क........

ABLAL

जंगल के बीच एक विशालकाय इमारत ! इमारत के बाहर अनेक जीव जन्तुओँ एवं महापुरूषोँ-कृष्ण विदुर ,महावीर जैन ,बुद्ध, चाणक्य, ईसा मसीह ,सुकरात, कालिदास ,दारा शिकोह, कबीर, शेरशाह सूरी ,गुरूनानक ,राजा राममोहनराय, सावित्री फूले ,राम कृष्ण परमहंस ,महात्मा गाँधी, एपीजे अब्दुल कलाम, साँई बाबा, ओशो , अन्ना हजारे, आदि की प्रतिमाएँ पेँड़ पौधोँ के बीच स्थापित थीँ . इमारत के अन्दर वातावरण आध्यात्मिक था. वेद कुरान बाइबिल आदि से लिए गये अमर वचन जहाँ -तहाँ दीवारोँ पर लिखे थे. इसके साथ ही सभी ग्रन्थोँ के प्रतीक चिह्न अंकित थे. मन्द मन्द 'ओ3म -आमीन' की ध्वनि गूँज रही थी. जहाँ अनेक औरतेँ नजर आ रही थीँ पुरुष कहीँ भी नजर नहीँ आ रहे थे. हाँ,इस इस इमारत के अन्दर एक अधेड़ पुरुष उपस्थित था जो श्वेत वस्त्र धारी था .इस इमारत का नाम था-'सद्भावना' .एक अण्डाकार यान आकाश मेँ चक्कर लगा रहा था. एक कमरे के अन्दर दीवारोँ पर फिट स्क्रीन्स के सामने किशोरियाँ एवं युवतियाँ उपस्थित थे. अधेड़ पुरुष के सामने उपस्थित स्क्रीन पर अण्डाकार यान को देख कर उसने अपना हाथ घुमाया और वह स्क्रीन गायब हो गयी. सामने रखी माचिस के बराबर एक यन्त्र लेकर फिर वह उठ बैठा. इधर अण्डाकार यान हवाई अड्डे पर उतर चुका था.

* * * *

पृथ्वी से लाखोँ प्रकाश वर्ष दूर एक धरती-सनडेक्सरन . जहाँ मनुष्य रहता तो था लेकिन ग्यारह फुट लम्बे और तीन नेत्रधारी . एक बालिका 'आरदीस्वन्दी'जो तीननेत्र धारी थी , वह बोली -देखो ,माँ पहुँची पृथ्वी पर क्या?एक किशोर 'सम्केदल वम्मा' दीवार मेँ फिट स्क्रीन पर अतीत के एक वैज्ञानिक, जिन्हेँ लोग त्रिपाठी जी कहकर पुकारते थे, को सुन रहा था . जो कह रहे थे कि आज से लगभग एक सौ छप्पन वर्ष पूर्व इस ( पृथ्वी) पर एक वैज्ञानिक हुए थे एपीजे अब्दुल कलाम. उन्होने कहा था कि हमेँ इस लिए याद नहीँ किया जायेगा कि हम धर्म स्थलोँ जातियोँ के लिए संघर्ष करते रहे थे. आज सन 2164ईँ0 की दो अक्टूबर! विश्व अहिँसा दिवस . आज मैँ इस सेमीनार मेँ कहना चाहूगा कि कुछ भू सर्वेक्षक बता रहे हैँ कि सूरत , ग्वालियर, मुरादाबाद, हरिद्वार ,उत्तरकाशी, बद्रीनाथ ,मानसरोवर, चीन स्थित साचे ,हामी, लांचाव, बीजिँग, त्सियांगटाव ,उत्तरी- द्क्षणी कोरिया, आदि की भूमि के नीचे एक दरार बन कर ऊपर आ रही है, जो हिन्दप्राय द्वीप को दो भागोँ मेँ बाँट देगी. यह दरार एक सागर का रुप धारण कर लेगी जिसमेँ यह शहर समा जाएँगे. इस भौगोलिक परिवर्तन से भारत और चीन क्षेत्र की भारी तबाही होगी जिससे एक हजार वर्ष बाद भी उबरना मुश्किल होगा. सम्केदल वम्मा आरदीस्वन्दी से बोला -" त्रिपाठी जी कहते रहे लेकिन पूँजीवादी सत्तावादी व स्वार्थी तत्वोँ के सामने उनकी न चली.

सन2165ई0 की फरवरी! इस चटक ने अरब की खाड़ी और उधर चीन के सागर से होकर प्रशान्त महासागर को मिला दिया. भारतीय उप महाद्वीप की चट्टान खिसक कर पूर्व की ओर बढ़ गयी थी. म्यामार,वियतनाम आदि बरबादी के गवाह बन चुके थे." बालिका बोली कि देखो न,माँ पृथ्वी पर पहुँची कि नहीं... आज सन 5010ई0 की 19 जनवरी! उस अण्डाकार यान से एक तीन नेत्र धारी युवती के साथ एक बालिका बाहर आयी जो कि तीन नेत्रधारी ही थी. अधेड़ व्यक्ति कुछ युवतियोँ के साथ जिनके स्वागत मेँ खड़ा था.

