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शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

IN SUNAASIR!!अंदर सुनासिर /अंडर सुनासिर /अंतर सुनासिर?!

अंदर सुनासिर?!इन सुनासिर?! सन 2043ई का समय!! आजाद हिन्द सरकार की 100वीं वर्षगांठ!! जनपद सुनासिर नाथ, बंडा में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा था। एक मंच का निर्माण हो चुका था और पंडाल आदि की व्यवस्था हो रही थी। एक बुजुर्ग व्यक्ति के हाथ में एक पुस्तक थी.. "अंदर सुनासिर?! " एक युवती उसे पढ़ने लगी थी.... मुख्य पात्र, उसका दुःख और आध्यात्मिक प्रश्न मुख्य पात्र ::अशोक जो एक अधेड़ व्यक्ति!! उसका दुःख... अंतर मन मिलने वाले संदेशों, किताबों से प्राप्त संदेशों के आधार पर चलने, जीविका चलाने, जिनके साथ रहना, काम करना आदि में असंतुलन। आध्यात्मिक प्रश्न ::हम अपनी इच्छाओं के गुलाम हैं, जो हमारे जीवन में बाधक है। हम अपनी इच्छाओं की अपेक्षा उन दिव्य संदेशों के हिसाब से सिर्फ कोशिश ही कर पा रहे हैं। लेकिन यह भी सत्य है कि हम कुछ ऐसा महसूस करते हैं जिससे पता चलता है कि हमारे साथ दिव्य शक्तियां है हम उनका सहयोग ले आगे बढ़ सकते हैं। हम ये भी महसूस कर चुके हैं कि हनुमान जी वास्तव में भक्तों के रक्षक हैं। गुरु अथवा संत से भेंट! जुलाई 1997ई में पुवायां रहने की शुरआत के साथ अशोक ने अपने साथ तीन बुजुर्गों संतों को अनेक बार महसूस किया है जो उसे मार्गदर्शन देते रहे हैं। पुवायां में रह कर निरंकारी समाज के साधकों से जुड़ना व सहज मार्ग का साहित्य पढना। खुटार के पास एक गांव मोहनापुर में फूफा जी के खेत में बनी कोठरी में ध्यान के दौरान शरीर में काफी हल्का पन व आनंद महसूस करना। 25दिसंबर 2014को सहज़ मार्ग में पहली सिटिंग ब्रह्माधार मिश्रा के कटरा स्थित मकान में प्रशिक्षक रविंद्र सिन्हा के द्वारा। जिससे पहले लाला जी महाराज, फतेहगढ़ के दर्शन करना। जो उन तीन बुजुर्गों में से एक। विश्व संविधान विश्व सरकार व श्री विश्व सरकार गुरु ग्रंथ साहब की धारणा मन में आना। एक दिन बाबूजी महाराज का दिखना जो कह रहे थे कि अपना काम शुरू करो। अशोक ने दाजी जी को देख कर कहा कि दाजी हैं तो पटेल जी हैं तो? बाबू जी बोले.. आप अपना काम करो। सेवा, ध्यान और जीवन-संघर्ष अंतर्मन में संदेश.. अपनी प्रतिभा से किसी को समझौता नहीं करना चाहिए। अशोक के आँखों में आंसू आ गये। वह सोंचने लगा कि.. वह कटरा में 01जुलाई 2004ई को आया था।