शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

जबरदस्ती का विवाद : अयोध्या विवाद

लगता है दुनिया मेँ अब भी लोग ऐसे हैँ जो फिजूल की हरकतोँ से विभिन्न समस्याएं बनाएं हैँ.वे ईमानदार व अन्वेषण से काफी दूर होते हैँ.ऐसे ही कुछ लोग अयोध्या विवाद को बनाये हुए हैँ.


काफी इन्तजार के बाद 30सितम्बर2010ई0के शाम 4.30 के लगभग इलाहावाद उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि

" जहाँ है, वहीँ रहेँगे रामलला."

ईमानदार व सच्चाई का सम्मान करने वाले लोगोँ को यह हजम नहीँ हो रहा है कि तीन हिस्सोँ मेँ बंटेगा विवादित स्थल:निर्मोही अखाड़ा,राम लला पक्ष और सुन्नी वक्फ बोर्ड को बराबर हिस्सा.इस पर अनेक सवाल उठ खड़े हुए हैँ कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को हिस्सा क्योँ? यह क्या अदालत का फैसला है?अदालत ने फैलता किया है कि विवादित स्थल का बटवारा किया?



जस्टिस एस यू खान का कहना था कि

"विवादित ढांचे को बाबर के आदेश से अथवा उनके द्वारा मस्जिद के तौर पर तामीर किया गया,लेकिन प्रत्यक्ष साक्ष्य से यह सिद्ध नहीँ हो पाया कि निर्मित भाग सहित विवादित परिसर बाबर का था या उसका था,जिसने इसे बनाया.मस्जिद बनाने के लिए कोई मन्दिर नहीँ गिराया गया ,बल्कि उसका निर्माण मन्दिर के खण्डहरोँ पर किया गया,जो बहुत समय से वहाँ मौजूद थे.तीन गुंबदोँ वाले ढांचे के बीच के गुम्बद वाला भाग ,जहाँ भगवान राम विराजमान है,हिन्दुओँ का है ."



जस्टिस धर्मवीर शर्मा का कहना था -



"यह सिद्ध हुआ है कि मुकदमेँ वाली सम्पत्ति रामचन्द्र जी की जन्म भूमि है......विवादित ढांचे का निर्माण बाबर ने करवाया था,किस वर्ष मेँ,यह निश्चित नहीँ है लेकिन यह इस्लाम के सिद्धान्तोँ के खिलाफ था इसलिए इसे मस्जिद नहीँ कहा जा सकता.
"



असलियत सामने है.मुसलमानोँ मेँ क्या सत्य समझने की नहीँ है?क्या सत्य है,यह तो समझना चाहिए?क्या इस्लाम के सिद्धान्तोँ का सम्बन्ध जबरदस्ती ,हिँसा,गैरमुसलमानोँ के आस्था पर चोट ,आदि से है?नहीँ ,ऐसा नहीँ.

पूर्व मुख्यमन्त्री कल्याण सिँह का यह कहना क्या गलत है कि


" जब वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज हो गयी है तो मुसलमानोँ को एक तिहाई जमीन देने का कोई औचित्य नहीँ."
लखनऊ से,भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माले ने कहा तक कहा कि

" अयोध्या विवाद का सन्तोषजनक हल देने मेँ उच्च न्यायालय असफल साबित हुई है.....यह निर्णय स्थापित कानूनी मान्यताओँ पर आधारित न हो कर राजनीतिक ज्यादा है."



वास्तव मेँ यह विवाद मेँ मुसलमानोँ के द्वारा पैदा किया गया जबरदस्ती का विवाद है.मुसलमानोँ को आत्मसाक्षात्कार की जरुरत है.



JAI HO...OM....AAMEEN!

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