शुक्रवार, 4 मार्च 2011

दूसरा पेरु :अन्तरिक्ष मेँ इंका सभ्यता

एक अण्डाकार यान अन्तरिक्ष मेँ काफी तेजी के साथ आगे बढ़ता जा रहा था.इस यान मेँ 'सनडेक्सरन' धरती निवासी तीन नेत्रधारी कन्कनेरसु,सस्कनपल व हह्नसरक थे .जो कि एक धरती'हा हा हूस ' पर जा रहे थे.इस सफर को कांच की टेबिल पर रखे एक अण्डाकार पारदर्शी पत्थर पर दर्शाया जा रहा था .जिसके सामने थी एक तीन नेत्रधारी युवती ' आरदीस्वन्दी'.




* * *





आरदीस्वन्दी के अन्त: कर्ण मेँ अब भी किसी अज्ञात व्यक्ति की आवाज'ओ3म आमीन' गूँज रही थी.वातावरण में मौजूद इन ध्वनि तरंगों के आधार पर आरदीस्वन्दी का यान आगे बढ़ता जा रहा था. अनेक आकाशीय पिण्डोँ के समीप से गुजरता
हुआ यह यान एक ऐसे आकाशीय पिण्ड का चक्कर लगाने लगा जिसका अस्सी प्रतिशत भू भाग वर्फ से आच्छादित था.



यान के स्पीकर पर अब 'ओम आमीन तत सत ' की ध्वनि तेज हो गयी थी.



अचानक आरदीस्वन्दी को याद आया ,जब वह किशोरावस्था मेँ थी.पृथु मही के समयानुसार लगभग
एक हजार वर्ष पूर्व सन5020ई0की 28 नबम्बर,अग्नि अण्कल से सम्वाद के दौरान 'दस सितम्बर' उपन्यास का जिक्र हुआ था.सेरेना की आत्मकथा मेँ किसी'सर जी' व्यक्ति का जिक्र अनेक बार हुआ था.जिन्होने यह उपन्यास लिखा था लेकिन जिसे किसी ने गुम कर लिया था.'सर जी'के कुछ उपन्यासोँ मेँ भी
ऐसे चरित्र रहे थे जो 'ओम आमीन 'पर विश्वास करते थे.उन्होने कही पर विदुरराज गोडसे का जिक्र किया था.जिसने 27फरबरी2002 के गोधरा काण्ड के बाद गुजरात काण्ड मेँ अपने सेक्यूलरवाद का परिचय देते हुए दोनोँ पक्षों के कट्टरपन्थियोँ पर खत्म किया था.जिसके साथ भी 'ओम आमीन' का जयघोष था, 'जय कुर आन जय कुरशान' का जयघोष था.





हालाँकि गोडसे सेक्यूलर फोर्स का मेम्बर था ,गुजरात काण्ड मेँ अपने किरदार से हट कर ' मिशन:जय माँ काली ' मेँ उसका किरदार था.



' सनडेक्सरन ' धरती की गुफा में रखी एक पाण्डुलिपि के कुछ अंशोँ को किसी अज्ञात भाषाविज्ञ के सहयोग से समझने का दाबा कर उसने एक पुस्तक लिखी थी-'पैगम्बरों के पुरखे '.


"आरदीस्वन्दी,गोडसे पर सोँचने लगीं?"
'पैगम्बरों के पुरखे' पुस्तक का आधार क्या वही है -सनडेक्सरन की गुफा मेँ रखी पुस्तक ...?


"दर असल गोडसे भी ओम आमीन पर..."


"वे सेक्यूलर ही थे.हाँ, तो आप यहाँ तक आ ही गयी."


" लेकिन आप कहाँ हैं?ध्वनि तरंगोँ के आधार पर आ तो गयी लेकिन......."




" जल्दी क्या है ? "



* * *



अन्जान आकाशीय पिण्ड के चक्कर लगाते लगाते जब यान की स्पीड धीमी हो गयी तो यान उस आकाशीय पिण्ड की ओर चल दिया .


नीचे इसी आकाशीय पिण्ड पर.....




खण्डहर हो चुकी एक दीवार , बची हुई दीवार पर एक यान व एक विशेष वेशभूषा मेँ एक युवती की तश्वीर बनी हुई थी.



इस तश्वीर के सामने अनेक हाथी व कुत्ते इकट्ठे होने लगे थे.



आरदीस्वन्दी का यान जब उस धरती के काफी नजदीक पहुंचा तो...




"अरे,यह क्या ?कहीं यह पृथु मही पर एक स्थान पेरु की तरह तो नहीं?जहां के इंका सभ्यता के लैंडमार्क की तरह यहाँ भी ये रेखाएं दिखाई दे रही हैं? जरूर यह भी यहाँ का लैंडमार्क होगा?"



कुछ सेकण्ड बाद यान लैंडमार्क पर उतर चुका था.हाथी ,कुत्ते, कुछ अन्य पशु पक्षी यान के करीब आ चुके थे.


अब क्या हो?


कुछ मिनट के लिए आरदीस्वन्दी यान के अन्दर ही बैठे पशु पक्षियों को देखती रही . जब उसने एक हाथी को यान की ओर बढ़ते देखा जिसके सूंड़ मेँ फूलों से लदी एक टहनी थी व उसके ऊपर बैठा एक बन्दर भी फूलों से लदी एक टहनी पकड़े था.


<यह है क्या DUSRA PERU?>

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