* * * *

"सर ! आपके इस इमारत 'सद्भावना' मेँ तो मेँ प्रवेश नहीँ कर सकूँगी?"- सनडेक्सरन से आयी महिला बोली. तो अधेड़ व्यक्ति बोला कि अफस्केदीरन !तुम ऐसा क्योँ सोचती हो? अफस्केदीरन बोल पड़ी-"सोचते होँगे आपकी धरती के लोग,आप जानते हैँ मैँ किस धरती से हूँ?" जेटसूट से एक वृद्धा उड़ कर धरती पर आ पहुँची. "नारायण!" वृद्धा को देख कर अधेड़ व्यक्ति बोला- "मात श्री !"फिर नारायण उसके पैर छूने लगा. " मैँ कह चुकी हूँ मेरे पैर न छुआ करो." "तब भी......" नारयण ने वृद्धा के पैर छू लिए. इमारत'सद्भावना' के समीप ही बने अतिथिकक्ष मेँ सभी प्रवेश कर गये. आखिर अफस्केदीरन ने ऐसा क्योँ कहा कि सद्भावना मेँ तो मैँ प्रवेश नहीँ कर सकूँगी? दरअसल सद्भावना मेँ औरतोँ का प्रवेश वर्जित था.क्योँ आखिर क्योँ ?इस इमारत को महागुरु ने बनवाया था. जहाँ उन्होँने अपना सारा जीवन गुजार दिया. उन्होँने ही यह नियम बनाया कि इस इमारत मेँ कोई औरत प्रवेश नहीँ करेगी. यह क्या कहते हो आप ? एक को छोड़ कर सब औरतेँ हैँ. तब भी...... बात तब की है जब महागुरु युवावस्था मेँ थे. वह अपनी शादी के लिए लेट होते जा रहे थे. परम्परागत समाज मेँ लोग तरह तरह की बात करने लगे थे. तब वह मन ही मन चिड़चिड़े होने लगे थे कि कोई लड़की हमसे बात करना तक पसन्द नहीँ करती, हमेँ अपने जीवन मेँ पसन्द करना दूर की बात. सामने वाले पर अपनी इच्छाएँ थोपना क्या प्रेम होता है? सद्भावना मेँ उपस्थित स्त्रियाँ ह्यूमोनायड थे. (…जारी)

मंगलवार, 4 अगस्त 2020

आगामी गुलामी की तैयारी

सन5020ई0!




पृथ्वी से लाखों प्रकाश वर्ष दूर एक धरती सनडेक्सरन।

जहां के मूल निवासी तीन नेत्रधारी व 11फुट लम्बे स्त्री पुरुष।


जहां से भी काफी दूर अंतरिक्ष में एक धरती -भुमसन्दा।
जहां के जंगली इलाका में एक शिविर लगा था।अधिकतर स्त्री पुरुष तीन नेत्रधारी थे। जो किसी किसी रिसर्च पर यहाँ आये हुए थे।


सत्तावाद, पूंजीवाद, माफिया वाद की मिलीभगत ने बार बार इतिहास दोहराया है। 

पृथु महि (पृथ्वी) से भी कुछ स्त्री पुरुष मौजूद थे।

दसलोफीन यवती तीन नेत्रधारी नहीं थी।वह जरूर पृथ्वी की रही होगी।


कदफनेडरीस नाम का युवक तीन नेत्रधारी था। जो शिविर की ओर ही जा रहा था।

दसलोफीन कुछ दूरी पीछे विशाल काय पत्थरों, शिलाओं की ओर थी।


एक शिला पर पृथु महि का नक्शा बना हुआ था।

जिसमें भूमध्यसागरीय क्षेत्र व साइबेरिया क्षेत्र के बीच एक  मोटी सी लाइन खींची दिखाई दे रही थी। जो ताशकन्द  व ककेकस के करीब दो भागों में बंटी थी। जहां पर एक पर्वत व एक कछुआ बना था।


जहां दसलोफीन  उपस्थित थी।



वह मन ही मन सोंच रही थी-ब्रह्मांड में जो भी धरती देखो, मनुष्य ही वहां के विनाश का कारण बना।


आम आदमी अपनी आजादी का भ्रम ही सिर्फ पाला रहा।जब आजाद हुआ तो उसकी पूरी धरती थी।अर्थात उसकी आजादी से पूर्व मानव सभ्यता समाप्त हो चुकी थी।

कुछ लोग तो सन 1947 की भारत आजादी को आजादी को भ्रम समझने लगे थे। सन1947ई0 से सत्तावादियो, पूंजीपतियों व माफियाओं की मिलीभगत सत्ता पर कायम रहने के लिए आगामी तैयारी करने लगे थे।जो आगामी गुलामी की ही तैयारी ही थी।


एक ओर शिला पर पशुपति की उकरी तश्वीर को देख कर -

किसी न किसी रूप में ये शक्ति के दर्शन कहीं न कहीं हो जाते हैं।

पृथु महि पर कहीं ब्रह्मा, विष्णु, महेश ब्रह्मांड की अन्य धरतियों से आये महापुरुष तो नहीं?








रविवार, 7 जून 2020

दसलोफीन के साथ अब क्या होगा?