एक माह के अंदर ही वह वापस बरेली जाने का मन बनाने लगा था। इससे पहले वह बरेली के मखानी इंटर कालेज, मुड़िया अहमदनगर में शिक्षण कार्य कर रहा था। कटरा में उसे उसके साथ पढ़ाने वाले एक शिक्षक अनिरुद्ध सिंह यादव रोके रहे। एक साल बाद जिनकी नियुक्ति राजकीय इंटर कालेज के लिए हो गयी थी। कटरा में डेढ़ साल बीतते बीतते उसके मन की यही पुकार थी कि अब वह भी कटरा छोड़ दे लेकिन वह इसके लिए हिम्मत न जुटा पाया। सन 2007ई के आते आते उसने महसूस किया कि कोई संत उसे चित्रकूट में बुला रहे हैं। लेकिन अनुरूद्द सिंह यादव ने उससे कहा था कि यहीं रुके रहना। यदि सरकारी नौकरी लग जाये तो अलग बात। और फिर... कटरा आने से पहले वह स्वप्न में जो स्थान देखता था वह उसने कटरा में ही देखा था। सूक्ष्म दशा को महसूस की सामर्थ्य में कुछ वृद्धि यहीं हुई थी। बड़ा संकट एवं चेतना-परिवर्तन पैतृक गांव यहां से काफी दूर। अशोक के पिता जिस नगर में रह रहे थे वह -बीसलपुर। सन 2007 ई के आते आते उसकी उसके पितृ कुल से उम्मीदें खत्म हो चुकी थीं। वह अपना आध्यात्मिक व साहित्यिक जीवन जी तो रहा था लेकिन इस सबके साथ वह अपना गृहस्थ जीवन भी जीना चाहता था लेकिन उसे शादी के लिए ऐसी कोई युवती नहीं मिल रही थी जो कि उसके आध्यात्मिक व साहित्यिक जीवन में सहयोगी हो। अशोक की दोनों बहिने व एक भाई उससे छोटा ही था लेकिन उनकी पहले ही शादी हो चुकी थी। वह अपने परिवार में में भी अपने को बचपन से ही अलग थलग महसूस करता था। चेतना परिवर्तन की ओर की उसकी यात्रा में अब इसके साथ काफी तेजी से बदलाव शुरू हो चुके थे। उसके स्वप्न अब चेतना की स्थिति में जाकर महसूस होने की ओर अग्रसर हो ही चुके थे. इसके साथ ही अब वह ऐसा भी देखने लगा था जो आगे चल सत्य घटित होने लगा था। अब उसकी चेतना विश्व स्तर पर महसूस करने लगी थी। उन दिनों की बात है जब अशोक बीसलपुर में रह रहा था और स्नातक अंतिम वर्ष का विद्यार्थी था। पड़ोस के एक मकान में जो गांव खमरिया के एक कुनबी व्यापारी था, जहां एक संत आये हुए थे। उन्होंने महसूस किया था जो वहाँ कहा कि यहां कोई दिव्य शक्ति व दिव्य व्यक्ति रह रहा है लेकिन वह अपने पूर्व संस्कारों के कारण विषम परिस्थितियों में फंसा हुआ है और उसके कुनबा के लोग भी उसके सहायक नहीं हैं। एक दिन एक युवा सन्यासी ऐसे आये थे जो सिर्फ अशोक से मिल कर चले गये थे। वे नगर व मोहल्ले में अन्य किसी से नहीं मिले थे। जो कि हनुमान भक्त थे और वे अशोक का हाथ देखना चाहते थे लेकिन अशोक ने नहीं दिखाया था।
समाधान तथा मानवता, प्रकृति और विश्व-शांति का संदेश!! अशोक सन 1989-90ई से ऐसे अनेक सपनें देखने लगा था जिसमें दिल्ली व दिल्ली के पश्चिम का पूरा क्षेत्र पाकिस्तान तक, मुंबई, कलकत्ता आदि को नष्ट होते देख रहा था। गलेशियर आदि को पिघलते। वह मुंबई को समुद्र में डूबते भी देखता था और श्री लंका में जाने वाली एक सुरंग को देखता जिसमें समुद्र का पानी भरा हुआ दिखाई दे। जब वह कक्षा दो में पीलीभीत -बीसलपुर मार्ग पर स्थित बाला जी की मड़ी में सरस्वती शिशु मंदिर, बीसलपुर में पढ़ता था तो उसे वहाँ आँख बंद कर ब्रह्म नाद करने की प्रेरणा मिली थी। जहां अनेक सन्यासी भी रहते थे और कुछ सन्यासियों की समाधियां भी बनी हुई थीं। रास्ते में एक ईसाइयों का क़ब्रस्तान