 "साइरियस से साइबेरिया तक!'
ब्लॉग-'भविष्य:कथांश'पर!
सर जी के भी मन को दाद देनी होगी।

किशोरावस्था से ही वे किसी अज्ञात में खो किसी अज्ञात का ििइंतजार करने लगे थे।

उनदिनों वे हरितक्रांति विद्या मंदिर में कक्षा 07-08 में रहे होंगे।

मन जब अंतर्मुखी होने लगे तो वह अमन हो जाता है, जो अनन्त का द्वार है।तब कुछ कहना ही क्या?


वे दोनों-

दसलोफीन  और कदफनेडरीस !
इनमें से कदफनेदरीस तीन नेत्र धारी एक युवक व दसलोफीन सामान्य युवती,हम लोगों के समाज में जैसी।

दोनों सहचर्य मित्र थे।

वह जहां खड़ी थी, वहां अनेक बूत व चटटाने खड़ीं थीं।
जंगली इलाका था।
युवक उससे दूर जा रहा था।

एक शिला पर पृथु महि का नक्शा बना था।

जिसमें भूमध्य सागरीय क्षेत्र व साइबेरिया क्षेत्र के बीच एक मोटी सी लाइन खींची दिखाई दे रही थी।जो ताशकंद व काकेकश के बीच दो भागों में बंटी थी।जहां पर एक पर्वत व एक कछुआ बना था।

पृथ्वी से लाखों प्रकाश वर्ष दूर एक धरती-सनडेक्सरन ।जहां के मूल निवासी तीन नेत्रधारी व 11फुट लंबे स्त्री पुरुष।

 समकेदल वम्मा!
समकेदल वम्मा का अंतरिक्ष यान एयर पोर्ट से उड़ान भर बिशेष तकनीक से अदृश्य हो ही पाया था कि.

सन5012ई0 की 14 जून!

उसके यान पर हमला बोल दिया गया था।

कुछ कुशक्तियां ऐसी पैदा हो गयी थीं जो विज्ञान व नवीन तकनीकी के माध्यम से विभिन्न देवी देवताओं को बना कर पृथु महि की 85-90 प्रतिशत गरीब जनता को बहलाए फुसलाए थी।

कुछ नकली युग प्रवर्तक भी विज्ञान ने खड़े कर दिए थे।

और-

सन2165ई0!

भारतीय उप महाद्वीप व चीन की भूमि को दो भागों में बांटने की योजना थी।


आखिर सफलता पा भी ली थी कुशक्तियों ने।

24फरबरी 2165ई0 को भूमि तीब्र भूकम्प के साथ चटक गयी थी।


गुजरात के सूरत से हरिद्वार, उत्तर काशी, मानसरोवर होते हुए चीन की भूमि को चीरते हुए उत्तरी कोरिया दक्षिणी कोरिया आदि से होकर इस चटक ने अरब सागर और चीन सागर से होकर प्रशांत महासागर को मिला दिया था।


सोंच से बाहर निकल कर -

दसलोफिन अकेली खड़ी कदफनेडरिस को जाते देख रही थी।

"सुनो,आरदीस्वन्दी से जाकर कहना...।"
दस लो फीन जब बोलने को हुई तो.....!??

ये दोनों अंतरिक्ष में एक 'भुम्सनदा'' नाम की धरती पर थे।

भुम्सनदा धरती के ही जंगल में एक शिविर में आरदीस्वन्दी उपस्थित थी। वह अपनी टीम के साथ यहां आयी थी। जिसमें दस लो फीन व उसका सहचर्य कद फने डरिस भी शामिल था।

इसके बाद?!
दस लो फीन?!
खैर!

इधर इस धरती-पृथु महि पर!
तीन नेत्रधारी बालक हफ़क़दम सन डेक्सरन धरती से आयी युवती फदेसहरर के साथ था।

दोनों एयरपोर्ट पर थे।जो भुम सनदा धरती की ओर रवाना होने वाले थे।


उधर सन डेक्सरन धरती पर!

आर दी स्वंदी कि वृद्ध मां अफ स्केदीर्न दीवार पर आ रहे चलचित्र को देख रही थी।यह चल चित्र भुम सनदा धरती के थे।


अंतरिक्ष में एक क्वासर क्षेत्र!

ये क्वासर क्षेत्र?!


अंतरिक्ष में वह धरती जहां जल ही जल ।

नारायण नाम का एक वृद्ध  जहां एक मत्स्य नारी के साथ जल की लहरों के बीच था।


भुम सनदा धरती पर तेज मूसलाधार बरसात हो रही थी।

अकेली पड़ गयी दस लो फीन के साथ अब क्या होने वाला था?

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सूक्ष्म जगत में हमारा वह मिशन पीछे क्यों धकिल गया?

अनेक प्रकाशआकृतियां संग हमारा अमेरिका जाना सूक्ष्म/स्वप्न में हुआ था।


अब..?!

 अप्रैल 2018ई0 से क्या हो गया ?

सूक्ष्म जगत में अनेक स्वपनों में सुधार हुआ है।स्थिति सुधरी है लेकिन अब वह स्वप्न अमेरिका जाने वाला?!उसका दिखना...


चलो, मालिक मर्जी।


लेकिन हमारे लिए 'भविष्य:कथांश'-श्रृंखला का क्या होगा?


क्या ये श्रृंखला अधूरी रह जाएगी?

अब--

भविष्य त्रिपाठी की  आगामी जीवन गाथा का क्या होगा?

उधर-


उधर न्यूमैक्सिको में?!


जून1947 में गिरी उड़नतश्तरीयां की असलियत को आगे कैसे लाया जाएगा?


अमेरिका तन्त्र भी अब मान रहा है कि हां, जून1947 ई0में न्यूमैसिको में उड़नतश्तरीयां गिरी थीं।

हमने #ह्वाइटहाउस की ई मेल पर अनेक मैसेज भेजे हैं।हालांकि उसका परिणाम अच्छा।मिला है।

ऐ कबीरा पुण्य सदन!?

उफ्फ!

सब गड़बड़ा गया।


सन2007ई0 से ही हम अपने मिशन से भटके हैं।


पुरानी आदतें, संस्कार ऐसे धुलने वाले नहीं।

लेकिन---


25 दिसम्बर 2014ई0 !?


चलो, ठीक है।


मालिक की मर्जी!


वक़्त आने दो।

सन2011ई0 से 25 तक का समय विशेष समय है।इस वक्त जो साहस के साथ खड़ा रहा, वही धरती का भोग करेगा।

दुनिया व देश के हालात ऐसे हो जाएंगे जैसे कुत्ते के गले में फंसी हड्डी!व्यक्ति स्तर पर,परिवार व संस्था स्तर पर,समाज स्तर पर.... सब गड़बड़... उलझन, जटिल!जैविक घड़ी चौपट, नियमितता चौपट, संकल्प शक्ति चौपट.....85/90प्रतिशत के साथ ऐसा ही।अमेरिका ,ब्रिटेन आदि देश की व्यवस्था भी चौपट.... आत्मनिर्भर, शिल्पकार, अध्यत्मिक व्यक्ति ही उबरने में।वक्त है, गुजर जाएगा लेकिन....इस वक्त में 85/90 प्रतिशत...!!?
समस्याओं का निदान मानवता व अध्यत्मवाद से ही है।विश्व बंधुत्व से ही है।


इस वक्त आवास की समस्या है।साथ में फैमिली है, इस कारण और भी।


देखते हैं, अब मोदी सरकार आयी है। क्या होता है? सन्तों की माने तो कुछ भी अच्छा नहीं1होने वाला आम आदमी की हैसियत से। अभी तो सफाई होनी है।।सफाई में भी कितना बबाल होता है?

अब आगे-

दस लो फीन?! उस ओर सूक्ष्म अब क्यों नहीं?

चलो, मालिक पर छोड़ते है ।








गुरुवार, 4 जून 2020

क्या विश्व अराजकता व विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहा है::युधिष्ठर

सन 5020ई0!
एक इमारत-सद्भावना!चारो ओर जंगल ही जंगल!

दो युवक तीन युवतियों के साथ झाड़ी झंखाड़ को हटाते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे।  सभी के हाथों में भाला थे।


इस जंगल अब भी कुछ आदिवासी अपने को पांडवों के वंशज का मानते हैं।


सब आपस में बात भी करते जा रहे थे।


अब से दस हजार वर्ष पहले विदुर व युधिष्ठर इस शिला पर बैठे परेशान हो रहे थे।


युधिष्ठर!आप भी कहने लगे कि विश्व अराजकता व विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहा है? लेकिन ??चलो ठीक है कि दुर्योधन ,शकुनि आदि भटके रास्ते पर हैं लेकिन आप लोगों का क्या कर्तव्य है?


हम पांडव तो पांच गांव लेकर ही सन्तुष्ट होने को तैयार है लेकिन....



ये लेकिन वेकिन क्या?संसार आपको धर्मराज व सत्य वादी कहना शुरू कर रहा है और आप?


सन2020 ई0 में भी ?


सन2020 ई0 में भी धर्म ,सन्यास, सन्त, आध्यत्म, सनातन ,राज धर्म आदि के नाम पर....



हूँ!अराजकता, गरीबी, बेरोजगारी, गृहयुद्ध, विश्व युद्ध आदि में...


सद्भावना -ये इमारत?!

 मांसाहार की जड़े बड़ी गहरी हैं।जो मांस का जीभ से स्वाद नहीं लेते है,वे अन्य इंद्रियों से स्वाद ले रहे हैं, ले रहे थे।

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

साइबेरिया में लेनिन::अशोकबिन्दु

साइबेरिया में लेनिन!!
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 सन 1903 ईस्वी !

बोल्शेविक कल की स्थापना का समय !

रूस भर में इतने ही लोग?

 सर! ये सिर्फ प्रतिनिधि हैं अपने अपने क्षेत्र से ।

आप सब जानते हैं लगभग 4 साल हम साइबेरिया में निर्वासित थे।

 यस सर !