पड़ता था। उसे आँख बंद कर ध्यान करने की प्रेरणा मिल चुकी थी। "उसके साथ के बच्चे कहते तू तो सहमा सहमा रहता है लेकिन समाधियों व कब्रों से नहीं डरता? " तब अशोक कहता था कि.." हमें इंसानों से डर ज्यादा लगता है। " अशोक ने एक दिन महसूस किया कि हमारे पास समाधान है लेकिन उसके लिए हमें अपनी आत्मा से जुड़ना होगा। किसी ने महसूस करवाया कि हनुमान भक्तों के रक्षक हैं। उन्हें चाहे पुकारो या न पुकारो। मोहल्ले में एक मुस्लिम लड़का आकर बजरी,मोरम आदि बेंचने लगा था। अशोक उसकी झोपड़ी में जाकर कभी कभी तख्त पर बैठ जाता था। "हनुमान हम मुसलमानों के थोड़ी हैं?" अशोक खामोश.. लेकिन उसने मन ही मन सोंचा कि हनुमान शक्ति के रूप में सबके हैं, बस जो छबि दिखाई देती है वह हिन्दुओं की नजर में है। अनंत यात्रा में वे सबके हैं जो शक्ल सूरत, देह से परे हैं। समाधान तथा मानवता, प्रकृति और विश्व-शांति का संदेश?! "हमारा समाधान वर्तमान मानव व्यवस्था, सिस्टम, नेताओं, दलों, पुरोहितों, धर्मों, धर्म स्थलों आदि के पास नहीं है। समाधान हमारे अंदर है। समस्या व समाधान जीवन प्रवाह के दो किनारे हैं। लेकिन इसमें बाधा अब मानव है। जो हनुमान के भक्त भी दिखते हैं वे किस लिए है? वे भी उस सिस्टम के हिस्सा हो सकते हैं जो कि मानव शांति, मानवता, प्रकृति अभियान, ब्राह्मड चेतना आदि के लिए बाधा हैं। अध्यात्म ही समाधान है। मानवता भी समस्याओं से दूरी का माध्यम है। जीवन प्रवाह में बस जीते रहो। अपनी चेतना को ब्रह्माण्ड चेतना से जोड़ने के अभ्यास में लगे रहो। सब कुछ प्रसाद समझो। सन 2025ई की 10जून!! अब अशोक अधेड़ अवस्था के चरमोत्कर्ष पर!! उसका सूक्ष्म शरीर उत्तराखंड व मानसरोवर के बीच क्षेत्र व अरुणाचल व चीन के बीच क्षेत्र में!! जहां अनेक साधु संतों के साथ वह।अरुणाचल व चीन के बीच क्षेत्र में वह साधु संतों के साथ आजाद हिन्द सरकार के अधिकारियों के साथ जहाँ कुछ दूरी पर नेता जी सुभाष चंद्र बोस का भी सूक्ष्म शरीर। वह वैष्णोदेवी देवी पर्वत से किसी देवी शक्ति को कहीं दूर जाते देखता है। एक सन्देश कि.. प्रकृति व ब्राह्मड में मानव अब एक बाधा बन चुका है। ऐसे में सबके सूक्ष्म शरीर को जगाने की जरूरत है। देह धारी जो सूक्ष्म शरीर हैं उनको रात्रि में ही हस्तक्षेप करना ठीक है। दिन में जागते वक़्त तो वे तर्क -कुतर्क करने लगते हैं और दुनियाबी आकर्षण से मुक्त होने तक सोंच नहीं आती। सन 2026ई के आते आते अशोक ने देखा कि नंदा देवी चोटी नष्ट हो रही है। ऐसे में अंदर सुनासिर?!इन सुनासिर?! बंडा से तीन किलोमीटर दूर एक तीर्थ.. सुनासिर नाथ!! जून 2026को वह वहां अनेक स्थानों पर आँख बंद कर बैठा और काफी कुछ महसूस किया। उसके साथ उसका एक चचेरा भाई अनुमोद उर्फ कल्लू उपस्थित था जो कि मोबाइल से फोटोग्राफ़ी व वीडियोग्राफ़ी कर रहा था।

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