व्लादिमीर इलिच उलियानोव लेनिन को सन 1895 ई0 गिरफ्तार करके सेंट पीटर्सबर्ग की जेल में भेज दिया गया था।
 निकोलस द्वितीय रूस का शासक जार था, जिसने उदारवादी विचारों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
 विश्वविद्यालय पर भी नियंत्रण बढ़ा दिया गया था।
 हजारों लोगों को देश निकाला दे दिया गया था।
 उसने सैकड़ों निर्दोष व्यक्तियों को जेलों में डाल दिया था।
 रूस की जनता त्राहि-त्राहि करने लगी थी ।
किसानों की दशा दयनीय हो चुकी थी ।
मजदूरों में असंतोष व्याप्त हो चुका था
संत 18 83 ईसवी में जयाजीं  प्लेखानोवा ने रूसी समाजवादी लोकतांत्रिक पार्टी की स्थापना की थी.समाजवाद का प्रचार पूरे रूस में तेजी से फैल रहा था...



इधर सन 1896 ई0 में साइबेरिया ????प


साइबेरिया में........



वो एलियन्स ???!!!
एलियन्स के लिए  साइबेरिया की धरती  सदियों से परिचित रही थी....

इस बार.....????



लेनिन साइबेरिया की धरती से अनन्त शक्तियों का अहसास कर रहा था!!!



खैर!!!!




इधर राय पुर, फरुखाबाद से.....????



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सन  1905ई0 !

बंगाल में लार्ड कर्जन द्वारा विभाजन!!!


 उधर रूस जापान युद्ध में रूस की पराजय!!

इस पराजय के बाद रूस की जनता में असंतोष की लहर उत्पन्न हो गई दूसरी ओर मजदूरों तथा आम लोगों में गरीबी के कारण आक्रोश बढ़ रहा था मजदूरों ने 22 जनवरी 1905 ईस्वी को रविवार के दिन 11 मांग पत्र चार्टर जार को प्रदान करने का निर्णय किया..

लगभग 1 लाख 50,000 मजदूर पादरी गोपन के नेतृत्व में अपनी मां को को लेकर सेंट पीटर्सबर्ग में स्थित शाही महल की और चल दिए दूसरी ओर जार निकोलस द्वितीय सैनिकों ने निहत्थे मजदूरों पर गोलियां चला दी 1000 से भी अधिक मजदूर मारे गए यह घटना रूस के इतिहास में खूनी रविवार के नाम से जानी जाती है..शीघ्र ही मजदूरों ने पूरे देश में हड़तालें कर दीं.. इस प्रकार प्रशासन का कामकाज डप्प हो गया.30अक्टूबर 1905 को जार ने क्रांतिकारियों के दमन के साथ साथ सुधारों की घोषणा करके क्रांति को दबा दिया.. ये क्रांति असफल तो जरूर हुई लेकिन सन 1917 की क्रांति का रास्ता खोल दिया..


   रूसी क्रांतिकारियों के उद्देश्य थे किसानों को भू स्वामित्व ,उद्योगों पर मजदूरों का नियंत्रण, समाजवादी व्यवस्था की स्थापना, समानता का समर्थन ,शांति की स्थापना आदि  ।


वो पादरी????


पादरी गोपन कौन????



साइबेरिया, अरुणाचल आदि क्षेत्र के साथ हम अपने सूक्ष्म को कुछ प्रकाशकृतियो के साथ रूस में पाते रहे हैं,आखिर????

शनिवार, 3 अगस्त 2019

हां, एलियन्स हैं!अन्य जीवनधारी धरतियाँ भी::अशोकबिन्दु

हां, एलियन्स हैं व और भी धरतियाँ भी हैं जहाँ जीवन है::अशोकबिन्दु
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बरेली, रुहेलखण्ड!! अनेक बार विश्व में कहीं न कहीं चर्चा होती रही है कि एलियंस हैं कि नहीं हम तो यही कहेंगे कि एलियंस हैं  ब्राह्मण्ड में ऐसी भी धरती है जहां जीवन है। हमारे अंदर कुछ ऐसा है जो अनंत यात्रा का साक्षी है लेकिन हम उसकी ओर होते नहीं। हम प्रत्याहार में नहीं। क्यों न हम हर रोज सुबह उठकर अनुलोम विलोम, कपाल भारती आदि करते हैं लेकिन हम उन स्थितियों को अवसर नहीं देते जो हमारे दिल दिमाग, मन को उस ओर ले जाए जो अनंत यात्रा का साक्षी है। असली ज्ञान अनुभव व एहसास से आता है। कभी कभी आकस्मिक ऐसी परिस्थितियां भी पैदा हो जाती हैं जो हमें उससे जोड़ती हैं जो अनंत यात्रा का साक्षी हैं।
 हम किशोरावस्था से  ही अपने अंदर झांकने की कोशिश करने में लगे रहे । ऐसे में कुछ एहसास हमें होते रहे ।जब हम इंटर के छात्र थे उस समय भी हमने अपने मित्रों विशेष रूप से  सुनील संवेदी को अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी कुछ बातों को ,तथ्यों को भविष्य के संबंध में रखा था लेकिन हमारी उस वक्त भी मजाक उड़ाई जाती थी ।आज फिर हम इस पोस्ट के माध्यम से आपको पूर्ण विश्वास से कहना चाहेंगे- एलियंस हैं। अंतरिक्ष में अन्य धरती है। जहां जीवन है। वेदांग के छह अंग हैं आखरी अंग है ज्योतिष। इस पर भी हम कहते रहे हैं यह भी एक विज्ञान है।



अमेरिका में जून1947 को न्यूमैक्सिको में दो उड़नतश्तरीयां गिरी थीं।

जो प्रमाण हैं कि अंतरिक्ष में कहीं एलियन्स है न।

मंगलवार, 9 अप्रैल 2019

मानव वही जिसमें मानवता!!!

मनुष्य जातिवाद/मजहबवाद/संस्था वाद/आदि के लिए नहीं है.
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प्रकृति अभियान  को समझिए....चेतना/ईश्वर  के अभियान को समझिए.मनुष्य स्वयम क्या है?वह प्रकृतिअंश  व  ब्रह्म अंश है.हम प्रकृतिअंश व् ब्रह्मअंश हैं. प्रकृतिअंश व ब्रह्मअंश में समसम्मान/समअस्तित्व(श्री अर्धनारीश्वर अबधारना) बिना हमारा क्या है?तुम्हारी कृत्रिम सोंच/व्यवस्था/वस्तुएं /आदि कब तक चलेंगी?जो क्षणभंगुर है,उसमें रमने से क्षणभंगुर  आनन्द/वस्तुओं /भूत योनि आदि की सम्भावनाओं को प्राप्त होंगे.....देव/आत्मा/आदि स्तर को नहीं....कुरुशान(गीता) में भी श्री कृष्ण कहते हैं--- तू जिसमें लीन(भजे गा) लीन होगा,उसको ही प्राप्त होगा.इसलिए  अपने मन का भी प्रवन्धन करो.तनप्रवन्धन से ही सिर्फ भला नहीं होने वाला. और फिर हम मन के 10 भाग में से भी 01 भाग सही से इस्तेमाल नहीं  करते.

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स्तर | प्राकृतिक  | साधना
---------------------------------------
स्थूल|काम  |   ब्रह्मचर्य
---------------------------------------
भाव  |भय    | अभय
         |घृणा  | प्रेम
         |क्रोध  | करुणा
         |हिंसा  | मैत्री
---------------------------------------
सूक्ष्म  |सन्देह  | श्रद्धा
          | बिचार| विवेक
---------------------------------------
मनस |कल्पना|सङ्कल्प
         |स्वप्न   |अतीन्द्रिय
         |           | दर्शन
---------------------------------------
 हमारे अंदर भी नगेटिव- पजटिव अर्थात स्त्री -पुरुष अर्थात प्रकृति- ब्रह्म होता है.अतः योग से हम आंतरिक सम्भोग(सम अस्तित्व/समसम्मान/आदि)  की दशा  भी  पा सकते है. जिसके बाद हम अपने अचेतन मन (कल्प वृक्ष/कामधेनु) को  पा कर अपनी कामनाओं  को पूर्ण कर सकते  हैं.

रविवार, 17 मार्च 2019

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=282258996021379&id=100027118429546

भविष्य वाणियों में 2011 -2025 का समय भूमिका है 2025 के बाद कि दुनिया

*साक्षी महाराज के मुंह से निकल गयी असली बात! कहा- देश में नहीं होंगे 2024 के बाद कोई चुनाव*

विवाद , , शुक्रवार , 15-03-2019

*जनचौक ब्यूरो*

नई दिल्ली। बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि 2024 के बाद देश में कोई चुनाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ''हमारे नेता मोदी सारे विश्व के नेता हैं और सारे देश में चर्चा है, मोदी हैं तो देश है।'' वह उन्नाव में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। आपको बता दें कि साक्षी महाराज यहीं से बीजेपी के सांसद भी हैं।

*बीजेपी सांसद के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वह जिस बात की पहले से आशंका जता रहे थे उसको साक्षी महाराज ने खुलकर कह दिया है।*

*साक्षी महाराज ने कहा कि 'अब जो चुनाव होगा वो देश का चुनाव होगा। मैं संन्यासी हूं और कह रहा हूं कि ये चुनाव देश का आखिरी चुनाव है और 2024 में चुनाव नहीं होगा।'' उन्होंने कहा कि केवल यही चुनाव है, ये चुनाव देश के नाम पर लड़ा जा रहा है।*


बीजेपी सांसद के बयान के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ''बीजेपी ने अपना मक़सद साफ़ कर दिया। मैं तो पहले से ही कह रहा हूं की मोदी और अमित शाह की जोड़ी दोबारा आ गयी तो वे संविधान बदल देंगे और चुनाव करवाना ही बंद कर देंगे। हिटलर ने भी ऐसा ही किया था।''

भाजपा ने अपना मक़सद साफ़ कर दिया।

"मैं तो पहले से ही कह रहा हूँ की मोदी और अमित शाह की जोड़ी दोबारा आ गयी तो वे संविधान बदल देंगे और चुनाव करवाना ही बंद कर देंगे। हिट्लर ने भी ऐसा ही किया था।" https://t.co/agGW08ACip

— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) March 15, 2019


शायद यही सही बात है जो अनजाने में साक्षी महाराज के मुंह से निकल गयी। बुद्धिजीवियों का एक हिस्सा पूरे मामले को इसी रूप में देख रहा है। उसका मानना है कि यह देश, लोकतंत्र और उसके संविधान को बचाने का चुनाव है। लिहाजा दांव पर पूरा गणतंत्र है। उसका कहना है कि अगर इस बार मोदी फिर से जीत गए तो आने वाले दिन देश के लिए किसी कयामत से कम नहीं होंगे।

*एक दूसरे हिस्से का मानना है कि अभी तक कमान बीजेपी और उसके नेताओं के हाथ थी। और आरएसएस खुलकर आने के बावजूद पर्दे के पीछे से ही काम कर रहा था। लेकिन 2019 में अगर बीजेपी की सरकार बन गयी तो पूरी कमान आरएसएस अपने हाथ में ले लेगा। उस आईने में रखकर साक्षी महाराज की बात को आसानी से समझा जा सकता है। क्योंकि खुद आरएसएस अपने संगठन के भीतर लोकतंत्र का पक्षधर नहीं रहा है।*

*उसके यहां पदाधिकारियों का चुनाव नहीं बल्कि मनोनयन होता है। और ऊपर से हिंदू राष्ट्र में विश्वास करने वाला संगठन देश के संचालन के लिहाज से पुरानी वर्ण व्यवस्था को आदर्श प्रणाली के तौर पर देखता है। लिहाजा उसके लिए अपने राज्य में उसको हासिल करना ही सबसे बड़ा लक्ष्य होगा। जिसकी पहली और आखिरी शर्त है लोकतंत्र का खात्मा। संविधान को तिलांजलि। और गणतंत्र को इतिहास बना देना। क्योंकि इन तीनों की कब्रों पर ही कोई हिंदू राष्ट्र खड़ा हो सकता है। जो देश में आरएसएस-बीजेपी का आखिरी लक्ष्य है।*

"ये देश का आखरी चुनाव है। इसके बाद 2024 में चुनाव ही नहीं होंगे।.... ये कोई और नहीं स्वयं बीजेपी सांसद साक्षी महाराज कह रहे हैं। क्या समझें इससे?pic.twitter.com/XwR35Yq7iJ"

— Anurag Dhanda (@anuragdhanda) March 15, 2019

https://janchowk.com/pahlapanna/sakshi-maharaj-bjp-election-unnao-modi-loksabha/4324#.XIvSChNtpYM.facebook

मंगलवार, 20 मार्च 2018

सिंहासन का मतलब है, सिंहों का आसन!!!लेकिन....

हम अपने नजदीक समाज व पास पड़ोस की संस्था में देखते हैं किसकी चल रही है? जिनकी चलती है उनके रहते समस्याएं हल क्यों नहीं हो रही हैं ?विभिन्न सरकार संस्थाओं, संयुक्त राष्ट्र संघ आदि के रहते समस्याएं हल क्यों नहीं हो रही हैं ?यदि समस्याएं हल नहीं हो रही हैं तो इसका मतलब क्या है ?दुनिया को जकड़े बैठे लोग क्या समस्याओं को हल करने की क्षमता नहीं रखते? यदि बे क्षमता नहीं रखते तो फिर गद्दी खाली क्यों नहीं करते? इसका मतलब हर पल क्रांति की आवश्यकता है हर पल जिहाद की आवश्यकता है .राष्ट्रवाद, जातिवाद ,मजहबवाद...... चाहे कोई भी वाद हो उससे विश्व में शांति व मानव का कल्याण संभव नहीं है .मानवता व अध्यात्म से ही सभी समस्याएं हल हो सकती हैं .आप कहते हैं -डंडा चलाने की जरूरत है योगी हो या मोदी देश का भला होने वाला नहीं . डंडा कौन चलाएगा निष्पक्ष या पक्षपाती? अब भी क्या डंडा नहीं चल रहा ?ईमानदारी ,न्याय, मानवता ,कानून ,सुपर प्रबंधन, सुप्रबंधन पर क्या झंडा नहीं चल रहा है? गांव या वार्ड के गुंडे,माफिया आज किसके साथ खड़े हैं ?कानूनी झाड़ने वाले ,कानून के बात करने वाले ,सच्चे ,ईमानदार, इंसानियत को स्वीकारने वाले, कानूनी व्यवस्था को मानने वाले आदि नेताओं विधायकों मंत्रियों थाना अध्यक्षयों आदि के साथ खड़े है??
#शेष

गुरुवार, 22 सितंबर 2016


२1सितम्बर::विश्व शान्ति दिवस
""""""""""""""""""""""""""""""""""""""[9/29, 11:38 PM] ashok kumar verma: मोदी विश्व यात्रा बनाम तृतीय विश्व युद्ध ??
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इस बार के महाविश्व / महाभारत का क्षेत्र एशिया होगा ? हालाँकि इस युद्ध को तृतीय विश्व युद्ध कहा जायेगा . क्या ये वास्तव में  होगा ? इस युद्ध के कारण मैजूद हैं . भारत चाहे तो ये युद्ध आज हो जाये ?  लेकिन भारत आज  दिव्य है?वह आज वही भारत है;भा+रत अर्थात प्रकाश में रत .दुनिया एक बार फिर भारत की ओर देखने जा रही है.भारत मेंअब भी ज्ञान-- कमलों की कमी नहीं है.दुनिया के गैर भारतीयों में ऐसा कौन सा नेता है जो सारी दुनिया के लिए जाति/मजहब/देश की शरहदों से परे हो सारी मनुष्यता व प्रकृति के लिए दर्द रखता है? भारत में इस नेता होने जा रहा है?मोदी की विश्व यात्राओं को यों ही हल्के में मत लीजिए.मोदी विश्व स्तर पर उन परिस्थितियों के लिए वातावरण बना रहे हैं .मोदी जाते जाते वो कर जायेंगे जिसे उनके  दुश्मन भी याद करेंगे?

इससे पहले काफी कुछ होना है----
@संयुक्त राष्ट्र सङ्घ में भारत को स्थाई  सदस्यता

@संयुक्त राष्ट्र सङ्घ में हिन्दी भाषा को मान्यता

@भारत को जगत गुरु का दर्जा

@सन् 2022 का इंतजार व अनेक फाइलों का सार्वजनिक होना.अनेक कानूनों का संशोधन.
@विभिन्न क्षेत्रों में सक्षम होना.

@विश्व मन्च पर अपना पक्ष मजबूती से रखना व उसके लिए विश्व मत तैयार करना.

@आतंकवाद पर स्पष्ट विश्व मत तैयार करना.

@गरीब देशों व गरीबों के हित कल्याणकारी नीतियों का समर्थन.

@पर्यावरण के लिए स्पष्ट नीति का समर्थन जो गरीब देशों के अहित में न हो.

@आदि


www.akvashokbindu.blogspot.com

शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

शैतान नहीँ क्या ये ? : एलियंस

पृथु महि के इन्सानोँ के बारे मेँ जो कहेँ कम ही है . अपने पैरों पर
कुल्हाड़ी ये मारेँ ही अन्य इन्सानों ,जन्तुओँ ,वनस्पतियोँ ,आदि के
अतिरिक्त अंतरिक्ष मेँ भी विकार पैदा कर डाले .इन लोगोँ के चरित्र की
मुख्य विशेषता है -आचरण ,मन व बोली से अंतर होना.
इनका ज्ञानी भी अज्ञानी है .


पृथुमही के एक नगर मेँ रामलीला चल रहा था .दो बहुरुपिया चेहरा पर
मुखौटा लगाये घूम रहे थे .राजसी वेश मेँ ये दोनों अपने सिर पर पगड़ी बांधे
हुए थे . इनका कद लगभग तीन फुट था.


"चटपकचटापच!अब देखते हैँ कि यहाँ क्या क्या हो रहा है ?"


कुछ दूरी पर मनचले लड़कोँ का झुण्ड एक लड़की के साथ अभद्रता का
व्यवहार कर रहा था.

"मानव क्या श्रेष्ठ है ?"

"मूर्ख भी है ."

"अपराधियोँ ,माफियाओँ और जातिवादियोँ को फूल माला चढ़ा कर अपना
नेता चुनता है .सत पर जीने वालोँ को सनकी पागल कहता है .धर्म की गलियोँ
मेँ धर्म की दुर्दशा हो ."

"देखो ये सड़ा गला क्या खा रहे हैँ ?"


"इसे ये अचार कहते है .उन बोतलोँ मेँ सिरका ......?!."

"वो मधुशाला ?"

दोनोँ मधुशाला की ओर बढ़ गये .

"मधुशाला यानि की ये लोग मधु पी रहे हैँ ? मधु पिया जा सकता है . "

एक बहुरूपिया सूंघता हुआ बोला -
" नहीँ,धोखा ! हनी नहीँ "

नशे मेँ धुत्त व्यक्ति हंस पड़े .

जब दोनोँ एक शिवभक्तोँ के एक पाण्डाल मेँ पहुँचे तो -

"ऐ शिवभक्त कैसे? "


भाँग के नशे
मेँ धुत्त एक शिवभक्त बोला -"आओ ,प्रसाद चखो ."

दोनोँ एक दृसरे को देखने लगे.


" पृथुमहि पर मनुज कैसा है ? धार्मिकोँ व आध्यात्मिकोँ मेँ तक धर्म
व आध्यात्म नहीँ .सब के सब शूद्र कर्म मेँ!"


"ब्रह्मांश व प्रकृतिअंश होकर भी अपने ब्रह्मांशीय व प्राकृतिक
अंशोँ के लिए इनसे सम्बंधित अंशोँ को छोंड़कर क्रत्रिम अंशोँ के लिए अपने
ब्रह्मांश व प्राकृतिक अंशोँ को नजरांदाज कर देना कहाँ तक उचित है ?"


दोनों बहुरूपिया मेला के बाहर आ गये थे .सड़क किनारे ही एक हरे बाग
को काटा जा रहा था .

"ये हरे बाग को काट रहे ?"

" प्रकृति माँ के पूजक कहाँ ....? "

" हूँ ,ये पाँचोँ तत्वोँ को पूजते भी हैँ और अपने स्वार्थ के लिए
इनको प्रदूषित भी कर रहे हैँ ."